![प्रदूषण अब केवल एक पर्यावरणीय समस्या नहीं रह गया है, बल्कि यह एक ग्लोबल हेल्थ क्राइसिस (Global Health Crisis) बन चुका है। [Pixabay]](http://media.assettype.com/newsgram-hindi%2F2025-08-29%2Fu69gw5ts%2Fistockphoto-1199942642-612x612.jpg?w=480&auto=format%2Ccompress&fit=max)
क्या आपने कभी सोचा है कि जिस हवा को हम हर पल सांस के रूप में अपने अंदर ले रहे हैं, वही हवा ज़हर में बदल जाए तो ज़िंदगी कैसी होगी? दुर्भाग्य से, दुनिया के कई देशों में यही हकीकत बन चुकी है। प्रदूषण अब केवल एक पर्यावरणीय समस्या नहीं रह गया है, बल्कि यह एक ग्लोबल हेल्थ क्राइसिस (Global Health Crisis) बन चुका है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) के अनुसार हर साल करोड़ों लोग प्रदूषण से जुड़ी बीमारियों जैसे अस्थमा, हार्ट अटैक और फेफड़ों के कैंसर की चपेट में आ रहे हैं।
2025 की ताज़ा रिपोर्ट बताती है कि कुछ देशों की हवा इतनी जहरीली हो चुकी है कि वहाँ रहना मानो हर दिन ज़हर पीने जैसा है। इनमें से ज्यादातर देश तेजी से विकास कर रहे हैं लेकिन उद्योगों, वाहनों और कोयले पर निर्भरता ने उनकी हवा को खतरनाक बना दिया है। यही वजह है कि वहाँ के लोग साफ हवा की जगह धुएं और धूल में जीने को मजबूर हैं। आज हम आपको बताएंगे दुनिया के 9 सबसे प्रदूषित देशों (9 Most Polluted Countries In The World) के बारे में, जहाँ सांस लेना भी एक चुनौती बन चुका है।
चाड है दुनिया का सबसे प्रदूषित देश
अफ्रीका का देश चाड (African country Chad) 2025 में दुनिया का सबसे प्रदूषित देश बन चुका है। यहाँ PM2.5 का स्तर WHO मानकों से 18 गुना ज्यादा पाया गया। चाड की राजधानी N'Djamena और अन्य शहरों में धूल, रेत के तूफान और घरेलू ईंधन (लकड़ी, कोयला) से निकलने वाला धुआँ प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण है। चाड के लोग सांस से जुड़ी गंभीर बीमारियों का सामना कर रहे हैं और जीवन प्रत्याशा भी प्रभावित हो रही है।
बांग्लादेश बना दूसरा सबसे प्रदूषित देश
बांग्लादेश (Bangladesh) लगातार दुनिया के सबसे प्रदूषित देशों की सूची में शामिल रहता है। ढाका शहर को तो दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर (Dhaka Is Most Polluted City In The World) भी कई बार घोषित किया गया। यहाँ मुख्य कारण हैं ईंट भट्टे, वस्त्र उद्योग, फैक्ट्रियों से निकलने वाला धुआँ और सड़कों पर वाहनों की अधिकता। खुले में कचरा जलाने और ठोस ईंधन पर खाना पकाने से भी प्रदूषण बढ़ता है। PM2.5 स्तर WHO की सीमा से 15 गुना ज्यादा है। परिणामस्वरूप, अस्थमा, फेफड़ों के संक्रमण और हृदय रोग जैसी बीमारियाँ तेजी से बढ़ रही हैं।
तीसरे नंबर पर है पाकिस्तान
पाकिस्तान का लाहौर और कराची (Lahore and Karachi in Pakistan) जैसे शहर वायु प्रदूषण के लिए बदनाम हैं। सर्दियों में धुंध और धुआँ मिलकर “स्मॉग” की समस्या को बेहद खतरनाक बना देता है। यहाँ प्रदूषण का मुख्य कारण है, कोयला आधारित ऊर्जा उत्पादन, ईंट भट्टे, कृषि अवशेष जलाना और तेज़ी से बढ़ते वाहन। पाकिस्तान के वायु प्रदूषण का स्तर WHO सीमा से कई गुना ज्यादा है।
डेमोक्रैटिक रिपब्लिक ऑफ़ कांगो
अफ्रीका का विशाल देश डेमोक्रैटिक रिपब्लिक ऑफ़ कांगो (Democratic Republic Of Congo) चौथे स्थान पर है। यहाँ प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण है, घरेलू स्तर पर ठोस ईंधन (लकड़ी और कोयला) का उपयोग और जंगलों की आग। खनन गतिविधियों और पुराने वाहनों से निकलने वाला धुआँ भी इसमें इजाफा करता है। शहरी क्षेत्रों में धूल और धुंआ लोगों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है। DRC में आर्थिक चुनौतियों के कारण आधुनिक प्रदूषण नियंत्रण साधन (Modern Pollution Control Tools) अपनाना मुश्किल है। यहाँ के नागरिक वायु प्रदूषण से जुड़ी सांस की बीमारियों और बच्चों में पोषण की कमी जैसी दोहरी समस्याओं से जूझ रहे हैं।
भारत का स्थान है पांचवां
भारत पांचवें स्थान पर है और यहाँ दिल्ली(Delhi), गाजियाबाद(Gaziabad), नोएडा (Noida) जैसे शहर दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में गिने जाते हैं। प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण है, तेजी से बढ़ता वाहन प्रदूषण, औद्योगिक धुआँ, निर्माण स्थलों की धूल और किसानों द्वारा फसलों के अवशेष जलाना। सर्दियों में यह समस्या और भी विकराल हो जाती है। भारत सरकार कई कदम उठा रही है, जैसे राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम और इलेक्ट्रिक वाहनों (Electric Vehicles) को बढ़ावा। फिर भी आबादी और विकास के दबाव में यह चुनौती लगातार बनी हुई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे “साइलेंट किलर” (“The Silent Killer”) मानते हैं।
ताजिकिस्तान की रैंकिंग है छठी
मध्य एशिया का छोटा देश ताजिकिस्तान (Tajikistan) भी प्रदूषण की समस्या से बुरी तरह प्रभावित है। यहाँ PM2.5 का स्तर WHO (World Health Organization) सीमा से कई गुना अधिक है। इस देश में प्रदूषण के कारण हैं, पुरानी गाड़ियाँ, कोयले से ऊर्जा उत्पादन और औद्योगिक धुआँ। पहाड़ी इलाकों में मौसम की स्थिति प्रदूषकों को फँसा देती है जिससे वायु गुणवत्ता और खराब हो जाती है। राजधानी दुशांबे में सांस की बीमारियों और आँखों में जलन जैसी समस्याएँ आम हो चुकी हैं। संसाधनों की कमी के कारण यहाँ प्रदूषण नियंत्रण की नीतियाँ प्रभावी ढंग से लागू नहीं हो पातीं।
नेपाल भी है इस लिस्ट में शामिल
नेपाल(Nepal), जो हिमालय की गोद में बसा है, वह भी प्रदूषण की गंभीर समस्या झेल रहा है। काठमांडू घाटी में वायु प्रदूषण का स्तर सबसे ज्यादा है। यहाँ मुख्य कारण हैं, वाहनों से निकलने वाला धुआँ, ईंट भट्टे और खुले में कचरा जलाना। पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण हवा का आवागमन धीमा रहता है जिससे प्रदूषक फँस जाते हैं। WHO मानकों से यह स्तर 8-10 गुना अधिक है। प्रदूषण के कारण यहाँ पर्यटक भी प्रभावित होते हैं और स्थानीय लोगों में सांस और हृदय से जुड़ी बीमारियाँ बढ़ रही हैं।
आठवें नंबर पर है युगांडा
युगांडा (Uganda) पूर्वी अफ्रीका का एक देश है, जो वायु प्रदूषण की समस्या से बुरी तरह प्रभावित है। यहाँ प्रदूषण का बड़ा कारण है, ठोस ईंधन से खाना पकाना, पुरानी गाड़ियाँ और कृषि अवशेष जलाना। शहरी इलाकों में धूल और धुंआ जीवन को कठिन बना रहे हैं। राजधानी कंपाला में प्रदूषण का स्तर WHO सीमा से 7 गुना ज्यादा है।
रवांडा है इस सूची में नौवां
रवांडा नौवें स्थान पर (Rwanda Is In Ninth Place) है और यह अफ्रीका का छोटा लेकिन घनी आबादी वाला देश है। यहाँ प्रदूषण का मुख्य कारण है, वाहनों से निकलने वाला धुआँ, उद्योगों से प्रदूषण और ग्रामीण इलाकों में लकड़ी-कोयले का इस्तेमाल। राजधानी किगाली में प्रदूषण का स्तर WHO मानकों से कई गुना अधिक है। हालांकि रवांडा सरकार ने “ग्रीन सिटी” परियोजना शुरू की है और प्लास्टिक पर प्रतिबंध जैसे कदम उठाए हैं, फिर भी वायु प्रदूषण की समस्या गंभीर बनी हुई है। यहाँ के नागरिक सांस संबंधी बीमारियों और आँखों की तकलीफों का सामना कर रहे हैं।
प्रदूषण से लड़ने के लिए विश्व स्तर पर पहल
पेरिस समझौता (Paris Agreement)
2015 में हुआ यह ऐतिहासिक समझौता जलवायु परिवर्तन के खिलाफ वैश्विक लड़ाई का सबसे बड़ा कदम है। इसमें 190 से अधिक देश शामिल हैं और लक्ष्य है कि पृथ्वी का औसत तापमान 1.5°C तक सीमित रखा जाए। इसके तहत देशों ने वचन दिया है कि वे कार्बन खपत को घटाने, ऊर्जा को बढ़ावा देने और प्रदूषण नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाएंगे। भारत भी इसमें शामिल है और उसने 2070 तक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन का लक्ष्य तय किया है।
UNEP का क्लीन एयर प्रोग्राम
संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) ने "क्लीन एयर प्रोग्राम" की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य वायु प्रदूषण कम करना और स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव को रोकना है। यह प्रोजेक्ट खासकर विकासशील देशों में जागरूकता, टेक्नोलॉजी और रिसर्च उपलब्ध कराता है। यह प्रोग्राम ऊर्जा के स्वच्छ साधन, बेहतर परिवहन और औद्योगिक उत्सर्जन कम करने पर फोकस करता है। भारत समेत कई देशों को इस प्रोजेक्ट से तकनीकी और नीतिगत सहयोग मिलता है।
WHO की ‘BreatheLife’ कैंपेन
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और UNEP ने मिलकर "BreatheLife Campaign" शुरू किया। इसका मकसद है दुनियाभर के शहरों और कस्बों को वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए प्रेरित करना। यह प्रोग्राम बताता है कि कैसे स्वच्छ ऊर्जा, हरे-भरे क्षेत्र और पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बढ़ाकर प्रदूषण घटाया जा सकता है। WHO की रिपोर्ट बताती है कि वायु प्रदूषण हर साल 70 लाख से ज्यादा मौतों का कारण बनता है। भारत के कई शहर भी इस कैंपेन का हिस्सा बने हैं।
ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट्स
दुनियाभर में ग्रीन एनर्जी (Green Energy Project) को बढ़ावा देने के लिए सौर, पवन और जल-ऊर्जा पर ज़ोर दिया जा रहा है। यूरोप, अमेरिका और एशिया के कई देश कोयले और तेल पर निर्भरता घटाकर अक्षय ऊर्जा को अपनाने लगे हैं। भारत ने भी इस दिशा में बड़ी छलांग लगाई है और 2030 तक 500 गीगावॉट अक्षय ऊर्जा क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है। इसके तहत सोलर पावर प्लांट, पवन ऊर्जा और इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए बड़े पैमाने पर काम हो रहा है।
भारत में प्रदूषण कम करने के लिए प्रमुख प्रोजेक्ट्स
राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP)
भारत सरकार ने 2019 में NCAP शुरू किया जिसका लक्ष्य 2024 तक 122 शहरों में PM2.5 और PM10 स्तर को 20-30% तक घटाना है। इसमें वायु प्रदूषण की निगरानी, उद्योगों से उत्सर्जन पर नियंत्रण, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा और सार्वजनिक परिवहन के सुधार पर ज़ोर दिया गया है। यह भारत का सबसे बड़ा वायु प्रदूषण नियंत्रण अभियान है।
इंटरनेशनल सोलर अलायंस (ISA)
भारत और फ्रांस द्वारा शुरू किया गया यह प्रोजेक्ट सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए वैश्विक स्तर पर काम करता है। इसका मुख्यालय गुरुग्राम (हरियाणा) में है। इसका मकसद है कि अधिक से अधिक देश सौर ऊर्जा अपनाएं और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटाएं। भारत ने ISA के ज़रिए सौर पैनलों और बड़े सोलर प्रोजेक्ट्स में निवेश तेज़ किया है।
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उज्ज्वला योजना और स्वच्छ भारत मिशन
भारत ने घरेलू प्रदूषण घटाने के लिए प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना शुरू की, जिसके तहत गरीब परिवारों को LPG गैस कनेक्शन दिए गए। इससे लकड़ी और कोयले से होने वाला धुआं काफी हद तक कम हुआ। वहीं स्वच्छ भारत मिशन के तहत गंदगी और कचरे से होने वाला प्रदूषण नियंत्रित किया गया। दोनों योजनाओं ने भारत के पर्यावरण और स्वास्थ्य पर बड़ा सकारात्मक असर डाला।
राष्ट्रीय इलेक्ट्रिक मोबिलिटी मिशन (NEMMP)
वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए भारत ने इलेक्ट्रिक गाड़ियों को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखा। इसके तहत FAME (Faster Adoption and Manufacturing of Electric Vehicles) स्कीम लागू की गई है। इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य पेट्रोल-डीजल की खपत घटाना और EV (Electric Vehicle) चार्जिंग स्टेशनों का बड़ा नेटवर्क बनाना है। [Rh/SP]