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व्यवसाय

कोविड के कहर की वापसी से वित्तवर्ष 2022 का आईपीओ सीजन प्रभावित होगा

कोविड महामारी की वापसी से न केवल भारत के द्वितीयक बाजारों पर, बल्कि वित्तवर्ष 2022 के आईपीओ सीजन पर भी असर पड़ने की आशंका है।

आईपीओ सीजन कोरोना महामारी के चलते रहेगा मंदा।(Pixabay)

By: रोहित वैद

कोविड महामारी की वापसी से न केवल भारत के द्वितीयक बाजारों पर, बल्कि वित्तवर्ष 2022 के आईपीओ सीजन पर भी असर पड़ने की आशंका है। कई कंपनियों की योजना अपेक्षित व्यापार को अगले 6 से 8 महीनों में सार्वजनिक रूप से पटरी पर लाने की है।


वित्तीय समानता में एक यूनिकॉर्न एक स्टार्टअप का प्रतिनिधित्व करता है जिसके पास अपने पिछले फंडिंग राउंड में उत्पन्न पूंजी के आधार पर एक अरब डॉलर से अधिक का बाजार मूल्यांकन है। इस तरह, कोविड की वापसी के संबंध में द्वितीयक बाजार में धन प्रवाह की स्थिति प्रारंभिक चरण के निवेशकों को बाहर निकलने के लिए यूनिकॉर्न की क्षमता को प्रभावित करेगी।

एचडीएफसी सिक्योरिटीज के रिटेल रिसर्च हेड दीपक जसानी ने आईएएनएस को बताया, “कोविड की वापसी का माध्यमिक बाजार के सूचकांकों पर प्रभाव पड़ेगा, और यह आईपीओ सदस्यता स्तरों को प्रभावित करेगा। आईपीओ मूल्य निर्धारण भी महत्वपूर्ण है। यदि निवेशकों के लिए टेबल पर पर्याप्त पैसा बचा है, तो आईपीओ आसानी से चल सकता है।”

कोविड की वापसी का माध्यमिक बाजार के सूचकांकों पर प्रभाव पड़ेगा।(Pixabay)

हाल तक, कई यूनिकॉर्न ने आईपीओ बाजार में टैप करने की योजना की घोषणा की है। इस समय एक दर्जन से अधिक कंपनियों को बाजार नियामक की मंजूरी मिल गई है, और अन्य एक दर्जन से अधिक को जनता के बीच जाने के मौके का इंतजार है।

कैपिटल वाया में अनुसंधान प्रमुख गौरव गर्ग ने कहा, “एसबीआई कार्ड जैसी कंपनियां, जो महामारी के शुरुआती चरण के दौरान सार्वजनिक हुईं, उन्हें रियायती मूल्य पर सूचीबद्ध किया गया। इस वर्ष भी, हमने देखा है कि कोविड-19 मामलों की बढ़ती संख्या ने मैक्रोटेक की डेवलपर सूची को कैसे प्रभावित किया है। इसलिए, यदि यह प्रवृत्ति बनी रहती है, तो हम आईपीओ में गिरावट देख सकते हैं।”

इसके अलावा, निवेशकों को बाहर निकलने के लिए पैसा जुटाने के साधन के रूप में आईपीओ ने हाल ही में महत्व प्राप्त किया है।

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मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के रिटेल रिसर्च के सिद्धार्थ खेमका ने कहा, “वित्तवर्ष 21 में मजबूत आईपीओ शो के बाद, हम वित्तवर्ष 22 में इसी तरह के रुझान की उम्मीद करते हैं।”

उन्होंने कहा, “एक बार जब बाजार में लाभ होने लगता है तो हम उम्मीद करते हैं कि सभी प्रकार की कंपनियां सार्वजनिक हो जाएंगी, चाहे वे यूनिकॉर्न हों या अन्य। कई लोग प्राथमिक बाजार में प्रवेश करने के लिए पहले ही नियामक मंजूरी प्राप्त कर चुके हैं।”

पिछले वित्तवर्ष में इंडिया इंक ने 30,000 करोड़ रुपये से अधिक धन जुटाए थे।(आईएएनएस-SHM)

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देश भर से जमा की गई 2 लाख से अधिक ईंटें। (IANS)

राम भक्तों द्वारा दी गई और विश्व हिंदू परिषद (विहिप) (Vishwa Hindu Parishad) द्वारा तीन दशक लंबे मंदिर आंदोलन के दौरान देश भर से जमा की गई 2 लाख से अधिक ईंटों का इस्तेमाल अब राम जन्मभूमि स्थल पर भव्य मंदिर का निर्माण के लिए किया जाएगा।

मंदिर ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा ने कहा, "1989 के 'शिलान्यास' के दौरान कारसेवकों द्वारा राम जन्मभूमि पर एक लाख पत्थर रखे गए थे। कम से कम, 2 लाख पुरानी कार्यशाला में रह गए हैं, जिन्हें अब निर्माण स्थल पर स्थानांतरित कर दिया जाएगा। ईंटों पर भगवान राम का नाम लिखा है और यह करोड़ों भारतीयों की आस्था का प्रमाण है।

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कर्नाटक राज्य में मंदिर विध्वंस अभियान पर विराम लगा दिया है। (wikimedia commons)

हिंदू संगठनों की ओर से आलोचना झेल रही कर्नाटक की भाजपा सरकार नें कर्नाटक में मंदिर विध्वंस के मुद्दे पर फिलहाल राज्य विधानसभा में एक कानून पारित कर पुरे कर्नाटक राज्य में मंदिर विध्वंस अभियान पर विराम लगा दिया है। सत्ताधारी पार्टी भाजपा और विपक्षी दल कांग्रेस इन दोनों के बीच मंगलवार को तीखी बहस के बीच प्रस्तावित कर्नाटक धार्मिक संरचना (संरक्षण) विधेयक 2021 को पारित कर दिया गया।

यह प्रस्तावित अधिनियम जिसका नाम 'कर्नाटक धार्मिक संरचना (संरक्षण) विधेयक-2021' है, इसका मुख्य उद्देश्य सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार राज्य में धार्मिक संरचनाओं के विध्वंस को रोकना है।

यह अधिनियम में कहा गया है कि 'कर्नाटक धार्मिक संरचना संरक्षण अधिनियम -2021' के लागू होने की तारीख से, कानूनों के कानूनी प्रावधान और अदालतों, न्यायशास्त्र और अधिकारियों के आदेशों या दिशानिदेशरें के बावजूद, सरकार धार्मिक केंद्रों की रक्षा करेगी।

सार्वजनिक संपत्तियों पर बने धार्मिक केंद्रों को खाली करने, स्थानांतरित करने और ध्वस्त करने की प्रक्रिया को रोक दिया जाएगा। इस अधिनियम के लागू होने और विधान परिषद में पारित होने के बाद से ही ।

इसी बीच विपक्ष के नेता सिद्धारमैया ने कर्नाटक सरकार पर आरोप लगाया कि हिंदू जागरण वेदिक और हिंदू महासभा की आलोचना का सामना करने के बाद भाजपा यह कानून लाई है। मैसूर में मंदिर तोड़े जाने के बाद बीजेपी पुनर्निर्माण के लिए नया कानून ला रही है, यह भी आरोप लगायें हैं उन्होंने भाजपा पार्टी के खिलाफ । इसके बाद कांग्रेस के एक और विधायक और पूर्व मंत्री औरयू.टी. खादर ने बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा कि छात्र पाठ्यपुस्तकों में पढ़ने जा रहे हैं कि भाजपा ने भारत में आक्रमणकारियों की तरह मंदिरों को ध्वस्त कर दिया।

\u0915\u0930\u094d\u0928\u093e\u091f\u0915 \u0930\u093e\u091c\u094d\u092f कर्नाटक राज्य का नक्शा सांकेतिक इमेज (wikimedia commons)

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डब्ल्यूएचओ यानीं विश्व स्वास्थ्य संगठन का मुख्यालय (wikimedia commons)

पूरी दुनिया एक बार फिर कोरोना वायरस अपना पांव पसार रहा है । डब्ल्यूएचओ यानीं विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि कोरोना वायरस का जो डेल्टा कोविड वैरिएंट संक्रामक वायरस का वर्तमान में प्रमुख प्रकार है, अब यह दुनिया भर में इसका फैलाव हो चूका है । इसकी मौजूदगी 185 देशों में दर्ज की गई है। मंगलवार को अपने साप्ताहिक महामारी विज्ञान अपडेट में वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसी ने कहा, डेल्टा वैरिएंट में अब सेम्पल इकट्ठा करने की डेट जो कि 15 जून -15 सितंबर, 2021 के बीच रहेंगीं । जीआईएसएआईडी, जो एवियन इन्फ्लुएंजा डेटा साझा करने पर वैश्विक पहल के लिए है, एक ओपन-एक्सेस डेटाबेस है।

मारिया वान केरखोव जो विश्व स्वास्थ्य संगठन में कोविड-19 पर तकनीकी के नेतृत्व प्रभारी हैं , उन्होंने डब्ल्यूएचओ सोशल मीडिया लाइव से बातचीत करते हुए कहा कि , वर्तमान में कोरोना के अलग अलग टाइप अल्फा, बीटा और गामा का प्रतिशत एक से भी कम चल रहा है। इसका मतलब यह है कि वास्तव में अब दुनिया भर में कोरोना का डेल्टा वैरिएंट ही चल रहा है।

\u0915\u094b\u0930\u094b\u0928\u093e \u0935\u093e\u092f\u0930\u0938 कोरोना का डेल्टा वैरिएंट हाल के दिनों में दुनियाभर में कहर बरपाया है (pixabay)

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