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बीपी कंट्रोल करने में मदद करेगा मोबाइल ऐप

विज्ञान और टेक्नोलॉजी के इस जमाने में जहां टेक्नोलॉजी एक ओर घातक साबित होती है तो वहीं दूसरी ओर मनुष्य के काफी काम आसान भी बनाती है।

हेलो हार्ट फंक्शन की सहायता से कंट्रोल में रहेगा बीपी(Wikimedia Commons)

विज्ञान और टेक्नोलॉजी के इस जमाने में जहां टेक्नोलॉजी एक ओर घातक साबित होती है तो वहीं दूसरी ओर मनुष्य के काफी काम आसान भी बनाती है। दरअसल, लगभग 28,000 वयस्कों पर तीन साल के लंबे अध्ययन से पता चला है कि स्मार्टफोन ऐप और कनेक्टेड मॉनिटर उनके ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में मदद कर सकता है। हेलो हार्ट एक फंक्शन है जिसमे लोगों को उनके ब्लड प्रेशर, वजन और शारीरिक गतिविधि पर नजर रखने, और ब्लड प्रेशर को प्रबंधित करने के तरीके के बारे में सुझाव देता है। हैलो हार्ट' फंक्शन में एक ब्लड प्रेशर मॉनिटर शामिल है जो स्वचालित रूप से सीधे ऐप पर रीडिंग भेजता है।

ऐप रीडिंग पर नजर रखता है और स्वचालित रूप से उपयोगकर्ताओं को आहार और व्यायाम जैसी चीजों के साथ अपने रक्तचाप में सुधार करने का सुझाव देता है। एक मोबाइल ऐप उच्च रक्तचाप स्व-प्रबंधन कार्यक्रम दीर्घकालिक कंट्रोल बीपी और बहुत उच्च बीपी का पता लगाने में सहायता कर सकता है। आप कोबतादे, मोबाइल प्रौद्योगिकी-सुविधा वाले बीपी स्व-प्रबंधन हस्तक्षेपों के पिछले अध्ययनों में बीपी नियंत्रण के साथ महत्वपूर्ण संबंध पाए गए हैं।


3 साल के लंबे शोध से मिली जानकारी।(Wikimedia Commons)


शोधकर्ताओं ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रमों से लोगों के बीपी की निगरानी और नियंत्रण में सुधार हो सकता है। जामा नेटवर्क ओपन जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, कार्यक्रम के एक वर्ष के बाद, चरण 2 उच्च रक्तचाप वाले 85 प्रतिशत से अधिक लोगों के सिस्टोलिक दबाव में कमी आई, जो तीन वर्षों के दौरान निचले स्तर पर रहा।

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अध्ययन के लेखकों ने कहा, "हमारे ज्ञान के लिए, यह उच्च रक्तचाप प्रबंधन के लिए डिजिटल स्वास्थ्य अनुप्रयोग के साथ दीर्घकालिक अनुभव की रिपोर्ट करने वाला पहला अध्ययन है, जो संभावित रूप से चिकित्सकीय रूप से सार्थक है।"

Input: आईएएनएस ; Edited By: Lakshya Gupta

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ऐसे ही इतिहास में बहुत समय पहले एक जानलेवा बीमारी HIV- AIDS फैली थी। यह असुरक्षित यौन संबंधों से होने वाली एक खतरनाक बीमारी है। उस वक्त AIDS ने बड़े स्तर पर लोगों को प्रभावित किया था। जिसके बाद लंबे समय तक चले वैज्ञानिकों के शोध के बाद इस बीमारी के खिलाफ वैक्सीन बनाने में कामयाबी मिली थी और इसलिए HIV- AIDS के टीकाकरण के लिए लोगों में जागरूकता फैलाने के लिए प्रतिवर्ष 18 मई को विश्व AIDS टीकाकरण दिवस मनाया जाता है। यह दिन इसलिए भी मनाया जाता है, ताकि उन सभी वैज्ञानिकों को धन्यवाद किया जा सके, जिन्होंने इस बीमारी के खिलाफ वैक्सीन की एक सफल खोज की थी। इस वर्ष विश्व AIDS दिवस की थीम “वैश्विक एकजुटता” है। 

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