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देश

आगरा में ताज महल को छोड़ बाकी सभी स्मारक को फिर से खोलने की इजाज़त

आगरा जिला प्रशासन के अधिकारियों ने कहा है कि ताजमहल और आगरा के किले को छोड़ कर शहर के अन्य ऐतिहासिक स्मारक आगंतुकों के स्वागत के लिए तैयार है।

ताज महल, ऐतिहासिक स्मारक, आगरा, उत्तर प्रदेश(Wikimedia Commons)

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) और आगरा जिला प्रशासन के अधिकारियों ने कहा है कि ताजमहल और आगरा के किले को छोड़ कर शहर के अन्य ऐतिहासिक स्मारक आगंतुकों के स्वागत के लिए तैयार है। जिन स्मारकों को 163 दिनों के बाद फिर से खोला जाएगा, उनमें अकबर का मकबरा सिकंदरा, एत्मादुद्दौला, मेहताब बाग, फतेहपुर सीकरी, मरियम का मकबरा, राम बाग, चीनी का रोजा आदि शामिल हैं।

एएसआई सुपरिटेंडिंग आर्कियोलॉजिस्ट बसंत कुमार ने कहा कि सभी आगंतुकों की स्मारकों में प्रवेश करने से पहले पूरी जांच की जाएगी। टिकटें ऑनलाइन खरीदनी होंगी क्योंकि स्मारकों में टिकट खिड़कियां नहीं खोली जाएंगी। सभी आगंतुकों को मास्क पहनना अनिवार्य होगा और हर दिन केवल 2,000 आगंतुकों को प्रवेश की अनुमति होगी।


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जिला मजिस्ट्रेट पी.एन. सिंह ने कहा, “15 सितंबर के बाद ताजमहल और आगरा किले को फिर से खोलने की योजना बनाई जाएगी, लेकिन पर्यटकों को कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करना होगा।”

बता दें कि कोविड-19 के कारण आगरा के टूरिस्ट और हॉस्पिटेलिटी सेक्टर को खासा नुकसान हुआ है। उद्योग जगत ने मंगलवार से कुछ छोटे स्मारकों को फिर से खोलने के फैसले का स्वागत करते हुए ताज और आगरा किले को जल्द खोलने की मांग की। इसके अलावा आगरा के बेंगलुरु और मुंबई से जोड़ने के लिए कुछ नई उड़ानें अक्टूबर में शुरू होने की उम्मीद है।

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आगरा के स्मारक 17 मार्च से बंद हैं। केंद्रीय संस्कृति मंत्री प्रह्लाद पटेल ने 6 जुलाई से पूरे भारत में स्मारकों को फिर से खोलने का निर्देश दिया था। लेकिन कोविड-19 मामलों की संख्या बढ़ने के कारण जिला प्रशासन ने 1 सितंबर तक के लिए इसे टालने का फैसला किया था।

आगरा में अब तक 107 मौतों के साथ 2,901 मामले दर्ज हो चुके हैं।(आईएएनएस)

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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद।(PIB)

राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने बुधवार को दोहराया कि भारत सामूहिक स्वास्थ्य और आर्थिक कल्याण सुनिश्चित करने के लिए Covid-19 महामारी के खिलाफ एक निर्णायक और समन्वित प्रतिक्रिया देने के वैश्विक प्रयासों में सबसे आगे रहा है। कोविंद ने यह भी कहा कि दुनिया के सबसे बड़े टीकाकरण अभियान के तहत भारतीयों को अब तक 80 करोड़ से अधिक खुराक मिल चुकी है।

राष्ट्रपति भवन से एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने बुधवार को एक आभासी समारोह में आइसलैंड, गाम्बिया गणराज्य, स्पेन, ब्रुनेई दारुस्सलाम और श्रीलंका के लोकतांत्रिक गणराज्य के राजदूतों/उच्चायुक्तों से परिचय पत्र स्वीकार किए।

अपना परिचय पत्र प्रस्तुत करने वाले राजदूत निम्न हैं : महामहिम गुडनी ब्रैगसन, आइसलैंड के राजदूत, महामहिम मुस्तफा जवारा, गाम्बिया गणराज्य के उच्चायुक्त, महामहिम जोस मारिया रिडाओ डोमिंगुएज, स्पेन के राजदूत, महामहिम दातो अलैहुद्दीन मोहम्मद ताहा, ब्रुनेई दारुस्सलाम के उच्चायुक्त, महामहिम अशोक मिलिंडा मोरागोडा, श्रीलंका के लोकतांत्रिक समाजवादी गणराज्य के उच्चायुक्त।


इस अवसर पर अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने इन सभी राजदूतों को उनकी नियुक्ति पर बधाई दी और उन्हें भारत में एक सफल कार्यकाल के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि भारत के इन सभी पांच देशों के साथ घनिष्ठ संबंध हैं और भारत इनके साथ शांति, समृद्धि का एक समन्वित दृष्टिकोण साझा करता है।

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भारत का खूबसूरत क्षेत्र कोडाईकनाल।(Unsplash)

भारत के तमिलनाडु राज्य में स्थित कोडाईकनाल एक पर्वतीय नगर है। यह समुद्र तल 2133 मी. की ऊंचाई पर पिलानी नामक पहाड़ पे बसा हैं। ये अपनी प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण से सब को मनमोहित कर देता है । खूबसूरत प्राकृतिक दृश्य के कारण इसे भारत का स्विट्जरलैंड भी कहा जाता हैं। यहां पर घूमने का मजा तब बढ़ जाता है, जब मानसून दस्तक देता है, क्योंकि इस समय यहां के झरने वादियां और भी खूबसूरत हो जाते हैं। यहां कुरिंजी नामक एक फूल है जो कि 12 वर्षों में खिलता है, जिससे यहां की पहाड़ियों में सुंदरता और निखरती है और इसकी महक मदहोश कर देने वाली होती है। कोडाईकनाल में प्रकृति की सुंदरता अपने तमाम रूपों में नजर आती है। विशाल चट्टान , शांत झील ,फलों के बगीचे और यहां के हरे भरे दृश्य अपनी सुंदरता की कहानियां व्यक्त करते हैं। मानसून में यह जगह जन्नत सी नजर आती है। यहां पर लोग पिकनिक मनाने , घूमने फिरने , या हनीमून के लिए आते हैं।

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देश भर से जमा की गई 2 लाख से अधिक ईंटें। (IANS)

राम भक्तों द्वारा दी गई और विश्व हिंदू परिषद (विहिप) (Vishwa Hindu Parishad) द्वारा तीन दशक लंबे मंदिर आंदोलन के दौरान देश भर से जमा की गई 2 लाख से अधिक ईंटों का इस्तेमाल अब राम जन्मभूमि स्थल पर भव्य मंदिर का निर्माण के लिए किया जाएगा।

मंदिर ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा ने कहा, "1989 के 'शिलान्यास' के दौरान कारसेवकों द्वारा राम जन्मभूमि पर एक लाख पत्थर रखे गए थे। कम से कम, 2 लाख पुरानी कार्यशाला में रह गए हैं, जिन्हें अब निर्माण स्थल पर स्थानांतरित कर दिया जाएगा। ईंटों पर भगवान राम का नाम लिखा है और यह करोड़ों भारतीयों की आस्था का प्रमाण है।

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