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देश

भद्रकाली मंदिर का विकास और कश्मीरी पंडितों की वापसी चाहते हैं हंदवाड़ा के युवा

उत्तर कश्मीर के हंदवाड़ा के एक युवा नेता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा को पत्र लिखकर माता भद्रकाली मंदिर के विकास के साथ ही केंद्र शासित प्रदेश में आध्यात्मिक पर्यटन के विस्तार और कश्मीरी पंडितों की वापसी की मांग की है।

By  : हितेश टिक्कू


उत्तर कश्मीर के हंदवाड़ा के एक युवा नेता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा को पत्र लिखकर माता भद्रकाली मंदिर के विकास के साथ ही केंद्र शासित प्रदेश में आध्यात्मिक पर्यटन के विस्तार और कश्मीरी पंडितों की वापसी की मांग की है। हंदवाड़ा के एक युवा नेता मुदस्सिर तांत्रे की ओर से लिखे गए एक पत्र में हंदवाड़ा में बेहतर बुनियादी ढांचे की मांग की गई है, जहां विख्यात माता भद्रकाली मंदिर भी है, जो जम्मू-कश्मीर के सबसे पुराने हिंदू तीर्थस्थलों में से एक है।

पत्र में इस ओर भी ध्यान दिलाया गया है कि बुनियादी सुविधाओं और अन्य जरूरी सुविधाओं की कमी के कारण ही श्रद्धालु मंदिर में आने के इच्छुक नहीं हैं। तांत्रे ने सरकार से अमरनाथ यात्रा की तरह ही भद्रकाली तीर्थ क्षेत्र पर भी ध्यान देने का आग्रह किया है, ताकि हंदवाड़ा देश के आध्यात्मिक पर्यटन मानचित्र का एक हिस्सा बन जाए, जो बदले में क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था व विकास को बढ़ावा देगा और बेरोजगार युवाओं के लिए रोजगार पैदा करेगा, जो आंतकवादी गतिविधियों के सबसे बड़े पीड़ित हैं।

 

बुंगस घाटी को अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन स्थल के रूप से विकसित किया जा सकता है । ( Wikimedia Commons)

उन्होंने अपने पत्र में कहा, “भद्रकाली मंदिर की आध्यात्मिक पर्यटन स्थल के रूप में शुरुआत के साथ ही पास की बुंगस घाटी को अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन स्थल के रूप में समग्र रूप से विकसित किया जा सकता है, जिससे पूरे उत्तरी कश्मीर को विकास के नक्शे पर लाया जा सकता है।” प्रधानमंत्री मोदी को संबोधित एक अन्य पत्र में तांत्रे ने लिखा, “हमारी विनती है कि माता भद्रकाली मंदिर को जल्द से जल्द विकसित किया जाए और इसकी खोई हुई महिमा को बिना किसी देरी के बहाल किया जाए। माता भद्रकाली मंदिर विभिन्न समुदायों के बीच भाईचारे का गवाह है।” पलायन कर चुके कश्मीरी पंडितों की वापसी सुनिश्चित करने का आग्रह करते हुए पत्र में कहा गया है, “मदर कश्मीर अपने बच्चों के बिना अधूरी है।” पत्र में कहा गया है, “माता के मंदिर से आध्यात्मिक आह्वान को अनसुना नहीं करना चाहिए। गरिमा के साथ कश्मीरी पंडितों की वापसी को यथाशीघ्र शुरू किया जाना चाहिए।”

पर्यटकों के लिए सुविधाओं की अपील करते हुए पत्र में कहा गया है, “बुंगस घाटी अपनी बेमिसाल सुंदरता के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है, लेकिन पर्यटकों और ट्रेकर्स के लिए सुविधाएं शून्य हैं। इस जगह पर विशाल पर्यटक आकर्षण हैं। इस ऐतिहासिक जगह के साथ कई ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, आदिवासी और वैश्विक यादें जुड़ी हुई हैं।” उन्होंने प्रधानमंत्री और राज्यपाल सिन्हा से यह आग्रह भी किया कि जल्द से जल्द पट्टान के बुनियादी ढांचे के विकास को शुरू किया जाए। (आईएएनएस )

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डब्ल्यूएचओ यानीं विश्व स्वास्थ्य संगठन का मुख्यालय (wikimedia commons)

पूरी दुनिया एक बार फिर कोरोना वायरस अपना पांव पसार रहा है । डब्ल्यूएचओ यानीं विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि कोरोना वायरस का जो डेल्टा कोविड वैरिएंट संक्रामक वायरस का वर्तमान में प्रमुख प्रकार है, अब यह दुनिया भर में इसका फैलाव हो चूका है । इसकी मौजूदगी 185 देशों में दर्ज की गई है। मंगलवार को अपने साप्ताहिक महामारी विज्ञान अपडेट में वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसी ने कहा, डेल्टा वैरिएंट में अब सेम्पल इकट्ठा करने की डेट जो कि 15 जून -15 सितंबर, 2021 के बीच रहेंगीं । जीआईएसएआईडी, जो एवियन इन्फ्लुएंजा डेटा साझा करने पर वैश्विक पहल के लिए है, एक ओपन-एक्सेस डेटाबेस है।

मारिया वान केरखोव जो विश्व स्वास्थ्य संगठन में कोविड-19 पर तकनीकी के नेतृत्व प्रभारी हैं , उन्होंने डब्ल्यूएचओ सोशल मीडिया लाइव से बातचीत करते हुए कहा कि , वर्तमान में कोरोना के अलग अलग टाइप अल्फा, बीटा और गामा का प्रतिशत एक से भी कम चल रहा है। इसका मतलब यह है कि वास्तव में अब दुनिया भर में कोरोना का डेल्टा वैरिएंट ही चल रहा है।

\u0915\u094b\u0930\u094b\u0928\u093e \u0935\u093e\u092f\u0930\u0938 कोरोना का डेल्टा वैरिएंट हाल के दिनों में दुनियाभर में कहर बरपाया है (pixabay)

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ऑस्ट्रेलिया का नक्शा (Wikimedia Commons)

ऑस्ट्रेलिया की शार्क प्रजातियों पर एक खतरा आ गया है। वहाँ 10 प्रतिशत से अधिक शार्क प्रजाति विलुप्त होने ही वाली है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय पर्यावरण विज्ञान कार्यक्रम (एनईएसपी) समुद्री जैव विविधता हब ने सभी ऑस्ट्रेलियाई शार्क, किरणों और घोस्ट शार्क (चिमेरा) के विलुप्त होने का मूल्यांकन प्रकाशित किया है।


ऑस्ट्रेलिया दुनिया की कार्टिलाजिनस मछली प्रजातियों के एक चौथाई से अधिक का घर है, इसमें 182 शार्क, 132 किरणें और 14 चिमेरे ऑस्ट्रेलियाई जलमार्ग में हैं। पीटर काइन जो चार्ल्स डार्विन विश्वविद्यालय (सीडीयू) के एक वरिष्ठ शोधकर्ता है और रिपोर्ट के प्रमुख लेखक है उन्होंने कहा कि तुरंत कार्रवाई की जरूरत है। पीटर काइन कहा, "ऑस्ट्रेलिया का जोखिम 37 प्रतिशत के वैश्विक स्तर से काफी कम है। यह उन 39 ऑस्ट्रेलियाई प्रजातियों के लिए चिंता का विषय है, जिनके विलुप्त होने का खतरा बढ़ गया है।"

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ब्रिटेन में पढ़ने के लिए राज्य छात्रवृत्ति मिली 6 आदिवासी छात्रों को।(Unsplash)

भारत के झारखंड राज्य में कुछ छात्रों का भविष्य उज्व्वल होने जा रहा है । क्योंकि झारखंड राज्य में छह छात्रों को राज्य के छात्रवृत्ति कार्यक्रम के तहत विदेश में मुफ्त उच्च शिक्षा मिलने जा रही है। राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कल्याण मंत्री चंपई सोरेन राजधानी रांची में गुरुवार कोआयोजित होने वाले एक कार्यक्रम में छात्रवृत्ति योजना मारंग गोमके जयपाल सिंह मुंडा के तहत लाभार्थियों छात्रोंऔर उनके अभिभावकों को सम्मानित करने जा रहे है।

आप को बता दे की यह योजना राज्य सरकार द्वारा यूके और आयरलैंड में उच्च अध्ययन करने हेतु अनुसूचित जनजातियों के छात्रों के लिए शुरू की गई है। छात्रवृत्ति के पुरस्कार प्राप्त करने वाले छात्रों को विविध खर्चो के साथ-साथ ट्यूशन फीस भी पूरी तरह मिलेगी । इस योजना के अनुसार झारखंड राज्य में हर साल अनुसूचित जनजाति से 10 छात्रों का चयन किया जाएगा।

सितंबर में ब्रिटेन के 5 विभिन्न विश्वविद्यालयों में अपना अध्ययन कार्यक्रम शुरू करंगे 6 छात्र जिनको को चुना गया हैं।

अगर बात करे चयनित छात्रों की सूचि के बारे में तो इसमें से हरक्यूलिस सिंह मुंडा जो कि "यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन " के "स्कूल ऑफ ओरिएंटल एंड अफ्रीकन स्टडीज" से एमए करने जा रहे हैं। "मुर्मू यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ लंदन" से छात्र अजितेश आर्किटेक्चर में एमए करने जा रहे हैं। और वंहीआकांक्षा मेरी "लॉफबोरो विश्वविद्यालय" में जलवायु परिवर्तन, विज्ञान और प्रबंधन में एमएससी करेंगी, जबकि दिनेश भगत ससेक्स विश्वविद्यालय में जलवायु परिवर्तन, विकास और नीति में एमएससी करेंगे।

\u0938\u094d\u091f\u0942\u0921\u0947\u0902\u091f विश्वविद्यालय में पढ़ते हुए छात्र (pixabay)

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