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मनोरंजन

कोरोना से जुड़ी भ्रांतियों को मिटाने के लिए मध्यप्रदेश पुलिस की नई पहल

बीमारी को लेकर पनपी भ्रांतियों को दूर करने के लिए मध्यप्रदेश के रीवा जिले में पुलिस ने जागरूकता की मुहिम तेज की है और इसके लिए एक लघुफिल्म भी बनवाई है- 'कोरोना काल की बहू'।

मध्यप्रदेश के रीवा पुलिस ने कोरोना की भ्रांतियों को दूर करने केलिए एक लघुफिल्म प्रस्तुत की है। (सांकेतिक चित्र, Pixabay)

 कोरोनावायरस महामारी को लेकर समाज में बड़ी भ्रांति है। यही कारण है कि लोग एक-दूसरे की मदद की खातिर सामने आने से कतरा रहे हैं। बीमारी को लेकर पनपी भ्रांतियों को दूर करने के लिए मध्यप्रदेश के रीवा जिले में पुलिस ने जागरूकता की मुहिम तेज की है और इसके लिए एक लघुफिल्म भी बनवाई है- ‘कोरोना काल की बहू’। कोरोना महामारी के संक्रमण को रोकने के लिए मास्क के इस्तेमाल के साथ सोशल डिस्टेंसिंग पर जोर दिया गया है।

साथ ही बीमारी के लक्षण नजर आने पर कोरोना टेस्ट कराने की सलाह दी जा रही है, मगर लोग इस बीमारी से बचाव की बजाय डर के साए में आते जा रहे हैं। इसी डर को मिटाने के लिए तरह-तरह के जतन सरकारी और निजी स्तर पर किए जा रहे हैं। इसी क्रम में रीवा में मनोरंजक, आकर्षक और संदेश देने वाली लघुफिल्म बनाई गई है।


पुलिस अधीक्षक राकेश सिंह बताते हैं कि लोगों में जागरूकता लाने के मकसद से फिल्म निर्देशक आफताब ने 15 मिनट की लघुफिल्म बनाई है। इस फिल्म में बहू अपने पति के जरिए कोरोना से बचने और इसके इलाज का संदेश दे रही है। फिल्म बताती है कि कोरोना से डरने की नहीं, एहतियात बरतने की जरूरत है। यह कोई लाइलाज बीमारी नहीं है, अगर सजग और सतर्क रहें तो इससे बचा जा सकता है।

लघुफिल्म ‘कोरोना की बहु’ (स्क्रीनशॉट, Twitter)

इस फिल्म की खासियत यह है कि इसके सारे कलाकार स्थानीय हैं और निर्देशक आफताब आलम ने मुख्य किरदार निभाया है। वह रहने वाले तो रीवा के हैं, मगर इस फिलहाल मुंबई फिल्म जगत में काम कर रहे हैं। उन्होंने ‘क्राइम पेट्रोल’ और ‘सावधान इंडिया’ सीरियल में काम किया है।

यह भी पढ़ें: कोरोना काल में दंपत्ति ने 49 दिन मेहनत कर बना लिया दो मंजिला आवास

आफताब फिल्म की कहानी के बारे में बताते हैं, “यह उस नवविवाहित जोड़े की कहानी है जिसकी मिलन की पहली रात में ही लड़के को खांसी आती है, तो उसकी पत्नी टेस्ट कराने की सलाह देती है और पति को सोफा पर सोकर रात गुजारना पड़ती है। पति टेस्ट कराता है तो रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आती है, फिर पति को 14 दिन तक होम आइसोलेशन में रहना पड़ता है। इस दौरान वह काढ़ा पीता है, गर्म पानी का इस्तेमाल करता है, योग करता है और स्वस्थ हो जाता है। इसके बाद यह युगल सुखमय जीवन जीवन जीने लगता है।”

रीवा पुलिस ने यह लघुफिल्म प्रस्तुत की है। (स्क्रीनशॉट, Twitter)

इस फिल्म को बनाने की योजना पूर्व में रीवा में पदस्थ रहे पुलिस अधीक्षक आबिद खान ने बनाई थी, मगर उनका तबादला हो गया। नए पुलिस अधीक्षक राकेश सिंह ने इस फिल्म को बनाने का अभियान जारी रखा। आमतौर पर होता यह है कि पूर्व पुलिस अधिकारी के फैसलों को नया पुलिस अधिकारी बदल देता है, मगर कोरोना के प्रति लोगों में जागरूकता लाने के लिए बनाई जा रही फिल्म के मामले में ऐसा नहीं हुआ और जन जागृति के लिए बनाई जा रही है फिल्म पूरी हो गई। इसमें किरदार निभाने वाले किसी भी कलाकार ने पारिश्रमिक नहीं लिया है।

यह पहली ऐसी फिल्म है, जो कोरोना को लेकर जनजागृति लाने के लिए बनाई गई है। यह रिलीज हो चुकी है, इसे जगह-जगह प्रदर्शित कर लोगों को जागृत किया जा रहा है और बताया जा रहा है कि सावधानी बरतने से कोरोना से खुद को दूर रख सकेंगे। बस जरूरत इस बात की है कि लक्षण नजर आएं तो छुपाएं नहीं, बल्कि जांच कराएं।(आईएएनएस)

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बांके बिहारी मंदिर में होली

कहा जाता है कि अगर किसी इंसान को सुकून चाहिए होता है तो उसे वृंदावन या मथुरा की गलियों में जाना चाहिए, क्योंकि इन्ही गलियों में खेलते हुए कृष्ण जी का बचपन बीता हैं। वृंदावन हो या मथुरा यहां हर दूसरा व्यक्ति कृष्ण भक्ति में लीन नज़र आता है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता की वह हिंदुस्तानी है या कहीं और से आया है। हर कोई कृष्ण की महिमा में डूबा हुआ होता है। वैसे तो वृंदावन में कई मंदिर है जहां हर रोज हज़ारों की संख्या में भक्त आते हैं और अपनी हाजिरी लगवाते हैं, लेकिन बांके बिहारी मंदिर की बात अलग है। यहां भी भक्तों का मेला लगा रहता है, पर हर किसी को कुछ बातें मालूम नहीं है। ऐसे ही कुछ तथ्यों के बारे में इस आर्टिकल में बताया गया है।

1) बांके बिहारी मंदिर की स्थापना स्वामी श्री हरिदास जी ने की थी। वह श्री कृष्ण के भक्त थे और महान गायक तानसेन के गुरु थे। वह अपने गीत से श्री कृष्ण को प्रसन्न करने की कोशिश किया करते थे। ऐसा कहा जाता है कि श्री हरिदास जी की भक्ति से प्रसन्न हो श्री कृष्ण ने दर्शन दिए थे।

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(instagram , virat kohali)

भारतीय क्रिकेट टीमके कप्तान विराट कोहली और अनुष्का

भारतीय क्रिकेट टीमके कप्तान विराट कोहली और उनके फाउंडेशन ने यहां मड, मलाड में आवारा पशुओं के लिए एक ट्रॉमा और रिहेब सेंटर का उद्घाटन किया है। इसके पहले इस साल की शुरूआत में, भारतीय कप्तान कोहली ने कहा था कि वह मुंबई में दो पशु देखभाल सुविधाएं स्थापित कर रहे हैं।
कोहली ने अपनी पत्नी अनुष्का शर्मा को शहर में आवारा जानवरों के सामने आने वाली कठिनाइयों को देखने का श्रेय दिया।

अभिनेत्री अनुष्का ने कई मौकों पर जानवरों के कल्याण और उनके अधिकारों के प्रति अपना समर्थन दिया है। अनुष्का के जानवरों के प्रति दीवानगी से प्रेरित होकर कोहली अपने फाउंडेशन के जरिए आवारा जानवरों की मदद करने के मौके तलाश रहे हैं।

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भीड़ में चलते लोग।

मौजूदा समय में विश्व की जनसंख्या 7 अरब से भी ज्यादा है। इस जनसंख्या को यहां तक पहुंचने में कई सदियां लग गई है। समस्त विश्व को 1 अरब से 2 अरब तक की आबादी होने में 100 सालों का समय लगा था। लेकिन 2 अरब से 3 अरब होने में मात्र 30 साल लगे, वहीं 3 से 4 अरब होने में 15 साल लगे थे। उसके बाद से यह अंतर और कम हो गया। औद्योगिक क्रांति के बाद अठारहवीं शताब्दी में विश्व जनसंख्या में विस्फोट हुआ था। तकनिकी प्रगति की वजह से मृत्यु दर में गिरावट आई जो कि जनसंख्या विस्फोट का एक बहुत बड़ा कारण बना। भारत में भी जनसंख्या विस्फोट देखा गया था।

1951 में भारत की जनसंख्या मात्र 36.1 करोड़ थी जो 2011 की जनगणना में 121.02 करोड़ हो गई। और अब यह लगभग 135 करोड़ के ऊपर है। अगर किसी क्षेत्र की जनसंख्या बढ़ती है तो उसका मतलब है कि वहाँ का मृत्यु दर कम है और जन्म दर ज्यादा। यह दर्शाता है कि उस जगह पर चिकित्सकीय सुविधाएं अच्छी है। लेकिन बढ़ती जनसंख्या देश के लिए मुसीबत का सबब भी बन सकती है, क्योंकि जनसंख्या में वृद्धि हुई है किन्तु साधनों में नहीं। भारत के साथ भी यही समस्या है। लगातार जनसंख्या बढ़ने से कई जगहों पर साधनों की कमी महसूस होने लगी है।

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