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देश

'कृषि उड़ान 2.0' योजना कृषि क्षेत्र के विकास के नए रास्ते खोलेगी: सिंधिया

नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने कृषि उड़ान 2.0 योजना को छह महीने के लिए शुरू करने की योजना बनाई है और यह अन्य हितधारकों के साथ मूल्यांकन और परामर्श के परिणामों के आधार पर संशोधन पेश करेगा।

नागरिक उड्डयन मंत्रालय की तरफ से चलाई जा रही है कृषि उड़ान 2.O योजना(Wikimedia commons)

नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया(Jyotiraditya Scindia) ने बुधवार को कृषि उड़ान 2.0' योजना का शुभारंभ करने के लिए आयोजित एक कार्यक्रम में भाग लिया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सिंधिया ने कहा कि 'कृषि उड़ान 2जेड.0' आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं को दूर कर किसानों की आय दोगुनी करने में मदद करेगी। यह योजना हवाई परिवहन द्वारा कृषि-उत्पाद की आवाजाही को सुविधाजनक बनाने और प्रोत्साहित करने का प्रस्ताव करती है।

सिंधिया(Jyotiraditya Scindia) ने कहा, "यह योजना कृषि क्षेत्र के लिए विकास के नए रास्ते खोलेगी और आपूर्ति श्रृंखला, रसद और कृषि उपज के परिवहन में बाधाओं को दूर करके किसानों की आय को दोगुना करने के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद करेगी। क्षेत्रों (कृषि और विमानन) के बीच अभिसरण तीन प्राथमिक कारणों से संभव है - भविष्य में विमान के लिए जैव ईंधन का विकासवादी संभावित उपयोग, कृषि क्षेत्र में ड्रोन का उपयोग और योजनाओं के माध्यम से कृषि उत्पादों का एकीकरण और मूल्य प्राप्ति।"


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अपको बता दें, कृषि उड़ान योजना का उन्नत संस्करण भारतीय मालवाहकों के लिए 'लैंडिंग, पार्किंग, टीएनएलसी और आरएनएफसी शुल्क की पूर्ण छूट प्रदान करता है और भारतीय लड़ाकू विमानों और 'पी2सी' के संचालन के लिए मुख्य रूप से पहाड़ी और जनजातीय क्षेत्र को ध्यान में रखते हुए करते हुए भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के चयनित हवाईअड्डों पर ध्यान केंद्रित करता है। इसे देशभर में 53 हवाईअड्डों पर मुख्य रूप से पूर्वोत्तर और आदिवासी क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करते हुए लागू किया जाएगा और इससे किसानों, माल भाड़ा और एयरलाइंस को लाभ होने की संभावना है।

Input: आईएएनएस; Edited By: Lakshya Gupta

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राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता लालू प्रसाद [Wikimedia Commons]

कार्ल मार्क्स द्वारा कहा गया है की भ्रष्टाचार वेश्यावृत्ति से भी बदतर है। वेश्यावृत्ति किसी व्यक्ति की नैतिकता को खतरे में डालती है , भ्रष्टाचार निर्विवाद रूप से पूरे देश की नैतिकता को खतरे में डालता है। अपने देश की बात करें तो यहां समय समय पर कई तरह के भ्रष्टाचार होते रहे हैं। देश में अब तक के सबसे बड़े घोटालों में से एक है 'चारा घोटाला'। सन् 1996 से सामने आए इस 900 करोड़ रुपये के घोटाले को आज 20 वर्ष से ज्यादा हो चूका है। इसमें प्रशासन के कई बड़े नेता और और नौकरशाह शामिल थे, जिन्होंने अपने राज्यकाल में पशुओं के लिए चारा खरीदने वाले पैसे तक को हड़प लिया और करोड़ों की हेर-फेर की। इसमें बड़े नामों में सबसे पहले नाम आता है राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता लालू प्रसाद यादव का। उनके साथ उस वक्त के मौजूदा विधायकों को भी दोषी ठहराया गया था और उन्हें अपनी विधानसभा और संसदीय सीटें गंवानी पड़ी थी।

यह हेर फेर तब सामने आया था जब बिहार और झारखण्ड एक ही राज्य हुआ करता था। चारा घोटाला के 64 मामलों में केस दर्ज किये गए थे और जब सन 2000 में बिहार से अलग होकर झारखण्ड एक अलग राज्य बना तब 64 मामलों से 53 पर रांची में मुकदमा चलाया गया था।

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बिहार के पंचायत चुनाव। (WIKIMEDIA COMMONS)

पंचायत चुनावों के बीच बिहार के ग्रामीण इलाकों में लोगों ने जीवन की अच्छी चीजों का स्वाद विकसित किया है, जहां उम्मीदवार उन्हें महंगे उपहार दे रहे हैं। एक बेरोजगार व्यक्ति और भोजपुर जिले के संदेश ब्लॉक के मूल निवासी राम अवतार शॉ (44) ने इन दिनों सिगरेट पीना शुरू कर दिया है।
शॉ ने कहा, "चूंकि जिले में पंचायत चुनाव चल रहे है, मैं कई अन्य लोगों के साथ सुबह के समय गांव के चाय की दुकानों पर इकट्ठा होता था। हमें पता था कि पंचायत चुनाव में जो उम्मीदवार मैदान में हैं, वे वहां प्रचार करने आएंगे, हमें नाश्ता, चाय और मिठाई देंगे। मैं बीड़ी पीता था जो 3 रुपये प्रति पैकेट पर उपलब्ध हैं और प्रत्येक पैकेट में 20 बीड़ी निकलती हैं। चूंकि क्षेत्र में चुनाव अभियान शुरू हो गया है, उम्मीदवार या उनके समर्थक हमें सिगरेट के पैकेट की पेशकश करते हैं।" शॉ ने कहा, "उम्मीदवारों ने युवाओं के स्वाद को भी उन्नत किया है। जो लोग तंबाकू और पान मसाला के आदी हैं, वे उम्मीदवारों के सौजन्य से महंगे ब्रांड का सेवन कर रहे हैं।"

एक बेरोजगार युवक कीरथ शर्मा (26) ने कहा, "उम्मीदवार पेट्रोल के लिए कूपन जैसी कई चीजों की पेशकश कर रहे हैं। कुछ उम्मीदवारों ने ईंधन स्टेशनों के साथ करार किया है और 100 रुपये और 200 रुपये मूल्य के हस्तलिखित कूपन दे रहे हैं जो हम विशेष रूप से ईंधन स्टेशन और हमारी बाइक में पेट्रोल भरवाने के लिए जमा कर रहे हैं।" कीरथ शर्मा ने कहा, "उम्मीदवार संभावित मतदाताओं को दोपहर और रात के खाने के लिए आमंत्रित कर रहे हैं, जहां वे वोट पाने की उम्मीद में आमंत्रित लोगों को मांसाहारी भोजन और शराब की पेशकश करते हैं। उम्मीदवारों के समर्थक आमंत्रित लोगों के नाम और पते लेते हैं और उन्हें ईंधन कूपन वितरित करते हैं।"

कई गांवों में जहां शराबबंदी लागू है, वहां गुप्त शराब पार्टी का आयोजन मुख्य आकर्षण बन रहा है। जो लोग पहले देशी शराब का सेवन करने के लिए शराब भट्टी (स्थानीय शराब निर्माण इकाइयों) में जाते थे, वे इन शराब पार्टियों की ओर जा रहे हैं और भारतीय निर्मित विदेशी शराब (आईएमएफएल) का सेवन कर रहे हैं। इसके बाद रात के खाने के लिए मछली-चावल या मांस-चावल का सेवन कर रहे हैं। उम्मीदवार आमंत्रितों के साथ जीत और हार के बिंदुओं पर चर्चा करते हैं और उनसे अपने पक्ष में वोट डालने का अनुरोध करते हैं।

बार-बार होने वाली पार्टियों के चलते इन दिनों बिहार में शराब की मांग बढ़ गई है। बिहार की शराबबंदी इकाई द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, बिहार में आदर्श आचार संहिता लागू होने के बाद से विभाग ने 4.5 लाख लीटर आईएमएफएल और देशी शराब जब्त की है। सितंबर में 1.4 लाख लीटर से अधिक जब्त किया गया था। बिहार में पंचायत चुनाव के दौरान शराब की खपत कई बार सार्वजनिक हो चुकी है। ऐसी ही एक घटना 19 सितंबर को गया में हुई जब पुलिस ने भाजपा के किसान विंग के जिला उपाध्यक्ष धर्मजीत सिंह और जगरनाथपुर पंचायत मुखिया धर्मेंद्र सिंह सहित पांच लोगों को शराब पीने और गुंडागर्दी करने के आरोप में गिरफ्तार किया।

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फतेहपुर थाने के एसएचओ मनो राम ने कहा, 'हमने शराबबंदी कानून बिहार 37 बी/सी के तहत उनके खिलाफ मामला दर्ज कर जेल भेज दिया है। '
बिहार के चुनाव आयोग के प्रमुख दीपक कुमार ने चेतावनी दी, "जो लोग शराब के सेवन या आदर्श आचार संहिता के किसी अन्य उल्लंघन में शामिल हैं, उन्हें कानून के अनुसार कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।"

बिहार के डीजीपी एसके सिंघल ने कहा, "शांतिपूर्ण पंचायत चुनाव कराना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। हमने सभी जिलों को संवेदनशील क्षेत्रों में गश्त तेज करने और अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।"

उन्होंने कहा, "हमने उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और झारखंड के डीजीपी को इन राज्यों की सीमाओं पर अपने सुरक्षाकर्मियों के साथ समन्वय स्थापित करने के लिए पत्र लिखा है। इसके अलावा, हमने सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के डीजीपी से भी अवैध गतिविधियों पर कड़ी नजर रखने और नेपाल से जुड़ी सीमाओं पर गतिविधियों का ध्यान रखने का अनुरोध किया है।"



बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार। (Twitter, Nitish Kumar)

जातीय जनगणना को लेकर बिहार में सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के दो बडे दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जनता दल (युनाइटेड) अब सीधे तौर पर आमने-सामने नजर आने लगे हैं। केंद्र की भाजपा नीत राजग सरकार जहां जाति आधारित जनगणना कराने से इंकार कर रही है वहीं जदयू के नेता नीतीश कुमार इस मामले को लेकर विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के साथ मुखर हैं। ऐसे में कयास लगाया जाने लगा है कि क्या फिर से बिहार की सियासी समीकण बदलेंगे। हालांकि इस मुद्दे को लेकर कोई भी नेता अब तक खुलकर बात नहीं कर रही है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दिल्ली में रविवार को स्पष्ट कर चुके हैं कि जाति जनगणना देश के लिए जरूरी है। उन्होंने दिल्ली में कहा कि केंद्र सरकार को जातिगत जनगणना करानी चाहिए। इसके कई फायदे हैं।

उन्होंने कहा कि आजादी के पहले जनगणना हुई थी, आजादी के बाद नहीं हुई। जातीय जनगणना होगी तभी लोगों के बारे में सही जानकारी होगी। तब पता चलेगा कि जो पीछे है, उसे आगे कैसे किया जाए। जातीय के साथ उपजातीय जनगणना भी कराई जाए। उन्होंने यह भी कहा कि इसको लेकर एक बार फिर राज्य में सभी दलों के साथ बैठक कर आगे का निर्णय लेंगे। नीतीश के इस बयान के बाद तय है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जातिगत जनगणना के मामले में पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। इधर, भाजपा के नेता इसमें व्यवहारिक दिक्कत बता रहे हैं।

बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और सांसद सुशील कुमार मोदी कहते हैं कि तकनीकी और व्यवहारिक तौर पर केंद्र सरकार के लिए जातीय जनगणना कराना संभव नहीं है। इस बाबत केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार अगर चाहे तो वे जातीय जनगणना कराने के लिए स्वतंत्र है।


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