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टाटा संस (Tata sons) के चेयरमैन एमेरिटस (मानद चेयरमैन) रतन टाटा (Ratan tata)) ने साइरस मिस्त्री के साथ विवाद के मामले में शुक्रवार को आए सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि शीर्ष अदालत का यह फैसला इस बात को साबित करता है कि टाटा संस अपने सिद्धांतों और मूल्यों पर हमेशा अडिग रहा है।


रतन टाटा ने ट्वीट कर कहा कि यह जीत और हार की बात नहीं थी। मेरे ग्रुप की ईमानदारी और नैतिकता को लेकर लगातार हमले किए गए। यह फैसला इस बात को साबित करता है कि टाटा संस अपने सिद्धांतों और मूल्यों पर हमेशा अडिग रहा है।

ट्वीट में रतन टाटा (Ratan tata) ने यह भी लिखा कि ये हमारी न्यायपालिका की निष्पक्षता और पारदर्शिता को प्रदर्शित करता है।

दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एनसीएलएटी के दिसंबर 2019 के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें सायरस मिस्त्री को टाटा समूह का दोबारा कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त करने का आदेश दिया गया था।

प्रधान न्यायाधीश एस. ए. बोबडे (S A Bobde) की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि कानून के सभी प्रश्न टाटा समूह के पक्ष में हैं। उन्होंने मिस्त्री द्वारा दायर अपील को खारिज कर दिया।

यह भी पढ़ें :- सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट द्वारा OTT कंटेंट के नियमन से संबंधित मामलों की सुनवाई पर रोक लगाई

बता दें कि टाटा समूह ने सायरस मिस्त्री को टाटा संस के चेयरमैन पद से 24 अक्टूबर 2016 को हटा दिया था। उनकी जगह रतन टाटा को अंतरिम चेयरमैन बनाया गया था। टाटा समूह ने एन. चंद्रशेखरन (Natarajan Chandrasekaran) को टाटा संस का चेयरमैन बनाया। दिसंबर 2012 को रतन टाटा ने टाटा संस के चेयरमैन पद से रिटायरमेंट ले ली थी, जिसके बाद साइरस मिस्त्री चेयरमैन बनाए गए थे। (आईएएनएस-SM)
 

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भारत, अमेरिका के विशेषज्ञों ने जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर चर्चा की ( Pixabay )

भारत(india) और अमेरिका(America) के विशेषज्ञों ने शनिवार को कार्बन कैप्चर, यूटिलाइजेशन एंड स्टोरेज (सीसीयूएस) के माध्यम से जलवायु परिवर्तन (Environment change) से निपटने के लिए विभिन्न तकनीकों पर चर्चा करते हुए कहा कि वे 17 सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) में से पांच - जलवायु कार्रवाई, स्वच्छ ताकत, उद्योग, नवाचार और बुनियादी ढांचा, खपत और उत्पादन जैसे लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए साझेदारी की है। विज्ञान विभाग के सचिव एस.चंद्रशेखर ने कहा, "सख्त जलवायु व्यवस्था के तहत हम उत्सर्जन कटौती प्रौद्योगिकियों के पोर्टफोलियो के सही संतुलन की पहचान और अपनाने का एहसास कर सकते हैं। ग्लासगो में हाल ही में संपन्न सीओपी-26 में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के उल्लेखनीय प्रदर्शन के साथ-साथ महत्वाकांक्षाओं को सामने लाया। दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक होने के बावजूद हम जलवायु लक्ष्यों को पूरा करेंगे।"

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के कार्बन कैप्चर पर पहली कार्यशाला में अपने उद्घाटन भाषण में उन्होंने कहा, "पीएम ने हम सभी को 2070 तक शून्य कार्बन उत्सर्जन राष्ट्र बनने को कहा है।" उन्होंने सीसीयूएस के क्षेत्र में प्रौद्योगिकी के नेतृत्व वाले आरडी एंड डी की दिशा में विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग की हालिया पहलों के बारे में भी जानकारी दी।

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वेल्लोर के इस 10 वर्षीय छात्र ने अपनी लगन से वकीलों के लिए ई-अटॉर्नी नामक एक ऐप बना डाला ( Pixabay)

कोरोना के इस दौर में ऐप टेक्नॉलॉजी (App Technology) की पढ़ाई कई समस्याओं का समाधान कर रही है। ऐसा ही एक समाधान 10 वर्षीय छात्र कनिष्कर आर ने कर दिखाया है। कनिष्कर ने पेशे से वकील अपने पिता की मदद एक ऐप (App) बनाकर की। दस्तावेज संभालने में मददगार यह ऐप वकीलों और अधिवक्ताओं को अपने क्लाईंट एवं काम से संबंधित दस्तावेज संभालने में मदद करता है। 10 वर्षीय कनिष्कर का यह ऐप अब उसके पिता ही नहीं बल्कि देश के कई अन्य वकील भी इस्तेमाल कर रहे हैं और यह एक उद्यम की शक्ल ले रहा है।

कनिष्कर अपने पिता को फाईलें संभालते देखता था, जो दिन पर दिन बढ़ती चली जा रही थीं। जल्द ही वह समझ गया कि उसके पिता की तरह ही अन्य वकील भी थे, जो इसी समस्या से पीड़ित थे। इसलिए जब कनिष्कर को पाठ्यक्रम अपने कोडिंग के प्रोजेक्ट के लिए विषय चुनने का समय आया, तो उसने कुछ ऐसा बनाने का निर्णय लिया, जो उसके पिता की मदद कर सके। वेल्लोर (Vellore) के इस 10 वर्षीय छात्र ने अपनी लगन से वकीलों के लिए ई-अटॉर्नी नामक एक ऐप बना डाला। इस ऐप का मुख्य उद्देश्य वकीलों और अधिवक्ताओं को अपने क्लाईंट के एवं काम से संबंधित दस्तावेज संभालने में मदद करना है। इस ऐप द्वारा यूजर्स साईन इन करके अपने काम को नियोजित कर सकते हैं और क्लाईंट से संबंधित दस्तावेज एवं केस की अन्य जानकारी स्टोर करके रख सकते हैं। इस ऐप के माध्यम से यूजर्स सीधे क्लाईंट्स से संपर्क भी कर सकते हैं। जिन क्लाईंट्स को उनके वकील द्वारा इस ऐप की एक्सेस दी जाती है, वो भी ऐप में स्टोर किए गए अपने केस के दस्तावेज देख सकते हैं।

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डॉ.मुनीश रायजादा ने फोन पर आईएएनएस से बात करते हुए बताया कि, " मंच इस वेब सीरीज का प्रचार यह कहकर नहीं कर रहा था कि यह एक राजनीतिक वेब सीरीज है, और मैंने सोचा कि मैं इस वेब सीरीज को बड़े पैमाने में दर्शकों तक कैसे ले जा सकता हूँ फिर मैंने यूट्यूब के बारे में सोचा।" यह वेब सीरीज यूट्यूब पर 17 जनवरी को रिलीज़ किया गया।

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