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थोड़ा हट के

बिहार के गांव में प्रवासी मजदूर के बेटे ने आईआईटी रुड़की में जीता स्वर्ण पदक

डिजिटल मोड के माध्यम से आयोजित संस्थान के वार्षिक दीक्षांत समारोह के दौरान राहुल को राष्ट्रपति के डॉ. शंकर दयाल शर्मा गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया। राहुल ने धातुकर्म और सामग्री इंजीनियरिंग में बी. टेक पूरी की है।

आईआईटी रुड़की, उत्तराखंड। (Wikimedia commons)

बिहार में नालंदा जिले के एक गांव के प्रवासी श्रमिक के 22 वर्षीय बेटे राहुल कुमार ने रुड़की स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) से स्नातक की डिग्री प्राप्त की है, जो देश के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों में से एक है। राहुल कुमार के 52 वर्षीय पिता सुनील सिंह गुजरात के सूरत में दैनिक मजदूर के तौर पर काम करते हैं। उनके पास खेती करने के लिए इतनी पर्याप्त जमीन नहीं थी कि उससे उनके परिवार का गुजारा हो पाता, इसलिए उन्हें गुजरात जाना पड़ा। डिजिटल मोड के माध्यम से आयोजित संस्थान के वार्षिक दीक्षांत समारोह के दौरान राहुल को राष्ट्रपति के डॉ. शंकर दयाल शर्मा गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया। राहुल ने धातुकर्म और सामग्री इंजीनियरिंग में बी. टेक पूरी की है।

अकादमिक रूप से शानदार होने के अलावा, राहुल का हमेशा समाज के कल्याण के लिए झुकाव रहा है और उनके उत्साह ने ही उन्हें राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस), आईआईटी रुड़की का महासचिव बनाया। कुमार ने अब संयुक्त राज्य अमेरिका के यूटा विश्वविद्यालय में पीएचडी करने के लिए छात्रवृत्ति हासिल की है।


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जाने क्यों खास है दीक्षांत समारोह

आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रोफेसर अजीत के. चतुर्वेदी ने आईएएनएस से कहा, “अपने महान नेतृत्व और प्रबंधकीय कौशल के साथ उन्होंने लगभग 1,000 छात्रों की एक टीम का नेतृत्व किया और कई कॉलेज प्रशासन, सरकारी अधिकारियों और गैर सरकारी संगठनों के साथ संबंध स्थापित किया।”

उन्होंने कहा, “इस साल का दीक्षांत समारोह कई कारणों से खास है। सबसे पहला और महत्वपूर्ण कारण यह है कि हमारे पूर्व छात्र अशोक सुता इसके मुख्य अतिथि हैं। उनकी उपस्थिति हमारे लिए बहुत गर्व की बात है। दूसरा विशेष कारण यह है कि इस वर्ष के दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता हमारे बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष बी. वी. आर मोहन रेड्डी कर रहे हैं। वे भारतीय उद्योग के एक ऐसे व्यक्ति हैं, जिन्होंने देश में उच्च शिक्षा क्षेत्र का मार्गदर्शन करने के लिए अपना कुछ समय देने पर सहमति व्यक्त की है।” (आईएएनएस)

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अब अयोध्या के संतो में जागने लगी चुनाव राजनीति में आने की जिज्ञासा। (Wikimedia Commons)

अयोध्या(Ayodhya) के कुछ संत तीर्थ नगरी से यूपी चुनाव लड़ना चाहते हैं। अयोध्या (सदर)(Ayodhya Sadar) उनका पसंदीदा विधानसभा क्षेत्र है जहां से वे यूपी चुनाव में उतरना चाहते हैं। राम जन्मभूमि, जहां एक भव्य राम मंदिर(Ram Temple) निर्माणाधीन है, इसी निर्वाचन क्षेत्र में आता है। लेकिन अयोध्या में संतों का एक और वर्ग राजनीति में अपनी बिरादरी की सक्रिय भागीदारी के खिलाफ है।

हनुमान गढ़ी मंदिर के पुजारियों में से एक राजू दास और तपस्वी जी की छावनी के परमहंस दास उन प्रमुख संतों में शामिल हैं जो अयोध्या (सदर) विधानसभा सीट से चुनाव लड़ना चाहते हैं। वीआईपी विधानसभा क्षेत्र माने जाने वाले अयोध्या सदर से बीजेपी के टिकट के दावेदारों में राजू दास भी शामिल हैं. इसी सीट से बीजेपी के मौजूदा विधायक वेद प्रकाश गुप्ता भी इसी सीट के दावेदार हैं.

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बेंगलुरु से हिंदू बनकर रह रही बांग्लादेशी महिला गिरफ्तार। (IANS)

कर्नाटक पुलिस(Karnataka Police) ने एक 27 वर्षीय बांग्लादेशी अप्रवासी महिला को गिरफ्तार किया है, जो बेंगलुरु(Bengaluru) के बाहरी इलाके में फॉरेनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफ इंडिया (FRFO) के इनपुट के आधार पर भारत में 15 साल तक हिंदू के रूप में रही, पुलिस ने शुक्रवार को यह भी कहा।

गिरफ्तार बांग्लादेशी महिला की पहचान रोनी बेगम के रूप में हुई है। उसने अपना नाम पायल घोष के रूप में बदल लिया और मंगलुरु के एक डिलीवरी एक्जीक्यूटिव नितिन कुमार से शादी कर ली। पुलिस ने फरार नितिन की तलाश शुरू कर दी है।

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बीते दिनों 'ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल' ने 'करप्शन परेसेप्शन इंडेक्स'(Corruption Perception Index) जारी किया, जिसमें 180 देशों को शामिल किया गया था। आपको बता दें की इस रिपोर्ट के मुताबिक इन 180 देशों में भारत(India) देश का स्थान 85वें स्थान पर है। भारत(India) की स्थिति में पिछले वर्ष के मुकाबले न तो सुधार आया है और न ही स्थिति बिगड़ी है।

इसके साथ भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान(Pakistan) की हालत बद से बद्तर हो गई है। पाकिस्तान सीपीआई(Corruption Perception Index) की लिस्ट में 124 से गिरकर अब 140वें स्थान पर पहुंच गया है। पाकिस्तान के जैसी ही स्थिति म्यांमार की भी बनी हुई है। आपको बता दें कि पाकिस्तान से भी बुरी हालत बांग्लादेश की है। सबसे खराब श्रेणी की बात करें तो सबसे खराब हाल 180वें स्थान पर दक्षिणी सूडान का है, उससे पहले सीरिया, सोमालिया, वेनेजुएला और यमन का है।

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