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कई वर्षों से टीम को सेवा दे रहे हैं श्रीधर(Wikimedia commons)

भारतीय टीम के फील्डिंग कोच रामाकृष्णन श्रीधर जिनका टीम के साथ टी20 विश्व कप आखिरी दौरा है, उन्होंने राष्ट्रीय टीम की सेवा करने का मौका देने के लिए भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) को धन्यवाद दिया। आपको बता दें श्रीधर का कार्यकाल टी20 विश्व कप के बाद खत्म हो रहा है। फील्डिंग कोच ने इंस्टाग्राम के जरिए अपने विचार प्रकट किए।





श्रीधर ने इंस्टाग्राम पर लिखा, "अब जब मैं भारतीय क्रिकेट टीम के फील्डिंग कोच के रूप में अपने अंतिम दौरे पर हूं तो मैं बीसीसीआई को 2014 से 2021 तक टीम की सेवा करने का अवसर देने के लिए धन्यवाद देता हूं। मुझे विश्वास है कि मैंने अपना काम जुनून, ईमानदारी, प्रतिबद्धता और अपनी सर्वश्रेष्ठ क्षमताओं के साथ पूरा किया है।"इसके अलावा श्रीधर ने कोच रवि शास्त्री को भी धन्यवाद देते हुए कहा ,"शास्त्री को विशेष रूप से धन्यवाद जो एक प्रेरणास्रोत्र लीडर हैं। मैं भाग्यशाली हूं जिसे प्रतिभाशाली क्रिकेटरों के साथ काम करने और इन्हें कोचिंग देने का मौका मिला। मैंने रिश्तों को बढ़ावा दिया और यादें बनाईं जिन्हें मैं जीवन भर संजो कर रखूंगा।"


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आपको बता दें मुख्य कोच रवि शास्त्री का भी कार्यकाल t20 विश्व कप के बाद खत्म हो जाएगा जिस कारण बीसीसीआई ने मुख्य कोच के पद के लिए आवेदन मंगाए हैं जिसकी डेडलाइन 26 अक्टूबर है।Input आईएएनएस

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गुरु नानक देव ब्राह्मणों को उपदेश दे रहे हैं। (Wikimedia Commons)

हिंदू कैलेंडर के मुताबिक हर साल कार्तिक शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि पर सिख धर्म के पहले गुरु, गुरु नानक देव जी की जयंती मनाई जाती है। इस साल उनकी जयंती 30 नवंबर को है। उनकी जयंती के अवसर पर मैं आप लोगों को उनसे जुड़ी एक कहानी के बारे में बताना चाहूंगा। यह उस समय की बात है जब…

गुरु नानक देव जी अलग अलग जगहों की यात्रा कर लोगों को मानवता की सीख दे रहे थे। ऐसे ही एक दिन, उन्होंने अपना रास्ता हरिद्वार की ओर किया। हरिद्वार; जहाँ गंगा, यमुना और सरस्वती का संगम होता है, जहाँ के लोगों पर निराकारी शिव, परम सत्य विष्णु और परम पिता ब्रह्मा की असीम कृपा है।

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गुरुद्वारा डेरा साहिब, लाहौर (Wikimedia Commons)

पाकिस्तान में रह रहे सिख समुदाय ने कहा है कि वह गुरु ग्रंथ साहिब की एक हस्तलिखित प्रति को गुरुद्वारा डेरा साहिब में रखना चाहता है। अभी यह प्रति लाहौर के एक संग्रहालय में डिस्प्ले में रखी हुई है। अनुमान है कि यह प्रति करीब 300 साल पुरानी है। द एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने बुधवार को एक रिपोर्ट में कहा है कि विशेषज्ञों के मुताबिक सिखों के पवित्र ग्रंथ की हस्तलिखित प्रति बेहद दुर्लभ है।

शोधकर्ता और लाहौर संग्रहालय में सिख धर्म को समर्पित सेक्शन की प्रभारी अलीजा सबा रिजवी ने कहा, “हालांकि इस पर कोई तारीख नहीं है लेकिन इसके लेखन और स्याही से पता चलता है कि यह तीन सौ साल से अधिक पुराना है।”

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