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देश

संकट के समय मंदिरों ने बढ़ाया मदद का हाथ!

देश में ऐसे कई मंदिर एवं अन्य धार्मिक संस्थान है जिन्होंने कोविड-19 महामारी में सहायता प्रदान करने का जिम्मा अपने कंधे पर लिया है और कई मदद दे भी रहे हैं।

(NewsGram Hindi)

कोरोना महामारी देश-भर में विकराल रूप ले रहा है। हस्पतालों में दी जा रहीं महत्वपूर्ण व्यवस्थाएं इस महामारी के सामने कम पड़ती दिखाई दे रहीं हैं। हर दिन संक्रमण दर नए रिकॉर्ड बना रहा है। किन्तु, इस मुश्किल की घड़ी में कुछ ऐसी सस्थाएं हैं जो कोरोना मरीजों को निःस्वार्थ भाव से मदद देने के लिए सामने आए हैं। कोई घर तक ऑक्सीजन को पहुँचाने का काम कर रहा है तो कोई कोरोना मरीजों के घर तक मुफ्त खाना और दवा पहुँचाने का काम कर रहा है। इनमें शामिल हैं देश के मंदिर एवं अन्य धार्मिक संस्थान जिन्होंने COVID-19 महामारी में सहायता प्रदान करने का जिम्मा अपने कंधे पर लिया है।

देश के मंदिर हर संभव प्रयास कर रहे हैं कि कोरोना मरीजों को किसी न किसी प्रकार से मदद मिले। किसी ने मंदिर में कोरोना सेंटर शुरू कर इस पहल की शुरुआत की है तो किसी ने ऑक्सीजन के लिए आर्थिक मदद प्रदान की है। आइए कुछ ऐसे ही मुख्य मंदिरों की सूचि देखते हैं जिन्होंने मुश्किल समय में मदद के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाया है:


श्री राम मंदिर(अयोध्या): देश में ऑक्सीजन की कमी को देखते हुए अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट ने ऑक्सीजन प्लांट स्थापित करने का निर्णय लिया है। इस प्लांट को दशरथ मेडिकल कॉलेज में स्थापित किया जाएगा।

काशी विश्वनाथ मंदिर(वाराणसी): काशी विश्वनाथ मंदिर ने यह ऐलान किया है कि वह कम आय वाले कोरोना मरीजों को जरूरत की सभी दवाएं मुफ्त में देगा।

भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में एक ज्योतिर्लिंग यहां काशी विश्वनाथ मंदिर में स्तिथ है।(Wikimedia Commons)

श्री जगन्नाथ मंदिर(पूरी): जगन्नाथ मंदिर ने नीलाचल भक्त निवास को 120 बेड वाले कोविड सेंटर में बदलने का फैसला किया है। यह उन कोरोना मरीजों के लिए एक केंद्र के रूप में भी काम करेगा जो मंदिर से जुड़े हुए हैं।

पावनधाम जैन मंदिर(मुंबई): पावन धाम जैन मंदिर ने अपने 5 मंजिला इमारत को 100 बेड वाले कोविड सेंटर में बदलने का काम किया है।

स्वामी नारायण मंदिर(वडोदरा): स्वामी नारायण मंदिर ने अपने परिसर में 500 बेड वाले कोविड सेंटर की शुरुआत की है, जिसमें लगभग सभी बेड भरे हुए हैं।

यह भी पढ़ें: Free Hindu Temples: क्या मंदिर भी सरकारी संपत्ति है?

इस्कॉन मंदिर: इस्कॉन मंदिर उन सभी लोगों तक मुफ्त में खाना पहुंचाएगा जो या तो कोरोना संक्रमण से पीड़ित हैं, या जिस घर में गर्भवती महिलाएं हैं या बड़े बुजुर्ग या बच्चे हैं। उन सभी तक पौष्टिक खाना पहुंचे ऐसा जिम्मा इस्कॉन मंदिर ने उठाया है।

ऐसे कई मंदिर मौजूद हैं जिन्होंने इस वर्ष एवं पिछले वर्ष करोड़ों रुपयों का दान किया था वह भी केवल कोरोना महामारी के खिलाफ सहायता हेतु। किन्तु देश में एक ऐसा भी लिब्रलधारी तबका है जिसे सिर्फ यह दिखाई देता है कि मंदिरों में पहनावे के लिए क्यों कहा गया? या मुस्लिमों का मंदिर प्रवेश क्यों वर्जित है? उन्हें इन मंदिरों द्वारा दिए जा रहे सहायता की कोई सुध नहीं है।(SHM)

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देश के पहले सीडीएस जनरल बिपिन रावत(General Bipin Rawat) 13 अन्य लोगों के साथ 9 दिसम्बर के दिन कुन्नूर के पहाड़ियों में हुए भीषण हेलीकाप्टर क्रैश में शहीद हो गए थे, जिनमें उनकी पत्नी मधुलिका रावत भी शामिल थीं। इस घटना ने न केवल देश को आहत किया, बल्कि विदेशों में भी इस खबर की खूब चर्चा रही। देश के सभी बड़े पदों पर आसीन अधिकारी एवं सेना के वरिष्ठ अफसरों ने इस घटना पर शोक व्यक्त किया।

जनरल बिपिन रावत(General Bipin Rawat) भारतीय सेना में 43 वर्षों तक अनेकों पदों पर रहते हुए देश की सेवा करते रहे और जिस समय उन्होंने अपना शरीर त्यागा तब भी वह भारतीय सेना के वर्दी में ही थे। उनके निधन के बाद देश में शोक की लहर दौड़ पड़ी है। मीडिया रिपोर्ट्स में वह लोग जिनसे कभी जनरल बिपिन रावत मिले भी नहीं थे, उनके आँखों में भी यह खबर सुनकर अश्रु छलक आए। देश के सभी नागरिकों ने जनरल बिपिन रावत(General Bipin Rawat), उनकी पत्नी सहित 13 अफसरों की मृत्यु पर एकजुट होकर कहा कि यह देश के लिए बहुत बड़ी क्षति है। आपको बता दें कि जनरल रावत के नेतृत्व में भारतीय सेना ने अनेकों सफल सैन्य अभियानों अंजाम तक पहुँचाया, जिससे भारत का कद न केवल आतंकवाद के खिलाफ मजबूत हुआ, बल्कि इसका डंका विदेशों में भी सुना गया।

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बीते एक साल से जिन तीन कृषि कानूनों पर किसान दिल्ली की सीमा पर और देश के विभिन्न हिस्सों में प्रदर्शन कर रहे थे, उन कानूनों को केंद्र ने वापस लेने का फैसला किया है। आपको बता दें कि केंद्र के इस फैसले से उसका खुदका खेमा दो गुटों में बंट गया है। कोई इस फैसले का समर्थन कर रहा है, तो कोई इसका विरोध कर रहा है। किन्तु यह सभी जानते हैं कि वर्ष 2022 में 6 राज्यों में विधानसभा चुनाव 2022 आयोजित होने जा रहे हैं, जिनमें शमिल हैं उत्तर प्रदेश, पंजाब, गुजरात, उत्तराखंड, हिमाचल-प्रदेश, और गोवा। और यह चुनाव सीधे-सीधे भाजपा के लिए नाक का सवाल है, वह भी खासकर उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 में।

उत्तर प्रदेश एवं पंजाब का चुनावी बिगुल, चुनाव से साल भर पहले ही फूंक दिया गया था। और अब केंद्र सरकार द्वारा कृषि कानून पर लिए फैसले का श्रेय अन्य राजनीतिक दल लेने में जुटे हैं। विपक्ष में कांग्रेस के नेता राहुल गांधी को इस फैसले का ताज पहनाना चाहते हैं, तो कुछ विपक्षी दल अपने-अपने सर पर यह ताज सजाना चाहते हैं। मगर इन सभी का लक्ष्य एक ही है 'विधानसभा चुनाव 2022'।

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भारत में आधुनिक लिबरल संस्कृति ने, हिन्दुओं को कई गुटों में बाँट दिया है। कोई इस धर्म को पार्टी से जोड़ कर देखता है या किसी को यह धर्म ढोंग से भरा हुआ महसूस होता है। किन्तु सत्य क्या है, उससे यह सभी लिब्रलधारी कोसों दूर हैं। यह सभी उस भेड़चाल का हिस्सा बन चुके हैं जहाँ आसिफ की पिटाई का सिक्का देशभर में उछाला जाता है, किन्तु बांग्लादेश में हो रहे हिन्दुओं के नरसंहार को, उनके पुराने कर्मों का परिणाम बताकर अनदेखा कर दिया जाता है। यह वह लोग है जो इस्लामिक आतंकवादियों पर यह कहते हुए पल्ला झाड़ लेते हैं कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता, लेकिन जब आतंकी बुरहान वाणी को सुरक्षा बलों द्वारा ढेर किया जाता है तो यही लोग उसे शहीद और मासूम बताते हैं। ऐसे ही विषयों पर मुखर होकर अपनी बात कहने और लिखने वाली जर्मन लेखिका मारिया वर्थ(Maria Wirth) ने साल 2015 में लिखे अपने ब्लॉग में इस्लाम एवं ईसाई धर्म पर प्रश्न उठाते हुए लिखा था कि "OF COURSE HINDUS WON'T BE THROWN INTO HELL", और इसके पीछे कई रोचक कारण भी बताए थे जिनपर ध्यान केंद्रित करना आज महत्वपूर्ण है।

कुरान, गैर-इस्लामियों के विषय में क्या कहता है,

मारिया वर्थ, लम्बे समय से हिंदुत्व एवं सनातन धर्म से जुड़े तथ्यों को लिखती आई हैं, लेकिन 2015 में लिखे एक आलेख में उन्होंने ईसाई एवं इस्लाम से जुड़े कुछ ऐसे तथ्यों को उजागर किया जिसे जानना हम सबके के लिए आवश्यक है। इसी लेख में मारिया ने हिन्दुओं के साथ बौद्ध एवं अन्य धर्मों के लोगों को संयुक्त राष्ट्र में ईसाई एवं इस्लाम धर्म के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी और इसके पीछे उन्होंने यह कारण बताया कि ईसाई एवं इस्लाम दोनों ही धर्मों के बुद्धिजीवी यह मानते हैं कि गैर-ईसाई या गैर-मुस्लिम नर्क की आग में जलेंगे। इसका प्रमाण देते गए उन्होंने क़ुरान की वह आयत साझा की जिसमें साफ-साफ लिखा गया है कि " जो काफिर होंगे, उनके लिये आग के कपड़े काटे जाएंगे, और उनके सिरों पर उबलता हुआ तेल डाला जाएगा। जिस से जो कुछ उनके पेट में है, और उनकी खाल दोनों एक साथ पिघल जाएंगे; और उन्हें लोहे की छड़ों से जकड़ा जाएगा।" (कुरान 22:19-22)

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