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संस्कृति

कोई भी आता है और घंटा बजा कर चला जाता है, लेकिन अब नहीं: ISKCON

"फिल्म, सीरियल, कॉमेडियन आदि द्वारा हिन्दू धर्म को बुरा दिखाए जाने की कोशिश लगातार की जा रही है"

कॉमेडियन सुरलीन कौर(बाएँ) और राधारमन दास, इस्कॉन(दायें)(Image Soure: Twitter)

पिछले दो दिनों से चल रहे सुरलीन कौर विवाद में इस्कॉन ने आज अपना मत साफ कर दिया है। इस्कॉन के उपाध्यक्ष और प्रवक्ता राधारमन दास ने आज एक वीडियो स्टेटमेंट जारी कर, ये जानकारी दी है की, कॉमेडियन सुरलीन कौर और शेमारू के खिलाफ इस्कॉन अपनी शिकायत वापस नहीं लेगा, और कोर्ट मे कानूनी तौर तरीकों से इस लड़ाई को लड़ेगा और जीतेगा। 

आपको बता दें की कुछ दिनों पहले कॉमेडियन सुरलीन कौर ने एक शो के दौरान इस्कॉन पर भद्दी टिपन्नी करते हुए कहा था की, “बेशक हम सब इस्कॉन वाले हैं, पर अंदर से हम सब हरमी पॉर्न वाले हैं।” इसके अलावा उसी शो में सुरलीन कौर ने ऋषि-मुनियों पर भी भद्दी टिप्पणी करते हुए कहा था की, “छोटे छोटे संस्कृत शब्दों का इस्तेमाल कर के हमारे ऋषि-मुनियों ने अपने बड़े बड़े कांड छुपाए हैं…कामासूत्रा”। 


जिसके बाद उनका ये वीडियो ट्वीटर, फ़ेसबूक, व्हाट्सऐप, इन्स्टाग्राम, पर लगातार शेयर किया जाने लगा। हिन्दू धर्म, इसकी संस्कृति, और इस्कॉन को बदनाम करने के लिए कॉमेडियन सुरलीन कौर को चौतरफा आलोचना का सामना करना पड़ा। 

28 मई को राधारमन दास के ट्वीटर हैंडल से सुरलीन कौर और शेमारू के खिलाफ इस्कॉन द्वारा एक स्टेटमेंट जारी किया गया। जिसके बाद शेमारू ने इस वीडियो को हटा लेने के साथ साथ सुरलीन कौर से कांट्रैक्ट तोड़ दिया है।  इसके अलावा उन्होने इस कृत्य के लिए माफी भी मांगी थी, लेकिन अब इस्कॉन ने उनकी माफी की सिफ़ारिश खारिज कर दी है। 

इस्कॉन के उपाध्यक्ष और प्रवक्ता राधारमन दास ने आज एक वीडियो मैसेज के ज़रिये अपना पक्ष रखा है, जिसमे उन्होने कहा है की, “हिन्दू धर्म के लोग स्वभाव से सहिष्णु होते हैं, और हम मानते  हैं की हर किसी को अपने सोच को बयां करने का हक़ है। लेकिन कुछ समय से सोशल मीडिया पर सनातन धर्म को बदनाम करने की एक नैरेटिव चलाई जा रही है । फिल्म, सीरियल, कॉमेडियन आदि द्वारा हिन्दू धर्म को बुरा दिखाए जाने की कोशिश लगातार की जा रही है। कोई भी आता है और घंटा बजा कर चला जाता है, लेकिन अब नहीं”।

राधारमन दास ने जानकारी दी है की, शेमारू या सुरलीन कौर के तरफ से आए किसी भी तरह के माफी को स्वीकार नहीं किया गया है और जो भी गुनहगार है उसे कानूनी तौर पर बचने नहीं दिया जाएगा।

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महामारी के बीच डोलो 650 ब्रांड बुखार की सर्वोत्तम दवा का पर्याय बन गया है। (Pixabay)

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नई दिल्ली के द्वारका स्थित मणिपाल अस्पताल के एचओडी और सलाहकार (आंतरिक चिकित्सा) चारु गोयल सचदेवा के अनुसार, डोलो 650 मूल रूप से एक पैरासिटामोल दवा है। चारु गोयल ने आईएएनएस को बताया, "अपनी सुरक्षा प्रोफाइल और इसकी प्रभावकारिता के कारण डोलो 650 बेहतर है। हमने अनुभव किया है कि लोग इस पर अच्छी प्रतिक्रिया देते हैं, कहते हैं कि इस दवा से बुखार तेजी से कम होने लगता है। यह न केवल ज्वरनाशक दवा है, बल्कि इसका शरीर पर कोई दुष्प्रभाव भी नहीं पड़ता। आपको नेफ्रोटॉक्सिसिटी या कई अन्य दवाओं की तरह साइडइफेक्ट की चिंता करने की जरूरत नहीं है।"

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माइक्रोसॉफ्ट गेमिंग के सीईओ फिल स्पेंसर ने एक ट्वीट में कहा कि सोनी प्लेटफॉर्म पर सीओडी का भविष्य है। ( Pixabay )

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ऐसी चिंताएं थीं कि सीओडी माइक्रोसॉफ्ट एक्सबॉक्स एक्सक्लूसिव फ्रैंचाइजी बन सकता है।

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