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थोड़ा हट के

पहाड़ों की रानी: ऊटी

ऊटी शहर प्रकृति प्रेमियों के लिए स्वर्ग समान है। यह नीलगिरी पर्वत पर बसा एक लोकप्रिय हिल स्टेशन है यहां नीलगिरी पर्वत की श्रंखलाऐ देखने लायक है, इन पहाड़ियों में खिले नीले फूल इसे और भी खूबसूरत बनाते हैं।

तमिलनाडु में बसा मनमोहक शहर ऊटी।(Unsplash)

तमिलनाडु राज्य का शहर ऊटी( उटकमंडलम )नीलगिरी पहाड़ियों में बसा एक हिल स्टेशन है। यह एक एसी जगह है जिसका नाम हर प्रकृति प्रेमी जरुर जानता होगा। कर्नाटक और तमिलनाडु राज्य की सीमा में बसा ऊटी शहर प्रकृति प्रेमियों के लिए स्वर्ग समान है। ऊटी नीलगिरी पर्वत पर बसा एक लोकप्रिय हिल स्टेशन है यहां नीलगिरी पर्वत की श्रंखलाऐ देखने लायक है, इन पहाड़ियों में खिले नीले फूल इसे और भी खूबसूरत बनाते हैं। यहां दूर-दूर तक फैली हरियाली ,चाय के बागान, तरह-तरह की वनस्पतियां, पर्यटक को मंत्रमुग्ध कर देती है।

यहां घूमने के लिए डोडाबेटा ,पिक लेमन रॉक कोडानाड व्यू प्वाइंट , बॉटेनिकल गार्ड़न, और नीलगिरी माउंटेन रेलवे हैं टॉय ट्रेन है जो नीलगिरी की खूबसूरत वादियों से निकलते हुए पर्यटकों को रोमांचित कर देती है। यहाँ पर पर्यटक बोटिंग का लुफ्त भी उठाते हैं। यहा पर अक्सर कई फिल्मों की शुटिंग होती रहती है। ऊटी के पास मदुमलाई वन्यजीव अभ्यारण भी है।


ऊटी के कुछ खास तथ्य: इस खुबसुरत शहर की बात करे तो यहा पर ब्रिटिश संस्कृति तथा वास्तुकला का प्रभाव देखने को मिलता है। इस शहर के लोगों कि अधिकतम आय पर्यटन से ही होती है।


\u090a\u091f\u0940( \u0909\u091f\u0915\u092e\u0902\u0921\u0932\u092e ) \u0928\u0940\u0932\u0917\u093f\u0930\u0940 \u092a\u0939\u093e\u0921\u0940 ऊटी( उटकमंडलम )नीलगिरी पहाड़ियों में बसा एक हिल स्टेशन है(wikimedia commons)

आप को बता दें कि अंग्रेज यहाँ की जलवायु तथा प्राकृतिक वातावरण और सुंदरता से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने इस स्थान का नाम ऊटी 'क्वीन ऑफ हिल स्टेशन' रखा दिया। अंग्रेजो ने ऊटी के निकट स्थित वेलिंगटन शहर में मद्रास रेजीमेंट की स्थापना की थी। वहीं से वेलिंगटन में मद्रास रेजीमेंट का केंद्र स्थापित हुआ। इस शहर को मद्रास प्रेसीडेंसी की ग्रीष्मकालीन राजधानी होने का गौरव प्राप्त है। नीलगिरी की पहाड़ियों में घने जंगलों के बीच स्थित ऊटी को ब्रिटिश शासनकाल में समर रिट्रीट के रूप में विकसित किया था। यहा पर ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने विकास कार्य भी किया।

ऊटी में तथा इसके आसपास चाय और कॉफ़ी के अनेक बागान हैं।ऊटी में कुछ महत्पूर्ण पर्यटन स्थल :यहा पर स्थित बोटेनिकल गार्डन अपनी खूबसूरती के लिए जाना जाता है । डोडाबेट्टा उद्यान भी एक बेहद खुबसुरत प्राकृतिक स्थल है । यहा पर एक बेहद रमणीय झील है जिसे ऊटी झील कहा जाता है , जहा पर पर्यटक नोकाविहार का लुफ्त उठाते हैं । कलहट्टी प्रपात भी पर्यटकों को आनंदित कर देता हैं । फ्लॉवर शो आदि कई कारण हैं जिनके लिए ऊटी प्रसिद्ध है। मुकुर्थी राष्ट्रीय उद्यान, मदुमलाई वन्यजीव अभ्यारण आदि ऊटी के कुछ प्रमुख पर्यटक स्थान हैं।ऊटी की टॉय ट्रेन :यहा पर दार्जिलिंग की ही तरह ऊटी में भी टॉय ट्रेन चलती है जिसे नीलगिरी माउंटेन ट्रेन कहते हैं और इसे भी यूनेस्को के वर्ल्ड हेरिटेज साइट में शामिल किया गया है। जिस से की पर्यटक रोमांचित हो उठते हैं । भारत की सबसे खुबसुरत रेल्वे लाइन में इसका नाम शामिल हैं ।

यह भी पढ़े: पिछले दो दशक में भारतीय प्रायद्विप में बढ़ी बिजली चमकने की घटनाएं

पहुँच मार्ग : ऊटी का नजदीकी एयरपोर्ट कोयम्बटूर एयरपोर्ट है जो की ऊटी से 85 किलोमीटर दूर है। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, अहमदाबाद समेत भारत के प्रमुख शहरों से नियमित फ्लाइट्स कोयंम्बटूर आती हैं। जहा से आप सड़क मार्ग से ऊटी पहुच सकते है । ऊटी से लगभग 40 किलोमीटर की दुरी पर स्थित मेट्टूपलयम ऊटी का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन है।

चेन्नई, मैसूर, बेंगलुरु समेत कई बड़े शहरों से नियमित ट्रेनें मेट्टूपलयम आती हैं। इसके अलावा आप चाहें तो नीलगिरी माउंटेन टॉय ट्रेन में बैठकर पहाड़ियों, घने जंगलों और घाटियों के बीच से होते हुए भी ऊटी पहुंच सकते हैं।

इसके आलावा सड़क मार्ग से भी यहां पंहुचा जा सकता हैं ।

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डब्ल्यूएचओ यानीं विश्व स्वास्थ्य संगठन का मुख्यालय (wikimedia commons)

पूरी दुनिया एक बार फिर कोरोना वायरस अपना पांव पसार रहा है । डब्ल्यूएचओ यानीं विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि कोरोना वायरस का जो डेल्टा कोविड वैरिएंट संक्रामक वायरस का वर्तमान में प्रमुख प्रकार है, अब यह दुनिया भर में इसका फैलाव हो चूका है । इसकी मौजूदगी 185 देशों में दर्ज की गई है। मंगलवार को अपने साप्ताहिक महामारी विज्ञान अपडेट में वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसी ने कहा, डेल्टा वैरिएंट में अब सेम्पल इकट्ठा करने की डेट जो कि 15 जून -15 सितंबर, 2021 के बीच रहेंगीं । जीआईएसएआईडी, जो एवियन इन्फ्लुएंजा डेटा साझा करने पर वैश्विक पहल के लिए है, एक ओपन-एक्सेस डेटाबेस है।

मारिया वान केरखोव जो विश्व स्वास्थ्य संगठन में कोविड-19 पर तकनीकी के नेतृत्व प्रभारी हैं , उन्होंने डब्ल्यूएचओ सोशल मीडिया लाइव से बातचीत करते हुए कहा कि , वर्तमान में कोरोना के अलग अलग टाइप अल्फा, बीटा और गामा का प्रतिशत एक से भी कम चल रहा है। इसका मतलब यह है कि वास्तव में अब दुनिया भर में कोरोना का डेल्टा वैरिएंट ही चल रहा है।

\u0915\u094b\u0930\u094b\u0928\u093e \u0935\u093e\u092f\u0930\u0938 कोरोना का डेल्टा वैरिएंट हाल के दिनों में दुनियाभर में कहर बरपाया है (pixabay)

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ऑस्ट्रेलिया का नक्शा (Wikimedia Commons)

ऑस्ट्रेलिया की शार्क प्रजातियों पर एक खतरा आ गया है। वहाँ 10 प्रतिशत से अधिक शार्क प्रजाति विलुप्त होने ही वाली है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय पर्यावरण विज्ञान कार्यक्रम (एनईएसपी) समुद्री जैव विविधता हब ने सभी ऑस्ट्रेलियाई शार्क, किरणों और घोस्ट शार्क (चिमेरा) के विलुप्त होने का मूल्यांकन प्रकाशित किया है।


ऑस्ट्रेलिया दुनिया की कार्टिलाजिनस मछली प्रजातियों के एक चौथाई से अधिक का घर है, इसमें 182 शार्क, 132 किरणें और 14 चिमेरे ऑस्ट्रेलियाई जलमार्ग में हैं। पीटर काइन जो चार्ल्स डार्विन विश्वविद्यालय (सीडीयू) के एक वरिष्ठ शोधकर्ता है और रिपोर्ट के प्रमुख लेखक है उन्होंने कहा कि तुरंत कार्रवाई की जरूरत है। पीटर काइन कहा, "ऑस्ट्रेलिया का जोखिम 37 प्रतिशत के वैश्विक स्तर से काफी कम है। यह उन 39 ऑस्ट्रेलियाई प्रजातियों के लिए चिंता का विषय है, जिनके विलुप्त होने का खतरा बढ़ गया है।"

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ब्रिटेन में पढ़ने के लिए राज्य छात्रवृत्ति मिली 6 आदिवासी छात्रों को।(Unsplash)

भारत के झारखंड राज्य में कुछ छात्रों का भविष्य उज्व्वल होने जा रहा है । क्योंकि झारखंड राज्य में छह छात्रों को राज्य के छात्रवृत्ति कार्यक्रम के तहत विदेश में मुफ्त उच्च शिक्षा मिलने जा रही है। राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कल्याण मंत्री चंपई सोरेन राजधानी रांची में गुरुवार कोआयोजित होने वाले एक कार्यक्रम में छात्रवृत्ति योजना मारंग गोमके जयपाल सिंह मुंडा के तहत लाभार्थियों छात्रोंऔर उनके अभिभावकों को सम्मानित करने जा रहे है।

आप को बता दे की यह योजना राज्य सरकार द्वारा यूके और आयरलैंड में उच्च अध्ययन करने हेतु अनुसूचित जनजातियों के छात्रों के लिए शुरू की गई है। छात्रवृत्ति के पुरस्कार प्राप्त करने वाले छात्रों को विविध खर्चो के साथ-साथ ट्यूशन फीस भी पूरी तरह मिलेगी । इस योजना के अनुसार झारखंड राज्य में हर साल अनुसूचित जनजाति से 10 छात्रों का चयन किया जाएगा।

सितंबर में ब्रिटेन के 5 विभिन्न विश्वविद्यालयों में अपना अध्ययन कार्यक्रम शुरू करंगे 6 छात्र जिनको को चुना गया हैं।

अगर बात करे चयनित छात्रों की सूचि के बारे में तो इसमें से हरक्यूलिस सिंह मुंडा जो कि "यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन " के "स्कूल ऑफ ओरिएंटल एंड अफ्रीकन स्टडीज" से एमए करने जा रहे हैं। "मुर्मू यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ लंदन" से छात्र अजितेश आर्किटेक्चर में एमए करने जा रहे हैं। और वंहीआकांक्षा मेरी "लॉफबोरो विश्वविद्यालय" में जलवायु परिवर्तन, विज्ञान और प्रबंधन में एमएससी करेंगी, जबकि दिनेश भगत ससेक्स विश्वविद्यालय में जलवायु परिवर्तन, विकास और नीति में एमएससी करेंगे।

\u0938\u094d\u091f\u0942\u0921\u0947\u0902\u091f विश्वविद्यालय में पढ़ते हुए छात्र (pixabay)

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