‘फर्जी मैसेजेस’ के जरिए नफरत फैलाने वाले कंटेंट और विज्ञापनों से बचाव में जुटी “सुप्रीम कोर्ट”

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र और ट्विटर को नोटिस जारी कर एक ऐसे मैकेनिज्म बनाने की मांग की है, जिससे फालतू अकाउंट्स से फर्जी समाचारों और फर्जी मैसेजेस के जरिए नफरत का प्रसार करने वाले कंटेंट और विज्ञापनों की जांच हो सके। मुख्य न्यायाधीश एस. ए. बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने ट्विटर पर कंटेंट चेक करने के मैकेनिज्म की मांग करने वाली भाजपा नेता विनीत गोएनका की याचिका पर एक नोटिस जारी किया है। ताकि फर्जी अकाउंट्स के जरिए नफरत फैलाने वाली विषय सामग्रियों की जांच हो सके। कोर्ट ने इस मामले को सोशल मीडिया विनियमन की मांग करने वाली इस तरह की अन्य याचिकाओं के साथ टैग किया है।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा ट्विटर को जारी किया गया नोटिस । (Unsplash)

वकील अश्विनी कुमार दुबे द्वारा दायर इस याचिका में तर्क दिया गया कि भारत में इस वक्त करीब 3.5 करोड़ ट्विटर हैंडल हैं और फेसबुक खातों की संख्या 35 करोड़ है। विशेषज्ञों का कहना है कि इनमें से 10 फीसदी ट्विटर हैंडल्स और 10 फीसदी फेसबुक अकाउंट्स फर्जी हैं।
 

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याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि ये फर्जी ट्विटर हैंडल और फेसबुक अकाउंट भारत के राष्ट्रपति, भारत के उप-राष्ट्रपति, भारत के प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, कैबिनेट मंत्रियों और हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश, न्यायाधीश सहित अन्य प्रतिष्ठित व गणमान्य लोगों के नाम पर बनाए गए हैं। ऐसे में इनसे जो भी जानकारियां पोस्ट की जाती हैं, उन पर आम जनता आसानी से यकीन कर लेती हैं। (आईएएनएस)
 

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