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खेल

बल्लेबाज पृथ्वी शॉ की तकनीक फिर सवालों के घेरे में

शॉ दूसरी गेंद खेल रहे थे और उन्होंने मिशेल स्टार्क की इनस्विंगर पर ड्राइव करने की कोशिश की, इस दौरान उनके बल्ले और पैड में गैप रहा और गेंद उनके बल्ले का अंदरूनी किनारा ले कर स्टम्प में जा लगी।

बल्लेबाज पृथ्वी शॉ । (Facebook)

By : खुर्रम हबीब

भारत ने एडिलेड ओवल मैदान पर आस्ट्रेलिया के साथ खेले जा रहे डे-नाइट टेस्ट मैच में अनुभवी लोकेश राहुल और युवा शुभमन गिल के स्थान पर सलामी बल्लेबाज के तौर पर पृथ्वी शॉ को चुना लेकिन मुंबई का यह युवा बल्लेबाज दूसरी ही गेंद पर बिना खाता खोले बोल्ड हो गया। इसने सुनील गावस्कर और एलन बॉर्डर द्वारा शॉ की तकनीक पर उठाए गए सवालों को और गहरा कर दिया है। शॉ दूसरी गेंद खेल रहे थे और उन्होंने मिशेल स्टार्क की इनस्विंगर पर ड्राइव करने की कोशिश की, इस दौरान उनके बल्ले और पैड में गैप रहा और गेंद उनके बल्ले का अंदरूनी किनारा ले कर स्टम्प में जा लगी।


पृथ्वी शॉ का भारतीय टीम के साथ आस्ट्रेलिया का पहला दौरा है । (Twitter )

खराब फॉर्म से गुज़र रहे है शॉ

इससे पहले शॉ दोनों अभ्यास मैच में एक भी अर्धशतक नहीं बना पाए थे। उन्होंने अभ्यास मैचों की चार पारियों में सिर्फ 62 रन बनाए। इसी कारण गावस्कर और बॉर्डर ने शॉ की तकनीक पर सवाल खड़े किए थे और उन्हें शॉट सेलेक्शन, डिफेंस पर काम करने के अलावा आस्ट्रेलियाई पिचों पर संभलकर बल्लेबाजी करने की सलाह दी थी।बीते कुछ महीनों से शॉ लगातार विफल हो रहे हैं। आईपीएल में दिल्ली कैपिटल्स ने उन्हें कुछ मैचों के लिए अंतिम-11 से बाहर भी कर दिया था। दिल्ली के साथ अपनी आखिरी सात पारियों में शॉ तीन बार शून्य पर आउट हुए और सिर्फ एक बार ही दहाई के आंकड़े में पहुंच सके।

यह भी पढ़ें : आमिर छोडेंगे क्रिकेट, कहा पीसीबी के मौजूदा प्रबंधन के रहते खेलना मुश्किल

भारत के पूर्व सलामी बल्लेबाज वसीम जाफर ने आईएएनएस से कहा, “मुझे लगता है कि आस्ट्रेलिया में समस्या यह है कि आप हर गेंद पर ड्राइव नहीं मार सकते क्योंकि गेंद वहां थोड़ा ज्यादा उछाल लेती है। आपको इस बात को लेकर काफी आश्वस्त होना होता है कि आप किस गेंद को खेलना चाहते हैं और किस गेंद को नहीं। आपको कई गेंदों को छोड़ना होता है। कई ऐसी गेंदें होती हैं कि आप भारत में ड्राइव कर सकते हैं, लेकिन उन पर आस्ट्रेलिया में ड्राइव नहीं कर सकते क्योंकि वहां उछाल ज्यादा रहता है।” जाफर को भी 2007-08 में आस्ट्रेलिया दौरे पर परेशानी हुई थी। यह उनका भारतीय टीम के साथ आस्ट्रेलिया का पहला दौरा था।

दिल्ली कैपिटल्स के कोच रिकी पोंटिंग । ( Wikimedia commons )

रिकी पोंटिंग ने बताई शॉ कि कमज़ोरी

उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि उन्हें जल्दी इस बात को समझना होगा कि वह लगातार अपने शॉट्स नहीं खेल सकते और उन्हें अपने वर्टिकल शॉट्स को लेकर सावधान रहना होगा। उन्हें अपने शरीर के पास से शॉट्स खेलने होंगे और तकनीक को मजबूत करना होगा। हालांकि अभी सिर्फ एक पारी हुई है। अगर वह उसमें अच्छा करते तो लोग उनकी तारीफ करते। लेकिन हां उन्हें अपनी तकनीक को मजबूत करने की जरूरत है।” दिल्ली कैपिटल्स के कोच रिकी पोंटिंग ने कॉमेंट्री के दौरान ही शॉ के आउट होने के तरीके की भविष्यवाणी कर दी थी। शॉ ठीक उसी तरह आउट हुए जिस तरह पोंटिंग ने बताया था- बैट और पैड के बीच गैप।

पोंटिंग ने आईपीएल के पहले हाफ के दौरान कहा था कि शॉ अपनी तकनीक पर काम कर रहे हैं। वह ऑफ स्टम्प की तरफ जाकर अपने आप को लेग स्टम्प पर रन करने का मौका दे रहे हैं। इससे फायदा हुआ था क्योंकि शॉ ने दो अर्धशतक बनाए थे लेकिन इसके बाद वह फॉर्म खो बैठे। न्यूजीलैंड दौरे पर भी शॉ का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा था। उन्होंने 16, 14, 54 और 14 रनों की पारियां खेली थीं। (आईएएनएस)

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भारत, अमेरिका के विशेषज्ञों ने जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर चर्चा की ( Pixabay )

भारत(india) और अमेरिका(America) के विशेषज्ञों ने शनिवार को कार्बन कैप्चर, यूटिलाइजेशन एंड स्टोरेज (सीसीयूएस) के माध्यम से जलवायु परिवर्तन (Environment change) से निपटने के लिए विभिन्न तकनीकों पर चर्चा करते हुए कहा कि वे 17 सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) में से पांच - जलवायु कार्रवाई, स्वच्छ ताकत, उद्योग, नवाचार और बुनियादी ढांचा, खपत और उत्पादन जैसे लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए साझेदारी की है। विज्ञान विभाग के सचिव एस.चंद्रशेखर ने कहा, "सख्त जलवायु व्यवस्था के तहत हम उत्सर्जन कटौती प्रौद्योगिकियों के पोर्टफोलियो के सही संतुलन की पहचान और अपनाने का एहसास कर सकते हैं। ग्लासगो में हाल ही में संपन्न सीओपी-26 में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के उल्लेखनीय प्रदर्शन के साथ-साथ महत्वाकांक्षाओं को सामने लाया। दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक होने के बावजूद हम जलवायु लक्ष्यों को पूरा करेंगे।"

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के कार्बन कैप्चर पर पहली कार्यशाला में अपने उद्घाटन भाषण में उन्होंने कहा, "पीएम ने हम सभी को 2070 तक शून्य कार्बन उत्सर्जन राष्ट्र बनने को कहा है।" उन्होंने सीसीयूएस के क्षेत्र में प्रौद्योगिकी के नेतृत्व वाले आरडी एंड डी की दिशा में विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग की हालिया पहलों के बारे में भी जानकारी दी।

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वेल्लोर के इस 10 वर्षीय छात्र ने अपनी लगन से वकीलों के लिए ई-अटॉर्नी नामक एक ऐप बना डाला ( Pixabay)

कोरोना के इस दौर में ऐप टेक्नॉलॉजी (App Technology) की पढ़ाई कई समस्याओं का समाधान कर रही है। ऐसा ही एक समाधान 10 वर्षीय छात्र कनिष्कर आर ने कर दिखाया है। कनिष्कर ने पेशे से वकील अपने पिता की मदद एक ऐप (App) बनाकर की। दस्तावेज संभालने में मददगार यह ऐप वकीलों और अधिवक्ताओं को अपने क्लाईंट एवं काम से संबंधित दस्तावेज संभालने में मदद करता है। 10 वर्षीय कनिष्कर का यह ऐप अब उसके पिता ही नहीं बल्कि देश के कई अन्य वकील भी इस्तेमाल कर रहे हैं और यह एक उद्यम की शक्ल ले रहा है।

कनिष्कर अपने पिता को फाईलें संभालते देखता था, जो दिन पर दिन बढ़ती चली जा रही थीं। जल्द ही वह समझ गया कि उसके पिता की तरह ही अन्य वकील भी थे, जो इसी समस्या से पीड़ित थे। इसलिए जब कनिष्कर को पाठ्यक्रम अपने कोडिंग के प्रोजेक्ट के लिए विषय चुनने का समय आया, तो उसने कुछ ऐसा बनाने का निर्णय लिया, जो उसके पिता की मदद कर सके। वेल्लोर (Vellore) के इस 10 वर्षीय छात्र ने अपनी लगन से वकीलों के लिए ई-अटॉर्नी नामक एक ऐप बना डाला। इस ऐप का मुख्य उद्देश्य वकीलों और अधिवक्ताओं को अपने क्लाईंट के एवं काम से संबंधित दस्तावेज संभालने में मदद करना है। इस ऐप द्वारा यूजर्स साईन इन करके अपने काम को नियोजित कर सकते हैं और क्लाईंट से संबंधित दस्तावेज एवं केस की अन्य जानकारी स्टोर करके रख सकते हैं। इस ऐप के माध्यम से यूजर्स सीधे क्लाईंट्स से संपर्क भी कर सकते हैं। जिन क्लाईंट्स को उनके वकील द्वारा इस ऐप की एक्सेस दी जाती है, वो भी ऐप में स्टोर किए गए अपने केस के दस्तावेज देख सकते हैं।

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डॉ. मुनीश रायजादा ने इस वेब सीरीज़ के माध्यम से आम आदमी पार्टी में हुए भ्रस्टाचार को सामने लाने का प्रयास किया है

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डॉ.मुनीश रायजादा ने फोन पर आईएएनएस से बात करते हुए बताया कि, " मंच इस वेब सीरीज का प्रचार यह कहकर नहीं कर रहा था कि यह एक राजनीतिक वेब सीरीज है, और मैंने सोचा कि मैं इस वेब सीरीज को बड़े पैमाने में दर्शकों तक कैसे ले जा सकता हूँ फिर मैंने यूट्यूब के बारे में सोचा।" यह वेब सीरीज यूट्यूब पर 17 जनवरी को रिलीज़ किया गया।

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