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मनोरंजन

सुसाइड की थ्योरी को पूरी तरह खारिज करते हैं सुशांत सिंह की डायरी के पन्ने

डायरी के पन्नों के मुताबिक सुशांत सिर्फ बॉलीवुड नहीं बल्कि हॉलीवुड में भी पैर पसारना चाहते थे। और तो और वह अपना खुद का प्रोडक्शन हाउस भी शुरू करना चाहते थे।

सुशांत सिंह राजपूत, दिवंगत अभिनेता(Image: Sushant Singh Rajput, Instagram)

By: जयंत के. सिंह

सुशांत सिंह राजपूत ने आत्महत्या की है या उनकी हत्या हुई है, यह अब जांच का विषय है लेकिन सुशांत की निजी डायरी के पन्ने कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। ये पन्ने चीख-चीख कर कह रहे हैं कि सुशांत ने 2020 के लिए जो प्लानिंग की थी, उसे देखते हुए वह सुसाइड कर ही नहीं सकते।


आईएएनएस के पास सुशांत की निजी डायरी के छह पन्ने हैं और हर पन्ना इस बात का सबूत देता है कि यह प्रतिभाशाली अभिनेता अपनी आगे की जिंदगी के लिए पूरी तरह तैयार था और इस लिहाज से उसके अवसाद में जाने और इस कारण आत्महत्या करने की थिओरी पूरी तरह खारिज होती दिख रही है।

डायरी के पन्नों के मुताबिक सुशांत सिर्फ बॉलीवुड नहीं बल्कि हॉलीवुड में भी पैर पसारना चाहते थे। और तो और वह अपना खुद का प्रोडक्शन हाउस भी शुरू करना चाहते थे। इसके अलावा सुशांत ने अपना खुद का व्यवसाय भी शुरू करने का प्लान बना रखा था।

सुशांत सिंह राजपूत, दिवंगत अभिनेता(Image: Sushant Singh Rajput, Instagram)

सुशांत ने अपनी डायरी के एक पन्ने पर इंटरटेनमेंट टाइटिल दिया और उसके नीचे लिखा है कि 2020 में उनका प्लान हॉलीवुड और बॉलीवुड दोनों में धाक जमाने का है। इसी पन्ने पर उन्होंने स्टार्टअप का जिक्र किया है, जो इमेडेंट टेक्नोलॉजी पर आधारित होगा। इस पन्ने की मुख्य बात यह है कि सुशांत ने एक प्रोडक्शन हाउस शुरू करने का प्लान बनाया था, जिसमें शीर्ष राइटर्स के साथ आइडिया डेवलपमेंट करना था। साथ ही वह एक प्रोडक्शन हाउस शुरू करने चाहते थे, जिसके बार में उन्होंने लिखा है कि वह अनुभवी तथा नए कलाकारों को मौका देना चाहेंगे।

यही नहीं, सुशांत राइटर्स की एक टीम बनाना चाहते थे, जो उनके प्रोडक्शन हाउस के लिए नई-नई कहानियां लिखे। सुशांत की डायरी के एक अन्य पन्ने में क्रिएटिव टीम के गठन का जिक्र है। इस पन्ने पर सुशांत ने कई स्टेप्स का जिक्र किया है। पहले स्टेप में कम्पनी का क्रिएशन शामिल है। दूसरे स्टेप को उन्होंने एक्सप्लोर नाम दिया है, जिसमें एफटीआईआई जैसे अग्रणी संस्थान में जाकर प्रतिभाओं को तलाशना शामिल है। इसके बाद स्टेप-3 है, जिसमें पहली स्क्रीनिंग का आइडिया है।

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14 जून के बांद्रा के अपने फ्लैट में कथित रूप से आत्महत्या करने वाले इस प्रतिभाशाली अभिनेता की डायरी का अगला पन्ना काफी अहम है। सुशांत लिखते हैं कि उनका आगे का प्लान क्या है। वह एक लीगल टीम भी खड़ी करना चाहते थे। वह श्रेष्ठ फॉरेन फिल्म डायरेक्र्टस और राइटर्स से सम्पर्क करना चाहते थे। लीगल टीम के लिए सुशांत ने पहले किसी प्रियंका का नाम लिखा और फिर उसे काटकर वहां पीएस लिख दिया। फिर इसके आगे उन्होंने किसी श्रृद्धा का नाम लिखा और फिर उसे काटकर मेघा कर दिया।

रिया चक्रवर्ती व सुशांत सिंह राजपूत(Image: Rhea Chakraborty, Instagram)

एक और पन्ना है, जो इस बात का सबूत है कि सुशांत यह सब अकेले करना चाहते थे। पूरी प्लानिंग में रिया चक्रवर्ती का कहीं कोई जिक्र नहीं है। इसका कारण यह है कि सुशांत ने एक पन्ने पर साफ लिखा है कि वह अपनी टीम अपने दम पर खड़ी करना चाहते हैं और इसके लिए वह पर्सनली इससे जुड़े लोगों से मिलना चाहेंगे।

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जहां पर लीगल टीम के गठन का जिक्र है और बार-बार प्रियंका और श्रृद्धा का नाम आ रहा है। यही एक बहुत महत्वपूर्ण बात लिखी है और वो यह है कि वह अपनी लीगल टीम 3 सप्ताह के अंदर गठित करना चाहते हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि सुशांत एक लीगल टीम बनाने के लिए इतनी जल्दबाजी में क्यों थे। क्या वह रिया से छुटकारा पाना चाहते थे या फिर अपनी आगे की प्लानिंग को एक्जक्यूट करने को लेकर काफी संजीदा और जल्दी में थे। लीगल टीम बनाने के पीछे दोनों कारण हो सकते हैं, पर इन सब बातों से साफ है कि जो इंसान इतनी लम्बी प्लानिंग करके चल रहा हो उसका इस तरह अचानक दुनिया छोड़कर जाने का निश्चित तौर पर कोई प्लानिंग नहीं रहा होगा।(आईएएनएस)

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मोदी ने अपने संबोधन में कहा, "जब भारत बढ़ता है, तो दुनिया बढ़ती है। (IANS)

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भारत और भारतीय: "दुनिया का हर छठा व्यक्ति भारतीय है। जब भारतीय प्रगति करते हैं, तो दुनिया के विकास को भी गति मिलती है। जब भारत बढ़ता है, तो दुनिया बढ़ती है। जब भारत सुधार करता है, तो दुनिया बदल जाती है।"

विज्ञान और तकनीक: "भारत में हो रहे विज्ञान और प्रौद्योगिकी आधारित नवाचार दुनिया में एक बड़ा योगदान दे सकते हैं। हमारे तकनीकी समाधानों का स्केल और उनकी कम लागत, दोनों अतुलनीय है। भारत में यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) के जरिए हर महीने 3.5 अरब से ज्यादा ट्रांजेक्शन हो रहे हैं।"

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वैक्सीन : "मैं यूएनजीए को ये जानकारी देना चाहता हूं कि भारत ने दुनिया की पहली डीएनए वैक्सीन विकसित कर ली है, जिसे 12 साल की आयु से ज्यादा के सभी लोगों को लगाया जा सकता है। एक और एमआरएनए टीका विकास के अंतिम चरण में है।" निवेश का अवसर: "मैं दुनिया भर के वैक्सीन निमार्ताओं को भी निमंत्रण देता हूं। आओ, भारत में वैक्सीन बनाएं।"

आतंकवाद: "प्रतिगामी सोच वाले देश आतंकवाद को एक राजनीतिक उपकरण के रूप में उपयोग कर रहे हैं। इन देशों को यह समझना चाहिए कि आतंकवाद उनके लिए भी उतना ही बड़ा खतरा है। साथ ही, यह सुनिश्चित करना नितांत आवश्यक है कि अफगानिस्तान के क्षेत्र का उपयोग आतंकवाद फैलाने या आतंकवादी हमलों के लिए न हो।"

आतंकवाद से निपटने पर जोर देते हुए पीएम मोदी ने आगे कहा, "हमें इस बात के लिए भी सतर्क रहना होगा कि वहां की नाजुक स्थितियों का कोई देश, अपने स्वार्थ के लिए, एक टूल की तरह इस्तेमाल करने की कोशिश ना करे। इस समय अफगानिस्तान की जनता को, वहां की महिलाओं और बच्चों को, वहां के अल्पसंख्यकों को मदद की जरूरत है और इसमें हमें उन्हें सहायता प्रदान करके अपना दायित्व निभाना ही होगा।" (आईएएनएस-SM)


पूर्वोत्तर सीमा क्षेत्र बहुत संवेदनशील हैं और उनके लिए तोड़फोड़ के ऐसे प्रयासों के बारे में जानना नितांत आवश्यक है। (Unsplash)

भारत चीन सीमा पर बसे हुए गांव चिंता का विषय हैं। हैग्लोबल काउंटर टेररिज्म काउंसिल के सलाहकार बोर्ड ने एक बड़ी सूचना देते हुए बड़ा खुलासा किया है कि चीन ने भारत के साथ अपनी सीमा पर 680 'जियाओकांग' (समृद्ध या संपन्न गांव) बनाए हैं। ये गांव भारतीय ग्रामीणों को बेहतरीन चीनी जीवन की और प्रभावित करने के लिए हैं।

कृष्ण वर्मा, ग्लोबल काउंटर टेररिज्म काउंसिल के सलाहकार बोर्ड के एक सदस्य ने आईएएनएस को बताया, " ये उनकी ओर से खुफिया मुहिम और सुरक्षा अभियान है। वे लोगों को भारत विरोधी बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इसलिए हम अपने पुलिस कर्मियों को इन प्रयासों के बारे में अभ्यास दे रहे हैं और उन्हें उनकी हरकतों का मुकाबले का सामना करने के लिए सक्षम बना रहे हैं। चीनी सरकार के द्वारा लगभग 680 संपन्न गांव का निर्माण किया जा चुका है। जो चीन और भूटान की सीमाओं पर हैं। इस गांव में चीन के स्थानीय नागरिक भारतीयों को प्रभावित करते है कि चीनी सरकार बहुत अच्छी है। शुक्रवार को भारत सरकार के पूर्व विशेष सचिव वर्मा गुजरात के गांधीनगर में राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय (आरआरयू) में 16 परिवीक्षाधीन उप अधीक्षकों (डीवाईएसपी) के लिए 12 दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन के अवसर पर एक कार्यक्रम में थे।

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बड़े देशों के एक समूह ने 'नो न्यू कोल पावर कॉम्पेक्ट' की घोषणा की है।(Canva)

विदेशी कोयला बिजली वित्त को रोकने की चीन की घोषणा के बाद, श्रीलंका, चिली, डेनमार्क, फ्रांस, जर्मनी, मोंटेनेग्रो और यूके जैसे देशों के एक समूह ने 'नो न्यू कोल पावर कॉम्पेक्ट' की घोषणा की है। इसका उद्देश्य अन्य सभी देशों को नए कोयले से चलने वाले बिजली संयंत्रों के निर्माण को रोकने के लिए प्रोत्साहित करना है ताकि 1.5 डिग्री सेल्सियस के लक्ष्य तक पहुंचा जा सके। पहली बार, विकसित और विकासशील देशों का एक विविध समूह नए कोयले से चलने वाले बिजली उत्पादन को समाप्त करने के वैश्विक प्रयासों को गति देने के लिए एक साथ आया है। उनकी नई पहल के लिए हस्ताक्षरकर्ताओं को वर्ष के अंत तक कोयले से चलने वाली बिजली उत्पादन परियोजनाओं के नए निर्माण की अनुमति तुरंत बंद करने और समाप्त करने की आवश्यकता है।

ये देश अन्य सभी सरकारों से इन कदमों को उठाने और संयुक्त राष्ट्र जलवायु शिखर सम्मेलन सीओपी26 से पहले समझौते में शामिल होने का आह्वान कर रहे हैं ताकि शिखर सम्मेलन के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को "इतिहास को कोयले की शक्ति सौंपने" में मदद मिल सके। नो न्यू कोल पावर कॉम्पेक्ट, संयुक्त राष्ट्र महासचिव के आह्वान का जवाब देता है कि इस साल नए कोयले से चलने वाली बिजली का निर्माण समाप्त करने के लिए, 1.5 डिग्री सेल्सियस लक्ष्य को पहुंच के भीतर रखने और जलवायु परिवर्तन के विनाशकारी प्रभावों से बचने के लिए पहला कदम है। साथ ही सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा प्रदान करने के लिए सतत विकास लक्ष्य 7 को प्राप्त करना है।

एनर्जी कॉम्पैक्ट्स जीवित दस्तावेज हैं और अन्य देशों को इसमें शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। समूह का लक्ष्य जल्द से जल्द नए हस्ताक्षरकर्ताओं की सबसे बड़ी संख्या को इकट्ठा करना है। ऊर्जा पर संयुक्त राष्ट्र उच्च स्तरीय वार्ता 40 वर्षो में पहली बार ऊर्जा पर चर्चा करने वाला एक महासचिव के नेतृत्व वाला शिखर सम्मेलन है। यह जलवायु लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में ऊर्जा की महत्वपूर्ण भूमिका के साथ-साथ कोविड रिकवरी प्रक्रियाओं सहित विकास प्राथमिकताओं को पहचानता है। श्रीलंका और चिली ने हाल ही में नई कोयला परियोजनाओं को रद्द करने और राजनीतिक बयान देने में नेतृत्व दिखाया है कि वे अब नई कोयला शक्ति का पीछा नहीं करेंगे। डेनमार्क, फ्रांस, जर्मनी, मोंटेनेग्रो और यूके ने अपनी पिछली कोयला परियोजनाओं को पहले ही रद्द कर दिया है और अब वे अपने शेष कोयला बिजली उत्पादन की सेवानिवृत्ति में तेजी लाने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

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