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मनोरंजन

पद्मिनी कोल्हापुरे ने गाया 'ये गलियां ये चौबारा' का नया वर्जन

अपनी बेटी की शादी के समय एक मां जो भावनाओं से गुजरती है, उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता है: पद्मिनी कोल्हापुरे

अभिनेत्री पद्मिनी कोल्हापुरे (Padmini Kolhapure) [Wikimedia Commons]

'दिल बेकरार' से वापसी करने के बाद, अनुभवी अभिनेत्री पद्मिनी कोल्हापुरे (Padmini Kolhapure) ने प्रतिष्ठित गीत 'ये गलियां ये चौबारा' का नया वर्जन गाया है। इस गाने में बचपन से युवा लड़की की शादी के दिन तक आदर्श मां-बेटी के बंधन को दर्शाती एक एक प्यारी छवि देखने को मिलती है।

उसी पर बोलते हुए, पद्मिनी कहती हैं कि अपनी बेटी की शादी के समय एक मां जो भावनाओं से गुजरती है, उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता है। खुशी से लेकर दुख तक खालीपन की भावना तक, एक समय में बहुत सी चीजें महसूस होती हैं। 'ये गलियां ये चौबारा' उन सभी भावनाओं का प्रतिपादन है।

मूल रूप से लता मंगेशकर द्वारा गाया गया गीत पद्मिनी की अत्यधिक प्रशंसित फिल्म 'प्रेम रोग' का है, जिसे राज कपूर ने निर्देशित किया था।

प्रतिष्ठित ट्रैक पर काम करने के अनुभव के बारे में बताते हुए, अभिनेत्री (Padmini Kolhapure) कहती हैं कि एक ही गीत को गाना एक भावनात्मक रोलर कोस्टर की तरह था और जिस तरह से इसे आकार दिया गया है, उस पर मुझे बहुत गर्व है। लता जी द्वारा गाए गए गाने को आवाज दी गई है। मैं यह देखने के लिए उत्साहित हूं कि दर्शक वीडियो पर कैसे प्रतिक्रिया देते हैं।

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गाने का फिर से बनाया गया संस्करण सारेगामा और धमाका रिकॉर्डस द्वारा प्रस्तुत किया गया है और 6 दिसंबर को प्रसारित होगा। (आईएएनएस)

Input: IANS ; Edited By: Manisha Singh

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(wikimedia commons)

देश के केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह


देश के केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह देश के केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को एक कार्यक्रम में हिंदी भाषा की तारीफ करते हुए कहा कि हिंदी भाषा किसी अन्य क्षेत्रीय भाषा के साथ प्रतिस्पर्धा या मुकाबला नहीं कर रही है, यह अन्य क्षेत्रीय भाषाओं की पूरक है या पूर्वज है । अमित शाह ने हिंदी दिवस पर यहां आयोजित एक समारोह में बोलते हुए उन्होंने कहा, "हिंदी सभी भारतीय भाषाओं की सखी (मित्र) कि तरह है और सभी क्षेत्रीय भाषाओं को बढ़ावा और प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।"
इस बात पर उन्होंने भी जोर दिया कि हिंदी भाषा जो की देश में सवार्धिक बोली जाने वाली भाषा है , किसी भी क्षेत्रीय भाषा के साथ प्रतिस्पर्धा नहीं कर रही है। हिंदी ने केवल अन्य क्षेत्रीय भाषाओं को पूरक और मजबूत किया है। इसने कभी किसी स्थानीय भाषा के साथ प्रतिस्पर्धा नहीं की है।
भारत की संस्कृति और मूल्य प्रणालियों को समझने के लिए अधिकारियों और युवाओं द्वारा हिंदी के अधिक से अधिक उपयोग पर जोर देते हुए शाह ने आगे कहा कि 2014 से अधिक से अधिक संसद सदस्य अपनी क्षेत्रीय भाषाओं में बोल रहे हैं।

साथ ही अमित शाह ने प्रधानमंत्री मोदी के आत्मनिर्भर भारत के आहवान का जिक्र करते हुए, कहा कि देश को भाषाओं के साथ भी आत्मनिर्भर होने की जरूरत है और देश के लोगों से अपनी मातृभाषा के साथ हिंदी का उपयोग करने का संकल्प लेने का आग्रह किया।

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