भारत को टेनिस में अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई|
विजय अमृतराज ने भारत को टेनिस में अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई और पेस-भूपति से पहले देश का झंडा बुलंद किया।IANS

विजय अमृतराज : पेस और भूपति से पहले वैश्विक स्तर पर टेनिस में देश का झंडा बुलंद करने वाला नायक

भारत में टेनिस की शुरुआती पहचान में विजय अमृतराज का अहम योगदान रहा, जबकि लिएंडर पेस, महेश भूपति और सानिया मिर्जा ने इसे और लोकप्रिय बनाया।
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विजय अमृतराज (Vijay Amritraj) का जन्म 14 दिसंबर 1953 को चेन्नई में हुआ था। बचपन से टेनिस में रुचि रखने वाले अमृतराज ने 17 साल की उम्र में 1970 में अपना पहला ग्रैंड प्रिक्स इवेंट (Grand Prix Event) खेला। 1973 में एकल में उन्हें अपनी पहली सफलता हासिल हुई। वह लगातार दो ग्रैंड स्लैम इवेंट्स के क्वार्टर फाइनल में पहुंचे। विंबलडन में, वह अंतिम चैंपियन जान कोडेश से पांच सेटों में हार गए। वहीं यूएस ओपन में उन्हें केन रोजवेल से हार का सामना करना पड़ा। 1979 में विंबलडन के दूसरे राउंड में वह गत चैंपियन बोर्ग से हार गए। 1980 में वे वह एकल में दुनिया के 16वें नंबर के खिलाड़ी बने। यह उनके करियर की सबसे ऊंची रैंकिंग रही। अमृतराज भारत डेविस कप टीम का हिस्सा थे जो 1974 और 1987 में फाइनल में पहुंची थी। अमृतराज का करियर सिंगल्स जीत-हार का रिकॉर्ड 405-312 था, जिसमें उन्होंने 15 सिंगल्स और 13 डबल्स खिताब जीते।

विजय ने 1993 में टेनिस (Tennis) करियर को अलविदा कह दिया था। टेनिस में उनके योगदान को देखते हुए उन्हें 1983 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। वह अंतरराष्ट्रीय टेनिस हॉल ऑफ फेम में शामिल होने वाले पहले एशियाई खिलाड़ी हैं। 2022 में उन्हें लंदन में टेनिस में उनके योगदान के लिए इंटरनेशनल टेनिस हॉल ऑफ फेम और इंटरनेशनल टेनिस फेडरेशन द्वारा सम्मानित किया गया।

संन्यास के बाद विजय अमृतराज कैलिफॉर्निया, अमेरिका (America) में रहते हैं।

लिएंडर पेस और महेश भूपति ने एक साथ या फिर अलग-अलग जोड़ीदारों के साथ टेनिस के क्षेत्र में बड़ी सफलता पाई, लेकिन विजय अमृतराज एक ऐसे खिलाड़ी हैं, जिन्होंने एकल श्रेणी में उस दौर में दबदबा बनाया, जब टेनिस देश में अपने विकास की शुरुआती अवस्था में था।

[AK]

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