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देश

पंजाब में कैप्टन की पारी समाप्त

कैप्टन अमरिंदर सिंह ने शनिवार को पंजाब के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया।

पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह (wikimedia commons)

हाल ही में कांग्रेस की पंजाब इकाई के प्रमुख के रूप में नियुक्त किए गए नवजोत सिंह सिद्धू के साथ जारी राजनीतिक खींचतान के बीच कैप्टन अमरिंदर सिंह ने शनिवार को पंजाब के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। राजभवन के गेट पर 79 वर्षीय अमरिंदर सिंह ने कहा कि वह खुद को अपमानित महसूस कर रहे हैं। बात यह है कि यह एक महीने में तीसरी बार हो रहा है कि विधायकों को बैठक के लिए बुलाया जा रहा है, मेरे नेतृत्व पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

अमरिंदर सिंह का यह फैसला कांग्रेस के लिए मुसीबत बन सकता है क्योंकि पंजाब के चुनाव में 6 महीने से भी काम के समय रह गया है। अमरिंदर सिंह ने कहा कि "मैंने आज सुबह कांग्रेस अध्यक्ष (सोनिया गांधी) को फोन किया और उनसे कहा कि मैं इस्तीफा देने जा रहा हूं। उन्होंने कहा कि भविष्य की रणनीति उनके समर्थकों से चर्चा के बाद तय की जाएगी।


बहुत से लोगों का कहना है कि इस कदम से आगामी राज्य चुनावों में कांग्रेस को नुकसान हो सकता है। जिसकी वजह से कांग्रेस की चिंता और बढ़ गई है। ऐसा माना जा रहा है कि पार्टी आलाकमान ने मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह को इस्तीफा देने के लिए कहा था, जिसके बाद यह फैसला लिया गया। पंजाब कांग्रेस प्रभारी हरीश रावत ने शनिवार को तत्काल सीएलपी की बैठक बुलाने के फैसले के बारे में ट्वीट किया था जिसके बाद से ही माहौल में गर्मी आ गई थी। इसके कुछ मिनट बाद ही नवजोत सिंह सिद्धू ने सभी को बैठक में उपस्थित रहने के निर्देश दिए थे। इसके बाद ही अटकलें लगनी शुरू हो गई थी। बैठक में विधायकों ने अमरिंदर सिंह से असंतोष जताया और उन्हें मुख्यमंत्री पद से हटाने की मांग की।

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सुनील जाखड़ ने ट्वीट किया कि "हैरानी की बात यह है कि पंजाब कांग्रेस के विवाद को सुलझाने के इस साहसिक निर्णय ने न केवल कांग्रेस कार्यकर्ताओं को रोमांचित किया है बल्कि अकालियों की रीढ़ की हड्डी को झकझोर कर रख दिया है"। ऐसा माना जा रहा है कि सुनील जाखड़ का नाम भी मुख्यमंत्री के पद के लिए दिया जा सकता है।

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