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देश

टेक्नो ने कोविड के खिलाफ ‘जीतेगा इंडिया फिरसे’ सामाजिक पहल शुरू की

वंचित समुदायों को जागरूक करने और उनका समर्थन करने के उद्देश्य से ग्लोबल प्रीमियम ब्रांड टेक्नो ने अपनी सामाजिक पहल 'जीतेगा इंडिया फिरसे' की घोषणा की|

यह पहल उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के कई गांवों में रहने वाले 30,000 से अधिक लोगों को कोविड-19 की रोकथाम, उपचार और टीकाकरण के बारे में जागरूकता का प्रसार करने में मदद करेगी। (Twitter)

वंचित समुदायों को जागरूक करने और उनका समर्थन करने के उद्देश्य से ग्लोबल प्रीमियम ब्रांड टेक्नो (Global Premium Brand Techno) ने शुक्रवार को अपनी सामाजिक पहल ‘जीतेगा इंडिया फिरसे’ की घोषणा की, जिसके तहत कंपनी कोविड-19 (Covid -19) के खिलाफ भारत की लड़ाई को मजबूत करने के लिए कई आवश्यक और प्रासंगिक कदम उठाएगी। यह पहल उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के कई गांवों में रहने वाले 30,000 से अधिक लोगों को कोविड-19 की रोकथाम, उपचार और टीकाकरण के बारे में जागरूकता का प्रसार करने में मदद करेगी।

ट्रांससियन इंडिया के सीईओ अरिजीत तालापात्रा ने एक बयान में कहा, “यह कठिन समय है और हमारे लिए यह बेहद जरूरी है कि हम अपनी आबादी के सबसे ज्यादा प्रभावित तबके की देखभाल के लिए मदद का हर संभव प्रयास करें।”


उन्होंने आगे कहा, “भारत की आधी से अधिक आबादी गांवों में रहती है, लेकिन जानकारी और स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं की कमी के कारण उन पर संक्रमण का जोखिम अधिक रहता है। टेक्नो राष्ट्र शक्ति की भावना से लड़ने और जीतने की इच्छा में विश्वास करता है।”

इस पहल के हिस्से के रूप में टेक्नो इन गांवों के लोगों को उनके परिवारों को कोविड से सुरक्षित रखने और उन्हें टीकाकरण के प्रति जागरूक करने के लिए स्वास्थ्य सूचना कार्यशालाओं का आयोजन कर रहा है।

कंपनी उन्हें आपातकालीन प्रोटोकॉल के लिए सभी संबंधित सरकारी हेल्पलाइन नंबरों और मार्गदर्शन के साथ मास्क, दस्ताने, सैनिटाइजर, हैंडवाश और एक कोविड-19 देखभाल पुस्तिका जैसी आवश्यक स्वास्थ्य किट भी प्रदान करेगी।

कंपनी कोविड-19 (Covid -19) के खिलाफ भारत की लड़ाई को मजबूत करने के लिए कई आवश्यक और प्रासंगिक कदम उठाएगी। (Pixabay)

वह आगे कहते हैं, “टेक्नो के ‘जीतेगा इंडिया फिरसे’ (Jeetega India Phirse) अभियान के माध्यम से ब्रांड यूपी के इन गांवों में रहने वाले 30,000 से अधिक लोगों तक पहुंचने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारे एनजीओ पार्टनर सर्वहिते के साथ हम घर-घर की सेवाएं और चिकित्सकों के साथ विभिन्न कार्यशालाओं का आयोजन कर रहे हैं, ताकि उन्हें महामारी की रोकथाम और स्वास्थ्य देखभाल व्यवस्था के बारे में शिक्षित किया जा सके।”

अपनी बात को जारी रखते हुए तलापात्रा ने आगे कहा, “यह पहल कोविड-19 संबंधित महत्वपूर्ण सुरक्षा प्रोटोकॉल के बारे में बहुत आवश्यक जागरूकता को बढ़ावा देगी और साथ ही उन लोगों को संसाधन प्रदान करेगी, जिन्हें इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है। हम यह सुनिश्चित करने के लिए अपने हिस्से का काम करना जारी रखेंगे और अधिक से अधिक लोगों का समर्थन करेंगे कि लोगों के पास खुद को और अपने प्रियजनों को स्वस्थ रखने की सही जानकारी और साधन हो, ताकि भारत को फिर से जीत दिलाई जा सके।”

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कंपनी के आंतरिक और बाहरी हितधारकों का समर्थन करने के अपने प्रयासों के हिस्से के रूप में ट्रांससियन ने स्वास्थ्य और सुरक्षा कार्यक्रम के लिए कई हस्तक्षेपों की भी घोषणा की, जैसे कि कर्मचारियों और उनके परिवारों को कोविड स्वास्थ्य देखभाल किट, कोविड टीकाकरण शिविर, 3,500 फ्रंट लाइन सदस्यों के लिए वार्षिक कोविड बीमा कवरेज नीति और कोविड के उपचार के लिए 24 घंटे ऑनलाइन डॉक्टर परामर्श और अन्य चिकित्सा सहायता का वितरण।

इस साल की शुरूआत में कंपनी ने पैन इंडिया में 50,000 से अधिक आउटलेट्स के सबसे बड़े रिटेल नेटवर्क के साथ अपनी अनूठी डोरस्टेप डिलीवरी पहल को फिर से शुरू किया है, जो उपभोक्ताओं को अपने घरों के आराम और सुरक्षा से टेक्नो स्मार्टफोन खरीदने में सक्षम बनाता है। टेक्नो ने उन स्मार्टफोन्स पर वारंटी अवधि भी बढ़ा दी, जिनकी वारंटी 15 अप्रैल से 15 जून, 2021 के बीच समाप्त होनी थी। (आईएएनएस-SM)

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मारिया वान केरखोव जो विश्व स्वास्थ्य संगठन में कोविड-19 पर तकनीकी के नेतृत्व प्रभारी हैं , उन्होंने डब्ल्यूएचओ सोशल मीडिया लाइव से बातचीत करते हुए कहा कि , वर्तमान में कोरोना के अलग अलग टाइप अल्फा, बीटा और गामा का प्रतिशत एक से भी कम चल रहा है। इसका मतलब यह है कि वास्तव में अब दुनिया भर में कोरोना का डेल्टा वैरिएंट ही चल रहा है।

\u0915\u094b\u0930\u094b\u0928\u093e \u0935\u093e\u092f\u0930\u0938 कोरोना का डेल्टा वैरिएंट हाल के दिनों में दुनियाभर में कहर बरपाया है (pixabay)

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ऑस्ट्रेलिया दुनिया की कार्टिलाजिनस मछली प्रजातियों के एक चौथाई से अधिक का घर है, इसमें 182 शार्क, 132 किरणें और 14 चिमेरे ऑस्ट्रेलियाई जलमार्ग में हैं। पीटर काइन जो चार्ल्स डार्विन विश्वविद्यालय (सीडीयू) के एक वरिष्ठ शोधकर्ता है और रिपोर्ट के प्रमुख लेखक है उन्होंने कहा कि तुरंत कार्रवाई की जरूरत है। पीटर काइन कहा, "ऑस्ट्रेलिया का जोखिम 37 प्रतिशत के वैश्विक स्तर से काफी कम है। यह उन 39 ऑस्ट्रेलियाई प्रजातियों के लिए चिंता का विषय है, जिनके विलुप्त होने का खतरा बढ़ गया है।"

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आप को बता दे की यह योजना राज्य सरकार द्वारा यूके और आयरलैंड में उच्च अध्ययन करने हेतु अनुसूचित जनजातियों के छात्रों के लिए शुरू की गई है। छात्रवृत्ति के पुरस्कार प्राप्त करने वाले छात्रों को विविध खर्चो के साथ-साथ ट्यूशन फीस भी पूरी तरह मिलेगी । इस योजना के अनुसार झारखंड राज्य में हर साल अनुसूचित जनजाति से 10 छात्रों का चयन किया जाएगा।

सितंबर में ब्रिटेन के 5 विभिन्न विश्वविद्यालयों में अपना अध्ययन कार्यक्रम शुरू करंगे 6 छात्र जिनको को चुना गया हैं।

अगर बात करे चयनित छात्रों की सूचि के बारे में तो इसमें से हरक्यूलिस सिंह मुंडा जो कि "यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन " के "स्कूल ऑफ ओरिएंटल एंड अफ्रीकन स्टडीज" से एमए करने जा रहे हैं। "मुर्मू यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ लंदन" से छात्र अजितेश आर्किटेक्चर में एमए करने जा रहे हैं। और वंहीआकांक्षा मेरी "लॉफबोरो विश्वविद्यालय" में जलवायु परिवर्तन, विज्ञान और प्रबंधन में एमएससी करेंगी, जबकि दिनेश भगत ससेक्स विश्वविद्यालय में जलवायु परिवर्तन, विकास और नीति में एमएससी करेंगे।

\u0938\u094d\u091f\u0942\u0921\u0947\u0902\u091f विश्वविद्यालय में पढ़ते हुए छात्र (pixabay)

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