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मनोरंजन

नब्बे के दशक के बाद से सुपरस्टार्स का युग फीका पड़ने लगा : पंकज त्रिपाठी

पंकज ने आईएएनएस से कहा, "नब्बे के दशक के नायक वास्तव में सुपरस्टार होते थे। उसके बाद से सुपरस्टार्स का युग फीका पड़ने लगा। उस दौर के नायक केवल स्क्रीन पर नहीं बल्कि असल जिंदगी में भी हीरो की तरह होते थे।

अभिनेता पंकज त्रिपाठी। (Wikimedia Commons)

फिल्म ‘शकीला’ में सुपरस्टार की भूमिका निभाने जा रहे अभिनेता पंकज त्रिपाठी का कहना है कि नब्बे के दशक के बाद से सुपरस्टार्स का युग फीका पड़ने लगा। पंकज ने आईएएनएस से कहा, “नब्बे के दशक के नायक वास्तव में सुपरस्टार होते थे। उसके बाद से सुपरस्टार्स का युग फीका पड़ने लगा। उस दौर के नायक केवल स्क्रीन पर नहीं बल्कि असल जिंदगी में भी हीरो की तरह होते थे। उनकी पर्सनालिटी की हर चीज यहां तक कि उनकी वॉर्डरोब भी एक स्टेटमेंट बन जाती थी।”

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फिल्म में पंकज ने दक्षिण भारतीय सिनेमा के सुपरस्टार की भूमिका निभाई है। इस किरदार के लिए एक अहम हिस्सा उस दशक के नायकों की वॉर्डरोब और शैली से मेल खाते कपड़े पहनना भी शामिल है। जिसमें सोने की आकर्षक एक्सेसरीज, चमकीले रंग और प्रिंट्स भी शामिल हैं, जो उन नायकों के लुक को पूरा करते थे और कई प्रतिष्ठित हीरो की याद दिलाते हैं।

उन्होंने आगे कहा, “उस समय का फैशन अन्य दशकों की तरह बहुत अजीब था। मैंने इस लुक में आने का पूरा आनंद लिया और आकर्षक भड़कीले कपड़े पहने। यानि कि वैसा लुक जो मेरे बाकी किरदारों से बहुत अलग है।” इस फिल्म में उनके साथ ऋचा चड्ढा शीर्षक भूमिका में हैं और यह फिल्म 25 दिसंबर को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है। (आईएएनएस)

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पंकज त्रिपाठी, अभिनेता [wikimedia commons]

अभिनेता पंकज त्रिपाठी कई विज्ञापन को साइन करने के लिए तैयार हैं। मगर साथ ही अभिनेता ने लापरवाही से सौदों पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया है, क्योंकि उन्हें लगता है कि उनके प्रशंसकों और समाज के प्रति उनकी नैतिक जिम्मेदारी है। त्रिपाठी जी के कालीन भैया ('मिजार्पुर'), सुल्तान ('गैंग्स ऑफ वासेपुर'), रुद्र ('स्त्री') और कई अन्य उनके किरदार दर्शकों को बेहद पसंद आए हैं।

Mirzapur, amazon prime video, web series अभिनेता पंकज त्रिपाठी ने मिर्जापुर वेब सीरीज में अपने पात्र कालीन भैया के लिए काफी प्रशंसा बटोरी । (Pankaj Tripathi , Facebook)

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सुशील मोदी, भाजपा के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद [twitter]

भाजपा के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सुशील कुमार (Sushil modi) मोदी ने नीति आयोग की ताजा रिपोर्ट को चुनौती दी है, जिसमें बिहार को सभी मानकों में सबसे निचले पायदान पर रखा गया है। मोदी ने दावा किया है कि आयोग संबंधित राज्य सरकारों से परामर्श किए बिना रिपोर्ट तैयार करता है। इसलिए यह जमीनी हकीकत पर आधारित नहीं है।

नीतीश कुमार के करीबी मोदी ने कहा, "नीति आयोग ने किसी तरह शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क के बुनियादी ढांचे से संबंधित रिपोर्ट तैयार की और बिहार को सबसे नीचे रखा। इसके अधिकारियों ने गलत चीजों का मूल्यांकन करने के लिए एक पुराने तंत्र का विकल्प चुना है। उन्हें संबंधित राज्य सरकारों से परामर्श करना चाहिए और सुविधाओं का मूल्यांकन करना चाहिए। पिछले 10 से 15 वर्षों के विकास को ध्यान में रखें।"

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मिशन शक्ति (Wikimedia Commons)

उत्तर प्रदेश(Uttar Pradesh) सरकार "मिशन शक्ति"(Mission Shakti) के तीसरे चरण में राज्य के हर राज्य विश्वविद्यालय, निजी विश्वविद्यालय, सरकारी कॉलेज, गैर सरकारी सहायता प्राप्त कॉलेज और स्वयं वित्त पोषित कॉलेज में लड़कियों के लिए स्वास्थ्य क्लबों का आयोजन करने जा रही है।

सरकारी प्रवक्ता के अनुसार राज्य का शिक्षा विभाग स्वास्थ्य विभाग से संपर्क करके छात्राओं और शिक्षकों के लिए भी सरकारी शिविर लगाएगा।

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