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पाकिस्तान में कारक हिन्दू मंदिर पर हमले के आरोपियों पर लगे जुर्माने का भुगतान करेगा हिन्दू समुदाय

पाकिस्तान के सर्वोच्च न्यायालय ने नामित आरोपियों से मंदिर के पुनर्निर्माण शुल्क के तौर पर 3.30 अरब रुपये की वसूली का आदेश दिया था।

पाकिस्तान के सर्वोच्च न्यायालय ने नामित आरोपियों से मंदिर के पुनर्निर्माण शुल्क के तौर पर 3.30 अरब रुपये की वसूली का आदेश दिया था। (Wikimedia Commons)

पाकिस्तान(Pakistan) में हिंदू समुदाय(Hindu Community) ने दिसंबर 2020 में करक मंदिर हमले में शामिल 11 धार्मिक नेताओं पर लगाए गए जुर्माने का भुगतान ऑल पाकिस्तान हिंदू काउंसिल फंड(Pakistan Hindu Council Fund) से करने का फैसला किया है। पाकिस्तान के सर्वोच्च न्यायालय(Supreme Court Of Pakistan) ने खैबर-पख्तूनख्वा (केपी) सरकार की आपत्तियों के बावजूद प्राथमिकी में नामित आरोपियों से मंदिर के पुनर्निर्माण शुल्क के तौर पर 3.30 अरब रुपये की वसूली का आदेश दिया था। रिपोर्ट से पता चला था कि हमले में शामिल स्थानीय मौलवी मंदिर के पुनर्निर्माण में बाधा उत्पन्न कर रहे थे।

सरकार द्वारा मंदिर का पुनर्निर्माण किया जा रहा है, लेकिन एक स्थानीय मौलवी और एक स्थानीय निवासी ने मंदिर के विस्तार पर आपत्ति जताई और ठेकेदार को बरामदे के सामने एक चारदीवारी बनाने का निर्देश दिया, ताकि हिंदू समुदाय को नाराज किया जा सके।

एक स्थानीय निवासी ने कहा, "हिंदू परिषद ने जमात उलेमाई-ए-इस्लाम फजल (जेयूआई-एफ) के जिला अमीर मौलाना मीर जाकीम, पूर्व करक जिला नाजिम रहमत सलाम खट्टक, मौलाना शरीफुल्ला और आठ अन्य नेताओं पर लगा जुर्माना देने का फैसला किया और प्रति व्यक्ति 268,000 रुपये का भुगतान किया गया है।"


supreme court of pakistan, hindu temple पाकिस्तान का सर्वोच्च न्यायलय (Wikimedia Commons)


रिपोर्ट में कहा गया है, "पुलिस द्वारा प्राथमिकी में कुल 123 आरोपी नामित किए गए हैं, जिनमें से कई को हमले के वीडियो फुटेज की मदद से नामित किया गया है।"

जिला प्रशासन ने इन 123 लोगों को पहले ही 26 अक्टूबर को उनके हिस्से का जुर्माना भरने के लिए नोटिस भेजा था। इन लोगों की संपत्तियों की एक सूची भी तैयार की गई है, क्योंकि राशि का भुगतान करने में विफल रहने पर उनकी चल और अचल संपत्तियों को जब्त करने का निर्णय लिया गया है।

एक्सप्रेस ट्रिब्यून के मुताबिक, एक स्थानीय हिंदू नेता ने कहा कि समुदाय पूरी तरह से असहाय था, क्योंकि सरकार की भागीदारी के बावजूद उपायुक्त ने स्थानीय मौलवियों के डर से पुनर्निर्माण चरण के दौरान मंदिर के विस्तार में उनकी मदद करने से इनकार कर दिया। इसलिए समुदाय इन मौलवियों को और अधिक नाराज नहीं करना चाहता था और उन्होंने हिंदू परिषद के फंड से अपने हिस्से का जुर्माना देने का फैसला किया।

उन्होंने कहा, "डीसी ने एक स्थानीय मौलवी के खिलाफ कार्रवाई करने से भी इनकार कर दिया, जिन्होंने कहा था कि इमारत के सामने की तरफ 'हिंदू मंदिर' शब्द नहीं लिखा जाएगा।"

रिपोर्ट में कहा गया है, "राशि का भुगतान पहले ही किया जा चुका है, लेकिन अब सभी 123 आरोपी मांग कर रहे हैं कि उनका जुर्माना भी हिंदू समुदाय द्वारा भुगतान किया जाए, जो संभव नहीं है।"

यह भी पढ़ें-
उत्तर प्रदेश के 35 प्रतिशत विधायकों के ऊपर आपराधिक मामले दर्ज, एडीआर रिपोर्ट में खुलासा

पुलिस व जिला प्रशासन ने बीते शुक्रवार को एक बार फिर आरोपियों को 14 दिन के भीतर राशि का भुगतान करने को कहा था, अन्यथा उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

Input-IANS ; Edited By- Saksham Nagar

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