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राजनीति

कांग्रेस "युक्त" भारत से कांग्रेस "मुक्त" भारत तक !

इसके दो कारण थे एक तो कांग्रेस(Congress) में समाज के हर वर्ग और विचारधारा से जुड़े नेता थे तो दूसरी तरफ उसने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का सामने से नेतृत्व किया था।

कांग्रेस का गठन 25 दिसंबर 1885 में किया गया था। (Wikimedia Commons)

हमारा देश जब 1947 में आज़ाद हुआ था तब हमारे सामने यह बहुत बड़ा सवाल था की हमारे देश का नेतृत्व कौन करेगा? क्योंकि तब न तो हमारे देश के नेताओं ने कभी शासन किया था और न ही हमारे देश के लोगों के पास लोकतंत्र में रहने का अनुभव था। तब देश का नेतृत्व करने की ज़िम्मेदारी स्वतंत्रता आंदोलन का नेतृत्व करने वाली भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस(Indian National Congress) को दी गई। इसके दो कारण थे एक तो कांग्रेस में समाज के हर वर्ग और विचारधारा से जुड़े नेता थे, तो दूसरी तरफ उसने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का सामने से नेतृत्व किया था।

कांग्रेस के वर्चस्व की शुरुवात


congress, jawahar lal nehru, indira gandhi, rajiv gandhi महात्मा गाँधी का करीबी होने के कारण नेहरू देश के पहले प्रधानमंत्री बने। (Wikimedia Commons)

कांग्रेस पार्टी में देश के हर समाज और विचारधारा से जुड़े नेताओं का होना, आज़ादी के शुरुवाती दिनों में उसके वर्चस्व की बड़ी वजह था। यहां तक की जब 1947 में आज़ादी के बाद जब 1950 में चुनाव हुए तब नतीजों के बाद ऐसा लगा की यह महज औपचारिकता है क्योंकि आज के दिनों में जहां नेता वोट के लिए जनता के पैरों तले गिर जाते हैं तब हाल इसका बिलकुल विपरीत था। लोग तो अपने चहिते नेता के पैरों तले यूं गिर जाते थे जैसे उन्हें साक्षात भगवान के दर्शन हो गए हो। कांग्रेस के वर्चस्व का एक कारण उस समय के प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू(Jawahar Lal Nehru) की शख्सियत भी थी क्योंकि एक तो वे एक बहुत पढ़े-लिखे और संयम वाले व्यक्ति थे तो दूसरी ओर वे राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी(Mahatma Gandhi) के सबसे करीबी व्यक्तियों में से एक थे इसलिए जनता उनपर और भी विश्वास करती थी।

जवाहर लाल नेहरू लगातार 17 साल भारत के प्रधानमंत्री रहे। साल 1964 से 1966 के बीच भारत अपने दो प्रधानमंत्री खो देता है। यह वो समय था जब एक ओर भारत 1965 में पाकिस्तान से युद्ध के बाद उभर रहा था ऐसे में हमारे देश के पास देश का नेतृत्व करने के लिए कोई अनुभवी नेता नहीं था। तब कांग्रेस ने देश की गद्दी पर इंदिरा गाँधी को बैठा दिया। कहने को तो इंदिरा गाँधी प्रधानमंत्री बन गई थी लेकिन देश से जुड़े फैसले कांग्रेस पार्टी के भीतर से लिए जाते थे जिनमे इंदिरा गाँधी की राय तक नहीं ली जाती थी। लोग उन दिनों इंदिरा गाँधी को एक गुड़िया के समान मानते थे।

इंदिरा इस इंडिया

1966 में इंदिरा गाँधी प्रधानमंत्री तो बन गई थी लेकिन उन्हें राजनीति का कोई ज्ञान नहीं था ऐसे में उन दिनों वे इस खेल में एक कच्ची खिलाड़ी थी। धीरे-धीरे कांग्रेस पार्टी में इंदिरा गाँधी को नज़रअंदाज़ किया जाने लगा। धीरे-धीरे इंदिरा गाँधी को यह बात समझ में आने लगी और अब उनकी पार्टी के भीतर के नेताओं के साथ ठन गई। यह लड़ाई खुलकर 1969 के राष्ट्रपति चुनाव के समय सामने आ गई जब एक तरफ इंदिरा गाँधी चाहती थी की उपराष्ट्रपति वीवी गिरि राष्ट्रपति बने तो वहीं कांग्रेस ने नीलम संजीव रेड्डी को अपना आधिकारिक उम्मीदवार घोषित कर रखा था। उन दिनों कांग्रेस दो धड़ो में बँट चुकी थी जहां एक खेमा इंदिरा की तरफ था तो वहीं एक खेमा पार्टी नेताओं का था जिसे सिंडिकेट भी कहा जाता है।

एक नए राष्ट्रपति का चुनाव प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी(Indira Gandhi) और सिंडिकेट(Syndicate) के रूप में ज्ञात कांग्रेस पार्टी के पुराने रक्षक के बीच एक प्रतियोगिता बन गया। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने प्रधानमंत्री के विरोध की परवाह न करते हुए, नीलम संजीव रेड्डी को राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के रूप में समर्थन देने का फैसला किया। गिरि, जो उपराष्ट्रपति थे, ने इस्तीफा दे दिया और एक स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने का फैसला किया। प्रधानमंत्री गांधी ने तब "अंतरात्मा की आवाज" का समर्थन करते हुए उनका समर्थन करने का फैसला किया, जिसने कांग्रेस सांसदों को गिरि के लिए वोट करने की अनुमति दी। 16 अगस्त 1969 को हुए चुनाव में रेड्डी, गिरि और विपक्षी उम्मीदवार सी डी देशमुख के बीच मुकाबला हुआ। करीब से लड़े गए चुनाव में वी वी गिरी विजयी हुए, पहली वरीयता के वोटों का 48.01 प्रतिशत जीतकर और बाद में दूसरी वरीयता के वोटों की गिनती पर बहुमत प्राप्त किया। अंतिम मिलान में, गिरि को राष्ट्रपति चुने जाने के लिए आवश्यक 418,169 मतों के कोटे के मुकाबले 420,077 मत मिले थे।

congress, jawahar lal nehru, indira gandhi, rajiv gandhi इंदिरा गाँधी भारत के महानतम प्रधानमंत्रियों में से एक हैं जिन्होंने एक दिन में बांग्लादेश बना दिया था। (Wikimedia Commons)

राष्ट्रपति चुनाव के बाद कांग्रेस औपचारिक रूप से दो हिस्सों में बँट गई। प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी को पार्टी से बर्खास्त कर दिया गया। कांग्रेस के अब दो भाग हो गए थे जिसमे एक उस समय के राष्ट्रीय अध्यक्ष सिध्दावनहल्ली निजलिंगप्पा(Siddhavanahalli Nijalingappa) के नेतृत्व वाला कांग्रेस (R) और उस वक़्त की प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी के नेतृत्व वाला कांग्रेस (O) I बाद में कांग्रेस (R )के कई नेता जनता पार्टी में चले गए I इस बीच 1971 में लोकसभा चुनाव होते हैं और कांग्रेस (O) प्रचंड बहुमत से सत्ता में आती है और यह वो समय था जब इंदिरा गाँधी का राजनितिक कद एकदम से बढ़ गया था I यह वो समय था जब कांग्रेस निर्वाचित सरकारों को चुन-चुन कर गिरा देती थी और तब के असम के मुख्यमंत्री डीके बरोआह(DK Baroah) जोकि इंदिरा गाँधी के सलाहकार भी थे ने कहा था "इंदिरा इस इंडिया, इंडिया इस इंदिरा।" इसी बीच भारत में इंदिरा गाँधी के खिलाफ आक्रोश बढ़ता जा रहा था और जयप्रकाश नारायण(Jai Prakash Narayan) नाम की बहुत चर्चा बढ़ गयी थी I अपनी तरफ बढ़ते हुए आक्रोश को देख इंदिरा गाँधी ने 1975 में इमरजेंसी लगा दी और 1977 में जैसे ही इमरजेंसी(Emergency) हटी इंदिरा गाँधी सत्ता से बेदखल हो गयी I

1977 में मोरारजी देसाई(Morarji Desai) के नेतृत्व वाली जनता पार्टी की सरकार बनती है I लेकिन जनता पार्टी के अंदर पनप रहे अंदरूनी कलहों से ये सरकार मात्र दो साल चलती है और 1979 में ये सरकार गिर जाती है I उन दिनों भारत में गरीबी चरम पर थी और इसी गरीबी को हटाने का वादा करके 'गरीबी हटाओ' के नारे के साथ इंदिरा गाँधी 1980 में सत्ता में वापसी करती हैं I इसी बीच 1984 में देश का सबसे नरसंहार हो जाता है, जहां दिल्ली और उससे सटे इलाकों में करीब 3000 से ज़्यादा सिखों को मौत के घाट उतार दिए जाते हैं यही नरसंहार बाद में इंदिरा गाँधी की मौत का कारण बनता है जब उनके सिख अंगरक्षकों द्वारा उनकी हत्या कर दी जाती हैI इंदिरा गाँधी की हत्या के बाद हुए चुनाव में कांग्रेस को सांत्वना वोट मिल जाते हैं और भारत के राजनितिक इतिहास की सबसे बड़ी जीत दर्ज कर लेती हैI देश की कमान अब राजीव गाँधी(Rajiv Gandhi) के हाथों में थी जिन्हे राजनीति का कोई अनुभव नहीं था I यह वह समय था जब भाजपा(Bhajpa) देश में अपनी राजनितिक ज़मीन तलाश रही थी और एक प्रमुख राष्टीय दल के तौर पर उभर रही थी I

गठबंधनों का दौर

1989 में अब चुनाव होते हैं और ऐसा पहली बार हुआ था की किसी पार्टी को बहुमत नहीं मिला था और भाजपा के समर्थन से राष्ट्रीय मंच के विश्वनाथ प्रताप सिंह(Vishwanath Pratap Singh) प्रधानमंत्री बनते हैं लेकिन सरकार भी ज़्यादा दिन नहीं चलती 1991 में ये सरकार गिर जाती है I मध्यवर्ती चुनाव में फिर किसी पार्टी को बहुमत नहीं मिलता और कांग्रेस सबसे बड़ा दल होकर दूसरी पार्टियों के समर्थन से सरकार बना लेता है I इसके बाद तमिलनाडु के आतंकी संगठन LTTE की आतंकी साजिश में राजीव गाँधी की हत्या हो जाती है और सरकार की कमान पीवी नरसिम्हा राव के हाथ में आ जाती है I उनके कार्यकाल में कई घटनाये घटी जैसे की बाबरी मस्जिद विध्वंस आदि I इसके बाद 1996 में हुए चुनाव में किसी पार्टी को बहुमत नहीं मिलता और पहली बार भाजपा सत्ता में आती है और दूसरी पार्टियों के समर्थन से अटल बिहारी वाजपायी प्रधानमंत्री बनते हैं लेकिन इनकी ये सरकार सिर्फ 13 दिन चलती है और कांग्रेस के समर्थन से एचडी देवेगौड़ा प्रधानमंत्री बनते हैं I इसके 2 साल तक भारत को कोई स्थिर सरकार नहीं मिलती I 1999 में हुए चुनाव में भाजपा के नेतृत्व वाला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन पूर्ण बहुमत की सरकार बनाता है और अटल बिहारी वाजपायी प्रधानमंत्री बन जाते हैं। तब वे पहले ऐसे गैर कांग्रेसी प्रधानमंत्री थे जिनकी सरकार पुरे पांच साल चली I 2004 में हुए चुनाव में कांग्रेस के नेतृत्व वाला संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार बनाता है और मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बनते हैं I कांग्रेस ने इस दाव से अपने ऊपर लगे हुए सिखों के 1984 में हुए नरसंहार का दाग मिटाने की कोशिश की I 2004-2014 तक कांग्रेस सत्ता में रहती है और यहाँ से उसके पतन की शुरुआत होती I

congress, jawahar lal nehru, indira gandhi, rajiv gandhi आज देश में कांग्रेस मात्र तीन राज्यों तक सिमट कर रह गई है और अब उसे आत्मचिंतन करने की ज़रूरत है।

पतन की शुरुवात

2014 में हुए आम चुनाव में ऐसी मोदी लहर(Modi Wave चलती है कांग्रेस के साथ-साथ तमाम विपक्षी पार्टियों का सूपड़ा साफ़ हो जाता है I 2014 से आज 2021 आ गया आज कांग्रेस की जो हालत है वैसी कभी नहीं थी जहाँ एक दिन ऐसा था जब कांग्रेस देश के 80 फीसद से ज़्यादा हिस्से पर राज करती थी और आज मात्र 3 राज्यों में सिमट कर रह गयी है और आज न तो इसके पास कोई पूर्णकालिक अध्यक्ष है I आज कांग्रेस की हालत ऐसी है की उसे फिर शुन्य से शुरू करना पड़ेगा I

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