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संस्कृति
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6 देवताओं के मंदिर होंगे राम जन्मभूमि परिसर में

रामजन्मभूमि परिसर में केवल भगवान श्रीराम के ही दर्शन नहीं होंगे। बल्कि यहां आने पर भक्तजनो को 6 अन्य देवी-देवाओं के दर्शन करने अवसर प्राप्त होगा।

(wikimedia commons)

राम जन्मभूमि मंदिर अयोध्या उत्तर प्रदेश।

उत्तर प्रदेश के अयोध्या में भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर बड़े ही हर्षो उल्लास के साथ बनाया जा रहा है। इसी बीच यह भी खबर है कि रामजन्मभूमि परिसर में केवल भगवान श्रीराम के ही दर्शन नहीं होंगे। बल्कि यहां आने पर भक्तजनो को 6 अन्य देवी-देवाओं के दर्शन करने का लाभ भी हो सकेगा । राम मंदिर निर्माण समिति द्वारा तैयार आखिरी ब्लू प्रिंट के अनुसार, राम मंदिर परिसर में छह अन्य मंदिर भी बनाये जायेंगे। यह मंदिर सूर्य, देव गणेश भगवान , शिव भगवान , दुर्गा माता , विष्णु देव और ब्रह्मा देव को समर्पित होंगे । इस प्रकार अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर परिसर में छह अलग-अलग देवताओं के लिए समर्पित मंदिर होंगे।


इसके लिए राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा ने कहा, "देवताओं के ये छह मंदिर राम मंदिर की बाहरी हिस्से के साथ-साथ परिसर के अंदर बन कर तैयार होंगे। भगवान रामचंद्र की पूजा के साथ-साथ इन देवताओं की पूजा हिंदू धर्म में भी बहुत महत्वपूर्ण है।" हिंदु धर्म में सभी देवी देवता पूजनीय है । उन्होंने कहा कि राम मंदिर की नींव का निर्माण जोरों पर है और इसके अक्टूबर के अंत या नवंबर के पहले सप्ताह तक पूरा होने की उम्मीद है।
राम मंदिर के सुपर स्ट्रक्च र के बेस (प्लिंथ) का निर्माण अक्टूबर के अंत से या नवंबर के पहले सप्ताह से नींव भरने के पूरा होने के बाद शुरू होगा।
मंदिर परिसर में चार अलग-अलग स्थानों पर मंदिर की संरचना में पत्थरों की ऑन-साइट सेटिंग के लिए चार टावर क्रेन लगाए जाएंगे।
राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा ने कहा कि 1,20,000 वर्ग फुट और 50 फुट गहरे खोदे गए है और नींव क्षेत्र को अक्टूबर के अंत तक पूरा कर लिए जाने की उम्मीद है।


Ayodhya Ram Mandir, \u0905\u092f\u094b\u0927\u094d\u092f\u093e \u0930\u093e\u092e \u092e\u0902\u0926\u093f\u0930 अयोध्या में भगवान श्रीराम के अलावा 6 अन्य देवी-देवाओं के दर्शन करने का लाभ भी होगा।(wikimedia commons)


उन्होंने कहा कि मंदिर ट्रस्ट ने नींव को समुद्र तल से 107 मीटर ऊपर लाने के लिए नींव क्षेत्र पर चार अतिरिक्त परतें बनाने का फैसला किया है।
पहले जिस फाउंडेशन में इंजीनियर फिल मैटेरियल की 44 लेयर का इस्तेमाल होता था, उसे अब बढ़ाकर 48 लेयर कर दिया गया है।
नींव भरने का काम पूरा होने के बाद फिर से सात फुट के राफ्ट की ढलाई की जाएगी।

यह भी पढ़ें : भगवान श्री विष्णु के 24 अवतार

आप को बता दे कि यह कास्टिंग कंक्रीट से की जाएगी जिसमें सीमेंट का भी इस्तेमाल किया जाएगा। अभी तक सीमेंट का उपयोग इंजीनियर्ड फील्ड सामग्री में नहीं किया जा रहा था, बल्कि पत्थर की धूल और फ्लाई ऐश का उपयोग किया जा रहा था।(आईएएनएस)

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Wikimedia Commons

जगन्नाथ मंदिर की तस्वीर

By- Tushar sethi

हिन्दू धर्म में मंदिरों का बहुत ज्यादा महत्व है क्योंकि यह हमारे लिए आस्था का केंद्र होते हैं। और बात जब चार धाम की हो तो महत्त्व और आस्था ज्यादा बढ़ जाती है। हिन्दू धर्म के चार धामों में से एक है जगन्नाथ मंदिर। ओड़िशा की राजधानी भुवनेश्वर से थोड़ी ही दूर पुरी शहर में स्थित है श्री जगन्नाथ मंदिर। यह मंदिर हिंदुओं का बहुत ही पवित्र तीर्थ स्थल माना जाता है। यहाँ हर कोई श्रद्धा भाव से भगवान की आराधना करता है। जगन्नाथ मंदिर श्री कृष्ण, बलराम और सुभद्रा को समर्पित है। यह मंदिर अपने रहस्यों के लिए भी प्रसिद्ध है। कुछ ऐसे ही अद्भुत रहस्यों के बारे में आप यहां पढ़ेंगे।

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एक प्रसिद्ध मंदिर की सुंदर वास्तुकला

ऐसा कहा जाता है कि जब भगवान हर जगह है तो मंदिर की क्या जरूरत है। इस प्रश्न का एक सरल सा जवाब यह है कि पानी भी हर जगह मौजूद है लेकिन जब प्यास लगती है तो हम नल या कुएं के पास ही जाते हैं और पढ़ तो हम कहीं भी सकते हैं लेकिन शांति के लिए हम पुस्तकालय का रुख करते है। इसी लिए मंदिर होना जरूरी है। हिंदुओं के लिए मंदिर एक पवित्र स्थल है। जिसकी वजह से इनकी एक अलग अहमियत है। भारत में बहुत से प्राचीन मंदिर है जहां आज भी पूजा की जाती है। लेकिन ऐसे बहुत से मंदिर है जो वीरान है। उन मंदिरों की कोई देख-रेख करने वाला नहीं है। जिसकी वजह से मंदिरों की हालत खराब है।


मंदिरों पर आक्रमण होना और सेकूलरी ज्ञान की वजह से इनकी यह दुर्दशा हुई है। इसी कारण बहुत से मंदिर विलुप्त होने की कगार पर भी है, और कई विलुप्त हो भी गए। यह हम सभी की जिम्मेदारी बनती है कि हम इन्हें खत्म होने से बचाए। वरना वह दिन दूर नहीं जब आने वाली पीढ़ी को इन मंदिरों के बारे में पता भी नहीं होगा। यह बहुत शर्म की बात है कि भारत में हज़ारों ऐसे मंदिर है जहां हर रोज 1 बार भी पूजा नहीं हो पाती है। कई मंदिरों में पूजा, संरक्षण, सुरक्षा के लिए मात्र एक ही व्यक्ति मौजूद है। इसलिए सरकारों को मंदिरों में दखल नहीं देना चाहिए और मंदिरों का प्रबंधन भक्तों द्वारा किया जाना चाहिए।

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(NewsGram Hindi)

1) श्री सनकादि मुनि- सबसे पहले, सृष्टि की शुरुआत में, ब्रह्मा [कुमार] के चार अविवाहित पुत्र थे, जिन्होंने ब्रह्मचर्य के व्रत में स्थित होने के कारण परम सत्य की प्राप्ति के लिए कठोर तपस्या की थी। इनका नाम सनक, सनन्दन, सनातन और सनत्कुमार था।

2) वराह अवतार- भगवान विष्णु ने इस अवतार को वराह के रूप में लिया और इस पृथ्वी को बचाया जो समुद्र में विलीन हो गई थी और इसे समुद्र से बाहर ले आई थी। उसके बाद ही सारी सृष्टि शुरू हुई।

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