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देश

इंटरपोल ने किया खुलासा, आतंकी समूह कोरोना को बना रहे हैं हथियार

इंटरपोल ने एक रिपोर्ट जारी की, जिसमें वैश्विक आतंकवाद पर कोविड-19 के पड़ने वाले प्रभाव पर ध्यान केंद्रित किया गया है।

आतंकवादी समूहों की गतिविधियों की जांच करने के लिए भारत में खुफिया और सुरक्षा प्रतिष्ठान सतर्क हो गए हैं। (Pixabay)

By – सुमित कुमार सिंह

आतंकवादी समूह अपनी शक्ति और प्रभाव को मजबूत करने के लिए कोरोनावायरस महामारी का उपयोग कर रहे हैं। अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक पुलिस संगठन इंटरपोल ने मंगलवार को यह खुलासा किया।


इंटरपोल की ओर से इस संबंध में एक रिपोर्ट जारी करने के बाद आतंकवादी समूहों की गतिविधियों की जांच करने के लिए भारत में खुफिया और सुरक्षा प्रतिष्ठान सतर्क हो गए हैं। इंटरपोल ने एक रिपोर्ट जारी की, जिसमें वैश्विक आतंकवाद पर कोविड-19 के पड़ने वाले प्रभाव पर ध्यान केंद्रित किया गया है। इसमें पांच मुख्य खतरों से संबंधित कारकों पर ध्यान फोकस किया गया है, जिनमें कोविड-19 प्रकोप से जुड़ी विशेषताएं और मेडिकल एडवांस, वैश्विक या राष्ट्रीय प्रतिक्रिया, सोशल क्लाइमेट, सुरक्षा तंत्र का लचीलापन और आतंकवादियों की रणनीति और क्षमता के साथ ही नॉन स्टेट एक्टर्स शामिल हैं।

यह भी पढ़ें – 26/11 हमलों का एक ‘मोस्ट वांटेड आतंकवादी’ अभी भी लापता

इंटरपोल ने कहा, “जैसे कि कोविड-19 मामले कुछ क्षेत्रों में घट रहे हैं और अन्य कुछ जगहों पर बढ़ रहे हैं, रिपोर्ट आतंकवादी नेटवर्क, हिंसक चरमपंथी समूहों और अन्य संभावित खतरनाक नॉन स्टेट एक्टर्स की ओर से प्रतिक्रिया की निगरानी करने की महत्वपूर्ण आवश्यकता को रेखांकित करती है।” मालूम हो कि नॉन स्टेट एक्टर्स उन कुख्यात लोगों के लिए इस्तेमाल शब्द है, जो सत्ता में न रहते हुए देश में अपनी समानांतर सरकार चलाते हैं।

इंटरपोल द्वारा कोविड – 19 के अवैध विज्ञापन के संबंध में संभावित आपराधिक गतिविधि की बात कही गई है। (Pixabay)

बता दें कि इस महीने की शुरूआत में इंटरपोल ने अपने 194 सदस्य देशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों को वैश्विक अलर्ट जारी किया था कि संगठित अपराध नेटवर्क शारीरिक और ऑनलाइन दोनों ही तरीके से कोविड-19 वैक्सीन को निशाना बना सकते हैं। इंटरपोल द्वारा जारी किए गए बयान में ऑरेंज नोटिस के साथ कोविड-19 और फ्लू के नकली रूप, उनकी चोरी और अवैध विज्ञापन के संबंध में संभावित आपराधिक गतिविधि की बात कही गई है।

इंटरपोल, जो 194 सदस्य देशों में पुलिस को अंतर्राष्ट्रीय अपराध से लड़ने के लिए एक साथ काम करने में सक्षम बनाता है, उसने अब कहा है कि कुछ आतंकवादी समूह और अन्य नॉन स्टेट एक्टर्स महामारी का उपयोग अपनी शक्ति और प्रभाव को मजबूत करने के लिए कर रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि विशेष रूप से स्थानीय आबादी के लिए या अपने बाहरी वित्तीय संसाधनों का विस्तार करने के लिए ऐसा किया जा रहा है।

आतंकवादी कोविड-19 से लाभ कमाने के लिए और पैसा बनाने के लिए प्रयासरत हैं। (सांकेतिक चित्र, Pixabay)

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर कोविड-19 का प्रभाव किस प्रकार पड़ा है और इसके साथ ही आतंकवादी संगठनों को मिलने वाले फंड पर भी इसका अप्रत्यक्ष रूप से प्रभाव पड़ने की संभावना है। इंटरपोल के महासचिव जुर्गेन स्टॉक ने सचेत करते हुए कहा है कि सभी अपराधियों की तरह ही आतंकवादी भी कोविड-19 से लाभ कमाने के लिए, पैसा बनाने के लिए और अपने आधार को मजबूत करने लिए प्रयासरत हैं।

अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए – Karima Baloch, The Pakistani Human Rights Activist Found Dead

महासचिव स्टॉक ने कहा, “हमारी आतंकवाद आकलन रिपोर्ट कानून प्रवर्तन को इन चुनौतीपूर्ण खतरों की पहचान करने और उन्हें दूर करने में मदद करने के लिए एक और उपकरण है, जो चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में जारी की गई है।”

रिपोर्ट में संभावित खतरों को दूर करने के लिए वैश्विक कानून प्रवर्तन समुदाय के लिए सिफारिशें और पूर्व चेतावनी के संकेत शामिल हैं। दिल्ली स्थित एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी ने कहा कि वे रिपोर्ट को पूरी तरह से देख रहे हैं और आतंकी संगठनों की गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी। (आईएएनएस)

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यूनेस्को को पूर्व पेंटागन अधिकारी, माइकल रुबिन की फटकार (Wikimedia Commons)

माइकल रुबिन, जो एक पूर्व पेंटागन सलाहकार रह चुके हैं, का मानना हैं कि यूनेस्को को न केवल अफगानिस्तान, बल्कि पाकिस्तान को भी अपने संस्था से बाहर कर देना चाहिए क्योंकि दोनों ही देश यूनेस्को की सहायता के योग्य नहीं है। उनका यह भी कहना है कि चीन भी इसी काबिल है। तीनों वर्तमान में यूनेस्को के कार्यपालक समिति में हैं, जबकि तीनों इसके बिल्कुल भी योग्य नहीं है। रुबिन, वाशिंगटन एक्जामिनर में लिखते हैं कि, "सांस्कृतिक विरासत की रक्षा करने के बजाय, यूनेस्को के भ्रष्टाचार ने इसे विनाश का उत्प्रेरक बना दिया है। अफगानिस्तान में, दुनिया को तालिबान को जिम्मेदार ठहराना चाहिए"।

रुबिन आगे कहते हैं कि किस तरह अफगानिस्तान में तालिबान, अफगानिस्तान की सांस्कृतिक विरासत को मिटाने के लिए व्यवस्थित रूप से प्रयास कर रहा है। वे पाकिस्तानी अधिकारियों के इशारे पर ऐसा करते हैं, जो पश्तून राष्ट्रवाद से डरते हैं और विभिन्न अफगान राजवंशों की विरासत के साथ-साथ इसके इतिहास की गहराई को मिटाना चाहते हैं। अफगानी विरासत को खत्म करके, पाकिस्तान अपनी भविष्य की भूमि हथियाने को सही ठहरा सकता है ।

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एप्पल वॉच,सांकेतिक चित्र (Pixabay)

एक नए अध्ययन से जानकारी समाने आया है कि एप्पल वॉच सीरीज 6 'नियंत्रित परिस्थितियों में फेफड़ों की बीमारियों के रोगियों में हृदय गति और ऑक्सीजन संतृप्ति (एसपीओ2) प्राप्त करने का एक विश्वसनीय तरीका है।'

जर्नल साइंटिफिक रिपोर्ट में प्रकाशित अध्ययन ने 9टू5मैक की रिपोर्ट 'एप्पल वॉच डिवाइस कमर्शियल ऑक्सीमीटर के बीच मजबूत सकारात्मक सहसंबंध' देखा गया है।

ऐप्पल वॉच या वाणिज्यिक ऑक्सीमीटर उपकरणों में त्वचा के रंग, कलाई की परिधि, कलाई के बालों की उपस्थिति और एसपीओ 2 के लिए तामचीनी कील और हृदय गति माप के मूल्यांकन में कोई सांख्यिकीय अंतर नहीं था।

साओ पाउलो विश्वविद्यालय की ओर से अध्ययन एक आउट पेशेंट न्यूमोलॉजी क्लिनिक से क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज और इंटरस्टिशियल लंग डिजीज के 100 रोगियों के साथ किया गया।

इसने ऐप्पल वॉच सीरीज 6 के साथ एसपीओ 2 और हृदय गति डेटा एकत्र किया और उनकी तुलना दो वाणिज्यिक पल्स ऑक्सीमीटर से की।

परीक्षण स्वस्थ व्यक्तियों, इंटरस्टीशियल लंग डिजीज और क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज वाले लोगों के साथ किए गए थे।

oximeter, corona virus, covid 19 कोरोना काल में ऑक्सीमीटर का सबसे अधिक उपयोग किया गया है।(Pixabay)

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बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार। (Twitter, Nitish Kumar)

जातीय जनगणना को लेकर बिहार में सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के दो बडे दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जनता दल (युनाइटेड) अब सीधे तौर पर आमने-सामने नजर आने लगे हैं। केंद्र की भाजपा नीत राजग सरकार जहां जाति आधारित जनगणना कराने से इंकार कर रही है वहीं जदयू के नेता नीतीश कुमार इस मामले को लेकर विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के साथ मुखर हैं। ऐसे में कयास लगाया जाने लगा है कि क्या फिर से बिहार की सियासी समीकण बदलेंगे। हालांकि इस मुद्दे को लेकर कोई भी नेता अब तक खुलकर बात नहीं कर रही है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दिल्ली में रविवार को स्पष्ट कर चुके हैं कि जाति जनगणना देश के लिए जरूरी है। उन्होंने दिल्ली में कहा कि केंद्र सरकार को जातिगत जनगणना करानी चाहिए। इसके कई फायदे हैं।

उन्होंने कहा कि आजादी के पहले जनगणना हुई थी, आजादी के बाद नहीं हुई। जातीय जनगणना होगी तभी लोगों के बारे में सही जानकारी होगी। तब पता चलेगा कि जो पीछे है, उसे आगे कैसे किया जाए। जातीय के साथ उपजातीय जनगणना भी कराई जाए। उन्होंने यह भी कहा कि इसको लेकर एक बार फिर राज्य में सभी दलों के साथ बैठक कर आगे का निर्णय लेंगे। नीतीश के इस बयान के बाद तय है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जातिगत जनगणना के मामले में पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। इधर, भाजपा के नेता इसमें व्यवहारिक दिक्कत बता रहे हैं।

बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और सांसद सुशील कुमार मोदी कहते हैं कि तकनीकी और व्यवहारिक तौर पर केंद्र सरकार के लिए जातीय जनगणना कराना संभव नहीं है। इस बाबत केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार अगर चाहे तो वे जातीय जनगणना कराने के लिए स्वतंत्र है।


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