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थोड़ा हट के

पावन धाम उत्तराखंड में फिर लौट रहे हैं स्वदेशी पर्यटक

ऋषिकेश में फिर पर्यटकों का आना शुरू हो चुका है। रिवर राफ्टिंग जैसे रोमांचक खेल दोबारा शुरू हो चुके हैं। स्वदेशी पर्यटक बढ़ा रहे हैं ऋषिकेश की रौनक।

हरिद्वार में फिर लौटने लगे हैं शिवभक्त।(Pixabay)

भारत में ऋषिकेश(Rishikesh) शहर का आध्यात्मिक क्षेत्र में बहुत महत्व है, किन्तु दुनिया की नज़रों में यह शहर आधी-सदी पहले आया था। जब अमेरिका का मशहूर बैंड बीटल्स के कलाकार ऋषिकेश(Rishikesh) में योग-ध्यान करने आए थे और यहीं अपने 40 गाने भी लिखे थे। जिसके बाद विदेशी पर्यटक भी यहाँ भरी मात्रा में योग एवं ध्यान की विद्या लेने आते हैं। देश के भी विभिन्न राज्यों से भी पर्यटक यहाँ मनमोहक दृश्यों को देखने आते थे, यह सिलसिला तब तक चला जब तक कोरोना महामारी ने दस्तक नहीं दी थी। किन्तु महामारी और लॉकडाउन के साथ पर्यटन में भारी गिरावट आई थी। होटल, खान-पान की दुकाने, योग की कक्षाएं यह सब ठप हो गया था।

किन्तु जिस तेजी से कोरोना महामारी का स्तर भारत में घटा है और लोगों में उसका भय कम हुआ है उसी तेजी से सब सामान्य होने ओर बढ़ चला है। अब सभी अपने परिवार के संग लम्बे सफर पर निकल रहे हैं और छुट्टियों का मज़ा ले रहे हैं। और इसी तरह ऋषिकेश(Rishikesh) में भी एक बार फिर पर्यटकों का आना शुरू हो चुका है। रिवर राफ्टिंग जैसे रोमांचक खेल दोबारा शुरू हो चुके हैं। लेकिन इस बीच विदेशी पर्यटन पर कोरोना महामारी की वजह से पाबंधी लगी हुई है जिस वजह है विदेशी पर्यटक ऋषिकेश(Rishikesh) में नाम मात्र ही दिखेंगे। किन्तु उनकी कमी पूरी कर रहे है स्वयं भारतीय।


रिवर राफ्टिंग का मज़ा उठा रहे हैं लोग।(Pixabay)

गुरुग्राम की ग्लोरिया सल्दान्हा कहती हैं कि “हाल ही में अपने पति राहुल जैन के साथ ऋषिकेश(Rishikesh) गई थी।” उन्होंने आगे बताया कि “हम नहीं जानते कि महामारी आखिर कब तक चलने वाली है, इसलिए आप घर में कब तक बंद रह सकते हैं? एक को कहीं से शुरू करना ही पड़ेगा, और यह हमारा पहला कदम था।”

पिछले दो दशकों में मध्यम वर्गीय भारतियों ने यूरोप और पूर्वी एशिया के जगहों को अपना विकेशन स्पॉट बना लिया था। एक रिपोर्ट के अनुसार 2019 में 2.6 करोड़ भारतीय इधर घूमने गए थे, जिसमें अनुमानित खर्च आया था 2500 करोड़ का।

अब वे देश के भीतर घूमने के विकल्प के रूप में ऋषिकेश(Rishikesh) जैसे पर्यटक शहरों के ओर बढ़ रहे हैं। ऋषिकेश के एक होटल प्रबंधक का कहना है कि “स्वदेशी पर्यटकों द्वारा ऋषिकेश में विदेशी पर्यटकों द्वारा पहले से बुक कमरों में रह रहे हैं।” भारत के होटल और रेस्टोरेंट संघ के उपाध्यक्ष गुरबख्श कोहली ने कहा कि “हमें यह देखने की जरूरत है कि इन 2.6 करोड़ लोगों को घरेलू पर्यटकों में कैसे बदला जाए, क्योंकि बहुत सारे लोग ऐसे हैं जो विदेश जाने में सहज नहीं होंगे, भले ही मालदीव जैसी कुछ जगहें खुल गई हों, लेकिन यदि हम वहाँ खर्च किए जाने वाली रकम का एक-चौथाई भी यहाँ खर्च कर देंगे, तो हम 1.1 करोड़ विदेशी पर्यटकों को भारत लाने में सफल हो जाएंगे।

वह बताते हैं कि यात्रा और पर्यटन उद्योग, कैब चालकों से लेकर होटल कर्मचारियों तक की अनुमानित 4 करोड़ आजीविका का निर्वाह करता है, जो की महामारी से प्रभावित क्षेत्रों में से एक है। ऋषिकेश के आसपास की पहाड़ियों के बीच बसे छोटे गांवों के लिए, पर्यटकों की वापसी महत्वपूर्ण है क्योंकि अधिकांश स्थानीय लोग होटलों और अन्य पर्यटन-संबंधित व्यवसायों में काम करते हैं। लेकिन पिछले साल महामारी के कारण उन्होंने अपनी नौकरी खो दी थी।

यह भी पढ़ें: बुंदेलखंड की हवा में है इतिहास बनाना- महिलाओं ने दिलाया गांव को पानी की समस्या से निजात

ऋषिकेश(Rishikesh) के एक होटल में सफाई करने वाली महिला देवा अपनी नौकरी को बरकरार रखने में कामयाब रहीं, लेकिन उनका पति, जो पास के दूसरे होटल में रसोइए के रूप में काम करता था, वह इतना खुशकिस्मत नहीं था और उसे पिछले साल मार्च में भारत बंद होते ही काम से निकाल दिया गया। देवा बताती हैं कि “वह अभी भी घर पर हैं” उन्हे भैंस का दूध बेचना कुछ अतिरिक्त आय प्रदान करता है। “यह कठिन है, लेकिन हम किसी तरह गुजारा कर लेते हैं। अब मेरा बेटा अपने चाचा के साथ रिवर राफ्टिंग का आयोजन करने वाली कंपनी में मदद करने गया है,” उन्होंने आगे कहा।

होटल में सफाई कर्मी ‘देवा’।(VOA)

केवल ऋषिकेश(Rishikesh) ही वह स्थान नहीं है जिसे भारतीय, पर्यटन के लिए चुनते हैं। कोहली बताते हैं कि मुंबई के नज़दीक पर्यटन क्षत्रों में कदम रखने तक की जगह नहीं है, वहां एक भी कमरा नहीं बचा हुआ है। गोवा के साथ कश्मीर में भी सभी जगह पर्यटकों से भरी हुई है।(VOA)

(हिंदी अनुवाद: Shantanoo Mishra)

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आईपीयू की 143वीं असेम्बली बैठक में भारत की दिया कुमारी ने रखा भारत का पक्ष।(सांकेतिक चित्र, Pixabay)

अंतर-संसदीय संघ आईपीयू की 143वीं असेम्बली बैठक में बाल यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़े मुद्दे पर भारतीय महिला संसदों के दल ने हिस्सा लिया। स्पेन के मैड्रिड में आईपीयू की 143वीं असेंबली के दौरान आयोजित महिला सांसद पूनम बेन मादाम और दीयाकुमारी के फोरम के 32वें सत्र को संबोधित किया।

इस दौरान सांसद दीयाकुमारी ने कहा कि जहां सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) अवसरों के नए रास्ते खोलती है, वहीं वे बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार सहित चुनौतियों, खतरों और हिंसा के नए रूपों को भी जन्म देती हैं। भारत में ऑनलाइन बाल यौन शोषण और दुर्व्यवहार से निपटने के लिए कड़े उपाय हैं।

सांसद दीया ने कहा कि भारत ने वर्ष 2000 में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम बनाया था और समय-समय पर इसमें संशोधन किया है। यह अश्लील सामग्री को इलेक्ट्रॉनिक रूप में प्रकाशित करने और प्रसारित करने पर रोक लगाता है और अधिनियम के विभिन्न वर्गों में उल्लंघन के लिए दंडात्मक प्रावधान भी निर्धारित करता है। उन्होंने आईटी इंटरमीडियरीज गाइडलाइंस रूल्स, 2011 के साथ-साथ पॉक्सो एक्ट पर भी विचार व्यक्त किये। भारतीय दल ने कहा कि केवल कानूनी प्रावधान और उनका सख्ती से क्रियान्वयन ही काफी नहीं है, ऑनलाइन यौन शोषण से बच्चों को बचाने के लिए विशेष नीतियों की आवश्यकता है।

अंतर-संसदीय संघ आईपीयू की 143वीं असेम्बली में भारत का दल।(IANS)

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भारत ने रूस और चीन से कहा कि अफगान क्षेत्र का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के लिए नहीं किया जाना चाहिए।(IANS)

भारत ने रूस और चीन से कहा कि लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे पाकिस्तान स्थित आतंकवादी समूहों द्वारा अफगान क्षेत्र का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के लिए नहीं किया जाना चाहिए। RIC Meeting त्रिपक्षीय ढांचे की 18 वीं बैठक की अध्यक्षता के दौरान रखा, जो शुक्रवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग पर हुई, जिसमें रूस और चीन के विदेश मंत्रियों सेर्गेई लावरोव और वांग यी ने भी भाग लिया।

जयशंकर ने अफगानिस्तान में समावेशी और प्रतिनिधि सरकार होने पर भारत के रुख को दोहराते हुए कहा, "RIC देशों के लिए आतंकवाद, कट्टरपंथ, मादक पदार्थों की तस्करी आदि के खतरों पर संबंधित दृष्टिकोणों का समन्वय करना आवश्यक है।" मंत्री ने मास्को और बीजिंग के अपने दो समकक्षों को बताया कि, अफगान लोगों की भलाई के लिए भारत की प्रतिबद्धता के अनुरूप, नई दिल्ली ने देश में सूखे की स्थिति से निपटने के लिए अफगानिस्तान को 50,000 मीट्रिक टन गेहूं की आपूर्ति की पेशकश की थी।

हालांकि, मानवीय पहल में रुकावट आ गई थी, क्योंकि बुधवार तक पाकिस्तान इस खेप को अपने क्षेत्र से गुजरने की अनुमति देने के लिए प्रतिबद्ध नहीं था। जयशंकर ने आज कहा, "RIC देशों को यह सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करने की जरूरत है कि मानवीय सहायता बिना किसी रुकावट और राजनीतिकरण के अफगान लोगों तक पहुंचे। एक निकट पड़ोसी और अफगानिस्तान के लंबे समय से साथी के रूप में, भारत उस देश में हाल के घटनाक्रमों, विशेष रूप से अफगान लोगों की पीड़ा के बारे में चिंतित है।"

तीनों मंत्रियों ने इस बात पर सहमति जताई कि आरआईसी देशों के बीच सहयोग न केवल उनके अपने विकास में बल्कि वैश्विक शांति, सुरक्षा, स्थिरता में भी योगदान देगा। जयशंकर ने अपने संबोधन में, आरआईसी तंत्र के तहत यूरेशियन क्षेत्र के तीन सबसे बड़े देशों के बीच घनिष्ठ संवाद और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए भारत की निरंतर प्रतिबद्धता की भी पुष्टि की। उन्होंने कहा, "मेरा मानना है कि व्यापार, निवेश, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी और राजनीति आदि क्षेत्रों में हमारा सहयोग वैश्विक विकास, शांति और स्थिरता में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।"

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वैज्ञानिको के अनुसार कोरोना का यह नया वैरिएंट डेल्टा वैरिएंट से भी ज़्यादा खतरनाक है। (Wikimedia Commons)

कोरोना(Corona) के कारण लगभग 18 से 20 महीने झूझने और घरों में बंद रहने के बाद दुनिया में अब ज़िन्दगी पटरी पर लौट रही है लेकिन अब दक्षिण अफ्रीका में पाए गए कोरोना के नए वैरिएंट ने अब दुनिया के कई देशों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। नए वैरिएंट का नाम बी.1.1.1.529 है। इस वैरिएंट के आने से वैज्ञानिको के बीच चिंता बढ़ गई है क्योंकि उनकी माने तो यह वैरिएंट डेल्टा प्लस वैरिएंट(Delta Plus Variant) से भी ज़्यादा खतरनाक है।

दक्षिण अफ्रीका(South Africa) में इस वैरिएंट के अब 100 मामले सामने आए हैं और अब यह धीरे-धीरे तेज़ी से फैलता जा रहा है।

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