Never miss a story

Get subscribed to our newsletter


×
दुनिया

प्रवासी पक्षियों को यदि संरक्षित नहीं किया गया तो हो सकता है मानव अस्तित्व ख़त्म।

भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) में एक ऑनलाइन बैठक आयोजित की गई है, जिसमें भारत प्रवासी पक्षियों के संरक्षण पर अपनी सर्वोत्तम प्रथाओं और सीएएफ रेंज देशों के साथ राष्ट्रीय कार्य योजना को साझा करेगा।

प्रवासी पक्षियों के लिए मुसीबत बनी आवास की हानि। ( Pixabay )

विश्व स्तर पर तेजी से हो रहे आवास की हानि पर भारत ने चिंता जताई है। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री, भूपेंद्र यादव ने बुधवार को उद्घाटन की गई दो दिवसीय सीएएफ रेंज देशों की बैठक में इस बात को दुनिया के सामने रखा।उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक के दौरान विश्व स्तर पर तेजी से आवास की हानि प्रवासी पक्षियों के लिए बड़ी बाधा साबित हुई है। इसमें जल निकायों, आद्र्रभूमि, प्राकृतिक घास के मैदान और जंगलों के नीचे का क्षेत्र भी शामिल है।साथ ही उन्होंने यह भी कहा, "अत्यधिक दोहन, प्राकृतिक संसाधनों का निरंतर उपयोग, जनसंख्या विस्फोट के साथ-साथ मौसम परिवर्तनशीलता में वृद्धि, और जलवायु परिवर्तन के परिणामस्वरूप प्रवासी पक्षियों के लिए जैव विविधता का नुकसान हुआ है।"

प्रवासी पक्षियों के संरक्षण के लिए देशों और राष्ट्रीय सीमाओं के बीच पूरे मध्य एशियाई फ्लाईवे (सीएएफ) के साथ सहयोग को बेहद जरूरी बताते हुए यादव ने कहा कि प्रवासी पक्षियों को जीवित रहने में मदद करना हमारे लिए पसंद की बात नहीं है बल्कि हमारे अस्तित्व के लिए आवश्यक है।


प्रवासी पक्षियों के संरक्षण के लिए सबको एक साथ आकर प्रयास करने के लिए प्रेरित करते हुए यह कहा की ये पक्षी सकारात्मक प्रभाव वाले मौसमी मेहमान हैं और भारत भाग्यशाली है कि सितंबर-अक्टूबर बड़े झुंडों का आगमन प्रवास की शुरूआत का प्रतीक है।

मंत्री ने यह भी बताया कि प्रवासी पक्षियों को बचाने का मतलब आद्र्रभूमि, स्थलीय आवासों को बचाना और एक पारिस्थितिकी तंत्र को बचाना है, जो आद्र्रभूमि पर निर्भर समुदायों को लाभ पहुंचाता है। पक्षियों को मौसम की प्रतिकूलताओं और ठंडे क्षेत्रों में भोजन की अनुपलब्धता को दूर करें और उनका आवास और भोजन सुनिश्चित करें।

एमओईएफ और सीसी की एक विज्ञप्ति में कहा गया है की भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) में एक ऑनलाइन बैठक आयोजित की गई है, जिसमें भारत प्रवासी पक्षियों के संरक्षण पर अपनी सर्वोत्तम प्रथाओं और सीएएफ रेंज देशों के साथ राष्ट्रीय कार्य योजना को साझा करेगा।

जिसके बाद बैठक गतिविधियों और संरक्षण प्राथमिकताओं, और सीएएफ के भीतर होने वाली कार्रवाइयों के बारे में सभी को जानकारी भी साझा की जाएगी। इस बैठक में सीएएफ रेंज के देशों के प्रतिनिधि के साथ साथ सीएमएस के प्रतिनिधि, इसके सहयोगी संगठन, दुनिया भर के क्षेत्र के विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, अधिकारी और राज्य/केंद्र शासित प्रदेश की सरकारों के प्रतिनिधि आदि भी शामिल होंगे।

मध्य एशियाई फ्लाईवे (सीएएफ) जिसमे पक्षियों के कई महत्वपूर्ण प्रवास मार्ग शामिल हैं, आर्कटिक और हिंद महासागरों के बीच यूरेशिया के एक बड़े क्षेत्र को कवर करता है। इसके तहत कुल 30 देश हैं। भारत ने इस फ्लाईवे की प्रगति को हमेशा सहयोग दिया है और इसने कई अंतर-सरकारी बैठकें भी आयोजित की हैं जो समझौतों और योजनाओं को विकसित करने और आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण साबित हुई हैं।

migratory birds/ india/ birds in india/ प्रवासी पक्षियों का संरक्षण महत्वपूर्ण।(Pixabay)

यह भी पढ़ें : फर्जी ई-कॉमर्स वेबसाइट्स फेस्टिव सीजन में भारतीयों को लगा रहीं चूना

इसके अतिरिक्त प्रवासी पक्षियों के संरक्षण के महत्व को ध्यान में रखते हुए भारत ने 2018 में सीएएफ के साथ प्रवासी पक्षियों के संरक्षण के लिए एक व्यापक राष्ट्रीय कार्य योजना (एनएपी) शुरू की है।

फरवरी 2020 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गांधीनगर में आयोजित प्रवासी प्रजातियों (सीएमएस) पर सम्मेलन के दलों (सीओपी) की 13 वीं बैठक के उद्घाटन समारोह के दौरान अपने मुख्य भाषण में कहा था कि भारत सभी मध्य एशियाई फ्लाईवे रेंज देशों के सक्रिय सहयोग के साथ प्रवासी पक्षियों के संरक्षण को एक नए प्रतिमान में ले जाने का इच्छुक है और मध्य एशियाई फ्लाईवे के साथ प्रवासी पक्षियों के संरक्षण के लिए अन्य देशों के लिए कार्य योजना तैयार करने की सुविधा प्रदान करने में प्रसन्नता होगी।

इस बैठक के दौरान एक संकल्प 12.11 और निर्णय 13.46 को अन्य बातों के साथ-साथ सीएमएस की छत्रछाया में और भारत के नेतृत्व में सीओपी 14 द्वारा स्थापित करने के लिए अपनाया गया था। इसमें अन्य रेंज राज्यों और संबंधित हितधारकों के साथ परामर्श, संरक्षण प्राथमिकताओं और संबंधित कार्यों पर सहमत होने के उद्देश्य से, और क्षेत्र में प्रवासी पक्षियों के लिए संरक्षण कार्रवाई के कार्यान्वयन के साथ पक्षों का समर्थन करने के उपाय, जिसमें अनुसंधान और अध्ययन को बढ़ावा देना शामिल है।(आईएएनएस-MS)


क्या आप कोविड ब्रेन फॉग का शिकार हैं? | what is brain fog | coronavirus latest news | Newsgram youtu.be

Popular

नागरिक उड्डयन मंत्रालय की तरफ से चलाई जा रही है कृषि उड़ान 2.O योजना(Wikimedia commons)

नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया(Jyotiraditya Scindia) ने बुधवार को कृषि उड़ान 2.0' योजना का शुभारंभ करने के लिए आयोजित एक कार्यक्रम में भाग लिया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सिंधिया ने कहा कि 'कृषि उड़ान 2जेड.0' आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं को दूर कर किसानों की आय दोगुनी करने में मदद करेगी। यह योजना हवाई परिवहन द्वारा कृषि-उत्पाद की आवाजाही को सुविधाजनक बनाने और प्रोत्साहित करने का प्रस्ताव करती है।

सिंधिया(Jyotiraditya Scindia) ने कहा, "यह योजना कृषि क्षेत्र के लिए विकास के नए रास्ते खोलेगी और आपूर्ति श्रृंखला, रसद और कृषि उपज के परिवहन में बाधाओं को दूर करके किसानों की आय को दोगुना करने के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद करेगी। क्षेत्रों (कृषि और विमानन) के बीच अभिसरण तीन प्राथमिक कारणों से संभव है - भविष्य में विमान के लिए जैव ईंधन का विकासवादी संभावित उपयोग, कृषि क्षेत्र में ड्रोन का उपयोग और योजनाओं के माध्यम से कृषि उत्पादों का एकीकरण और मूल्य प्राप्ति।"

Keep Reading Show less

चंदा बंद सत्याग्रह जिसे No List No Donation के नाम से भी जाना जाता है। (File Photo)

सत्याग्रह का सामन्य अर्थ होता है "सत्य का आग्रह।" सर्वप्रथम इसका प्रयोग महात्मा गांधी द्वारा किया गया था। उन्होंने भारत में कई आंदोलन चलाए, जिनमें चंपारण, बारदोली, खेड़ा सत्याग्रह आदि प्रमुख। हैं। सत्याग्रह स्वराज प्राप्त करने और सामाजिक संघर्षों को मिटाने का एक नैतिक और राजनीतिक अस्त्र है। आज हम ऐसे ही एक सत्याग्रह की बात करेंगे जिसे गांधी जी से प्रेणा लेकर शुरू किया गया था।

"चंदा बंद सत्याग्रह" जिसे No List No Donation के नाम से भी जाना जाता है। यह आम आदमी पार्टी के विरुद्ध एक अमरीकी डॉक्टर वह NRI सेल के सह-संयोजक डॉ. मुनीश रायजादा द्वारा साल 2016 में शुरू किया गया था। डॉ. मुनीश जब आम आदमी पार्टी से जुड़े थे, तब उन्हें पार्टी के NRI सेल का सह-संयोजक नियुक्त किया गया था।

Keep Reading Show less

वन्य जीव अभयाण्य में अब हिरण, चीतल, तेंदुआ, लकड़बग्घा जैसे जानवरों का परिवार बढ़ गया है।(Pixabay)

कोरोना काल में जब सब कुछ बंद चल रहा था । झारखंड के पलामू टाइगर रिजर्व(Palamu Tiger Reserve) में कोरोना काल के दौरान सैलानियों और स्थानीय लोगों का प्रवेश रोका गया तो यहां जानवरों की आमद बढ़ गयी। इस वन्य जीव अभयाण्य में अब हिरण, चीतल, तेंदुआ, लकड़बग्घा जैसे जानवरों का परिवार बढ़ गया है। आप को बता दे कि लगभग एक दशक के बाद यहां हिरण की विलुप्तप्राय प्रजाति चौसिंगा की भी आमद हुई है। इसे लेकर परियोजना के पदाधिकारी उत्साहित हैं। पलामू टाइगर प्रोजेक्ट(Palamu Tiger Reserve) के फील्ड डायरेक्टर कुमार आशुतोष ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि लोगों का आवागमन कम होने जानवरों को ज्यादा सुरक्षित और अनुकूल स्पेस हासिल हुआ और इसी का नतीजा है कि अब इस परियोजना क्षेत्र में उनका परिवार पहले की तुलना में बड़ा हो गया है।

पिछले हफ्ते इस टाइगर रिजर्व(Palamu Tiger Reserve) के महुआडांड़ में हिरण की विलुप्तप्राय प्रजाति चौसिंगा के एक परिवार की आमद हुई है। फील्ड डायरेक्टर कुमार आशुतोष के मुताबिक एक जोड़ा नर-मादा चौसिंगा और उनका एक बच्चा ग्रामीण आबादी वाले इलाके में पहुंच गया था, जिसे हमारी टीम ने रेस्क्यू कर एक कैंप में रखा है। चार सिंगों वाला यह हिरण देश के सुरक्षित वन प्रक्षेत्रों में बहुत कम संख्या में है।

Palamu Tiger Reserve वन्य जीव अभयाण्य में अब हिरण, चीतल, तेंदुआ, लकड़बग्घा जैसे जानवरों का परिवार बढ़ गया है।(Unsplash)

Keep reading... Show less