Never miss a story

Get subscribed to our newsletter


×
ज़रूर पढ़ें

यमुना का जलस्तर बढ़ते ही ताजमहल के पीछे का नजारा बदला

पूरी दुनिया में खूबसूरती के लिए विख्यात आगरा के ताजमहल के पीछे का नजारा इन दिनों जलस्तर के बढ़ने से बदला हुआ है।

विश्व विरासत स्थल ‘ताजमहल’। (Pixabay)

By- बृज खंडेलवाल

खूबसूरती के लिए विख्यात आगरा के ताजमहल के पीछे का नजारा इन दिनों बदला हुआ है। नहरनुमा यमुना नदी में आमतौर पर पानी काफी कम रहता है, मगर लगातार हुई बारिश ने उसका जलस्तर बढ़ा दिया है। यमुना के भर जाने पर इन दिनों मेहताब बाग से एक शानदार दृश्य नजर आ रहा है।


बारिश के पानी ने शहर की जीवनरेखा कही जाने वाली यमुना नदी को “बीमार सीवेज नहर” से एक आकर्षक जल निकाय में बदल दिया है। इतना ही नहीं, इसके आसपास जो कूड़े के ढेर जमा थे, वे भी पानी में बह गए हैं।

बदले हुए इस माहौल ने यहां के लोगों को खासा उत्साहित कर दिया है। यमुना किनारा रोड के एक मंदिर के पुजारी नंदन श्रोत्रिय कहते हैं, “मानसून की बारिश ने नदी के किनारों को साफ और हरा-भरा कर दिया है। वहीं कुछ समय के लिए रुकी लोगों की आवाजाही ने यहां पक्षियों की चहचहाट भी वापस ला दी है।”

ताजमहल के पीछे का नजारा। (Pixabay)

नदी के लिए काम करने वाले एक कार्यकर्ता श्रवण कुमार सिंह कहते हैं, “बादशाह शाहजहां ने यमुना नदी के कारण इस जगह को ताजमहल के निर्माण के लिए चुना था लेकिन पिछले कुछ दशकों से साल के ज्यादातर समय में यह नदी एक गंदी नहर जैसी हालत में रहती है।”

ऐसे में सवाल यह है कि अभी नदी पानी से भरी है, लेकिन कब तक इसमें पानी रहेगा? इस पर पर्यावरणविद् देवाशीष भट्टाचार्य कहते हैं, “साल में लगभग आठ महीने यमुना सूखी और प्रदूषित रहती है, क्योंकि नदी पर बने बांध हथिनी कुंड से वजीराबाद, ओखला और गोकुल तक पानी का बहाव रोक देते हैं। लिहाजा, शहर के निचले हिस्सों में पानी की कमी हो जाती है। यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि नदी में सालभर पानी रहे, ताकि इसमें जलीय जीवन बना रहे।”

यह भी पढ़ें- इंदौरियत ने बनाया इंदौर को चौथी बार देश का सबसे स्वच्छ शहर

यह यमुना नदी की भव्यता ही थी जिसने 500 साल पहले, मुगल वंश के संस्थापकों को यहां आकर दुकानें खोलने के लिए आकर्षित किया था और फिर उनके वंशजों को ताजमहल जैसी कृति समेत कई स्मारक बनाने के लिए प्रेरित किया।

लेकिन बदबूदार हो चुकी इस नदी से अब लोग दूर ही भागते हैं। जबकि कभी नदी का यही किनारा संपन्न व्यावसायिक गतिविधियों का केंद्र हुआ करता था। अब यहां से न केवल व्यापार, बल्कि नदी की संस्कृति ही गायब हो चुकी है। कई किलोमीटर तक केवल बंजर भूमि ही नजर आती है।

ताज से सटे दशहरा घाट के कैलाश मंदिर से लेकर काफी दूर तक लाल बलुआ पत्थरों और संगमरमर के स्थायी घाट थे। कुछ घाट तो लोगों की उदासीनता के शिकार हो गए, तो कुछ राजनीतिक उठा-पठकों के।

वेकअप आगरा के अध्यक्ष शिशिर भगत कहते हैं, “आज लोग यमुना के किनारे चलते हुए उसकी बदबू से बचने अपनी नाक को ढंकते हुए दिखाई देते हैं। मोदी के मंत्री नितिन गडकरी ने वादा किया था कि वे पर्यटकों को स्टीमर्स से दिल्ली से यमुना लेकर आएंगे। पता नहीं वे यह वादा भूल गए हैं या उन्होंने यह प्रोजेक्ट ही छोड़ दिया है।”

कारीगरी का नायब नमूना ‘ताजमहल’। (Pixabay)

रिवर कनेक्ट के प्रचारक पंडित जुगल किशोर कहते हैं, “वे दिन थे जब आगरा के लोग नदी के किनारे इत्मीनान से गर्मियों की शाम बिताते थे, जहां मंदिरों की एक लंबी कतार थी। धार्मिक आयोजन हुआ करते थे। लेकिन अब तो लोग इससे इतने दूर हो गए हैं कि शायद भूल ही गए हैं कि शहर में एक नदी भी है।”

रिवर कनेक्ट अभियान जैसे नागरिक समूह सरकारी एजेंसियों पर स्वच्छता अभियान चलाने, स्थायी घाटों का निर्माण करने और नदी से निकले गाद को हटाने के लिए दबाव डाल रहे हैं। लेकिन अभी तक कोई सकारात्मक जबाव नहीं मिला है।

यह भी पढ़ें- गाय के गोबर से बन रहे गौरी-गणेश, पर्यावरण संरक्षण का संदेश

ब्रज मंडल हेरिटेज कंजर्वेशन सोसाइटी के अध्यक्ष सुरेंद्र शर्मा कहते हैं, “हमने योगी और मोदी सरकार से आगरा और मथुरा में साबरमती मॉडल को दोहराने का आग्रह किया है। जिस तरह अहमदाबाद में साबरमती नदी एक गंदे नाले में बदल गई थी और फिर नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली तत्कालीन राज्य सरकार ने इसे लेकर जो काम किए वो देखने लायक हैं। वैसा ही काम यहां करने की जरूरत है।”(आईएएनएस)

Popular

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में बात करते हुए योगी ने तारीफ की (wikimedia commons )

हमारा देश भारत अनेकता में एकता वाला देश है । हमारे यंहा कई धर्म जाती के लोग एक साथ रहते है , जो इसे दुनिया में सबसे अलग श्रेणी में ला कर खड़ा करता है । योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं । उन्होंने एक बयान में कहा कि नई थ्योरी में पता चला है कि पूरे देश का डीएनए एक है। यहां आर्य-द्रविण का विवाद झूठा और बेबुनियाद रहा है। भारत का डीएनए एक है इसलिए भारत एक है। साथ ही उन्होंने कहा की दुनिया की तमाम जातियां अपने मूल में ही धीरे धीरे समाप्त होती जा रही हैं , जबकि हमारे भारत देश में फलफूल रही हैं। भारत ने ही पूरी दुनिया को वसुधैव कुटुंबकम का भाव दिया है इसलिए हमारा देश श्रेष्ठ है। आप को बता दे कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार को युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की व राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की पुण्यतिथि पर आयोजित एक श्रद्धांजलि समारोह का शुरुआत करने गये थे। आयोजन के पहले दिन मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई भी ऐसा भारतीय नहीं होगा जिसे अपने पवित्र ग्रन्थों वेद, पुराण, उपनिषद, रामायण, महाभारत आदि की जानकारी न हो। हर भारतीय परम्परागत रूप से इन कथाओं ,कहनियोंको सुनते हुए, समझते हए और उनसे प्रेरित होते हुए आगे बढ़ता है।

साथ ही मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे यंहा के कोई भी वेद पुराण हो या ग्रंथ हो इनमे कही भी नहीं कहा गया की हम बहार से आये थे । हमारे ऐतिहासिक ग्रन्थों में जो आर्य शब्द है वह श्रेष्ठ के लिए और अनार्य शब्द का प्रयोग दुराचारी के लिए कहा गया है। मुख्यमंत्री योगी ने रामायण का उदाहरण भी दिया योगी ने कहा कि रामायण में माता सीता ने प्रभु श्रीराम की आर्यपुत्र कहकर संबोधित किया है। लेकिन , कुटिल अंग्रेजों ने और कई वामपंथी इतिहासकारों के माध्यम से हमारे इतिहास की किताबो में यह लिखवाया गया कि आर्य बाहर से आए थे । ऐसे ज्ञान से नागरिकों को सच केसे मालूम चलेगा और ईसका परिणाम देश लंबे समय से भुगतता रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में बात करते हुए योगी ने कहा कि , आज इसी वजह से मोदी जी को एक भारत-श्रेष्ठ भारत का आह्वान करना पड़ा। आज मोदी जी के विरोध के पीछे एक ही बात है। साथ ही वो विपक्ष पर जम के बरसे। उन्होंने मोदी जी के बारे में आगे कहा कि उनके नेतृत्व में अयोध्या में पांच सौ वर्ष पुराने विवाद का समाधान हुआ है। यह विवाद खत्म होने से जिनके खाने-कमाने का जरिया बंद हो गया है तो उन्हें अच्छा कैसे लगेगा।

Keep Reading Show less

हरिद्वार हिंदुओं की धार्मिक नगरी है , जहा हर 12 वर्षो में कुंभ का मेला भी आयोजित होता है (wikimedia commons)

उत्तराखंड देवभूमि के नाम से विख्यात है , यहां हिंदु धर्म के कई तीर्थ स्थल हैं। उत्तराखंड राज्य के नए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कुछ विशेष कदम उठाये हैं। इस माह की शुरुआत में धामी सरकार ने प्रदेश में अप्रत्याशित रूप से बढ़ती मुस्लिम आबादी पर काबू करने के लिए जनसंख्या नियंत्रण नीति लाने पर हामी भरी थी। धामी सरकार से RSS से जुड़े 35 संगठनों ने यह मांग की थी। कई हिन्दूवादी संगठनों का दावा है कि उत्तराखंड के कई शहर देहरादून, हरिद्वार, उधमसिंह नगर और नैनीताल में मुस्लिम आबादी कुछ सालों में लगातार बढ़ रही है ।

हरिद्वार हिंदुओं की धार्मिक नगरी है , जहां हर 12 वर्षो में कुंभ का मेला भी आयोजित होता है यह हिंदुओ के आस्था का केंद्र रहा है। सनातन धर्म के प्रमुख केंद्रों में एक, जहां सभी मठ, अखाड़े और आध्यात्मिक केंद्र स्थित हैं। यह हिंदुओं के सबसे बड़े धार्मिक कार्यो की पवित्र भूमि है। यहां पर हिन्दू अस्थि विसर्जन से लेकर जनेऊ या उपनयन संस्कार और यंहा तक की काँवड़ यात्रा में जाने के लिए भक्त जन यंहा गंगा जल तक लेने आते हैं।

Keep Reading Show less

अल्जाइमर रोग एक मानसिक विकार है। (unsplash)

ऑस्ट्रेलिया के शोधकर्ताओं ने एक अभूतपूर्व अध्ययन में 'ब्लड-टू-ब्रेन पाथवे' की पहचान की है जो अल्जाइमर रोग का कारण बन सकता है। कर्टिन विश्वविद्यालय जो कि ऑस्ट्रेलिया के पर्थ शहर में है, वहाँ माउस मॉडल पर परीक्षण किया गया था, इससे पता चला कि अल्जाइमर रोग का एक संभावित कारण विषाक्त प्रोटीन को ले जाने वाले वसा वाले कणों के रक्त से मस्तिष्क में रिसाव था।

कर्टिन हेल्थ इनोवेशन रिसर्च इंस्टीट्यूट के निदेशक प्रमुख जांचकर्ता प्रोफेसर जॉन मामो ने कहा "जबकि हम पहले जानते थे कि अल्जाइमर रोग से पीड़ित लोगों की पहचान विशेषता बीटा-एमिलॉयड नामक मस्तिष्क के भीतर जहरीले प्रोटीन जमा का प्रगतिशील संचय था, शोधकर्ताओं को यह नहीं पता था कि एमिलॉयड कहां से उत्पन्न हुआ, या यह मस्तिष्क में क्यों जमा हुआ," शोध से पता चलता है कि अल्जाइमर रोग से पीड़ित लोगों के दिमाग में जहरीले प्रोटीन बनते हैं, जो रक्त में वसा ले जाने वाले कणों से मस्तिष्क में रिसाव की संभावना रखते हैं। इसे लिपोप्रोटीन कहा जाता है।

Keep reading... Show less