ताहिर हुसैन के कबूलनामे के बाद एनडीटीवी, दी वायर जैसे हिन्दूविरोधी मीडिया संस्थानों में पसरा सन्नाटा

ताहिर ने पूछताछ के दौरान यह भी कबूला है की ख़ालिद सैफी ने लोगों को 'दंगों' के लिए भड़काने की ज़िम्मेदारी ली थी, जबकि उमर ख़ालिद के सुझाव पर उसने भारी मात्रा में तेज़ाब, पत्थर, पेट्रोल बम से लेकर हथियारों का प्रबंध पहले ही कर लिया था।

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ताहिर हुसैन, निष्काषित आप पार्षद, दिल्ली दंगों का मुख्य साजिशकर्ता (Image: Twitter)

फरवरी के महीने में हुए दिल्ली के हिन्दू विरोधी दंगों के साजिशकर्ताओं का भांडाफोड़ हो चुका है। दिल्ली दंगों की जांच कर रही स्पेशल टीम ने 2 अगस्त को इस बात का खुलासा कर दिया है कि आम आदमी पार्टी पार्षद ताहिर हुसैन ही दिल्ली दंगों का मुख्य सूत्रधार था। हालांकि दंगों में नाम आने के बाद पार्टी ने उसे बर्खास्त कर दिया था। ताहिर हुसैन ने अब इस बात को कबूल लिया है की उसने ही दंगों की योजना बनाई और ख़ालिद सैफी व उमर ख़ालिद के साथ मिल कर इस दंगे को अंजाम भी दिया। 

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पुलिस ने बताया की ताहिर हुसैन से पूछताछ के दौरान उसने कबूल किया है कि वह अनुच्छेद 370 व राम मंदिर पर आए फैसले से नाखुश था जिस कारण वह हिंदुओं को सबक सिखाना चाहता था। ताहिर हुसैन ने बताया की 8 जनवरी, 2020 को ख़ालिद सैफी की मदद से उसकी मुलाक़ात, देशद्रोह का आरोप झेल रहे पूर्व जेएनयू छात्र उमर ख़ालिद से हुई। ताहिर के कबूलनामे के अनुसार, उमर ख़ालिद ने ताहिर से कहा था की वह अपनी कौम के लिए कुर्बानी भी देने को तैयार है। ताहिर को ख़ालिद सैफी ने आश्वासन दिया था की ‘हिंदुओं के खिलाफ जंग’ में पीएफ़आई का दानिश उसकी आर्थिक सहायता करेगा। 

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ताहिर ने पूछताछ के दौरान यह भी कबूला है की ख़ालिद सैफी ने लोगों को ‘दंगों’ के लिए भड़काने की ज़िम्मेदारी ली थी, जबकि उमर ख़ालिद के सुझाव पर उसने भारी मात्रा में तेज़ाब, पत्थर, पेट्रोल बम से लेकर हथियारों का प्रबंध पहले ही कर लिया था। ताहिर ने बताया की, उसने इस बात का ध्यान रखा था कि मुस्लिम समुदाय के लोगों को कम क्षति पहुंचे। इसी कारण उसने अपनी पत्नी और बच्चों को दंगों के एक दिन पहले ही वहाँ से कहीं दूर शिफ्ट करा दिया था। उसकी तस्वीर किसी सीसीटीवी में ना आ जाए, इसीलिए उसने इस बात का भी खास ध्यान रखा था कि सारे कैमरे को बंद कर दिया जाए या वहाँ से हटा दिया जाए। ताहिर ने दंगों के दौरान बार बार पुलिस वालों से संपर्क का नाटक भी रचा था ताकि किसी को दंगों मे उसकी भूमिका पर शक ना हो पाए। 

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दंगों के बाद से ही लगातार मुस्लिम कट्टरपंथी व वामपंथी समुदाय इन दंगों का इल्ज़ाम हिंदुओं पर डालने की कोशिश में लगा था। ताहिर हुसैन के कबूलनामे के बाद एनडीटीवी, दी वायर जैसे हिन्दू विरोधी मीडिया संस्थान अब चुप्पी साधे बैठे हैं। 

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