

Summary
इंदौर के बाद दिल्ली में भी दूषित पानी से स्वास्थ्य संकट गहराया
केंद्र-दिल्ली-MCD में BJP सरकार, फिर भी पानी व्यवस्था फेल
टैंकर माफिया, यमुना प्रदूषण और MCD भ्रष्टाचार ने हालात बिगाड़े
सोशल मीडिया पर एक मीम काफी वायरल होता है, 'आग लगे बस्ती में, हम रहें अपनी मस्ती में।', ये मीम केंद्र की सत्ताधारी पार्टी बीजेपी पर फिट बैठती है। हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि देश में इस समय दूषित पानी का मुद्दा काफी गरम है, लेकिन लगता है सरकार अपनी आँखें मूंद कर बैठी है। ताजा मामला इंदौर का है, जहाँ दूषित पानी पीने के कारण 3200 से अधिक लोग बीमार पड़ चुके हैं। इसमें बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं बड़ी संख्या में शामिल हैं। वहीं, सरकारी तौर पर मरने वालों की संख्या 6 से 7 है लेकिन कई रिपोर्ट्स में 15 से 17 का भी दावा है। आलम तो ये है कि वहां महामारी जैसे हालात पैदा हो गए हैं।
अब इंदौर के बाद ऐसे ही मामले दिल्ली में भी देखने को मिल रहे हैं। दिल्ली में जगह-जगह पर दूषित पानी के मामले सामने आए हैं। सरकार ने इसपर अब तक कौन से कड़े कदम उठाए हैं, ये एक प्रश्नवाचक चिन्ह है? हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि केंद्र में भी बीजेपी है, दिल्ली में भी बीजेपी की ही सरकार है, और MCD भी भाजपा के पास ही है। ऐसे में ये प्रश्न उठना लाजमी है। तो ऐसे में आइये समझते हैं कि पूरा मामला क्या, है और सरकार का इसको लेकर क्या रुख है?
इंदौर के बाद अब दिल्ली में भी दूषित पानी का मामला काफी देखने को मिल रहा है। ताजा मामला दिल्ली के द्वारका से आया है जहाँ इस क्षेत्र की कई सोसाइटीज़ (Socities) में बारिश का पानी जमा करने वाले गड्ढों (रेनवॉटर हार्वेस्टिंग पिट्स) में फीकल कॉलिफ़ॉर्म बैक्टीरिया मिला है, जो यह इशारा करता है, कि इससे गंभीर स्वास्थ्य समस्या हो सकती है। फीकल कॉलिफ़ॉर्म ऐसे बैक्टीरिया होते हैं, जो आमतौर पर इंसान या जानवरों के मल से आते हैं।
अगर ये बैक्टीरिया पानी में चला जाए, तो इसका साफ़ मतलब है कि पानी में सीवर या गंदा पानी घुस रहा है। अब अगर ये पानी कोई पीता है, तो गंभीर स्वास्थ्य समस्या हो सकती है। इससे पेट से जुड़ी बीमारियाँ, दस्त और संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है। बता दें कि इससे पहले सितंबर 2025 में दिल्ली जल बोर्ड (DJB) की जाँच में द्वारका के 144 रेनवॉटर हार्वेस्टिंग पिट्स में से 124 पिट्स में फीकल कॉलिफ़ॉर्म बैक्टीरिया पाए गए थे। द्वारका से पहले भी इस तरह की समस्या सामने आ चुकी है।
वहीं, दिल्ली जल बोर्ड (DJB) ने प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) को सख्त निर्देश दिए हैं कि जो सोसाइटीज़ (Socities) रेनवॉटर हार्वेस्टिंग पिट्स के साफ़ सफाई का ध्यान नहीं रख रही हैं, उन पर पर्यावरणीय जुर्माना लगाया जाए। साथ ही उनके पानी की सप्लाई काटने की कार्रवाई पर भी विचार किया जा रहा है।
वहीं, पर्यावरण/जल विशेषज्ञ पंकज कुमार (Pankaj Kumar) ने नवंबर 2025 में एक रिपोर्ट में कहा था, कि दिल्ली के पानी में यूरेनियम और कई दूसरे हानिकारक तत्व ऐसे पाए गए हैं, जिनका स्तर खतरनाक माना गया है। इसका मतलब है कि यह पानी औद्योगिक इस्तेमाल से पहले ही पीने या घर में इस्तेमाल के लिए असुरक्षित हो गया है।
दूषित पानी के आलावा दिल्ली में TDS की मात्रा भी चिंता का विषय बनी हुई है। दिल्ली के कुछ क्षेत्र जैसे भलस्वा डेरी, किराड़ी, बवाना, नरेला, कालकाजी में पानी का TDS 200 से लेकर 900 के बीच मिला है जबकि पूर्वी दिल्ली के मौजपुर गांव में पानी का TDS 965 तक देखा गया। TDS के बारे में बात करें तो ये वह मात्रा होती है, जिसमें पानी में घुला हुआ खनिज, नमक और रसायन होते हैं। अगर कोई ज्यादा मात्रा के TDS वाला पानी पीता है, तो उसे पेट, किडनी, ब्लड प्रेशर, त्वचा और बालों से जुड़ी बीमारियाँ हो सकती हैं। आपको यह पता होना चाहिए कि पीने के पानी में TDS 500 mg/L तक होना सुरक्षित माना जाता है।
बता दें कि अब आलम ऐसा हो गया है कि लोग नल के पानी की बजाय RO या बोतलबंद पानी पर निर्भर हो रहे हैं। ऐसे में यह साफ़ दिख रहा है कि इसमें दिल्ली जल बोर्ड की बड़ी लापरवाही है क्योंकि पाइपलाइन टूटने और सीवर का गंदा पानी, साफ़ पीने के पानी में मिल जाने से ये समस्या सामने आ रही है। कई जगहों पर नल से गंदा, बदबूदार पानी भी आ रहा है और लोगों ने इसकी शिकायत करने शुरू भी कर दी है।
खबर ये अभी आई है कि दिल्ली के उत्तर-पश्चिमी इलाके में रहने वाले लोगों को करीब एक दिन पानी की समस्या से झूझना पड़ सकता है। बताया जा रहा है कि सप्लाई लाइन में तकनीकी खराबी दिखी है, जिसके बाद कई रिहायशी इलाकों में जल आपूर्ति अस्थायी रूप से बंद कर दी है। वहां अभी मरम्मत का काम चल रहा है। रिठाला और रोहिणी जैसे इलाकों में 8 जनवरी से पानी की सेवा बहाल हो सकती है।
इस घटना के सामने आने के बाद दिल्ली जल मंत्री प्रवेश वर्मा का बयान भी समाने आया। उन्होंने दिल्ली जल बोर्ड (DJB) को निर्देश दिया कि पानी की गुणवत्ता की जांच और मॉनिटरिंग बढ़ाई जाए, ताकि दिल्ली में पानी सुरक्षित रहे लेकिन सवाल उठता है, कि आज केंद्र में भी बीजेपी की सरकार है और दिल्ली में भी बीजेपी की सरकार है।
परन्तु जब दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार थी, तब बीजेपी नेता संबित पात्रा ने केजरीवाल सरकार पर निशाना साधते हुए कहा था कि उनकी टीम पानी की व्यवस्था ठीक से नहीं कर रही है, और लोग बोतलबंद पानी खरीदने को मजबूर हैं, साथ ही “माफिया” आदि शब्दों का इस्तेमाल किया था। ऐसे में आज जब बीजेपी खुद सत्ता में है, तो वो सवालों से घिरी हुई है।
वर्तमान समय में दिल्ली, केंद्र और MCD हर जगह बीजेपी की ही धाक है, लेकिन ट्रिपल इंजन की ये सरकार पानी की समस्या को ठीक करने में नाकाम दिख रही है। दिल्ली में जो पानी की जो समस्या है, उसके 3 कारण निकलकर सामने आते हैं, और शायद ट्रिपल इंजन की सरकार इस मामले में मुस्तैदी नहीं दिखा रही है।
टैंकर माफिया: साल 2024 में “टैंकर माफिया” द्वारा पानी की चोरी का मामला सामने आया। केंद्र में बीजेपी थी और MCD-दिल्ली में आम आदमी की सरकार थी। इस मामले को लेकर पक्ष-विपक्ष में आरोप प्रत्यरोप चला लेकिन इसे रोकने पर काम नहीं हुआ। कई रिपोर्ट्स में यह बात सामने भी आई थी कि 500 रुपये की चीज के लिए लोगों को 1000 से 2000 रुपए तक देने पड़े थे।
यमुना: यमुना नदी दिल्ली में 1980 के दशक से गंभीर रूप से खराब होना शुरू हुई। 1990 के बाद आई इसकी हालत ख़राब होनी शुरू हुई, जब दिल्ली की आबादी तेज़ी से बढ़ी, लेकिन सीवर और ट्रीटमेंट सिस्टम उतने नहीं बढ़े और 2000 के बाद यमुना दिल्ली में लगभग नाले जैसी बनती चली गई। आज दिल्ली की यमुना करीब 80% प्रदूषित है। कांग्रेस, बीजेपी, आम आदमी पार्टी इसके लिए एक दूसरे पर सिर्फ आरोप लगाते रहे हैं लेकिन इसे साफ़ करने की कोशिश किसी ने नहीं की। खासकर तब जब पिछले 10 साल से बीजेपी ही केंद्र में है, और अब तो दिल्ली के साथ MCD में भी नरेंद्र मोदी की ही सरकार है। दिल्ली सरकार ने यमुना की सफाई के लिए ₹250 करोड़ बजट रखा है, और एक साल सत्ता संभालते होने जा रहे हैं, लेकिन हालात ज्यों के त्यों हैं। आज भी झाग वाली समस्या सुनने को मिलती ही है।
MCD में भ्रष्टाचार के मामले: साल 2024 और 2025 के दौरान दिल्ली MCD से जुड़े कई भ्रष्टाचार के मामले सामने आए। CBI ने एक MCD जूनियर इंजीनियर को ₹10 लाख की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया, वहीं कुछ कर्मचारियों पर FIR भी दर्ज हुई। आरोप था, कि पैसे लेकर सफ़ाई, नालों और टेंडर से जुड़े कामों में घोटाले हुए, जिससे नगर सेवाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठे। इसमें भी बीजेपी और आम आदमी पार्टी आमने सामने आ गए और एक दूसरे पर ही इल्जाम लगाया। AAP ने आरोप लगाया कि MCD में भ्रष्टाचार BJP के नियंत्रण के दौरान बढ़ा जबकि बीजेपी ने खराब प्लानिंग और निगरानी की कमी का आरोप लगाया।
अब ऐसे में सवाल यह उठता है, कि क्या दिल्ली की जनता आरोप प्रत्यारोप के बीच ही फंसती रहेगी। पहले कांग्रेस, फिर आम आदमी पार्टी और अब बीजेपी। सरकारें आईं और गईं लेकिन दिल्ली में पानी की समस्या में कोई सुधार देखने को नहीं मिला। अब तो ट्रिपल इंजन की सरकार भी आ चुकी है लेकिन सवाल यही उठेंगे, भारत की राजधानी 'दिल्ली' को साफ़ पानी कब नसीब होगा?