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सुशांत सिंह का मामला बनेगा बिहार चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा?

राजद के नेता तेजस्वी यादव भी बॉलीवुड अभिनेता सुशांत की मौत को लेकर कहते रहे हैं कि राजद ने इस मामले को लेकर सबसे पहले केंद्रीय जांच ब्यूरो से जांच की मांग की थी।

बिहार भाजपा के कला एवं संस्कृति प्रकोष्ठ द्वारा जारी किया गया पोस्टर

By: मनोज पाठक

बिहार में विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही सभी राजनीतिक दलों ने मतदाताओं में अपनी पैठ बनाने को लेकर मुद्दों की तलाश शुरू कर दी है। चुनाव के पहले ही राजनीतिक दलों के पैंतरों से इस बात की पूरी संभावना जताई जा रही है कि इस चुनाव में सुशांत की मौत का मामला चुनावी मैदान में राजनीतिक दलों का ‘हथियार’ बनेगा।


दीगर बात है कि सभी राजनीतिक दल इसे हालांकि चुनावी या राजनीतिक मुद्दा मानने से इनकार कर रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कला एवं संस्कृति प्रकोष्ठ द्वारा बजाप्ता स्टिकर और पोस्टर वितरित कर सुशांत के लिए न्याय की मांग की जा रही है। सुशांत की तस्वीर वाले स्टिकर में ‘जस्टिस फॉर सुशांत’ लिखा हुआ है तथा ‘ना भूले हैं, ना भूलने देंगें’ लिखा हुआ है। इस स्टिकर में भाजपा का चुनाव चिह्न भी अंकित है।

भाजपा कला एवं संस्कृति प्रकोष्ठ हालांकि मानता है कि सुशांत उनके लिए राजनीतिक मामला ना कभी था और और ना ही आज है। अभिनेता की मौत के बाद से न्याय की मांग को लेकर अभियान चलाया जा रहा है। प्रकोष्ठ के संयोजक वरूण कुमार सिंह कहते हैं, “25,000 कार स्टिकर छपवाए गए हैं और जुलाई से इसे कई जिलों में वितरित किया जा रहा है। इसके अलावे मास्क भी वितरित किए गए हैं। जून, जुलाई से ही यह अभियान चल रहा है।” उन्होंने कहा कि इसे राजनीतिक मुद्दा कहना ही गलत है। उन्होंने कहा कि यह मात्र संयोग है कि विधानसभा चुनाव होने वाला है। उन्होंने कहा कि हम लोग प्रारंभ से ही सुशांत के लिए न्याय की मांग को लेकर अभियान चला रहे हैं।

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उल्लेखनीय है कि भाजपा के नेता और केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद, बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, सांसद रामृकपाल यादव ने सुशांत की मौत के बाद उनके पटना स्थित आवास जाकर उनके पिता से मुलाकात की थी।

बिहार के कई इलाकों में लगे हैं सुशांत के लिए न्याय की मांग करने वाले पोस्टर। (Twitter)

इधर, राजद के नेता तेजस्वी यादव भी बॉलीवुड अभिनेता सुशांत की मौत को लेकर कहते रहे हैं कि राजद ने इस मामले को लेकर सबसे पहले केंद्रीय जांच ब्यूरो से जांच की मांग की थी। राजद के प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी भी इसे राजनीतिक मुद्दा नहीं मानते हैं, हालांकि उन्होंने भाजपा पर इसे राजनीतिक मुद्दा बनाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव पहले नेता हैं जो सुशांत के घर पहुंचे और उनके लिए न्याय की मांग की, लेकिन सरकार इस मामले को सीबीआई की जांच की अनुशंसा करने में 44 दिनों की देर कर दी।

इधर, भाजपा की सहयोगी पार्टी जद (यू) के नेता भी इस मामले को राजनीति मुद्दा नहीं मानते हैं। जदयू के नेता और राज्य के सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री नीरज कुमार ने कहा कि आज जो भी लोग सुशांत के लिए न्याय की मांग को उठा रहे हैें, उसे राजनीति से जेाड़ना कहीं से ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि बिहार सरकार ने इस मामले को लेकर प्रारंभ से ही विधिसम्मत कार्रवाई के तहत सुशांत के परिजनों को न्याय दिलाने का काम किया है।

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उल्लेखनीय है कि पटना के रहने वाले बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत का शव उनके मुंबई स्थित फ्लैट में 14 जून को बरामद किया गया था। इस मामले में सुशांत के पिता द्वारा पटना के राजीव नगर थाने में एक मामला दर्ज कराए जाने के बाद मामले की जांच सीबीआई से कराने को लेकर बिहार सरकार ने अनुशंसा की थी। फि लहाल इस मामले की जांच सीबीआई कर रही है। (आईएएनएस)

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बांके बिहारी मंदिर में होली

कहा जाता है कि अगर किसी इंसान को सुकून चाहिए होता है तो उसे वृंदावन या मथुरा की गलियों में जाना चाहिए, क्योंकि इन्ही गलियों में खेलते हुए कृष्ण जी का बचपन बीता हैं। वृंदावन हो या मथुरा यहां हर दूसरा व्यक्ति कृष्ण भक्ति में लीन नज़र आता है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता की वह हिंदुस्तानी है या कहीं और से आया है। हर कोई कृष्ण की महिमा में डूबा हुआ होता है। वैसे तो वृंदावन में कई मंदिर है जहां हर रोज हज़ारों की संख्या में भक्त आते हैं और अपनी हाजिरी लगवाते हैं, लेकिन बांके बिहारी मंदिर की बात अलग है। यहां भी भक्तों का मेला लगा रहता है, पर हर किसी को कुछ बातें मालूम नहीं है। ऐसे ही कुछ तथ्यों के बारे में इस आर्टिकल में बताया गया है।

1) बांके बिहारी मंदिर की स्थापना स्वामी श्री हरिदास जी ने की थी। वह श्री कृष्ण के भक्त थे और महान गायक तानसेन के गुरु थे। वह अपने गीत से श्री कृष्ण को प्रसन्न करने की कोशिश किया करते थे। ऐसा कहा जाता है कि श्री हरिदास जी की भक्ति से प्रसन्न हो श्री कृष्ण ने दर्शन दिए थे।

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भारतीय क्रिकेट टीमके कप्तान विराट कोहली और अनुष्का

भारतीय क्रिकेट टीमके कप्तान विराट कोहली और उनके फाउंडेशन ने यहां मड, मलाड में आवारा पशुओं के लिए एक ट्रॉमा और रिहेब सेंटर का उद्घाटन किया है। इसके पहले इस साल की शुरूआत में, भारतीय कप्तान कोहली ने कहा था कि वह मुंबई में दो पशु देखभाल सुविधाएं स्थापित कर रहे हैं।
कोहली ने अपनी पत्नी अनुष्का शर्मा को शहर में आवारा जानवरों के सामने आने वाली कठिनाइयों को देखने का श्रेय दिया।

अभिनेत्री अनुष्का ने कई मौकों पर जानवरों के कल्याण और उनके अधिकारों के प्रति अपना समर्थन दिया है। अनुष्का के जानवरों के प्रति दीवानगी से प्रेरित होकर कोहली अपने फाउंडेशन के जरिए आवारा जानवरों की मदद करने के मौके तलाश रहे हैं।

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भीड़ में चलते लोग।

मौजूदा समय में विश्व की जनसंख्या 7 अरब से भी ज्यादा है। इस जनसंख्या को यहां तक पहुंचने में कई सदियां लग गई है। समस्त विश्व को 1 अरब से 2 अरब तक की आबादी होने में 100 सालों का समय लगा था। लेकिन 2 अरब से 3 अरब होने में मात्र 30 साल लगे, वहीं 3 से 4 अरब होने में 15 साल लगे थे। उसके बाद से यह अंतर और कम हो गया। औद्योगिक क्रांति के बाद अठारहवीं शताब्दी में विश्व जनसंख्या में विस्फोट हुआ था। तकनिकी प्रगति की वजह से मृत्यु दर में गिरावट आई जो कि जनसंख्या विस्फोट का एक बहुत बड़ा कारण बना। भारत में भी जनसंख्या विस्फोट देखा गया था।

1951 में भारत की जनसंख्या मात्र 36.1 करोड़ थी जो 2011 की जनगणना में 121.02 करोड़ हो गई। और अब यह लगभग 135 करोड़ के ऊपर है। अगर किसी क्षेत्र की जनसंख्या बढ़ती है तो उसका मतलब है कि वहाँ का मृत्यु दर कम है और जन्म दर ज्यादा। यह दर्शाता है कि उस जगह पर चिकित्सकीय सुविधाएं अच्छी है। लेकिन बढ़ती जनसंख्या देश के लिए मुसीबत का सबब भी बन सकती है, क्योंकि जनसंख्या में वृद्धि हुई है किन्तु साधनों में नहीं। भारत के साथ भी यही समस्या है। लगातार जनसंख्या बढ़ने से कई जगहों पर साधनों की कमी महसूस होने लगी है।

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