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थोड़ा हट के

किसे कहा जाता है भारत का जिब्राल्टर

इस किले को सीधी लड़ाई में जीता नहीं जा सका। जब भी इस किले पर किसी आक्रमणकारी का कब्जा हुआ तो उसकी मुख्य वजह विश्वासघात या कई सालों की घेराबंदी ही रही है।

ग्वालियर के किले को भारत का या पूर्व का जिब्राल्टर कहा जाता है (Wikimedia Commons)

ग्वालियर के किले को भारत का या पूर्व का जिब्राल्टर कहा जाता है क्योंकि इस किले को सीधी लड़ाई में जीता नहीं जा सका। जब भी इस किले पर किसी आक्रमणकारी का कब्जा हुआ तो उसकी मुख्य वजह विश्वासघात या कई सालों की घेराबंदी ही रही हैं। जिब्राल्टर यूरोप के दक्षिणी छोर पर भूमध्य सागर के प्रवेश द्वार पर स्थित है ब्रिटिश क्षेत्र है या ब्रिटेन के सशस्त्र बलों के लिए एक महत्वपूर्ण आधार है। ग्वालियर का किला लाल बलुए पत्थर से निर्मित है। यह किला भारत में भारत के प्रमुख बड़े किलो में से एक है। अगर इसके इतिहास की बात करे तो इस पर राजपूत, पाल वंश, गुलाम वंश, तोमरवंश, लोदी वंश,मुगल,मराठा, ईस्ट इंडिया कंपनी, फिर सिंधिया ने इस दुर्ग पर कब्जा या शाषन किया। इसका निर्माण आठवीं शताब्दी में हुआ था यह उत्तर और मध्य भारत का सबसे सुरक्षित किला है। सुंदर स्थापत्य कला दीवारों की बेहतरीन नक्काशी के कारण यह विश्व धरोहर यूनेस्को में शामिल है।

प्रमुख स्थल :


यहां घूमने के लिए सबसे खास स्मारक बुद्ध और जैन मंदिर, गुजरी महल, मानसिंह महल, मान मंदिर महल हैं।

सास–बहू का मंदिर :

सहस्रबाहु का मंदिर ग्वालियर किले का प्राचीन ऐतिहासिक स्मारक है। इसकी स्थापना 1093 ई0 में हुई थी। यह मंदिर किले के पूर्व के कोने में दो मंदिरों के समूह के रूप में स्थापित है। अगर बात करे इसके निर्माण को ले कर तो इसे कछवाहा नरेश महिपाल ने बनवाया था। यह मंदिर भगवान सहस्रबाहु विष्णु को समर्पित है। इतिहासकारों का कहना है कि इसका शिखर 100 फुट ऊँचा था लेकिन बाद में इसका शिखर और गर्भगृह दोनों ही नष्ट हो गये। फिर भी इसका वैभव इसकी छत एवं बाहरी और भीतरी दीवारों पर की गयी मूर्तिकारी नक्काशी से स्पष्ट झलकता है। फिर आगे चल कर इसका रूपान्तर हुआ और इसके कारण बाद में इसे सास–बहू का मंदिर कहा जाने लगा।

\u0938\u093e\u0938 \u092c\u0939\u0941 \u092e\u0902\u0926\u093f\u0930 सहस्रबाहु का मंदिर ग्वालियर किले का प्राचीन ऐतिहासिक स्मारक है। (Wikimedia Commons)


तेली का मंदिर :

ग्वालियर के किले में एक और प्रसिद्ध मंदिर तेली का मंदिर है , यह सास–बहू मंदिर से लगभग एक किमी की दूरी पर स्थित है यह किले का सर्वोच्च स्मारक है। इसकी ऊँचाई 100 फीट से भी अधिक है। इस मंदिर का निर्माण प्रतिहार राजा के सेनापति तेल्प ने आठवीं शताब्दी में करवाया था। इसे तेल्प का मंदिर कहा जाता था जिसे बाद में तेली का मंदिर कहा जाने लगा।

मान मंदिर भवन :

यह ग्वालियर के किले की सबसे महत्वपूर्ण इमारत है साथ ही यह महल हिन्दू स्थापत्य कला का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। बात करे इसकी स्थापना की तो इसे 1508 में ग्वालियर के प्रतापी राजा मान सिंह तोमर द्वारा बनवाया गया था। यह महल आज भी अपनी सुन्दरता को बखूबी प्रदर्शित कर रहा है। इस भवन में चार तल है और यह भवन शुद्ध भारतीय या हिन्दू वास्तुशैली में बना है। इसकी ऊँचाई सतह से 300 फुट है। इस महल के तहखानों में एक कैदखाना भी है जहां इतिहास काल में मुगलकाल के राजनीतिक बंदियों को कैद करके रखा गया था।

गूजरी महल :

ग्वालियर किले की एक अन्य महत्वपूर्ण इमारत है गूजरी महल। इस भवन को तोमर राजा मानसिंह ने 1486–1516 के बीच बनवाया था। ग्वालियर के किले में कर्ण महल,विक्रम महल,जहाँगीर महल,शाहजहाँ महल भी हैं।

\u092e\u0941\u0916\u094d\u092f \u0926\u094d\u0935\u093e\u0930 पैदल जाना हो तो ग्वालियर गेट और गाड़ी चलाने के लिए उरवाई गेट का उपयोग होता है ।(Wikimedia Commons))


यह भी पढ़ें : पहाड़ों की रानी: ऊटी

किले का प्रवेश द्वार :

यहां पहुंचने के लिए आप दो दरवाजों का उपयोग कर सकते हैं पैदल जाना हो तो ग्वालियर गेट और गाड़ी चलाने के लिए उरवाई गेट का उपयोग होता है। यहां पहुंचने के लिए आप ग्वालियर एयरपोर्ट या ग्वालियर रेलवे स्टेशन तक आ सकते हैं। यह देश की राजधानी दिल्ली से लगभग 360 किलोमीटर दुरी पर स्थित है ।

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सिंधिया(Jyotiraditya Scindia) ने कहा, "यह योजना कृषि क्षेत्र के लिए विकास के नए रास्ते खोलेगी और आपूर्ति श्रृंखला, रसद और कृषि उपज के परिवहन में बाधाओं को दूर करके किसानों की आय को दोगुना करने के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद करेगी। क्षेत्रों (कृषि और विमानन) के बीच अभिसरण तीन प्राथमिक कारणों से संभव है - भविष्य में विमान के लिए जैव ईंधन का विकासवादी संभावित उपयोग, कृषि क्षेत्र में ड्रोन का उपयोग और योजनाओं के माध्यम से कृषि उत्पादों का एकीकरण और मूल्य प्राप्ति।"

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