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संस्कृति

क्या भगवान हनुमान जी का जन्म तिरूमला के पर्वतों में हुआ था?

टीटीडी यह दावा करता है कि, तिरुपति में शेश्चलम की सात पहाड़ियों में से एक अंजनद्री पहाड़ी भगवान हनुमान जी का जन्म स्थान है।

तिरुमाला वेंकटेश्वर बालाजी मंदिर| (Wikimedia Commons)

हाल ही में तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (Tirumala Tirupati Devasthanam) ने रामनवमी के समारोह पर घोषणा की, कि भगवान हनुमान जी का जन्म आंध्र प्रदेश (Andhra Pardesh) में हुआ था। टीटीडी जो भगवान हनुमान (Hanuman) जी के मंदिर तिरुमाला पहाड़ियों को नियंत्रित करता है। यह बताता है कि यह तथ्य वैदिक विद्वानों, इतिहासकारों, हिन्दू धार्मिक नेताओं के विशेषज्ञों के एक पैनल द्वारा गहन अध्ययन पर आधारित है। 

टीटीडी (TTD) यह दावा करता है कि, तिरुपति में शेश्चलम की सात पहाड़ियों में से एक अंजनद्री (Anjanadri) पहाड़ी भगवान हनुमान जी का जन्म स्थान है। चार महीने के लंबे अध्ययन के निष्कर्षों के बाद , राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य सरमा ने कहा कि, इस अध्ययन ने स्थापित किया है कि, भगवान राम के परम भक्त महावीर हनुमान अंजनद्री की पहाड़ियों में पैदा हुए थे। सरमा ने कहा कि, उनके निष्कर्ष पौराणिक साक्ष्य और भौगोलिक संदर्भों में मौजूद जानकारियों से प्राप्त हुए हैं। सरमा ने कहा कि, 12 पुराणों से सबूत एकत्र किए गए थे। उन्होंने यह भी समझाया कि, कर्नाटक (Karnataka) में हंपी हनुमान जी का जन्म स्थान नहीं है। जैसा कि लंबे समय से यह दावा किया जा रहा है। हम्पी प्राचीन समय का किष्किंधा है। जबकि वेंकटचलम, अंजनद्री है। जब सुग्रीव, हनुमान को अंजनद्री से वानर लाने को कहते हैं तो उनकी बातचीत से यह स्पष्ट हो जाता है। इसी प्रकार कंबा के रामायणम और अन्नाम चार्य की रचनाओं के छंदों से साहित्यिक साक्ष्य मिलें हैं। जबकि एपीग्राफिक साक्ष्य 12वीं और 13वीं शताब्दी के शिलालेख से प्राप्त हुए हैं।


तिरुपति, बालाजी (Wikimedia commons)

इसके अलावा कार्यकारी अधिकारियों ने वैदिक विद्वानों द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों का अध्ययन करने के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया था। समिति ने भौगोलिक मान्यता के लिए स्कंद पुराण की ओर रुख किया, जहां ऋषि मतंग हनुमान जी की माता अंजनी देवी से कहते हैं कि, वेंकटचलम स्वर्णमुखी नदी के उत्तर में है और आंध्र प्रदेश के वर्तमान कुरनूल जिले में अहोबिलम से 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। 

पैनल ने देश भर के उन सभी स्थानों का भी अध्ययन किया, जहां यह माना जाता है कि, भगवान हनुमान जी का जन्म यहां हुआ था। सभी साक्ष्यों को देखने, पढ़ने और समझने के बाद यह मत सामने निकल के आया कि, भगवान हनुमान जी का जन्म अंजनद्री (Anjanadri) की पहाड़ियों में हुआ था। सभी उपलब्ध साक्ष्य अंजनद्री पहाड़ी का समर्थन करते हैं। 

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टीटीडी समिति में, श्री वेंकटेश्वर वैदिक विश्वविद्यालय के वीसी आचार्य सन्निधानम सुधाकर सरमा, आचार्य रानी सदाशिव मूर्ति, आचार्य जन्मादि रामकृष्ण, इसरो वैज्ञानिक रेमेला मूर्ति, आचार्य मुरलीधर सरमा और आंध्र प्रदेश पुरातत्व विभाग के उप निदेशक विजय कुमार शामिल थे| टीटीडी एसवी विश्वविद्यालय की वेदाध्ययन परियोजना की प्रमुख अकीला विभेष्ण सरमा समिति की संयोजक थीं|

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विज्ञान और तकनीक: "भारत में हो रहे विज्ञान और प्रौद्योगिकी आधारित नवाचार दुनिया में एक बड़ा योगदान दे सकते हैं। हमारे तकनीकी समाधानों का स्केल और उनकी कम लागत, दोनों अतुलनीय है। भारत में यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) के जरिए हर महीने 3.5 अरब से ज्यादा ट्रांजेक्शन हो रहे हैं।"

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वैक्सीन : "मैं यूएनजीए को ये जानकारी देना चाहता हूं कि भारत ने दुनिया की पहली डीएनए वैक्सीन विकसित कर ली है, जिसे 12 साल की आयु से ज्यादा के सभी लोगों को लगाया जा सकता है। एक और एमआरएनए टीका विकास के अंतिम चरण में है।" निवेश का अवसर: "मैं दुनिया भर के वैक्सीन निमार्ताओं को भी निमंत्रण देता हूं। आओ, भारत में वैक्सीन बनाएं।"

आतंकवाद: "प्रतिगामी सोच वाले देश आतंकवाद को एक राजनीतिक उपकरण के रूप में उपयोग कर रहे हैं। इन देशों को यह समझना चाहिए कि आतंकवाद उनके लिए भी उतना ही बड़ा खतरा है। साथ ही, यह सुनिश्चित करना नितांत आवश्यक है कि अफगानिस्तान के क्षेत्र का उपयोग आतंकवाद फैलाने या आतंकवादी हमलों के लिए न हो।"

आतंकवाद से निपटने पर जोर देते हुए पीएम मोदी ने आगे कहा, "हमें इस बात के लिए भी सतर्क रहना होगा कि वहां की नाजुक स्थितियों का कोई देश, अपने स्वार्थ के लिए, एक टूल की तरह इस्तेमाल करने की कोशिश ना करे। इस समय अफगानिस्तान की जनता को, वहां की महिलाओं और बच्चों को, वहां के अल्पसंख्यकों को मदद की जरूरत है और इसमें हमें उन्हें सहायता प्रदान करके अपना दायित्व निभाना ही होगा।" (आईएएनएस-SM)


पूर्वोत्तर सीमा क्षेत्र बहुत संवेदनशील हैं और उनके लिए तोड़फोड़ के ऐसे प्रयासों के बारे में जानना नितांत आवश्यक है। (Unsplash)

भारत चीन सीमा पर बसे हुए गांव चिंता का विषय हैं। हैग्लोबल काउंटर टेररिज्म काउंसिल के सलाहकार बोर्ड ने एक बड़ी सूचना देते हुए बड़ा खुलासा किया है कि चीन ने भारत के साथ अपनी सीमा पर 680 'जियाओकांग' (समृद्ध या संपन्न गांव) बनाए हैं। ये गांव भारतीय ग्रामीणों को बेहतरीन चीनी जीवन की और प्रभावित करने के लिए हैं।

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बड़े देशों के एक समूह ने 'नो न्यू कोल पावर कॉम्पेक्ट' की घोषणा की है।(Canva)

विदेशी कोयला बिजली वित्त को रोकने की चीन की घोषणा के बाद, श्रीलंका, चिली, डेनमार्क, फ्रांस, जर्मनी, मोंटेनेग्रो और यूके जैसे देशों के एक समूह ने 'नो न्यू कोल पावर कॉम्पेक्ट' की घोषणा की है। इसका उद्देश्य अन्य सभी देशों को नए कोयले से चलने वाले बिजली संयंत्रों के निर्माण को रोकने के लिए प्रोत्साहित करना है ताकि 1.5 डिग्री सेल्सियस के लक्ष्य तक पहुंचा जा सके। पहली बार, विकसित और विकासशील देशों का एक विविध समूह नए कोयले से चलने वाले बिजली उत्पादन को समाप्त करने के वैश्विक प्रयासों को गति देने के लिए एक साथ आया है। उनकी नई पहल के लिए हस्ताक्षरकर्ताओं को वर्ष के अंत तक कोयले से चलने वाली बिजली उत्पादन परियोजनाओं के नए निर्माण की अनुमति तुरंत बंद करने और समाप्त करने की आवश्यकता है।

ये देश अन्य सभी सरकारों से इन कदमों को उठाने और संयुक्त राष्ट्र जलवायु शिखर सम्मेलन सीओपी26 से पहले समझौते में शामिल होने का आह्वान कर रहे हैं ताकि शिखर सम्मेलन के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को "इतिहास को कोयले की शक्ति सौंपने" में मदद मिल सके। नो न्यू कोल पावर कॉम्पेक्ट, संयुक्त राष्ट्र महासचिव के आह्वान का जवाब देता है कि इस साल नए कोयले से चलने वाली बिजली का निर्माण समाप्त करने के लिए, 1.5 डिग्री सेल्सियस लक्ष्य को पहुंच के भीतर रखने और जलवायु परिवर्तन के विनाशकारी प्रभावों से बचने के लिए पहला कदम है। साथ ही सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा प्रदान करने के लिए सतत विकास लक्ष्य 7 को प्राप्त करना है।

एनर्जी कॉम्पैक्ट्स जीवित दस्तावेज हैं और अन्य देशों को इसमें शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। समूह का लक्ष्य जल्द से जल्द नए हस्ताक्षरकर्ताओं की सबसे बड़ी संख्या को इकट्ठा करना है। ऊर्जा पर संयुक्त राष्ट्र उच्च स्तरीय वार्ता 40 वर्षो में पहली बार ऊर्जा पर चर्चा करने वाला एक महासचिव के नेतृत्व वाला शिखर सम्मेलन है। यह जलवायु लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में ऊर्जा की महत्वपूर्ण भूमिका के साथ-साथ कोविड रिकवरी प्रक्रियाओं सहित विकास प्राथमिकताओं को पहचानता है। श्रीलंका और चिली ने हाल ही में नई कोयला परियोजनाओं को रद्द करने और राजनीतिक बयान देने में नेतृत्व दिखाया है कि वे अब नई कोयला शक्ति का पीछा नहीं करेंगे। डेनमार्क, फ्रांस, जर्मनी, मोंटेनेग्रो और यूके ने अपनी पिछली कोयला परियोजनाओं को पहले ही रद्द कर दिया है और अब वे अपने शेष कोयला बिजली उत्पादन की सेवानिवृत्ति में तेजी लाने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

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