Never miss a story

Get subscribed to our newsletter


×
दुनिया

कहां से शुरू हुई तालिबान की कहानी?

तालिबान द्वारा अफगानिस्तान को पूरी तरह से कब्जे में करने के बाद वहां डर का माहौल है।

Unsplash

अफ़ग़ानिस्तान का झंडा

By- Tushar sethi

अफगानिस्तान में लोगों को शांति का एहसास कई बरस पहले हुआ था। पिछले कुछ दशकों से अफगानिस्तान के क्या हालात रहे हैं यह समस्त विश्व को मालूम है। तालिबान के आने के बाद अफगानिस्तान के लोगों ने बहुत कुछ सहा है। इनके क्रूर शासन की वजह से अफगानिस्तान में दहशत का माहौल है। लेकिन यह जानना भी जरूरी है कि अफगानिस्तान में तालिबान की शुरुआत कैसे हुई।


साल 1979 से 1989 के बीच अफगानिस्तान में सोवियत संघ की मौजूदगी थी। अफगानिस्तान की सरकार के खिलाफ अमेरिका ने मुजाहिदीन लड़ाको को तैयार करना शुरू कर दिया था। इसके बाद सरकार और लड़ाको के बीच लड़ाई चली थी। 1994 में तालिबान शब्द सामने आया। तालिबान पूर्वी और दक्षिणी अफगानिस्तान के पश्तून क्षेत्र के धार्मिक छात्रों (तालिब) का आंदोलन था, जिन्हें पाकिस्तान में पारंपरिक इस्लामी स्कूल में शिक्षित किया गया था। मुल्ला मोहम्मद उमर ने सितंबर 1994 में कंधार में 50 छात्रों के साथ समूह की स्थापना की। उमर इस बात से निराश थे कि अफगानिस्तान में कम्युनिस्ट शासन को हटाने के बाद भी इस्लामी कानून स्थापित नहीं किया गया था। शुरुआत में यह समूह बहुत छोटा था लेकिन कुछ ही समय बाद इसकी संख्या बढ़ने लगी थी।

तालिबान की रणनीति सबसे पहले बड़े शहरों पर कब्ज़ा करने के थी। तालिबान ने धीरे-धीरे प्रांतो पर कब्ज़ा करना शुरू कर दिया था। इन्होंने इतने ज्यादा आक्रमण किए की आधे से ज्यादा अफगानिस्तान इनके कब्जे में आ गया था। मात्र 2 साल के अंदर ही 1996 में तालिबान ने काबुल को अपने कब्जे में ले लिया था। इनका काबू अफगानिस्तान पर 2001 तक चला।

इनके कड़े क़ानूनों ने लोगों की नाक में दम करके रख दिया था, खास तौर पर महिलाओं के साथ दुराचार किया जाता था। महिलाओं को पढ़ने लिखने की आजादी नहीं थी, वह बिना मर्द के घर के बाहर नहीं निकल सकती थी। जहां कहीं भी महिलाएँ काम किया करती थी वहां से उन्हें निकाल दिया था। यहाँ तक की वह तेज आवाज़ में बात भी नहीं कर सकती थी। पश्चिमी कपड़े या किताबों को भी मंजूरी नहीं दी गयी थी। मर्दों को दाढ़ी बढ़ाने का आदेश दिया गया था और शिया जो थे उन्हें कहा गया था कि सुन्नी में बदलना होगा वरना मरने के लिए तैयार हो जाओ।

Taliban, terrorist, weapon खुलेआम बंदूक लेकर घूमते आतंकी।Wikimedia commons


यह गुंडागर्दी का माहौल आतंकवादियों की लिए किसी जन्नत से कम नहीं था। साल 2001 तक लगभग पूरे अफगानिस्तान पर इनका कब्ज़ा हो गया था।कुछ समय बाद सितम्बर 2001 में ओसामा बिन लादेन ने अमेरिका में 9\11 हमले हो अंजाम दिया। इसके बाद तालिबान ने ओसामा बिन लादेन को पनाह देने में मदद की थी। जिसकी वजह से अमेरिका बहुत क्रोधित था और बदला लेने के लिए अमेरिका ने अपनी आर्मी को अफगानिस्तान भेज दिया था। अमेरिका के हमले करने के बाद 2001 से 2014 तक तालिबान का नियंत्रण बिलकुल खत्म हो गया था लेकिन तालिबान पूरी तरह से नष्ट नहीं हुआ था। साल 2021 में अमेरिका ने अपने सैनिकों को वापस लाने की प्रक्रिया शुरू की और आज की तरीक में एक बार फिर तालिबान का अफगानिस्तान पर कब्ज़ा हो चुका है।

Popular

नवजात के लिए माँ के दूध से कोविड संक्रमण का नही है कोई खतरा ( Pixabay )

Keep Reading Show less

5 राज्यों के विधानसभा चुनावों की तारीख़ की घोषणा के बाद कार्यकर्तओं के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पहला सवांद कार्यक्रम (Wikimedia Commons)


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अपने संसदीय क्षेत्र वारणशी के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं से बातचीत की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भाजपा कार्यकर्ताओं से बात करते हुए कहा कि "उन्हें किसानों को रसायन मुक्त उर्वरकों के उपयोग के बारे में जागरूक करना चाहिए।"

नमो ऐप के जरिए प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने भाजपा के बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं से बातचीत के दौरान बताया कि नमो ऐप में 'कमल पुष्प" नाम से एक बहुत ही उपयोगी एवं दिलचस्प सेक्शन है जो आपको प्रेरक पार्टी कार्यकर्ताओं के बारे में जानने और अपने विचारों को साझा करने का अवसर देता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नमो ऐप के सेक्शन 'कमल पुष्प' में लोगों को योगदान देने के लिए आग्रह किया। उन्होंने बताया की इसकी कुछ विशेषतायें पार्टी सदस्यों को प्रेरित करती है।

Keep Reading Show less

हुदा मुथाना वर्ष 2014 में आतंकवादी समूह आईएस में शामिल हुई थी। घर वापसी की उसकी अपील पर यूएस कोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया (Wikimedia Commons )

2014 में अमेरिका के अपने घर से भाग कर सीरिया के अतंकवादी समूह इस्लामिक स्टेट (आईएस) में शामिल होने वाली 27 वर्षीय हुदा मुथाना वापस अपने घर लौटने की जद्दोजहद में लगी है। हुदा मुथाना वर्ष 2014 में आतंकवादी समूह इस्लामिक स्टेट के साथ शामिल हुई साथ ही आईएस के साथ मिल कर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर आतंकवादी हमलों की सराहना की और अन्य अमेरिकियों को आईएस में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया था। हुदा मुथाना को अपने किये पर गहरा अफसोस है।

वर्ष 2019 में हुदा मुथाना के पिता ने संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएस) के सुप्रीम कोर्ट में अमेरिका वापस लौटने के मामले पर तत्कालीन ट्रंप प्रशासन के खिलाफ मुक़द्दमा दायर किया था। संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएस) के सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को बिना किसी टिप्पणी के हुदा मुथाना के इस मामले पर सुनवाई से इनकार कर दिया।

Keep reading... Show less