Never miss a story

Get subscribed to our newsletter


×
राजनीति

अयोध्या विवाद के फैसले में पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री सरदार बूटा सिंह की रही अहम भूमिका

अयोध्या विवाद मामले में रामलला विराजमान को पक्षकार बनाने के पीछे पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता सरदार बूटा सिंह की अहम भूमिका थी। इस बात का जिक्र अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर लिखी गई किताब ‘एक रुका हुआ फैसला’ में किया गया है। पूर्व गृहमंत्री सरदर बूटा सिंह का शनिवार

अयोध्या विवाद मामले में रामलला विराजमान को पक्षकार बनाने के पीछे पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता सरदार बूटा सिंह की अहम भूमिका थी। इस बात का जिक्र अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर लिखी गई किताब ‘एक रुका हुआ फैसला’ में किया गया है।

पूर्व गृहमंत्री सरदर बूटा सिंह का शनिवार को निधन हो गया। वह 86 वर्ष के थे। अयोध्या विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में विवादित जमीन जिस रामलला विराजमान को दिया उसे पक्षकार बनाने के पीछे एक रोचक कहानी है।


बूटा सिंह की भविष्यवाणी

अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर आधारित वरिष्ठ पत्रकार प्रभाकर कुमार मिश्र की किताब ‘एक रुका हुआ फैसला’ में लेखक ने कहा है कि अगर रामलला को मामले में पक्षकार नहीं बनाया गया होता तो फैसला अलग हो सकता था। दरअसल, 1989 से पहले हिंदू पक्ष की ओर से जो भी मुकदमा दायर हुआ था उसमें कहीं जमीन के मालिकाना हक की मांग नहीं थी।

इसी पुस्तक में आगे जिक्र किया गया है कि तत्कालीन गृहमंत्री बूटा सिंह ने कांग्रेस की वरिष्ठ नेता शीला दीक्षित के जरिए विश्व हिंदू परिषद के अशोक सिंघल को संदेश भेजा था कि हिंदू पक्ष की ओर से दाखिल किसी मुकदमे में जमीन का मालिकाना हक नहीं मांगा गया है और ऐसे में उनका मुकदमा हारना लाजिमी है।

प्रभाकर मिश्र ने लिखा है कि बूटा सिंह की इस भविष्यवाणी के पीछे एक महत्वपूर्ण तर्क था कि मुस्लिम पक्ष का दावा था कि सदियों से विवादित जमीन उनके कब्जे में रही है। ऐसे में परिसीमन कानून के तहत इतना लंबा समय गुजर जाने के बाद हिंदू पक्षकार विवादित भूमि पर अपना हक नहीं जता सकते थे।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर लिखी गई किताब ‘एक रुका हुआ फैसला’ बाबरी विध्वंस और राम मंदिर के विषय में कई बातें उजागर करती है।

इस कानूनी अड़चन को दूर करने के लिए बूटा सिंह ने राम मंदिर आंदोलन से जुड़े लोगों को देश के पूर्व अटार्नी जनरल लाल नारायण सिन्हा से कानूनी मदद लेने की सलाह दी थी। आंदोलन से जुड़े नेता देवकीनंदन अग्रवाल और कुछ लोगों को सिन्हा की राय लेने पटना भेजा गया।

आगे किताब में जिक्र है कि पटना में ही लाल नारायण सिन्हा की सलाह पर रामलला विराजमान और श्रीराम जन्मभूमि को कानूनी अस्तित्व देने का फैसला हुआ क्योंकि सिन्हा को पता था कि भारतीय कानून के अनुसार, हिंदू देवता मुकदमा दायर भी कर सकते हैं और उनके खिलाफ मुकदमा भी चल सकता है।

यह भी पढ़ें – अयोध्या विवाद के रोचक पहलुओं से रूबरू कराती है किताब ‘एक रूका हुआ फैसला’

सरदार बूटा सिंह के बारे में

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सरदार बूटा सिंह, बिहार के राज्यपाल के रूप में नियुक्त होने के अलावा आठ बार लोकसभा सदस्य रहे थे। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्रियों इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और पी.वी. नरसिम्हा राव के साथ काम किया। वह 2004 से 2006 तक बिहार के राज्यपाल थे। जालंधर में जन्मे सिंह के पास रेलवे, वाणिज्य, संसदीय कार्य, खेल, जहाजरानी, कृषि, संचार और आवास जैसे प्रमुख विभाग थे। वह 2007 से 2010 तक राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष थे। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सिंह के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की और कहा कि दिग्गज पार्टी नेता ने अपना जीवन आम आदमी की सेवा में बिता दिया। (आईएएनएस)

Popular

प्रमुख हिंदू नेता और श्री नारायण धर्म परिपालन योगम के महासचिव वेल्लापल्ली नतेसन (wikimedia commons)

हमारे देश में लव जिहाद के जब मामले आते है , तब इस मुद्दे पर चर्चा जोर पकड़ती है और देश कई नेता और जनता अपनी-अपनी राय को वयक्त करते है । एसे में एक प्रमुख हिंदू नेता और श्री नारायण धर्म परिपालन योगम के महासचिव वेल्लापल्ली नतेसन ने सोमवार को एक बयान दिया जिसमें उन्होनें कहा कि यह मुस्लिम समुदाय नहीं बल्कि ईसाई हैं जो देश में धर्मांतरण और लव जिहाद में सबसे आगे हैं।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार एनडीए के सहयोगी और भारत धर्म जन सेना के संरक्षक वेल्लापल्ली नतेसन नें एक कैथोलिक पादरी द्वारा लगाए गए आरोपों पर प्रतिक्रिया दी , जिसमे कहा गया था हिंदू पुरुषों द्वारा ईसाई धर्म महिलाओं को लालच दिया जा रहा है। नतेसन नें पाला बिशप जोसेफ कल्लारंगट की एक टिप्पणी जो कि विवादास्पद "लव जिहाद" और "मादक जिहाद" की भी जमकर आलोचना की और यह कहा कि इस मुद्दे पर "मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाना सही नहीं है"।

Keep Reading Show less

महंत नरेंद्र गिरि (Wikimedia Commons)

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की सोमवार को संदिग्ध हालात में मौत हो गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि को बाघंबरी मठ स्थित उनके आवास पर श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि दोषियों को जांच के बाद सजा दी जाएगी। उन्होंने कहा ''यह एक दुखद घटना है और इसी लिए अपने संत समाज की तरफ से, प्रदेश सरकार की ओर से उनके प्रति श्रद्धांजलि व्यक्त करने के लिए में स्वयं यहाँ उपस्थित हुआ हूँ। अखाड़ा परिषद और संत समाज की उन्होंने सेवा की है। नरेंद्र गिरि प्रयागराज के विकास को लेकर तत्पर रहते थे। साधु समाज, मठ-मंदिर की समस्याओं को लेकर उनका सहयोग प्राप्त होता था। उनके संकल्पों को पूरा करने की शक्ति उनके अनुयायियों को मिले''

योगी आदित्यनाथ ने कहा '' कुंभ के सफल आयोजन में नरेंद्र गिरि का बड़ा योगदान था। एक-एक घटना के पर्दाफाश होगा और दोषी अवश्य सजा पाएगा। मेरी अपील है सभी लोगों से की इस समय अनावश्यक बयानबाजी से बचे। जांच एजेंसी को निष्पक्ष रूप से कार्यक्रम को आगे बढ़ाने दे। और जो भी इसके लिए जिम्मेदार होगा उसको कानून की तहत कड़ी से कड़ी सजा भी दिलवाई जाएगी।

Keep Reading Show less

बसपा अध्यक्ष मायावती (Wikimedia Commons)

बहुजन समाज पार्टी(बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने कांग्रेस को आड़े हाथों लिया है। मायावती का कहना है कि कांग्रेस को अभी तक दलितों पर पूरा भरोसा नहीं है। मायावती ने सोमवार को कहा कि पंजाब के अगले मुख्यमंत्री के रूप में चरणजीत सिंह चन्नी की नियुक्ति एक चुनावी चाल है। मायावती ने कहा कि कांग्रेस ने समुदाय के वोट बटोरने की उम्मीद से एक दलित को पंजाब का सीएम बनाया। जब भी कांग्रेस मुसीबत में होती है तभी उसे दलितों की याद आती है।

मायावती ने चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनने की बधाई भी दी थी। पंजाब के दलितों को मायावती ने कांग्रेस से सावधान रहने को भी कहा है। मायावती ने कांग्रेस के साथ बीजेपी को भी लपेटे में ले लिया। उन्होंने कहा कि बीजेपी भी ऐसी ही है। वह भी ओबीसी समाज के लिए कुछ करना चाहती है तो करती क्यों नहीं है।

Keep reading... Show less