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मनोरंजन

Sushant Singh Rajput Death Anniversary: सुशांत की बेहतरीन फिल्में

बॉलीवुड दुनिया में सुशांत सिंह ने अपने बेहतरीन प्रदर्शन से खूब नाम कमाया। उनकी हर एक फिल्म एक संदेश दिया करती थी। आइए आज उनकी बेहतरीन फिल्मों की बात करें।

सुशांत सिंह राजपूत के असामयिक निधन को आज एक साल हो गया है| (Wikimedia Commons)

सुशांत सिंह राजपूत के असामयिक निधन को आज एक साल हो गया है, जिसने पूरी फिल्म बिरादरी यहां तक की पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। हालांकि सुशांत की मौत की असली वजह अब तक खुल कर सामने नहीं आई है लेकिन लोगों का यही कहना और मानना है कि, सुशांत की मौत व्यक्तिगत और व्यवसायिक कारणों की वजह से हुई है। 

बॉलीवुड दुनिया में सुशांत सिंह ने अपने बेहतरीन प्रदर्शन से खूब नाम कमाया। उनकी हर एक फिल्म एक संदेश दिया करती थी। आइए आज हम उनकी कुछ बेहतरीन फिल्मों की बात करें। 


“Dil Bechara”

सुशांत सिंह राजपूत की यह आखिरी फिल्म थी। यह जॉन ग्रीन के उपन्यास “फॉल्ट इन आवर स्टार” (The Fault in Our Stars) से प्रेरित एक रीमेक है। मुकेश छाबड़ा द्वारा अभिनीत, इसमें संजना सांघी महत्वपूर्ण भूमिका में हैं। हालांकि इस फ़िल्म को सिनेमाघरों में रिलीज किया जाता लेकिन सुशांत की मौत के बाद इस फिल्म को डिजिटल मीडिया पर उतारा गया और लोगों ने सुशांत को श्रद्धांजलि के रूप में उनकी इस आखिरी फिल्म को देखा और हमेशा की भांति अपना खूब प्यार दिया। 

(Image: Twitter)

‘Chhichhore’

सुशांत सिंह राजपूत, नितेश तिवारी की फिल्म “छिछोरे” में भी नजर आए थे। फिल्म में श्रद्धा कपूर ने उनके साथ एक अहम भूमिका निभाई थी। यह फिल्म सुशांत की मौत से पहले उनकी अंतिम नाटकीय रूप से रिलीज हुई फिल्म थी। इस फिल्म में सुशांत ने एक दोस्त और पिता के रूप में अपना किरदार बखूभी निभाया था। 

(Image: Twitter)

‘Kedarnath’

यह फिल्म केदारनाथ 2013 में उत्तराखंड बाढ़ की पृष्ठ भूमि पर आधारित है। इस फिल्म में सुशांत सिंह के साथ “सारा अली खान” ने अपना बेहतरीन प्रदर्शन किया था। सुशांत और सारा की केमिस्ट्री ने इस फिल्म से बहुत नाम कमाया। 

(Image: Twitter)

‘M.S Dhoni: The Untold Story’

नीरज पांडे द्वारा निर्देशित और महेंद्र सिंह धोनी के जीवन पर आधारित “एम. एस धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी।” इस फिल्म में सुशांत सिंह ने Mahendra Singh Dhoni का किरदार निभाया था। जिसके बाद सुशांत ने अपने शानदार प्रदर्शन के लिए पुरुस्कार नामांकन भी अर्जित किए। यहां तक की उनकी आलोचना करने वालों ने भी उनके प्रदर्शन की व्यापक प्रशंशा की। आपको बता दें कि 2016 की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली बॉलीवुड फ़िल्मों में से एक थी। 

(Image: Twitter)

‘Kai Po Che’

“काई पो चे” यह सुशांत की डेब्यू फिल्म है। अभिषेक कपूर द्वारा निर्देशित और चेतन भगत के उपन्यास “द 3 मिस्टेक्स ऑफ माई लाइफ” पर आधारित है। इस फिल्म की कहानी दोस्तों के इर्द गिर्द घूमती है। राजकुमार राव और अमित साध ने भी इस फिल्म में सुशांत के साथ अपना अभिनय किया है और अमृता पूरी ने महिला किरदार की भूमिका निभाई है। 

(Image: Twitter)

‘Sonchiriya’

अभिषेक चौबे द्वारा निर्देशित “सोनचिरैया” में सुशांत सिंह राजपूत, भूमि पेडनेकर, मनोज बाजपेयी आदि ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। 2019 की यह फिल्म 1975 में हुई डकैती पर आधारित है। हालांकि यह फिल्म दर्शकों को प्रभावित नहीं कर पाई थी। इस फिल्म की विफलता के बाद सुशांत ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट से इस फिल्म से संबंधित सभी पोस्ट को डिलीट भी कर दिया था। 

(Image: Twitter)

यह भी पढ़ें :- Irrfan Khan: ‘एक कलाकार जिसकी आज भी दुनिया कायल है’

सुशांत सिंह राजपूत के निधन को एक साल पुरे होने पर अंकिता लोखंडे (Ankita Lokhande) ने दिवंगत अभिनेता को याद करते हुए कहा “वह एक शानदार अभिनेता, शानदार सह – कलाकार थे और मैं उनके साथ काम करने के लिए बहुत भाग्यशाली थी। (SM) 

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Wikimedia Commons)

शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) सम्मेलन को संम्बोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चरमपंथ और कट्टरपंथ की चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए एससीओ द्वारा एक खाका विकसित करने का आह्वान किया। 21वीं बैठक को संम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मध्य एशिया में अमन के लिए सबसे बड़ी चुनौती है विश्वास की कमी।

इसके अलावा, पीएम मोदी ने विश्व के नेताओं से यह सुनिश्चित करने का आह्वान किया कि मानवीय सहायता अफगानिस्तान तक निर्बाध रूप से पहुंचे। मोदी ने कहा, "अगर हम इतिहास में पीछे मुड़कर देखें, तो हम पाएंगे कि मध्य एशिया उदारवादी, प्रगतिशील संस्कृतियों और मूल्यों का केंद्र रहा है।
"भारत इन देशों के साथ अपनी कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है और हम मानते हैं कि भूमि से घिरे मध्य एशियाई देश भारत के विशाल बाजार से जुड़कर अत्यधिक लाभ उठा सकते हैं"

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ओला इलेक्ट्रिक के स्कूटर।(IANS)

ओला इलेक्ट्रिक ने घोषणा की है कि कंपनी ने 600 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के ओला एस1 स्कूटर बेचे हैं। ओला इलेक्ट्रिक का दावा है कि उसने पहले 24 घंटों में हर सेकेंड में 4 स्कूटर बेचने में कामयाबी हासिल की है। बेचे गए स्कूटरों का मूल्य पूरे 2डब्ल्यू उद्योग द्वारा एक दिन में बेचे जाने वाले मूल्य से अधिक होने का दावा किया जाता है।

कंपनी ने जुलाई में घोषणा की थी कि उसके इलेक्ट्रिक स्कूटर को पहले 24 घंटों के भीतर 100,000 बुकिंग प्राप्त हुए हैं, जो कि एक बहुत बड़ी सफलता है। 24 घंटे में इतनी ज्यादा बुकिंग मिलना चमत्कार से कम नहीं है। इसकी डिलीवरी अक्टूबर 2021 से शुरू होगी और खरीदारों को खरीद के 72 घंटों के भीतर अनुमानित डिलीवरी की तारीखों के बारे में सूचित किया जाएगा।

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अमिताभ बच्चन के साथ बातचीत करते हुए, भारत के गोलकीपर पीआर श्रीजेश (IANS)

केबीसी यानि कोन बनेगा करोड़पति भारतीय टेलिविज़न का एक लोकप्रिय धारावाहिक है । यहा पर अक्सर ही कई सेलिब्रिटीज आते रहते है । इसी बीच केबीसी के मंच पर भारत की हॉकी टीम के गोलकीपर पीआर श्रीजेश पहुंचे । केबीसी 13' पर मेजबान अमिताभ बच्चन के साथ बातचीत करते हुए, भारत के गोलकीपर पीआर श्रीजेश 41 साल बाद हॉकी में ओलंपिक पदक जीतने को लेकर बात की। श्रीजेश ने साझा किया कि "हम इस पदक के लिए 41 साल से इंतजार कर रहे थे। साथ उन्होंने ये भी कहा की वो व्यक्तिगत रूप से, मैं 21 साल से हॉकी खेल रहे है। आगे श्रीजेश बोले मैंने साल 2000 में हॉकी खेलना शुरू किया था और तब से, मैं यह सुनकर बड़ा हुआ हूं कि हॉकी में बड़ा मुकाम हासिल किया, हॉकी में 8 गोल्ड मेडल मिले। इसलिए, हमने खेल के पीछे के इतिहास के कारण खेलना शुरू किया था। उसके बाद हॉकी एस्ट्रो टर्फ पर खेली गई, खेल बदल दिया गया और फिर हमारा पतन शुरू हो गया।"

जब अभिनेता अमिताभ बच्चन ने एस्ट्रो टर्फ के बारे में अधिक पूछा, तो उन्होंने खुल के बताया।"इस पर अमिताभ बच्चन ने एस्ट्रो टर्फ पर खेलते समय कठिनाई के स्तर को समझने की कोशिश की। इसे समझाते हुए श्रीजेश कहते हैं कि "हां, बहुत कुछ, क्योंकि एस्ट्रो टर्फ एक कृत्रिम घास है जिसमें हम पानी डालते हैं और खेलते हैं। प्राकृतिक घास पर खेलना खेल शैली से बिल्कुल अलग है। "

इस घास के बारे में आगे कहते हुए श्रीजेश ने यह भी कहा कि "पहले सभी खिलाड़ी केवल घास के मैदान पर खेलते थे, उस पर प्रशिक्षण लेते थे और यहां तक कि घास के मैदान पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी खेलते थे। आजकल यह हो गया है कि बच्चे घास के मैदान पर खेलना शुरू करते हैं और बाद में एस्ट्रो टर्फ पर हॉकी खेलनी पड़ती है। जिसके कारण बहुत समय लगता है। यहा पर एस्ट्रो टर्फ पर खेलने के लिए एक अलग तरह का प्रशिक्षण होता है, साथ ही इस्तेमाल की जाने वाली हॉकी स्टिक भी अलग होती है।" सब कुछ बदल जाता है ।

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