अनकही कहानी : अटल बिहारी वाजपेयी और मिसेज कौल की

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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी(Wikimedia Commons)

1978 में जब वाजपेयी विदेश मंत्री के रूप में चीन, पाकिस्तान और अन्य देशों की यात्रा से लौट कर दिल्ली में चीन के झूठ और पाकिस्तान जैसे देशों के मुद्दों पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे थें। उसी दौरान युवा पत्रकार उदयन शर्मा ने बाजपेयी से एक प्रश्न पूछा, “वाजपेयी जी, पाकिस्तान, कश्मीर और चीन की बात छोड़िए और ये बताइए कि, मिसेज़ कौल का क्या मामला है?” अपनी वाकपटुता के लिए मशहूर वाजपेयी ने जवाब दिया, “कश्मीर जैसा मसला है।”

3 मई 2014 को राजधानी दिल्ली के कृष्णा मेनन मार्ग के वाजपेयी के बंगले पर लंबे समय तक उनके साथ रहने वाली मिसेज कौल का दिल का दौरा पड़ने की वजह से मृत्यु हो गई, उस दौरान वहाँ पर कई लोग, यहां तक की उनके विरोधी दल के नेता भी उनके घर पहुंचे। मिसेज कौल की मौत के बाद उनके अंतिम संस्कार में भारतीय जनता पार्टी के बड़े नाम लाल कृष्ण आडवाणी, वर्तमान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जैसे बड़े नाम मौजूद रहे।

मिसेज कौल की मृत्यु से जो सम्बन्ध प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष रूप से ख़त्म हुआ, वह हिन्दुस्तान की राजनीति में किसी न सुना और ना ही किसी ने देखा था। इस बात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वाजपेयी जी ने कौल दंपति की बड़ी पुत्री नमिता भट्टाचार्य को गोद ले लिया। वाजपेयी के विदेश मंत्री बनने से लेकर भारत के प्रधानमंत्री पद संभालने तक के सफर में मिसेज कौल हमेशा साथ ही रहीं। वाजपेयी के कई फैसलों में वह प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष रूप शामिल रहती थी।

अटल बिहारी वाजपेयी, राजकुमारी हकसर के साथ ही ग्वालियर के विक्टोरिया कॉलेज, जिसे वर्तमान में लक्ष्मीबाई कॉलेज के नाम से जाना जाता है, वहां साथ में पढाई कर रहे थें। 40 के दशक में किसी लड़की से दोस्ती और प्यार किसी बारूद के ढ़ेर से कम नहीं था, पता नहीं कब आग लग जाए और सब खाक हो जाए।

वाकपटुता , हाज़िरजवाबी या सेंस ऑफ़ ह्यूमर के धनी कवि हृदय अटल बिहारी वाजपेयी ने एक पत्र में अपनी भावनाओं को लिखकर राजकुमारी हकसर के सामने रखा, हालांकि मिसेज कौल का उत्तर कभी वाजपेयी को नहीं मिल पाया। और राजनेता के रूप में हर मुकाम को हासिल करने वाले अटल बिहारी वाजपेयी आजीवन अविवाहित रहे।

समय बीतते ही, राजकुमारी के पिता गोविंद नारायण हकसर जो एक कश्मीरी पंडित थें। उन्होंने राजकुमारी की शादी बृज नारायण कौल से करा दी। बृज नारायण कौल खुद एक कश्मीरी पंडित थे।और इस घटनाक्रम से अटल प्रेम की कहानी किसी और दिशा में मुड़ गयी।

दिन बीते, वाजपेयी अपनी राजनीतिक यात्रा और राजकुमारी हकसर दोनों अपनी निजी जिंदगी में खो गए। वाजपेयी अपनी राजनीतिक सफर मे कानपुर से उत्तर प्रदेश के राजनीती के गढ़ और प्रदेश की राजधानी लखनऊ पहुंच गए और दूसरी तरफ मिसेज कौल पति के साथ राष्ट्रिय राजधानी दिल्ली आयी और यही रहने लगी। मिसेज कौल के पति बृज नारायण कौल, रामजस कॉलेज में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत थे।

समय बीता, अविवाहित वाजपेयी पूर्ण रूप से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पटल पर एक परिपक्व राजनेता बन गए, जो हाजिर जवाबी से सबका दिल जीत लेने के लिए मशहूर थे। इसी बीच वाजपेयी के राजनीतिक यात्रा के दौर में एक वक़्त ऐसा भी आया जहां मिसेज कौल से आमना-सामना हुआ।

फिर कुछ समय बाद कौल के घर अटल बिहारी वाजपेयी जी अक्सर आने लगे थे। बाद में वाजपेयी जी कौल परिवार के साथ ही उनके घर में रहने लगें। उस समय प्रो. कौल, रामजस कॉलेज में वार्डन नियुक्त थें। अपनी राजनीतिक यात्रा में 1978 में मोरारजी देसाई की सरकार में जब अटल बिहारी वाजपेयी विदेश मंत्री नियुक्त हुए तो वह कौल परिवार के साथ ही अपने सरकारी बंगले में रहने लगे।

हालांकि अटल बिहारी वाजपेयी और महारानी कौल के इस रिश्ते की चर्चा कभी हुई ही नहीं। इस रिश्ते को लेकर ना ही वाजपेयी जी और नहीं कभी महारानी ने किसी के सामने अपना पक्ष रखा।

मिसेज कौल ने एक बार एक पत्रिका के इंटरव्यू दौरान कहा था कि, वाजपेयी जी से उनकी दोस्ती या रिश्ते को लेकर किसी को समझाने की जरूरत नहीं है। मिसेज कौल ने यह भी कहा था कि, पति बी एन कौल के साथ भी उनका रिश्ता बहुत ही मजबूत है।

जब मिसेज कौल का निधन हुआ तब वाजपेयी खुद बहुत बीमार हो गए थे, जिसकी वजह से वो उनके अंतिम संस्कार में नहीं पहुंच पाए। अविवाहित वाजपेयी जी की जब मृत्यु हुयी थी तब, उनकी दत्तक पुत्री नमिता ने मुखाग्नि दी।

अटल बिहारी वाजपेयी ऐसे के नेता थे जो अपनी वाकपटुता से, किसी मुद्दे से उठे मुश्किल सवालों के साथ-साथ मुद्दे को ही कुचल देते थे। कई बार उनका विरोधी भी उनकी बातों से मुस्कुरा देता था। लेकिन मिसेज कौल के साथ के उनके इस रिश्ते का कोई नाम नहीं था।

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