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राजनीति

BJP छोड़ने के पीछे विधायकों के हैं  व्यक्तिगत स्वार्थ : सिद्धार्थ नाथ सिंह

सिद्धार्थ नाथ सिंह का भारतीय जनता पार्टी छोड़ रहे विधायकों पर पलटवार कहा व्यक्तिगत स्वार्थ और टिकट कटने के डर से छोड़ रहे हैं पार्टी।

भारतीय जनता पार्टी ( उत्तर प्रदेश में ) मंत्री एवं विधायक सिद्धार्थ नाथ सिंह।(Wikimedia Commons)

उत्तर प्रदेश में चुनाव नजदीक है, चुनावी माहौल में कई नेता अपने निजी फायदे को देखते हुए दल बदलने लगे हैं। जिनको आभास हो रहा है पार्टी उनका टिकट काट सकती है या उनको अपने मनपसंद विधानसभा सीट से हटा सकती है वह नेता अब दूसरी पार्टी में अपने फायदे को ढूंढने की कोशिश कर रहे हैं।

भारतीय राजनीतिज्ञ एवं भारतीय जनता पार्टी (उत्तर प्रदेश सरकार) में मंत्री, इलाहाबाद पश्चिम (विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र) से विधायक सिद्धार्थ नाथ सिंह ने समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए कहा कि, " मंत्री और विधायकों के पार्टी छोड़ने के कई कारण है ! व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए मंत्री और विधायक दल बदल रहे हैं। पार्टी छोड़ रहे नेताओं को डर है कि उन्हें उनकी मनपसंद विधानसभा सीट से टिकट नहीं दिया जाएगा इन सभी लोगों ने पांच साल तक भारतीय जनता पार्टी में मलाई खाने का काम किया है।"


सिद्धार्थ नाथ सिंह ने आगे कहा कि "भारतीय जनता पार्टी जनता से अपने विधायकों के बारे में फीडबैक लेती है और उस आधार पर भरतीय जनता पार्टी विधायकों को टिकट देती है या काटती है !" भारतीय जनता पार्टी जनता के अपने विधायक के नकारात्मक फीडबैक के आधार पर जब नेताओं का टिकट काटती है तो यह लोग पार्टी छोड़ के अन्य पार्टियों में अपनी दाल गलाने की कोशिस करते हैं। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव की पार्टी में ऐसे लोगों के लिए दरवाजे खुले हैं। अखिलेश यादव सबको पार्टी में शामिल कर लें, हमे इससे कोई एतराज नही है। उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी इस बार भी 300 से अधिक सीटों पर अपनी जीत दर्ज करेगी।

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सिद्धार्थ नाथ सिंह ने भारतीय जनता पार्टी को छोड़ चुके कई विधायकों द्वारा उठाये जा रहे दलित और पिछडों के मुद्दे पर पलटवार करते हुए कहा कि "उत्तर प्रदेश में पिछड़ों और दलितों को भटकाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भरतीय जनता पार्टी को छोड़ने वाले विधायक पिछड़ों और दलितों के हित में समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव के किसी 10 योजनाओं के नाम बता कर देखें। समाजवादी पार्टी सिर्फ मुसलमानों और यादवों की बात करती है समाजवादी पार्टी से मैं कहूंगा की अन्य पिछड़ी जातियाँ उनका साथ कभी नही देंगी।

बता दें कि हाल ही में भारतीय जनता पार्टी को छोड़ के समाजवादी पार्टी में शामिल होने वाले मंत्री एवं विधायक उत्तर प्रदेश के वर्तमाम सरकार को पिछडो एवं दलितों का विरोधी बताया। उत्तर प्रदेश की सरकार में मंत्री रहे स्वामी प्रशाद मौर्य ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया और उन्होंने समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया। दल बदल रहे नेताओं के द्वारा उठाये जा रहे इन बेबुनियाद मुद्दों पर सिद्धार्थ नाथ सिंह ने एएनआई से बात करते हुए पलटवार किया।

Various source; Edited by - Abhay Sharma

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विदेश मंत्रियों ने मध्य पूर्व में क्वाड के समान एक समूह बनाने के लिए एक वर्चुअल मंत्रिस्तरीय बैठक की। (Wikimedia Commons)

भारत, अमेरिका, इजरायल और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के विदेश मंत्रियों ने मध्य पूर्व में क्वाड के समान एक समूह बनाने के लिए एक वर्चुअल मंत्रिस्तरीय बैठक की। यह बैठक हालांकि अधिक सीमित सुरक्षा एजेंडे के साथ हुई। भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार को अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन और इजरायल के विदेश मंत्री यायर लापिड और यूएई के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद के साथ बैठक के बाद ट्वीट किया, "आर्थिक विकास और वैश्विक मुद्दों पर एक साथ मिलकर काम करने पर चर्चा की। तेजी से फॉलोअप पर काम करने पर सहमत हुए।"

जयशंकर, जो इस समय इजराइल के दौरे पर हैं, वर्चुअल मीटिंग के दौरान लैपिड के बगल में बैठे थे। विदेश विभाग के प्रवक्ता नेड प्राइस के एक बयान में कहा गया है कि चार शीर्ष राजनयिकों ने 'क्षेत्र और विश्व स्तर पर सहयोग के भविष्य के अवसरों' के साथ-साथ समुद्री सुरक्षा पर चर्चा की।

बयान में कहा गया है कि उन्होंने 'व्यापार सहित मध्य पूर्व और एशिया में आर्थिक और राजनीतिक सहयोग के विस्तार' पर भी चर्चा की। इससे पहले वाशिंगटन में अपने दैनिक ब्रीफिंग में, प्राइस ने कहा, "जाहिर है कि यह चार देशों - अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात, इजराइल और भारत का एक संग्रह है - जिनके साथ हम कई हित साझा करते हैं।"

एक रणनीतिक वातावरण अमेरिका द्वारा अफगानिस्तान से अपने सैनिकों को वापस बुलाने के बाद, चीन वहां अपनी शक्ति को आगे बढ़ाने के लिए अपना प्रभाव बढ़ा रहा है। लेकिन इंडो-पैसिफिक के विपरीत, जहां क्वाड बीजिंग को व्यापक खतरे के रूप में देखता है, भारत के संभावित मध्य पूर्वी 'क्वाड' पर एक निरोधक बल बनने की संभावना है, जिससे स्थानीय प्रतिद्वंद्विता में बहुत गहराई तक जाने की संभावना कम हो जाती है। इसके बजाय ऊर्जा, स्वास्थ्य, अर्थशास्त्र और जलवायु परिवर्तन में सहयोग पर ध्यान केंद्रित करना महत्वपूर्ण होगा।

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलिया के स्कॉट मॉरिसन और जापान के तत्कालीन प्रधान मंत्री योशीहिदे सुगा ने पिछले महीने वाशिंगटन में एक शिखर सम्मेलन आयोजित किया, जिसमें उन्होंने 'भारत में सुरक्षा और समृद्धि को बढ़ाने के लिए' खुद को प्रतिबद्ध किया।

क्वाड खुद को लोकतंत्रों के एक समूह के रूप में 'भारत-प्रशांत और उसके बाहर लोकतांत्रिक लचीलापन बनाने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन यह मध्य पूर्व-उन्मुख समूह पर लागू होता है, जिसमें संयुक्त अरब अमीरात, गैर-लोकतांत्रिक राजशाही का एक मिश्रण शामिल है।'

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