

Summary
महिलाओं पर बढ़ते जघन्य अपराधों ने बंगाल को झकझोर दिया।
कई मामलों में सरकार और प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठे।
महिला मुख्यमंत्री के होते हुए भी महिला सुरक्षा चिंता का विषय बनी।
साल 2016 में एक फिल्म आई थी, नाम था उसका पिंक (Pink), ये फिल्म समाज में महिलाओं के साथ होने वाले उत्पीड़न और जुल्म पर आधारित थी। इसमें एक कोर्ट रूम का सीन (Scene) है जहाँ अमिताभ बच्चन कहते हैं कि "ना" सिर्फ एक शब्द नहीं, अपने आप में एक पूरा वाक्य है, इसमें कोई तर्क, स्पष्टीकरण या व्याख्या की जरूरत नहीं होती, ना का मतलब ना ही होता है (No means No)। ये फिल्म समाज में महिलाओं के साथ होने वाले गलत कृत्य की तस्वीर को दिखाता है।
भारत में होने वाले महिलाओं के साथ होने वाले ज़ुल्म की घटना किसी से छिपी नहीं है। आए दिन इस प्रकार की घटनाएं सामने आती ही रहती हैं लेकिन आप सोचकर देखिये कि किसी राज्य की मुखिया एक महिला हो और उसके राज्य में ही महिलाओं पर आए दिन अत्याचार होते हों, ये एक चिंता का विषय है। हम बात पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की कर रहे हैं। वो ममता बनर्जी जो खुद एक महिला हैं, उनके पास स्वास्थ्य और गृह विभाग भी हैं और उनके राज्य में भी महिलाएं सुरक्षित नहीं है। ऐसे में आज हम उन 5 मामलों के बारे में बात करेंगे, जिसने पूरे बंगाल को झकझोर कर रख दिया और यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि क्या एक महिला मुख्यमंत्री के राज में क्या महिलाएं सुरक्षित हैं?
ये मामला साल 2024 का है। 9 अगस्त को एक जानकारी सामने आती है कि आरजी कर मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (R. G. Kar Medical College and Hospital) में 31 साल की ट्रेनी डॉक्टर के साथ दुष्कर्म हुआ और बाद में उसकी हत्या कर दी गई। मामला जब सामने आया, तो इसने पूरे कोलकाता को हिलाकर रख दिया। पुलिस ने तुरंत जाँच शुरू की और इस घटना में शामिल एकमात्र व्यक्ति सिविक वॉलिंटियर संजय रॉय को 10 अगस्त को धर दबोचा। इसके बाद जब काफी प्रदर्शन हुए, तो 12 अगस्त को कॉलेज के प्रिंसिपल ने इस्तीफा दिया जबकि 13 से 15 के बीच भारी तोड़फोड़ हुई, तो सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान लिया और सरकार से कई तरह के सवाल किये।
फिर 7 अक्टूबर 2024 को CBI द्वारा चार्जसीट दायर की गई और 11 नवंबर को मुकदमा शुरू हुआ। 16 जनवरी 2025 को मामले की सुनवाई पूरी हुई और 18 जनवरी को सियालदह कोर्ट ने संजय रॉय को दोषी करार देते हुए उम्र कैद की सज़ा सुनाई। हालांकि, CBI ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी ताकि संजय को फांसी मिले लेकिन कोर्ट ने उनकी दलील को ख़ारिज कर दिया। संजय खुद को निर्दोष बताता रहा और अपनी सजा के खिलाफ उसने चुनौती थी लेकिन मामला अब तक कोर्ट में चल रहा है।
यह मामला 5 जनवरी 2024 का है, जब महिलाओं के शोषण की भयावह सच्चाई ने पूरे देश को हिला दिया। हुआ ये कि ED की टीम पश्चिम बंगाल के करोड़ों रुपये के 'राशन वितरण घोटाले' की जांच कर रही थी लेकिन अचानक उनकी टीम पर हमला हो जाता है। ED के पास सबूत थे कि राशन घोटाले का पैसा शाहजहां शेख के जरिए ठिकाने लगाया गया था। इसी वजह से रेड (Raid) चल रही थी लेकिन टीम जैसे ही TMC नेता शाहजहां शेख के घर पहुंची, तो अचानक सैकड़ों लोगों की भीड़ जमा हो गई और वहां ED की टीम पर हमला हुआ। हमले के बाद अधिकारियों को जान बचाकर भागना पड़ा।
इस घटना के बाद फरवरी 2024 में स्थानीय महिलाओं ने सड़कों पर उतरकर हिंसक प्रदर्शन शुरू किया। उन्होंने TMC नेताओं के खिलाफ यौन उत्पीड़न (Sexual Assault) और उनकी जमीनों पर जबरन कब्जा करने का आरोप लगाया। महिलाओं का कहना था कि उन्हें रात में पार्टी ऑफिस बुलाया जाता था और विरोध करने पर उनके परिवारों को जान से मारने की धमकी दी जाती थी। इसमें शाहजहां शेख और उसके साथी शिबू हाजरा और उत्तम सरदार का नाम सामने आया था। भारी दबाव के बाद शाहजहां शेख को गिरफ्तार किया गया। मामला CBI के पास है और TMC नेता जेल में है।
कोर्ट ने ममता सरकार को फटकार भी लगाते हुए कहा कि वे नागरिकों, खासकर महिलाओं की रक्षा करने में असफल रहे हैं। कोर्ट के बयान के बाद ही शाहजहां शेख को TMC से सस्पेंड किया गया और तब जाकर उसकी गिरफ्तारी भी हुई।
यह दर्दनाक दास्ताँ 5 फरवरी 2012 की है, जो कोलकाता के सबसे पॉश इलाके 'पार्क स्ट्रीट' में हुआ था। उस समय ममता बनर्जी को सत्ता संभालते हुए एक साल ही हुए थे। हुआ ये था कि 40 साल की एक एंग्लो-इंडियन महिला जिसका नाम कथित रूप से सुज़ेट जॉर्डन बताया गया था, वो एक नाईट क्लब से बाहर आई ही थी कि आरोपियों ने महिला को लिफ्ट देने के बहाने अपनी कार में बिठाया। चलती कार में उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म (Gangrape) किया और सड़क पर फेंककर फरार हो गए।
इस मामले में कादर खान मुख्य आरोपी था और उसके साथ रुम्मान खान, नासिर खान, सुमित बजाज और मोहम्मद अली शामिल थे। कोर्ट ने 2015 में रुम्मान, नासिर और सुमित को दोषी पाते हुए 10-10 साल की सजा सुनाई जबकि मुख्य आरोपी कादर खान 2016 में ग्रेटर नोएडा से गिरफ्तार हुआ था। जब इस मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ा, तो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सार्वजनिक रूप से इसे साजिश बता दिया। तब उनकी जमकर किरकिरी हुई थी।
वहीं, 2015 में पीड़िता की दिमागी बुखार (Meningitis) के चलते मृत्यु हो गई। वो अंत तक न्याय की लड़ाई लड़ती रही। इस मामले के दोषी अभी जेल में सजा काट रहे हैं।
आरजी कर मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (R. G. Kar Medical College and Hospital) की घटना के बाद कोलकाता के लॉ कॉलेज से शर्मसार करने वाली घटना सामने आई थी। घटना 25 जून 2025 के शाम की है जब एक 24 वर्षीय छात्रा शाम को परीक्षा फॉर्म जमा करने कॉलेज गई थी। बताया जाता है कि वहां के गार्ड ने कॉलेज परिसर के भीतर उसके साथ करीब तीन घंटे तक सामूहिक दुष्कर्म (Gangrape) किया। इसमें तीन लोग शामिल थे। मुख्य दोषी मनोजित मिश्रा था जबकि उसके साथ दो वर्तमान छात्र प्रमित मुखोपाध्याय और जैब अहमद भी थे। इसमें यह भी बात सामने आई कि तीनों ने ना सिर्फ दरिंदगी को अंजाम दिया बल्कि इसका वीडियो भी बनाया, ताकि पीड़िता को ब्लैकमेल कर सकें।
इस घिनौने कृत्य में पुलिस ने सिक्योरिटी गार्ड पिनाकी बनर्जी को भी गिरफ्तार किया था। इस व्यक्ति पर आरोप था कि उसने अपराधियों के कहने पर कमरा खाली कर दिया और चीखें सुनने के बावजूद छात्रा की मदद नहीं की। जाँच में यह बात पता चली कि मनोजित मिश्रा सत्ताधारी दल की छात्र इकाई (TMCP) का करीबी है। इसी ने मामले को राजनीतिक मोड़ दे दिया। वर्तमान समय में चारों आरोपी जेल में हैं। फिलहाल इन्हें सजा नहीं हुई है। मामला अदालत में चल रहा है।
बता दें कि इस मामले पर ममता बनर्जी ने विवादित बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि उस लड़की को रात में कॉलेज जाने की जरूरत क्या थी? इस बयान के बाद उनकी काफी आलोचना हुई थी। उन्होंने यहाँ तक कह दिया था कि ये एक छोटी सी घटना है।
यह मामला 21 अगस्त 2023 का है जिसे सिलीगुड़ी माटीगाड़ा छात्रा हत्याकांड (Matigara Siliguri Student Murder 2023) के नाम से भी जाना जाता है। मामला यह था कि एक छात्रा जो 11 वीं कक्षा में पढ़ती थी, वो स्कुल से घर वापस आ रही थी। तभी एक लड़का जिसका नाम मोहम्मद अब्बास बताया जाता है, वो छात्रा को सुनसान इलाके में रोकता है और उसके साथ छेड़खानी करता है।
फिर वो छात्रा के साथ जबरन दुष्कर्म (Attempted Rape/Sexual Assault) की कोशिश करता है लेकिन जब वो अपने मकसद में कामयाब नहीं हो पाता है, तो आरोपी ने पत्थर से मारकर उसकी हत्या कर दी। बाद में छात्रा का शव एक सुनसान खंडहर माकन में मिला।
जैसे ही बात सामने आई, सिलीगुड़ी के आसपास इलाकों में तनाव फ़ैल गया। इसके तुरंत बाद पुलिस ने दोषी मोहम्मद अब्बास को गिरफ्तार किया। मामला कोर्ट में पहुंचा, तो अक्टूबर 2024 में अदालत ने दोषी को फांसी की सजा सुनाई। आरोपी ने इस मामले को उच्च न्यायालय (High Court) में चुनौती दी लेकिन इस तरह के मामले पश्चिम बंगाल की वर्तमान सरकार पर सवाल खड़े करते हैं।