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दुनिया

अफगानिस्तान में पत्रकारों से मारपीट

अफगानिस्तान में पत्रकारों की पीटाई से लोग दहशत में हैं।

unsplash

विरोध प्रदर्शन में शामिल हुआ एक युवक

अफगानिस्तान में तालिबान ने अपनी सरकार बनाने के बाद शाशन करना शुरू कर दिया है। जब तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्ज़ा किया था तब बहुत से लोगों के यह विचार थे कि यह नया तालिबान है। जो कि अपनी पिछड़ी सोच को छोड़ कर नए तरीके से शाशन करेगा। लेकिन तालिबान को यह बताने में ज़रा भी समय नहीं लगा कि उनकी सोच में कोई बदलाव नहीं आया है। तालिबान का रवैया औरतों के प्रति किस तरीके का होता है इस बात से हम सब वाकिफ हैं, लेकिन अब वह पत्रकारों के साथ भी क्रूरता से पेश आ रहा है।

हाल ही में आई एक रिपोर्ट के मुताबिक तालिबान पत्रकारों को अपना निशाना बना रहा है। तालिबान ने करीब 24 पत्रकारों को गिरफ्तार कर लिया और इनके साथ दुराचार किया। अफगानिस्तान में हालात खराब होती जा रही है। कुछ दिन पहले ही खबर आई थी कि तालिबान ने एटिलाट्रोज अखबार के 5 पत्रकारों को गिरफ्तार कर लिया था।


afghansitan flag, slogans, liberty अफगानिस्तान का झंडा पकड़े महिलाunsplash

एटिलाट्रोज के 2 पत्रकारों की तस्वीरें सामने आई है, जिसमें साफ दिख रहा है कि उन्हें कितना प्रताड़ित किया गया है। उनके शरीर पर चोट के लाल निशान रोंगटे खड़े कर देते हैं। यह दर्शाता है कि पत्रकारों के साथ किस तरह का व्यवहार किया गया है। यह पत्रकार महिलाओं का तालिबान के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कवर करने गए थे। जहां इन्हें हिरासत में ले लिया और बहुत मारा गया। इसके बाद इन्हें अस्पताल में भर्ती करना पड़ा। एक तरफ तालिबान सभी देशों के सामने अपनी अच्छी छवि दिखाना चाहता है और दूसरी तरफ पत्रकारों के साथ ऐसा सलूक कर रहा है।

महिलाओं और पत्रकारों के खिलाफ ऐसा व्यवहार आपत्तिजनक है। लगातार पत्रकारों को पकड़ कर बेरहमी से पीटा जा रहा है क्योंकि तालिबान नहीं चाहता है कि उनके गलत काम दुनिया के सामने आए। इस तरह का बर्ताव तालिबान तब कर रहा है जब वह दूसरे देशों को बताना चाहता है कि वह बदल गया है। इससे कुछ समय पहले भारत के फोटो-पत्रकार दानिश सिद्दीकी का भी अफगानिस्तान में कत्ल कर दिया गया था। यह सिर्फ अफगानिस्तान के लोगों के लिए ही नहीं बल्कि सभी देशों के लिए चिंता का विषय है। इस समय सभी प्रमुख देशों को इस मामले पर चर्चा करनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि अफगानिस्तान की धरती आतंकी घटनाओं को अंजाम देने के लिए इस्तमाल न हो।(IANS)

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आईपीएल में रॉयल चेलेंजर्स बेंगलोर (आरसीबी) का एक मैच (wikimedia commons)

भारत के क्रिकेट टीम के कप्तान और दिग्गज बल्लेबाज विराट कोहली ने एक के बाद टीम से अपनी कप्तानी छोड़ने का जैसे ऐलान किया वैसे हि , उनके चाहने वाले , प्रशंसकों और साथी खिलाडियों ने अपनीं प्रतिक्रिया देना शुरू कर दी । इसी बीच दक्षिण अफ्रीका के पूर्व तेज गेंदबाज डेल स्टेन का कहना है कि आईपीएल की टीम का नेतृत्व करने का दबाव और युवा परिवार का होना रॉयल चेलेंजर्स बेंगलोर (आरसीबी) के कप्तान विराट कोहली के इस आईपीएल के बाद टीम की कप्तानी छोड़ने के फैसले का कारण हो सकता है। आरसीबी की टीम की और से रविवार की देर रात यह घोषणा की गई , कि विराट कोहली आईपीएल 2021 सीजन के बाद टीम की कप्तानी छोड़ देंगे । इस के पहले कोहली ने कुछ दिन पहले ही टी20 विश्व कप के बाद भारतीय टीम के टी20 प्रारूप की कप्तानी छोड़ने का भी फैसला किया था।


डेल स्टेन ने आगे कहा कि, " विराट कोहली आरसीबी टीम के साथ शुरू से जुड़े हैं। मुझे नहीं पता, जैसे-जैसे जीवन आगे बढ़ता है आप चीजों को प्राथमिकता देने लगते हैं। कोहली का नया यूवा परिवार है । उन्हें अपनी पर्शनल लाइफ भी देखना है ।
डेल ने यह भी कहा कि , "हो सकता है, उस जिम्मेदारी (कप्तानी) से थोड़ा सा त्याग करना और सिर्फ अपनी बल्लेबाजी पर ध्यान केंद्रित करने में सक्षम होना उनके करियर के लिए इस समय एक अच्छा निर्णय है।"

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दुनिया के सबसे बड़े ऑनलाइन रिटेलर अमेजन (wikimedia commons)

दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी में शुमार अमेजन को लेकर एक बहुत बड़ी खबर सामने आई है । द मॉर्निग कॉन्टेक्स्ट की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के सबसे बड़े ऑनलाइन रिटेलर अमेजन ने भारत में अपने कानूनी प्रतिनिधियों के आचरण की जांच शुरू कर दी है। एक व्हिसलब्लोअर शिकायत के आधार पर यह जांच हुई है जिसमें आरोप लगाया गया है कि अमेजन द्वारा कानूनी शुल्क में भुगतान किए गए कुछ पैसे को उसके एक या अधिक कानूनी प्रतिनिधियों द्वारा घूस में बदल दिया गया है।

काम करने वाले दो लोगों ने जो कि अमेजन की इन-हाउस कानूनी टीम के साथ है , उन्होंने मिलकर पुष्टि की कि अमेजन के वरिष्ठ कॉर्पोरेट वकील राहुल सुंदरम को छुट्टी पर भेजा गया है। एक संदेश में उन्होंने कहा, "क्षमा करें, मैं प्रेस से बात नहीं कर सकता।" हम स्वतंत्र रूप से यह पता नहीं लगा सके कि आंतरिक जांच पूरी हो चुकी है या प्रगति पर है।

कई सवालों के एक विस्तृत सेट के जवाब में, अमेजन के प्रवक्ता ने कहा, "भ्रष्टाचार के लिए हमारे पास शून्य सहनशीलता है। हम अनुचित कार्यो के आरोपों को गंभीरता से लेते हैं, उनकी पूरी जांच करते हैं, और उचित कार्रवाई करते हैं। हम विशिष्ट आरोपों या किसी की स्थिति पर इस समय जांच या टिप्पणी नहीं कर रहे हैं इस समय जांच।"

\u0911\u0928\u0932\u093e\u0907\u0928 \u0930\u093f\u091f\u0947\u0932\u0930 \u0905\u092e\u0947\u091c\u0928 दुनिया की सबसे बड़े ऑनलाइन रिटेलर अमेजन कंपनी का लोगो (wikimedia commons)

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भारतीय जनता पार्टी भाजपा का चुनावी चिन्ह (wikimedia commons)

अभी-अभी भारत के पंजाब राज्य में एक बड़ी राजनेतिक घटना घटी जब वंहा का मुख्यमंत्री ने इस्तीफा दिया और सत्ता दल पार्टी ने राज्य ने नया मुख्यमंत्री बनाया । पंजाब में एक दलित को मुख्यमंत्री बना कर कांग्रेस ने एक बड़ी सियासी चाल खेल दी है। अब कांग्रेस इसका फायदा अगले साल होने जा रहे राज्यों के विधानसभा चुनाव में उठाने की रणनीति पर भी काम करने जा रही है । उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के सियासी पारे को गरम कर दिया है कांग्रेस की इस मंशा ने।

कांग्रेस नेता हरीश रावत जो कि पंजाब में दलित सीएम के नाम का ऐलान करने वाले वो उत्तराखंड से ही आते हैं, अतीत में प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और आगे भविष्य में भी सीएम पद के दावेदार हैं, इसलिए बात पहले इस पहाड़ी राज्य के सियासी तापमान की करते हैं। साढ़े चार साल के कार्यकाल में भाजपा राज्य में अपने दो मुख्यमंत्री को हटा चुकी है और अब तीसरे मुख्यमंत्री के सहारे राज्य में चुनाव जीतकर दोबारा सरकार बनाना चाहती है। इसलिए भाजपा इस बात को बखूबी समझती है कि हरीश रावत उत्तराखंड में तो इस मुद्दें को भुनाएंगे ही।

बात करे उत्तराखंड राज्य कि तो यहा पर आमतौर पर ठाकुर और ब्राह्मण जाति ही सत्ता के केंद्र में रहती है, लेकिन अब समय बदल रहा है राजनीतिक दल भी दलितों को लुभाने का विशेष प्रयास कर रहे हैं। दरअसल, उत्तराखंड राज्य में 70 विधानसभा सीट आती है , जिसमें 13 सीट अनुसूचित जाति और 2 सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है। मसला सिर्फ 13 आरक्षित सीट भर का ही नहीं है। उत्तराखंड राज्य के 17 प्रतिशत से अधिक दलित मतदाता 22 विधानसभा सीटों पर जीत-हार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और इसके साथ ही कुल 36 सीटों पर जीत हासिल करने वाली पार्टी राज्य में सरकार बना लेती है।

brahmin in uttrakhand उत्तराखंड राज्य में 70 विधानसभा सीट आती है (wikimedia commons)

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