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संस्कृति

जानें महापर्व छठ पूजा क्यों है बाकि त्यौहारों से खास

आस्था का महापर्व छठ पूजा हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। इस साल छठ पूजा सोमवार 8 नवंबर से शुरू हो रहा है

छठ पूजा के दौरान भक्त ठन्डे पानी में खड़े होकर सूर्य देव को अर्घ्य देते हैं [Wikimedia Commons]

आस्था का महापर्व छठ पूजा हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। इस साल छठ पूजा सोमवार 8 नवंबर से शुरू हो रहा है। षष्ठी तिथि 9 नवंबर को शुरू होकर 10 नवंबर तक रहेगी।

छठ का त्यौहार मुख्य रुप से बिहार , झारखंड और उत्तर प्रदेश में मनाया जाता है। यह त्यौहार भारत के अलावा नेपाल के मधेश क्षेत्र में भी मनाया जाता है।


माना जाता है की छठ माता से जो भी मांगो , मिल जाता है। इस त्यौहार के फल के समान ही इसका व्रत भी खास है। इसे सबसे कठिन व्रतों में गिना जाता है। व्रत करने वाले को इसमें लगातार 36 घंटे का निर्जल उपवास रखना होता है। व्रत के दौरान शुद्धता का ख़ास ध्यान रखा जाता है।

छठ पूजा में मुख्य रूप से सूर्य देव और प्रकृति की पूजा की जाती है। यह 4 दिवसीय त्यौहार है। त्योहार के पहले दिन को नहाय खाय के नाम से जाना जाता है। लोग एक जल निकाय में पवित्र डुबकी लगाते हैं। पूजा करने वाली महिलाएं केवल एक ही भोजन करती हैं। नहाय खाय के अगले दिन उपवास रख व्रती खरना पूजन करती हैं। इस दिन रात में खीर का प्रसाद ग्रहण किया जाता है। त्यौहार के तीसरे दिन शाम को डूबते सूर्य को पहला अर्घ्य दिया जाता है। छठ के अंतिम दिन प्रात: काल उदय हो रहे सूर्य को अर्घ्य देने के साथ व्रत का समापन होता है।

Chhath Puja , Bihar ,Sun छठ पूजा को सबसे अधिक धूमधाम से बिहार और झारखंड में मनाया जाता है [Wikimedia Commons]


छठ पूजा के इतिहास को लेकर कई कथाएं और मान्यताएं हैं। माना जाता है की यह पर्व वैदिक काल से मनाया जा रहा है। ऐसा कहा जाता है की वैदिक युग में कुछ ऋषियों ने विस्तृत पूजा की और शाम और भोर के दौरान खुद को सीधे सूर्य के प्रकाश में उजागर किया ताकि सूर्य से जीवन शक्ति का दोहन कर सके । ऋग्वेद और महाभारत में सूर्य देव की प्रशंसा करने और छठ पूजा के समान रीति-रिवाजों का वर्णन करने वाले छंद हैं जो यह साबित करते हैं की यह त्यौहार बेहद प्राचीन काल से मनाया जा रहा है ।

छठ पूजा से जुड़ी एक मान्यता यह भी है कि इसकी शुरुआत महाभारत काल से हुई जब पांडव अपना सारा राजपाट जुए में हार गए थे। उस समय द्रोपदी ने ऋषि धौम्य के कहने पर चार दिनों तक इस व्रत को किया और सूर्य देव की उपासना कर उनसे अपना राजपाट वापस मांगा था।

छठ पूजा से जुड़ी लोकप्रिय कथाओं में से एक भगवान राम की भी है। ऐसा कहा जाता है कि रावण को मारने के बाद जब भगवान राम और माता सीता अयोध्या वापस आए तो उन्होंने उपवास किया और छठ पूजा की रस्में निभाईं और अपने कुल देवता सूर्य देव की विधि विधान से पूजा की ।

यह भी पढ़ें : जानिए प्रभु श्री राम के ऐसे 5 गुण जो उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम बनाते हैं

छठ पूजा को बाकी सारे त्यौहारों से अलग और ख़ास माना जाता है। यह ऐसा हिन्दू त्यौहार है ,जिसमे मूर्ति पूजन नहीं होती , बल्कि प्रकृति को पूजा जाता है। साथ ही डूबते सूर्य की पूजा की जाती है जो की इस बात का प्रतीक है की प्रकृति केवल तभी ख़ास नहीं है जब वो हमे कुछ प्रदान कर रही हो , बल्कि प्रकृति हर हाल में पूजनीय है।

छठ पूजा में जातिवाद का भेदभाव मिट जाता है। छोटे बड़े , अमीर गरीब , सभी प्रेम से एकजुट होकर छठ पूजा करते हैं और एक ही तरह का प्रसाद बनाकर भगवान को भोग लगाते हैं। छठ पूजा के अवसर पर नदियां , तालाब और जलाशयों को साफ़ किया जाता है और इनके किनारे पूजा की जाती है । यह त्यौहार नदियों को प्रदुषण मुक्त बनाने का प्रेरणा देता है। साथ ही इसमें सेब , गन्ना , केला जैसे फलों को प्रसाद के रूप में चढ़ाया जाता है ,जो हमे वनस्पतियों की महत्ता दर्शाती है ।

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