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कोच रवि शास्त्री ने भारतीय टीम से कहा, पूरा विश्व तुम्हें खड़े होकर सलाम करेगा

भारतीय टीम के कोच रवि शास्त्री ने गाबा टेस्ट मैच में मिली जीत के बाद ड्रेसिंग रूम में खिलाड़ियों की तारीफ की और उनके आत्मविश्वास को सराहा। भारत ने गाबा में खेले गए चौथे टेस्ट मैच में आस्ट्रेलिया को तीन विकेट से हरा दिया और चार मैचों की टेस्ट सीरीज 2-1 से अपने नाम करते

भारतीय टीम के कोच रवि शास्त्री ने गाबा टेस्ट मैच में मिली जीत के बाद ड्रेसिंग रूम में खिलाड़ियों की तारीफ की और उनके आत्मविश्वास को सराहा। भारत ने गाबा में खेले गए चौथे टेस्ट मैच में आस्ट्रेलिया को तीन विकेट से हरा दिया और चार मैचों की टेस्ट सीरीज 2-1 से अपने नाम करते हुए आस्ट्रेलिया में लगातार दूसरी बार टेस्ट सीरीज जीती।

भारत की यह जीत उसके अधिकतर मुख्य खिलाड़ियों के बिना आई। कप्तान विराट कोहली पहले टेस्ट मैच के बाद अपने पहले बच्चे के जन्म के लिए स्वदेश लौट गए थे। ईशांत शर्मा चोटिल होने के कारण दौरे पर नहीं थे। मोहम्मद शमी बीच दौरे में चोटिल हो गए। यही हाल उमेश यादव, रवींद्र जडेजा, रविचंद्रन अश्विन, हनुमा विहारी का था जो चोटिल हो गए। इसके अलावा भारत को पहले टेस्ट मैच में शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा था क्योंकि टीम दूसरी पारी में 36 रनों पर ही ऑल आउट हो गई थी जो उसका टेस्ट की एक पारी में सबसे कम स्कोर है।


बीसीसीआई ने अपनी वेबसाइट पर एक वीडियो पोस्ट किया है जिसमें शास्त्री ड्रेसिंग रूम में टीम से बात करते हुए कह रहे हैं, “साहस, निश्चय, मजबूती, आप लोगों ने जो दिखाया वो शानदार था। आप एक बार भी हताश नहीं हुए। चोटें, 36 पर ऑल आउट होना, इसके बाद भी आप लोगों में आत्मविश्वास था। यह एक रात में नहीं होता, लेकिन आपमें आत्मविश्वास है और आप देख सकते हैं कि यह आपको कहां ले जा सकती है।”

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उन्होंने कहा, “आज, सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि पूरा विश्व आपको खड़े होकर सलाम करेगा। याद रखिए आपने आज जो किया। आपको इस पल का लुत्फ लेना चाहिए। इसे जाने नहीं दें, जितना हो सके इसका लुत्फ उठाएं। पदार्पण करने वाले सभी खिलाड़ी, सपोर्ट स्टाफ, सभी शानदार थे।” भारत ने चौथे और आखिरी टेस्ट मैच में टी. नटराजन और वॉशिंगटन सुंदर को पदार्पण का मौका दिया था और शार्दूल ठाकुर को भी खेलाया था जो उनका दूसरा टेस्ट मैच था।

शास्त्री ने कहा, “इसकी शुरुआत मेलबर्न से हुई। सिडनी में शानदार खेल खेला जिसके कारण हम बराबरी पर रहते हुए यहां आए। आपने आज जिस तरह से यह मैच जीता वो अविश्वस्नीय है। शुभमन गिल, शानदार बल्लेबाजी। चेतेश्वर पुजारा आप एक बेहतरीन योद्धा के तौर पर जाने जाओगे। पंत, एकदम अविश्वस्नीय है। हम जिस स्थिति में थे वहां से रहाणे ने जिस तरह की कप्तानी की और टीम की वापसी कराई वो बेहतरीन है।”

उन्होंने कहा, “एक और बात, इस मैच में मैं नहीं भूलूंगा कि हमने तीन खिलाड़ियों को पदार्पण का मौका दिया और पहली पारी में उनका प्रदर्शन शानदार था। नटराजन, सुंदर और मै तो कहूंगा ठाकुर भी जिसे अपने पहले टेस्ट मैच में खेलने का कम मौका मिला था। आपने आस्ट्रेलिया पर दबाव ला दिया। आपने वापसी की और 180/6 पर होने के बाद टीम को 330-340 तक ले गए। हमारे मेस्योर और फिजियो को नहीं भूलना चाहिए। इस पल का लुत्फ लो। ऐसी चीजें हर दिन नहीं होतीं।” (आईएएनएस )

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अल्जाइमर रोग एक मानसिक विकार है। (unsplash)

ऑस्ट्रेलिया के शोधकर्ताओं ने एक अभूतपूर्व अध्ययन में 'ब्लड-टू-ब्रेन पाथवे' की पहचान की है जो अल्जाइमर रोग का कारण बन सकता है। कर्टिन विश्वविद्यालय जो कि ऑस्ट्रेलिया के पर्थ शहर में है, वहाँ माउस मॉडल पर परीक्षण किया गया था, इससे पता चला कि अल्जाइमर रोग का एक संभावित कारण विषाक्त प्रोटीन को ले जाने वाले वसा वाले कणों के रक्त से मस्तिष्क में रिसाव था।

कर्टिन हेल्थ इनोवेशन रिसर्च इंस्टीट्यूट के निदेशक प्रमुख जांचकर्ता प्रोफेसर जॉन मामो ने कहा "जबकि हम पहले जानते थे कि अल्जाइमर रोग से पीड़ित लोगों की पहचान विशेषता बीटा-एमिलॉयड नामक मस्तिष्क के भीतर जहरीले प्रोटीन जमा का प्रगतिशील संचय था, शोधकर्ताओं को यह नहीं पता था कि एमिलॉयड कहां से उत्पन्न हुआ, या यह मस्तिष्क में क्यों जमा हुआ," शोध से पता चलता है कि अल्जाइमर रोग से पीड़ित लोगों के दिमाग में जहरीले प्रोटीन बनते हैं, जो रक्त में वसा ले जाने वाले कणों से मस्तिष्क में रिसाव की संभावना रखते हैं। इसे लिपोप्रोटीन कहा जाता है।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Wikimedia Commons)

शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) सम्मेलन को संम्बोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चरमपंथ और कट्टरपंथ की चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए एससीओ द्वारा एक खाका विकसित करने का आह्वान किया। 21वीं बैठक को संम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मध्य एशिया में अमन के लिए सबसे बड़ी चुनौती है विश्वास की कमी।

इसके अलावा, पीएम मोदी ने विश्व के नेताओं से यह सुनिश्चित करने का आह्वान किया कि मानवीय सहायता अफगानिस्तान तक निर्बाध रूप से पहुंचे। मोदी ने कहा, "अगर हम इतिहास में पीछे मुड़कर देखें, तो हम पाएंगे कि मध्य एशिया उदारवादी, प्रगतिशील संस्कृतियों और मूल्यों का केंद्र रहा है।
"भारत इन देशों के साथ अपनी कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है और हम मानते हैं कि भूमि से घिरे मध्य एशियाई देश भारत के विशाल बाजार से जुड़कर अत्यधिक लाभ उठा सकते हैं"

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क्रांतिकारी दुर्गावती देवी (wikimedia commons)

हिंदुस्तान की भूमि पर कई साहसी और निडर लोगों का जन्म हुआ जिन्होने भारत की आजादी में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया था। लेकिन दुःख की बात यह है कि इनका नाम इतिहास के पन्नों में इतनी बार दर्ज नहीं हुआ जितना होना चाहिए था। ऐसी ही एक वीरांगना का नाम है दुर्गावती देवी। इन्हें दुर्गा भाभी के नाम से भी जाना जाता है। यह उन महिलाओं में से एक थी जिन्होंने ब्रिटिश राज के खिलाफ क्रांति में भाग लिया था।

दुर्गा भाभी का जन्म 7 अक्टूबर 1907 में उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले में हुआ था। इनका जन्म छोटी उम्र में ही भगवती वोहरा जी के साथ हुआ। भगवती वोहरा का परिवार लाहौर का प्रतिष्ठित परिवार था। दुर्गावती के पति भी क्रांति में पुरजोर तरीके से भाग लेना चाहते थे। लेकिन पिता के दबाव के कारण ऐसा कर नहीं पा रहे थे। पिता का देहांत होने के बाद भगवती जी ने भी क्रांति में भाग लिया था।

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