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विश्व संसाधन संस्थान (World Resources Institute) ने एक नई रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें उनके शोध व नवीनतम आंकड़ों के अनुसार दुनिया ने 2020 में लगभग नीदरलैंड शहर के आकार जितने उष्णकटिबंधीय जंगलों(tropical forests) को खो दिया है। बड़े – बड़े शहरों की बात करें तो, इंडोनेशिया (Indonesia) और मलेशिया (Malaysia) जैसे शहरों में, जंगलों में लगातार कमी देखने को मिली है। कुल मिलाकर देखा जाए तो करीबन एक जैसे वनों का बड़े स्तर पर नुकसान हुआ है और यह नुकसान 2019 में कुछ 12 फीसदी तक बढ़ गया था।


डब्ल्यूआरआई के वन कार्यक्रम के प्रमुख रॉड टेलर (Rod Taylor) ने कहा कि, यह घने जंगल सैंकड़ों साल पुराने होते हैं और यह बड़ी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) का उपयोग करते हैं और मानव जीवन को ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) के दुष्प्रभाव से बचाते हैं। लेकिन दुनिया भर में जंगलों का निरंतर घटाव होने से जैव विविधता और जलवायु परिवर्तन पर इसका विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। डब्ल्यूआरआई के प्रतिष्ठित वरिष्ठ पत्रकार फ्रांसेस सेमोर (Frances Seymour) ने कहा कि, सभी देशों की सरकारों को अपनी अर्थव्यवसथा को बचाए रखने के साथ – साथ जंगलों की सुरक्षा के लिए भी ठोस कदम उठाना बहुत जरूरी है। 

डब्ल्यूआरआई ने अपने आंकड़ों में बताया है कि, ट्रॉपिक्स (tropics) ने 2020 में फिर से विकसित वनों(Regrown forest) के कुल 12.2 मिलियन हैक्टेयर भूमि को खो दिया है। यह घाटा कुल उतना है, जितना हम 570 मिलियन कारों का निर्माण करते हैं। अन्य देशों की बात करें तो ब्राजील में भी जंगलों के घटाव में भारी गिरावट देखी गई है। यह आंकड़ा करीबन 1.7 मिलियन हैक्टेयर है। जिसका मतलब है कि, पिछले साल से भी करीब 25 फीसदी ज्यादा वनों के घटाव में वृद्धि हुई है। 

ब्राजील (Brazil) में भी कृषि क्षेत्रों के उपयोग के लिए बड़े स्तर पर जंगलों में आग लगा दी गई थी। जिसका परिणाम यह हुआ कि, गर्म व शुष्क परिस्थितियों के कारण यह आग नियंत्रण से बाहर निकल गई थी। जिस वजह से भारी नुकसान हुआ था। विशेषज्ञों का कहना है कि, 2015 में विनाशकारी आग के बाद, सरकार ने अपना योगदान बढ़ा दिया है और कुछ नियमों या उपायों को सामने रखा है। जिसमें जंगलों में आग की निगरानी और रोकथाम, नए ताड़ के तेलों (Palm Oil) के बागानों पर प्रतिबंध और गरीबी को कम करने के उद्देश्य से कृषि व्यवस्था में सुधार लाना आदि जैसे उपाय शामिल हैं। 

ब्राजील में भी कृषि क्षेत्रों के लिए बड़े स्तर पर जंगलों में आग लगा दी गई थी। (सांकेतिक चित्र, Pexel)

डब्ल्यूआरआई के इंडोनेशिया कार्यालय में सस्टेनेबल कमोडिटीज और बिजनेस मैनेजर एंडिका पुत्रादित्यमा (Andika Putraditama) ने कहा कि, ताड़ के तेल में फिर से उछाल देखने को मिल रहा है, जो उद्योगों पर विस्तार का दवाब बना सकता है। ताड़ का तेल विश्व भर में लोगों का पसंदीदा तेल है। जिस वजह से यह उद्योगों में विस्तार को बढ़ावा देता है। इसके अतिरिक्त उन्होनें यह भी कहा कि, यह इंडोनेशिया शहर की दो तीन साल असली परीक्षा होगी की वह वनों की कटाई को कम करने में अपने प्रदर्शन को बनाए रख सकता है या नहीं।

सेमोर ने बताया कि, जलवायु परिवर्तन (Climate Change) में वनों की कटाई का सबसे बड़ा योगदान होता है। 2020 के आंकड़ों के मुताबिक, विभन्न प्रकार के वन कई बार खुद इस जलवायु परिवर्तन का शिकार हो जाते हैं और ऐसा गर्म व शुष्क मौसम के कारण होता है। गर्म और शुष्क मौसम के कारण, 2018 में जर्मनी और चेक गणराज्य में जंगलों की हानि को तीन गुना बढ़ा दिया था। अत्यधिक गर्मी और सूखे ने 2019 और 2020 में ऑस्ट्रेलिया (Australia) के जंगलों में भी विनाशकारी आग को जन्म दिया था। जिस वजह से करीब नौ गुना पेड़ों की हानि में वृद्धि हुई। उन्होंने यह भी कहा कि, अगर निरंतर जलवायु परिवर्तन की स्थिति बनी रही तो, जंगलों का ह्रास होना एक सामान्य स्थिति बन जाएगी।

यह भी पढ़ें :- पर्यावरणविद् : पृथ्वी पर जीवन दुनिया के जंगलों की बहाली पर टिका है

सीमोर ने कहा, प्रकृति लंबे समय से हमारे दिए गए जोखिम को चुप – चाप सह रही है लेकिन अब वह चिल्ला रही है। प्रकृति को मिली चोट मनुष्य के जीवन पर सबसे बड़ा खतरा बनकर उभरेगी। सीमोर ने कहा, जलवायु परिवर्तन और वन क्षरण (Deforestation) (जंगलों की निरंतर कटाई), दोनों ने मिलकर परिस्थिति को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। आग की चपेट में आकर जब यह जंगल जल जाते हैं और सड़ जाते हैं तब यह और अधिक मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ते हैं। जो मानव जीवन के लिए सबसे बड़ा खतरा है। अभी ये खतरा मामूली लगता है लेकिन आने वाले समय में इसके प्रभाव खतरनाक व दीर्घकालीन होंगे।

सीमोर ने कहा, वनों की कटाई और ग्रीन हाउस गैस (Green House Gas) के उत्सर्जन को रोकने में काफी अधिक समय लगता है। इसलिए जरूरी है कि हर व्यक्ति वनों की कटाई को रोकने के लिए अपने स्तर पर प्रयास करें और यह प्रयास वैश्विक स्तर पर भी होने जरूरी है ताकि सभी देश जंगलों के बचाव में अपना योगदान दें सकें। (VOA)

(हिंदी अनुवाद- स्वाती मिश्रा)

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