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देश

#freehindutemple की मुहीम रंग लाती दिख रही है, तमिलनाडु सरकार द्वारा मंदिर की भूमि को दोबारा कब्जा किया

तमिलनाडु सरकार ने स्कूल चलाने वाले एक ट्रस्ट से कांचीपुरम एकंबरेश्वर मंदिर की 160 करोड़ रुपये की जमीन पर कब्जा हासिल कर लिया है।

कांचीपुरम एकंबरेश्वर मंदिर।(Wikimedia Coomons)

तमिलनाडु सरकार ने सीता किंग्स्टन हाउस मैट्रिकुलेशन हायर सेकेंडरी स्कूल चलाने वाले एक ट्रस्ट से कांचीपुरम एकंबरेश्वर मंदिर की 160 करोड़ रुपये की जमीन पर कब्जा हासिल कर लिया है। हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती (एचआर एंड सीई) विभाग ने रविवार को चेन्नई के किलपौक में पूनमल्ले हाई रोड पर 32 जमीन की संपत्ति पर कब्जा कर लिया। यह जमीन कांचीपुरम एकंबरेश्वर मंदिर की जमीन का हिस्सा है। ट्रस्ट ने मंदिर के 44.5 मैदान पट्टे पर दिए थे जिनमें से 12.5 मैदान मंदिर को लौटा दिए गए।

जमीन तमिलनाडु में इस्तेमाल किया जाने वाला एक उपाय है, जहां एक जमीन 2.5 सेंट भूमि के बराबर होती है। मानव संसाधन एवं सीई मंत्री पी.के. सेकर बाबू और विभाग आयुक्त जे. कुमारगुरुबरन ने रविवार को ट्रस्ट के अधिकारियों से मंदिर की संपत्ति के कागजात प्राप्त किए। बाबू ने आईएएनएस को बताया, “हमने अन्य किरायेदारों से शेष क्षेत्र को दोबारा पाने के लिए कदम उठाए हैं, जिन्होंने संपत्ति को उप-पट्टे पर भी लिया था। दो संपत्तियों पर मुकदमा चल रहा है और हम छह महीने के भीतर जमीन को दोबारा पाने की उम्मीद कर रहे हैं।”


छह महीने के भीतर शेष भूमि को दोबारा प्राप्त करेगा।(सांकेतिक चित्र, Wikimedia Commons)

एचआर एंड सीई ने एक बयान में कहा कि कालावाला कुन्नन चेट्टी चैरिटी ट्रस्ट ने 99 साल के पट्टे के लिए पूनमल्ले हाई रोड, किलपौक पर एकंबरेश्वर मंदिर की भूमि के 44.5 मैदान ले लिए थे और वहां सीता किंग्स्टन स्कूल चला रहा था। एचआर एंड सीई विभाग ने भूमि की पुनप्र्राप्ति के लिए अदालत का रुख किया और मद्रास उच्च न्यायालय ने मानव संसाधन और सीई विभाग के पक्ष में फैसला सुनाया।

यह भी पढ़ें: क्या मंदिर भी सरकारी संपत्ति है?

शेष 96.5 जमीनों की कीमत 483 करोड़ रुपये आंकी गई है और विभाग, मंत्री के अनुसार, मुकदमेबाजी करेगा और छह महीने के भीतर भूमि को दोबारा प्राप्त करेगा। तमिलनाडु में मंदिर की संपत्तियों को पट्टे पर देना बड़े पैमाने पर था और द्रमुक सरकार ने पद संभालने के बाद मानव संसाधन और सीई विभाग को पट्टे पर दी गई मंदिर की जमीन की दोबारा प्राप्ति के लिए कदम उठाने के लिए कहा था। जब 1984-85 के भूमि विवरण की तुलना 2019-20 के भूमि विवरण से की गई, तो पूरे तमिलनाडु में मंदिर की लगभग 40,000 एकड़ भूमि का नुकसान हुआ है। सरकार ने जमीन और अन्य संपत्तियों सहित मंदिर की संपत्तियों के सभी विवरण ऑनलाइन अपलोड करने का आदेश दिया है जिससे यह सार्वजनिक डोमेन में आए।(आईएएनएस-SHM)

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देश भर से जमा की गई 2 लाख से अधिक ईंटें। (IANS)

राम भक्तों द्वारा दी गई और विश्व हिंदू परिषद (विहिप) (Vishwa Hindu Parishad) द्वारा तीन दशक लंबे मंदिर आंदोलन के दौरान देश भर से जमा की गई 2 लाख से अधिक ईंटों का इस्तेमाल अब राम जन्मभूमि स्थल पर भव्य मंदिर का निर्माण के लिए किया जाएगा।

मंदिर ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा ने कहा, "1989 के 'शिलान्यास' के दौरान कारसेवकों द्वारा राम जन्मभूमि पर एक लाख पत्थर रखे गए थे। कम से कम, 2 लाख पुरानी कार्यशाला में रह गए हैं, जिन्हें अब निर्माण स्थल पर स्थानांतरित कर दिया जाएगा। ईंटों पर भगवान राम का नाम लिखा है और यह करोड़ों भारतीयों की आस्था का प्रमाण है।

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कर्नाटक राज्य में मंदिर विध्वंस अभियान पर विराम लगा दिया है। (wikimedia commons)

हिंदू संगठनों की ओर से आलोचना झेल रही कर्नाटक की भाजपा सरकार नें कर्नाटक में मंदिर विध्वंस के मुद्दे पर फिलहाल राज्य विधानसभा में एक कानून पारित कर पुरे कर्नाटक राज्य में मंदिर विध्वंस अभियान पर विराम लगा दिया है। सत्ताधारी पार्टी भाजपा और विपक्षी दल कांग्रेस इन दोनों के बीच मंगलवार को तीखी बहस के बीच प्रस्तावित कर्नाटक धार्मिक संरचना (संरक्षण) विधेयक 2021 को पारित कर दिया गया।

यह प्रस्तावित अधिनियम जिसका नाम 'कर्नाटक धार्मिक संरचना (संरक्षण) विधेयक-2021' है, इसका मुख्य उद्देश्य सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार राज्य में धार्मिक संरचनाओं के विध्वंस को रोकना है।

यह अधिनियम में कहा गया है कि 'कर्नाटक धार्मिक संरचना संरक्षण अधिनियम -2021' के लागू होने की तारीख से, कानूनों के कानूनी प्रावधान और अदालतों, न्यायशास्त्र और अधिकारियों के आदेशों या दिशानिदेशरें के बावजूद, सरकार धार्मिक केंद्रों की रक्षा करेगी।

सार्वजनिक संपत्तियों पर बने धार्मिक केंद्रों को खाली करने, स्थानांतरित करने और ध्वस्त करने की प्रक्रिया को रोक दिया जाएगा। इस अधिनियम के लागू होने और विधान परिषद में पारित होने के बाद से ही ।

इसी बीच विपक्ष के नेता सिद्धारमैया ने कर्नाटक सरकार पर आरोप लगाया कि हिंदू जागरण वेदिक और हिंदू महासभा की आलोचना का सामना करने के बाद भाजपा यह कानून लाई है। मैसूर में मंदिर तोड़े जाने के बाद बीजेपी पुनर्निर्माण के लिए नया कानून ला रही है, यह भी आरोप लगायें हैं उन्होंने भाजपा पार्टी के खिलाफ । इसके बाद कांग्रेस के एक और विधायक और पूर्व मंत्री औरयू.टी. खादर ने बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा कि छात्र पाठ्यपुस्तकों में पढ़ने जा रहे हैं कि भाजपा ने भारत में आक्रमणकारियों की तरह मंदिरों को ध्वस्त कर दिया।

\u0915\u0930\u094d\u0928\u093e\u091f\u0915 \u0930\u093e\u091c\u094d\u092f कर्नाटक राज्य का नक्शा सांकेतिक इमेज (wikimedia commons)

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डब्ल्यूएचओ यानीं विश्व स्वास्थ्य संगठन का मुख्यालय (wikimedia commons)

पूरी दुनिया एक बार फिर कोरोना वायरस अपना पांव पसार रहा है । डब्ल्यूएचओ यानीं विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि कोरोना वायरस का जो डेल्टा कोविड वैरिएंट संक्रामक वायरस का वर्तमान में प्रमुख प्रकार है, अब यह दुनिया भर में इसका फैलाव हो चूका है । इसकी मौजूदगी 185 देशों में दर्ज की गई है। मंगलवार को अपने साप्ताहिक महामारी विज्ञान अपडेट में वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसी ने कहा, डेल्टा वैरिएंट में अब सेम्पल इकट्ठा करने की डेट जो कि 15 जून -15 सितंबर, 2021 के बीच रहेंगीं । जीआईएसएआईडी, जो एवियन इन्फ्लुएंजा डेटा साझा करने पर वैश्विक पहल के लिए है, एक ओपन-एक्सेस डेटाबेस है।

मारिया वान केरखोव जो विश्व स्वास्थ्य संगठन में कोविड-19 पर तकनीकी के नेतृत्व प्रभारी हैं , उन्होंने डब्ल्यूएचओ सोशल मीडिया लाइव से बातचीत करते हुए कहा कि , वर्तमान में कोरोना के अलग अलग टाइप अल्फा, बीटा और गामा का प्रतिशत एक से भी कम चल रहा है। इसका मतलब यह है कि वास्तव में अब दुनिया भर में कोरोना का डेल्टा वैरिएंट ही चल रहा है।

\u0915\u094b\u0930\u094b\u0928\u093e \u0935\u093e\u092f\u0930\u0938 कोरोना का डेल्टा वैरिएंट हाल के दिनों में दुनियाभर में कहर बरपाया है (pixabay)

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