Never miss a story

Get subscribed to our newsletter


×
देश

Subhas Chandra Bose Jayanti 2021: पढ़िए नेताजी के अंग्रेजों के चंगुल से भाग निकलने की गाथा

By – सौधृति भवानी वर्ष 1941 में 44 वर्षीय नेताजी सुभाष चंद्र बोस (Netaji Subhas Chandra Bose) को दक्षिण कोलकाता में उनके एल्गिन रोड स्थित आवास पर नजरबंद (हाउस अरेस्ट) किया गया था और उनके घर के बाहर पूरा क्षेत्र पुलिस की निगरानी में था। विख्यात नेताजी शोधार्थी जयंत चौधरी के अनुसार नेताजी सुभाष चंद्र

By – सौधृति भवानी

वर्ष 1941 में 44 वर्षीय नेताजी सुभाष चंद्र बोस (Netaji Subhas Chandra Bose) को दक्षिण कोलकाता में उनके एल्गिन रोड स्थित आवास पर नजरबंद (हाउस अरेस्ट) किया गया था और उनके घर के बाहर पूरा क्षेत्र पुलिस की निगरानी में था।


विख्यात नेताजी शोधार्थी जयंत चौधरी के अनुसार

नेताजी सुभाष चंद्र बोस (Netaji Subhas Chandra Bose) 16 जनवरी 1941 को काले रंग की जर्मन वांडरर सेडान कार से अंग्रेजों को चकमा देकर भाग निकले थे। उन्होंने इसी कार से एल्गिन रोड से एजेसी रोड और फिर महात्मा गांधी रोड से होते हुए हावड़ा ब्रिज के माध्यम से हुगली नदी को पार करते हुए हावड़ा जिले में प्रवेश किया था। इसके बाद राज्य की राजधानी से लगभग 100 किलोमीटर दूर स्थित बर्दवान जिले तक पहुंचने के लिए कार ने जीटी रोड का सफर भी तय किया। जिसके बाद नेताजी बीरभूम जिले के बोलपुर के शांति निकेतन गए, जहां उन्होंने दिल्ली पहुंचने से पहले नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर से आशीर्वाद लिया और फिर से बर्दवान जिला लौट आए।

नेताजी सुभाष चंद्र बोस को दक्षिण कोलकाता में उनके एल्गिन रोड स्थित आवास पर नजरबंद किया गया था। (Wikimedia Commons)

बर्दवान से उन्होंने ‘फ्रंटियर मेल’ नामक एक ट्रेन पकड़ी और मोहम्मद जियाउद्दीन के भेष में दिल्ली पहुंचे। नेताजी दिल्ली से सबसे पहले पाकिस्तान के पेशावर पहुंचे और वहां से काबुल पहुंचे, जहां उन्हें लगभग 48 दिनों तक इंतजार करना पड़ा। काबुल से वे समरकंद पहुंचे और वहां से वह हवाई मार्ग से मास्को गए और आखिरकार वह मार्च 1941 में बर्लिन पहुंच गए।

यह भी पढ़ें – भाजपा के लिए क्यों महत्वपूर्ण हुए नेताजी सुभाष चंद्र बोस?

नेताजी के भाग निकलने की और भी कई थ्योरी हैं

  • शिशिर बोस के बारे में बताई गई बातों की कोई प्रासंगिकता नहीं है

बोस के एल्गिन रोड स्थित आवास से भाग निकलने को लेकर कई थ्योरी हैं। चौधरी ने आईएएनएस को बताया कि लेकिन सबूतों के अनुसार, बोस को उनके एक करीबी सहयोगी सरदार निरंजन सिंह तालिब ने निकाला था न कि शिशिर बोस ने।

बोस की परपौत्री (भांजी, बहन की नातिन) और एबीएचएम की राष्ट्रीय अध्यक्ष राज्यश्री चौधरी ने भी इस घटनाक्रम को याद करते हुए कहा कि सिख समुदाय ने बोस को भारत से भागने में मदद की थी और शिशिर बोस के बारे में बताई गई बातों की कोई प्रासंगिकता नहीं है।

यह भी पढ़ें – नेताजी की कथित अस्थियों से जुड़े वो 5 तथ्य जो आप नहीं जानते हैं

  • गोमो रेलवे स्टेशन की कहानी भी मनगढ़ंत

चौधरी, जो न्यायमूर्ति मुखर्जी आयोग के साक्षी लोगों में से एक रहे हैं, उन्होंने बताया, मैं उस थ्योरी का समर्थन नहीं करता कि बोस ने गोमो रेलवे स्टेशन से कालका मेल पकड़ी और दिल्ली पहुंचे, जो कि अब झारखंड में है। क्योंकि यह पूरी तरह से मनगढ़ंत है।

भारतीय रेलवे ने बुधवार को नेताजी की 125वीं जयंती समारोह से पहले हावड़ा-कालका मेल का नाम बदलकर ‘नेताजी एक्सप्रेस’ कर दिया है। 1941 में ब्रिटिश साम्राज्य के चंगुल से बाहर निकलने वाले बोस के सम्मान में 2009 में गोमो रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर नेताजी सुभाष चंद्र बोस गोमो रेलवे स्टेशन कर दिया गया था। केंद्र ने 23 जनवरी को नेताजी की जयंती को ‘पराक्रम दिवस’ के रूप में मनाने का फैसला किया है। (आईएएनएस)

Popular

अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी (Wikimedia Commons)

बॉलीवुड (Bollywood) के जाने माने अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी (Nawazuddin Siddiqui) अपने दमदार अभिनय के अलावा अक्सर पुरस्कारों और सम्मानों के साथ वैश्विक मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करने को लेकर भी सुर्ख़ियों में रहते हैं। उन्हें मिलने वाले सम्मान उनका आत्मविश्वास बढ़ाते हैं। उसी के बारे में बात करते हुए, अभिनेता ने कहा, "मैं अपनी पहचान या पुरस्कारों पर नजर नहीं रखता, लेकिन यह निश्चित रूप से मुझे प्रेरित करते हैं और उस तरह की फिल्मों या पात्रों को चुनने में मदद करते है जिन्हें मैं करना चाहता हूं। पुरस्कार मुझे अपना काम चुनने में आत्मविश्वास देते हैं।"

नवाज ने हाल ही में अंतर्राष्ट्रीय एमी पुरस्कारों (International Emmy Awards) की अपनी यात्रा के साथ सुर्खियां बटोरीं, क्योंकि उन्हें सुधीर मिश्रा निर्देशित 'सीरियस मेन' में उनके काम के लिए एक अभिनेता श्रेणी द्वारा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन में नामांकित किया गया था। हालांकि, अभिनेता डेविड टेनेंट से हार गए, जो ड्रामा मिनिसरीज 'देस' में अपने प्रदर्शन के लिए ट्रॉफी लेकर चले गए।

पहले भी अभिनेता (Nawazuddin Siddiqui) ने कई अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त की है, क्योंकि वह दुनिया के एकमात्र ऐसे अभिनेता हैं जिनके पास कान्स फिल्म समारोह में आधिकारिक तौर पर चयनित और प्रदर्शित 8 फिल्में हैं।

उनकी फिल्म 'पतंग: द काइट' का प्रीमियर 2012 में बर्लिन इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल और ट्रिबेका फिल्म फेस्टिवल में हुआ था।

Keep Reading Show less

टोयोटा (Wikimedia Commons)

टोयोटा(Toyota) मोटर कॉर्प ने घोषणा की है कि वह अमेरिका में अपनी कुछ इलेक्ट्रिक वाहन(Electric Vehicles) आपूर्ति श्रृंखला लाने के प्रयास में उत्तरी कैरोलिना में एक नई 1.29 बिलियन डॉलर की लागत से बैटरी फैक्ट्री(Battery Factory) का निर्माण कर रही है।

एक समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, टोयोटा ने घोषणा की है कि वह अगले दशक में बैटरी तकनीक में करीब 13.6 अरब डॉलर का निवेश करेगी, उत्पादन में 9 अरब डॉलर का निवेश शामिल है। क्योंकि यह अपने वाहन लाइनअप को विद्युतीकृत करने का प्रयास करता है।

नया संयंत्र शुरू में सालाना 8 लाख वाहनों के लिए लिथियम-आयन बैटरी की आपूर्ति करने में सक्षम होगा। पहले वर्ष में, फर्म इलेक्ट्रिक वाहनों के आगामी लाइनअप के लिए 1.2 मिलियन बैटरी पैक का उत्पादन करने की योजना बना रही है।

उत्तरी अमेरिका में टोयोटा मोटर के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी क्रिस रेनॉल्ड्स की रिपोर्ट के हवाले से कहा गया है, "यह निवेश, जो मुझे लगता है कि उत्तरी कैरोलिना के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा निजी पूंजी निवेश है.. कम से कम 1,750 नई नौकरियां पैदा करेगा और हमें ऑटोमोटिव बैटरी उत्पादन को विकसित करने और स्थानीय बनाने में मदद करेगा जो यहां निर्मित बैटरी इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका में मार्ग प्रशस्त करेगा।"

Keep Reading Show less

जेएनयू के कॉमरेड को अब बाबरी मस्जिद चाहिए (Image: Wikimedia Commons)

अपने हिंदू विरोधी कर्तव्य के लिए प्रसिद्ध साम्यवादी(communist) विचारधारा से ग्रसित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ(JNUSU) एक बार फिर से सुर्खियों में है। अबकी बार वह जिस वजह से सुर्खियों में है वह है बाबरी मस्जिद(Babri Masjid)। दरअसल, जेएनयूएसयू ने अयोध्या(ayodhya) में ध्वस्त बाबरी मस्जिद के पुनर्निर्माण की मांग को लेकर कैंपस के अंदर एक विरोध मार्च निकाला। विरोध मार्च चंद्रभागा छात्रावास में समाप्त हुआ, जहां छात्र नेताओं ने जमकर नारेबाजी और भाषण बाजी करी।

इसके अलावा एक जगह पर तख्तियां लिए हुए, नारेबाजी करते हुए जमा हो गए और बाद में उन्होंने परिसर के अंदर मार्च निकाला। छात्र नेताओं ने मस्जिद(Babri Masjid) के पुनर्निर्माण की मांग को लेकर भाषण भी दिया। जेएनयूएसयू(Janusu) के उपाध्यक्ष साकेत मून(Saket Moon) ने कहा कि बाबरी मस्जिद के पुनर्निर्माण से न्याय मिलेगा। उपाध्यक्ष जी न्याय दिलवाने की बात करके मस्जिद के निर्माण की बात कर रहे हैं, लेकिन शायद वह भूल गए कि राम मंदिर(Ram Mandir) आज सुप्रीम कोर्ट (supreme Court) द्वारा किए गए न्याय पर मिल रहा है।

Keep reading... Show less