Never miss a story

Get subscribed to our newsletter


×
टेक्नोलॉजी

इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण के बिना आत्मनिर्भर भारत संभव नहीं : ईएलसीआईए

ईएलसीआईए के महानिदेशक राजू गोयल ने कहा कि दुनिया के लिए एक विनिर्माण केंद्र बनने का भारत का महत्वाकांक्षी लक्ष्य हासिल करना असंभव होगा|

वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण में भारत की हिस्सेदारी 2012 में 1.3 प्रतिशत से बढ़कर 2019 में 3.6 प्रतिशत हो गई है। (NewsGramHindi)

ईएलसीआईए के महानिदेशक राजू गोयल ने कहा कि दुनिया के लिए एक विनिर्माण केंद्र बनने का भारत का महत्वाकांक्षी लक्ष्य हासिल करना असंभव होगा, यदि देश महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए आवश्यक डिस्प्ले और आईसी (एकीकृत चिप्स) जैसे प्रमुख घटकों के निर्माण में तुरंत निवेश शुरू नहीं करेगा। गोयल ने कहा, “इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण आत्मनिर्भर भारत (Atmanirbhar Bharat) के लिए महत्वपूर्ण है।”

उन्होंने कहा, “इलेक्ट्रॉनिक्स अधिकांश मौजूदा और उभरती प्रौद्योगिकियों के केंद्र में है और व्यापक रूप से एक मेटा-रिसोर्स के रूप में मान्यता प्राप्त है। इलेक्ट्रॉनिक घटक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के निर्माण खंड हैं और इसमें इलेक्ट्रॉनिक्स प्रौद्योगिकी का सार होता है। भारत घटकों के निर्माण में पिछड़ गया है, विशेष रूप से हाई इंड पीसीबी, चिप कंपोनेंट और सेमीकंडक्टर। प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक्स को आज पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, मेमोरी डिवाइस, सेंसर और डिस्प्ले के निर्माण के लिए अत्याधुनिक सेमीकंडक्टर तकनीक पर आधारित इन घटकों की आवश्यकता होती है।”


गोयल ने ऐसे डिस्प्ले का उदाहरण दिया जो मोबाइल फोन, टीवी सेट, लैपटॉप, टैबलेट जैसे लोकप्रिय इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के 10-50 प्रतिशत तक प्रमुख मूल्य बनाते हैं और उनका उपयोग तेजी से बढ़ रहा है और सभी डोमेन में टच और इंटरैक्टिव तकनीक आम हो रही है।

दुर्भाग्य से भारत में डिस्प्ले फैब्रिकेशन यूनिट नहीं है जिसके लिए कई अरब अमेरिकी डॉलर के बहुत बड़े निवेश की आवश्यकता होती है और यह सेमीकंडक्टर तकनीक पर आधारित है। इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम डिजाइन और विनिर्माण क्षेत्र के लिए एक स्थायी और आत्मनिर्भर पारिस्थितिकी तंत्र स्थापित करने के लिए ऐसे प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक घटकों का निर्माण महत्वपूर्ण है। यह मूल्यवर्धन को बढ़ाने और अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम मूल्य श्रृंखला दोनों को स्थापित करने का एकमात्र तरीका है।

मोबाइल फोन, टीवी सेट, लैपटॉप, टैबलेट जैसे लोकप्रिय इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के 10-50 प्रतिशत तक प्रमुख मूल्य बनाते हैं और उनका उपयोग तेजी से बढ़ रहा है| (Pixabay)

गोयल ने कहा, “जैसा कि जापान (Japan), दक्षिण कोरिया, ताइवान और चीन (China) जैसी अर्थव्यवस्थाओं द्वारा प्रदर्शित किया गया है, इलेक्ट्रॉनिक्स परिवर्तनकारी परिवर्तन ला सकता है और किसी भी देश को विकसित देशों की वर्ग में पहुंचा सकता है। यह भारत के लिए एक सबक है और हमारे लिए आत्मानिर्भर भारत की ओर आगे बढ़ने का रास्ता है। यदि ये देश यह कर सकते हैं, हम क्यों नहीं? हमारे पास प्राकृतिक संसाधन, शिक्षित और कुशल जनशक्ति है, एक बड़ा बाजार है और हमारे बुनियादी ढांचे में सुधार हो रहा है। अब हमें केवल अपनी लक्ष्य प्राप्ति के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स पर अपनी राष्ट्रीय नीति को ²ढ़ता और आक्रामक रूप से लागू करने की आवश्यकता है।”

सरकारी अनुमानों के अनुसार, वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार का मूल्य लगभग 2 ट्रिलियन डॉलर है। प्रौद्योगिकी (Technologies) के बढ़ते महत्व को देखते हुए, यह संख्या काफी और बहुत कम समय में बढ़ने की उम्मीद है। जबकि चीन सबसे बड़ा इलेक्ट्रॉनिक्स निमार्ता है, वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण में भारत की हिस्सेदारी 2012 में 1.3 प्रतिशत से बढ़कर 2019 में 3.6 प्रतिशत हो गई है।

भारत सरकार पिछले कुछ समय से भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्च रिंग को बढ़ावा देने पर काम कर रही है। जब मोबाइल फोन जैसे प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक्स के संयोजन की बात आती है, तो बहुत कुछ हुआ है, प्रमुख घटकों के निर्माण के बारे में अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। इस साल की शुरूआत में, मई में, सरकार ने देश में डिस्प्ले फैब्रिकेशन इकाइयों के निर्माण के लिए कंपनियों से प्रस्ताव आमंत्रित करने के लिए रुचि की अभिव्यक्ति(एक्सप्रेस ऑफ इंटरेस्ट-ईओआई) जारी की थी। समझा जाता है कि इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय प्रस्तावों पर गौर कर रहा है और इस साल के अंत में अगले कदम के साथ आने की उम्मीद है।

यह भी पढ़ें :- वैश्विक आर्थिक सुधार भारत के लिए सकारात्मक : ईवाई

सरकारी अनुमानों के अनुसार, भारत का डिस्पले मार्केट लगभग 7 अरब डॉलर का होने का अनुमान है और अगले चार वर्षों में इसके दोगुने से अधिक 15 अरब डॉलर होने की उम्मीद है। निजी उद्यमों को उम्मीद है कि यह समान समय सीमा में लगभग 25 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा। डिस्प्ले पूरी तरह से आयात किए जाते हैं और 90 प्रतिशत से अधिक चीन से आते हैं।

इंडियन सेल्युलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन (Indian Cellular and Electronics Association) की एक हालिया रिपोर्ट का अनुमान है कि बढ़ती घरेलू मांग को देखते हुए, 2020 के लिए डिस्प्ले की कुल मांग लगभग 253 मिलियन यूनिट थी, जिसका मूल्य 5.4 अरब डॉलर था। मोबाइल फोन, टीवी और आईटी हार्डवेयर उत्पादों के लिए विनिर्माण योजनाओं को देखते हुए, यह 29.5 प्रतिशत के स्वस्थ सीएजीआर से बढ़कर 922 मिलियन यूनिट या 2025 तक 18.9 अरब डॉलर होने की उम्मीद है। वर्तमान में, इलेक्ट्रॉनिक्स तेल के बाद देश के लिए दूसरा सबसे बड़ा आयात खर्च हैं| (आईएएनएस-SM)

Popular

महिला बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी (Wikimedia Commons)

जैसा कि राष्ट्र ने 24 जनवरी को राष्ट्रीय बालिका दिवस(National Girl Child Day) मनाया, केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री(Union Minister of Women and Child Development) श्रीमती स्मृति जुबिन ईरानी(Smriti Zubin Irani) ने देशवासियों से देश की बेटियों की सराहना करने और उनकी उपलब्धियों का जश्न मनाकर उन्हें प्रोत्साहित करने और एक समावेशी निर्माण के लिए लिंग विभाजन को पाटने और समान समाज का संकल्प लेने का आह्वान किया।

"शिक्षित करें, प्रोत्साहित करें, सशक्त करें! आज का दिन हमारी लड़कियों को समान अवसर प्रदान करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता को नवीनीकृत करने का दिन है। राष्ट्रीय बालिका दिवस पर, जैसा कि हम अपनी बेटियों की उपलब्धियों का जश्न मनाते हैं, हम एक समावेशी और समान समाज के निर्माण के लिए लिंग भेद को पाटने का संकल्प लेते हैं”, ईरानी ने अपने ट्वीट संदेश में कहा।

Keep Reading Show less

नरेंद्र मोदी (Wikimedia Commons)

गणतंत्र दिवस समारोह(Republic Day Celebration) हमेशा संस्कृति का पर्याय होते हैं, क्योंकि इस दिन विभिन्न राज्यों की झांकियों को नई दिल्ली में राजपथ पर परेड के हिस्से के रूप में प्रदर्शित किया जाता है। दर्शकों का स्वागत रंग-बिरंगे छींटों और देश की विविधता के प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व के साथ किया जाता है।

इस वर्ष, भारतीय गणराज्य के 73वें वर्ष के अवसर पर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी(Narendra Modi) को दो अलग-अलग कपड़ों में देखा गया - जो देश के दो अलग-अलग राज्यों से संबंधित हैं - जिनका पारंपरिक महत्व है।

Keep Reading Show less

डॉ. मुनीश रायजादा ने इस वेब सीरीज़ के माध्यम से आम आदमी पार्टी में हुए भ्रस्टाचार को सामने लाने का प्रयास किया है।

पंजाब(Punjab) में जहां एक तरफ आगामी चुनाव में आम आदमी पार्टी(Aam Aadmi Party) एक बड़ी जीत की उम्मीद कर रही है, तो वहीं दूसरी ओर इसी पार्टी के एक पूर्व सदस्य ने एक वेब सीरीज के ज़रिये इस पार्टी के भीतर छिपे काले सच को बाहर लाने की कोशिश की है। वेब सीरीज का नाम है ट्रांसपेरेंसी : पारदर्शिता(Transparency : Paardarshita) है, जोकि डॉ मुनीष रायजादा(Dr Munish Raizada द्वारा निर्देशित और निर्मित है। डॉ रायजादा शिकागो में एक डॉक्टर के तौर पर कार्यरत हैं और कुछ समय पहले तक आम आदमी पार्टी के लिए काम भी करते थे, पर जैसे ही उन्होंने यह देखा की आम आदमी पार्टी अपने मूल सिद्धांतो से भटक रही है तो उन्होंने इसके खिलाफ अपनी आवाज़ उठाई।

मीडिया एजेंसी IANS से फ़ोन पर बातचीत करते हुए डॉ रायजादा ने बताया, "पारदर्शिता एक राजनीतिक वेब सीरीज है, इसलिए हमने पहले इसके ज़्यादा प्रचार और प्रसार के बारे में नहीं सोचा, परंतु जब बात आई इसे समाज के हर तबके तक पहुंचाने की तो फिर हमें यूट्यूब का ख्याल आया।" पारदर्शिता वेब सीरीज का पहला एपिसोड 17 जनवरी को यूट्यूब पर रिलीज़ किया गया था।

Keep reading... Show less