Never miss a story

Get subscribed to our newsletter


×
थोड़ा हट के

भारत में क्रॉस ब्रीडिंग से विकसित हुए थे अजीब आकार के जानवर

गुजरात में खानों की खोज करने वाले जॉन्स हॉपकिन्स विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों ने, 'कैम्बेथेरियम' नामक अजीब प्राणी के अवशेषों की खोज की है।

कैम्बेथेरियम नामक जानवर, सुअर और कुत्ते के बीच हुए क्रॉस ब्रीडिंग से विकसित हुए थे। (Unsplash)

घोड़े और गैंडे जैसे खुरों वाले जानवर एक अजीब किस्म के भेड़ के आकार वाले जानवरों की सुअर और कुत्ते के बीच, क्रॉस ब्रीडिंग से विकसित हुए हैं। शोधकर्ताओं का दावा है कि ऐसे जानवर 5.5 करोड़ साल पहले भारत में रहते थे। गुजरात में खानों की खोज करने वाले जॉन्स हॉपकिन्स विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों ने कैम्बेथेरियम नामक अजीब प्राणी के अवशेषों की खोज की है। कैम्बेथेरियम, पेरिसोडैक्टिल्स (स्तनधारियों का समूह जिसमें घोड़े, गैंडे, और टेपीर शामिल हैं) का एक विलुप्त चचेरा भाई है जो लगभग 5.5 करोड़ साल पहले भारतीय उपमहाद्वीप में रहते थे।

जॉन्स हॉपकिन्स विश्वविद्यालय में एमेरिटस प्रोफेसर और इस अध्ययन के प्रमुख लेखक केन रोज ने कहा कि 2001 में की गई राजस्थान की पहली यात्रा में बहुत कम सफलता मिली थी। उन्होंने कहा, “हमें उस यात्रा में केवल मछलियों की कुछ हड्डियां मिलीं लेकिन बाद के सालों में हमारे भारतीय सहयोगी राजेंद्र राणा ने दक्षिण में लिग्नाइट खानों की खोज जारी रखी और फिर गुजरात में वस्तान खान पहुंचे। यह नई खदान हमारे लिए बहुत अधिक आशाजनक साबित हुई।”


यह भी पढ़ें – जलवायु परिवर्तन बन सकता है कैंसर का मुख्य कारण

अपने पेपर में उन्होंने आगे कहा, “2004 में हमारी टीम वापस आयी और बेल्जियम के हमारे सहयोगी थिएरी स्मिथ को पहला स्तनपायी जीवाश्म मिला, जिसमें कैम्बेथेरियम भी शामिल था।” हमारी टीम फिर से गुजरात की खदानों में पहुंची और कैम्बेथेरियम की कई जीवाश्म हड्डियों को इकट्ठा किया।

शोधकर्ताओं ने कहा कि संभवत: यह जानवर उस समय विकसित हुआ, जब भारत एक द्वीप था। रोज ने कहा, “इससे पहले 1990 में क्राउज एंड मास ने भी कहा था कि घोड़ों की उत्पत्ति भारत में हुई थी।”

2005 में पहली बार कैम्बेथेरियम का वर्णन विलुप्त समूह के सबसे प्रमुख सदस्य के रूप में किया गया जो पेरिसोडैक्टिल के विकास से ठीक पहले खत्म हो गया था। (आईएएनएस)

Popular

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी है दुनिया के सबसे लोकप्रिय नेता ( wikimedia Commons )

अमेरिकी डेटा इंटेलिजेंस फर्म ‘द मॉर्निंग कंसल्ट’ की एक सर्वे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अप्रूवल रेटिंग 71% दर्ज की गई है यह जानकारी 'द मॉर्निंग कंसल्ट' ने अपने ट्विटर हैंडल के जरिए साझा की है। 'द मॉर्निंग कंसल्ट' के सर्वे के मुताबिक अप्रूवल रेटिंग में प्रधानमंत्री मोदी ने अमरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन, ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन समेत दुनिया भर के 13 राष्ट्र प्रमुखों को पीछे छोड़ दिया है।

मॉर्निंग कंसल्ट’ दुनिया भर के टॉप लीडर्स की अप्रूवल रेटिंग ट्रैक करता है। मॉर्निंग कंसल्ट पॉलिटिकल इंटेलिजेंस वर्तमान में ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, भारत, इटली, जापान, मैक्सिको, दक्षिण कोरिया, स्पेन, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका में नेताओं की रेटिंग पर नज़र रख रही है। रेटिंग पेज को सभी 13 देशों के नवीनतम डेटा के साथ साप्ताहिक रूप से अपडेट किया जाता है।

Keep Reading Show less

अल्लू अर्जुन की नई फिल्म 'अला वैकुंठपुरमुलु' हिंदी में जल्द होगी रिलीज ( wikimedia commons )


हाल ही में रिलीज़ हुई अल्लू अर्जुन की फ़िल्म 'पुष्पा: द राइज़' को दर्शकों ने काफ़ी पसंद किया इस फ़िल्म के आने के बाद से तमिल फिल्म के अभिनेता अल्लू अर्जुन के प्रशंसकों की संख्या में काफ़ी इज़ाफ़ा हुआ है। लोग उनकी फिल्म को खूब पसंद कर रहे हैं । अब दर्शकों को अल्लू अर्जुन की नई फिल्म 'अला वैकुंठपुरमुलु' को हिंदी में रिलीज होने का इंतजार है। यह फ़िल्म भगवान विष्णु की पौराणिक कहानी से प्रेरित है।
पुष्पा की तरह फ़िल्म 'अला वैकुंठपुरमुलु' से भी दर्शक जुड़ाव महसूस करें इसके लिए मेकर्स ने इस फ़िल्म के टाइटल के मायने भी बताए।

फिल्म निर्माण कम्पनी ‘गोल्डमाइंस टेलीफिल्म्स’ ने अपने ट्विटर हैंडल पर फ़िल्म 'अला वैकुंठपुरमुलु'का मतलब बताते हुए लिखा की “अला वैकुंठपुरमुलु पोथन (मशहूर कवि जिन्होंने श्रीमद्भागवत का संस्कृत से तेलुगु में अनुवाद किया) की मशहूर पौराणिक कहानी गजेंद्र मोक्षणम की सुप्रसिद्ध पंक्ति है। भगवान विष्णु हाथियों के राजा गजेंद्र को मकरम (मगरमच्छ) से बचाने के लिए नीचे आते हैं। उसी प्रकार फिल्म में रामचंद्र के घर का नाम वैकुंठपुरम है, जहाँ बंटू (अल्लू अर्जुन) परिवार को बचाने आता है। अला वैकुंठपुरमुलू की यही खूबी है।”

Keep Reading Show less

फ़िल्म अभिनेता मनोज बाजपेयी (Wikimedia Commons)

दिग्गज अभिनेता मनोज बाजपेयी(Manoj Bajpai) के लिए ये साल काफी व्यस्त रहने वाला है क्योंकि वह इस साल कई प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। उनका कहना है कि उनके पास जो प्रतिबद्धताएं हैं वह 2023 के अंत तक ऐसे ही रहने वाली हैं।

साल 2022 राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता मनोज बाजपेयी(Manoj Bajpai) के लिए बहुत व्यस्त रहने वाला है क्योंकि वह इस साल राम रेड्डी की बिना शीर्षक वाली फिल्म, कानू भेल की 'डिस्पैच', अभिषेक चौबे की फिल्म और राहुल चितेला की फिल्म जैसे नए प्रोजेक्ट के लिए बैक-टू-बैक शूटिंग करेंगे।


मनोज बाजपेयी ने हाल ही में दो प्रोजेक्ट को खत्म किया है, एक रेड्डी की अभी तक बिना शीर्षक वाली फिल्म के साथ, जिसमें दीपिक डोबरियाल भी हैं। फिल्म की शूटिंग उत्तराखंड की खूबसूरत जगहों पर हुई फिर, उन्होंने कानू बहल द्वारा निर्देशित आरएसवीपी के 'डिस्पैच' को समाप्त किया, जो अपराध पत्रकारिता की दुनिया में स्थापित एक खोजी थ्रिलर है।

Keep reading... Show less