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देश के खिलौना उद्योग में बड़ी ताकत छुपी हुई है : नरेन्द्र मोदी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि हमारे देश के खिलौना उद्योग में बड़ी ताकत छुपी हुई है। इस ताकत को बढ़ाना और इसकी पहचान बढ़ाना आत्मनिर्भर भारत अभियान का बड़ा हिस्सा है।

आत्मनिर्भर भारत की पहल को साकार करते हुए देश में भारतीय खिलौना मेले का आयोजन किया जा रहा है। इस मेले में पूरे देश से तीन केंद्रीय विद्यालय अपने स्टॉल प्रदर्शित करने के लिए चुने गए हैं। दिल्ली क्षेत्र से केवी जेएनयू, केवी नंबर 1 एएफएस गुरुग्राम और केवी आईआईटी कानपुर अपने अनूठे खिलौने प्रदर्शित कर रहे हैं। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि हमारे देश के खिलौना उद्योग में बड़ी ताकत छुपी हुई है। इस ताकत को बढ़ाना और इसकी पहचान बढ़ाना आत्मनिर्भर भारत अभियान का बड़ा हिस्सा है। प्रधानमंत्री ने 27 फरवरी को भारतीय खिलौना मेले का उद्घाटन भी किया है।


30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 1000 से अधिक प्रदर्शकों ने अपने उत्पादों को ई-कॉमर्स वाली आभासी प्रदर्शनी में प्रदर्शित किया। इसमें पारंपरिक भारतीय खिलौनों के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक खिलौने, आलीशान खिलौने, पहेलियां और खेल सहित आधुनिक खिलौने प्रदर्शित किए गए।

केंद्रीय विद्यालय संगठन के छात्र भारतीय खिलौना मेला 2021 में उत्साहपूर्वक भाग ले रहे हैं। केवीएस से हुए कुल पंजीकरण की संख्या करीब 3.5 लाख है।

केवी हॉल नंबर 9 में मौजूद हैं, जहां सीखने के और शैक्षणिक खिलौने प्रदर्शित किए गए हैं। स्टॉल नंबर आई 347 पर केवी जेएनयू तक पहुंचा जा सकता है। केवी आईआईटी कानपुर अपने खिलौने स्टाल नंबर आई 1550 पर प्रदर्शित कर रहा है। केवी नंबर 1 एएफएस गुरुग्राम स्टॉल नंबर आई 361 पर मौजूद है।

देश का खिलौना उद्योग आत्मनिर्भर भारत अभियान का बड़ा हिस्सा है। (ट्विटर)

केवी जेएनयू 25 खिलौने प्रदर्शित कर रहा है, जिसमें अलग अलग कहानियों को सुनाने में इस्तेमाल होने वाली जानवरों की कठपुतलियां, कलाबाज नर्तक स्केलटन, लंग्स बलून, नोज बग शामिल हैं।

केवी आईआईटी कानपुर अपने स्टॉल पर 33 खिलौने प्रदर्शित कर रहा है, जिसमें बोर्ड गेम, डिजिटल गेम, मैकेनिकल गेम और साइंस एक्टिविटी गेम हैं। इसमें रोलिंग जोकर, कागज की कठपुतली, डाइनैमिक डॉल, नॉलेज एक्सप्रेस, वे मेकर, टचिंग स्लेट, कोविड रक्षक और खिलौना पैराशूट शामिल है।

केवी नंबर 1 एएफएस गुरुग्राम ने अपने स्टॉल में 14 खिलौने शामिल किए हैं, जिसमें जोड़ मशीन, वर्ड हाउजी, हाइड्रॉलिक ब्रेक सिस्टम, जोड़गाड़ी, नलतरंग, प्रोबिनो आदि हैं।

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अपनी तरह की इस पहली पहल में, जहां सभी तरह के पारंपरिक और आधुनिक खिलौने प्रदर्शित किए जा रहे हैं, और जो बच्चों को भारतीय खिलौनों के अनूठे संसार में ले जा रहे हैं, केंद्रीय विद्यालय के छात्र सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं।

भारतीय खिलौना मेला का मंगलवार को आखिरी दिन है। (आईएएनएस-SM)

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इंडियन स्कूल ऑफ हॉस्पिटैलिटी (ISH) [IANS]

दुनिया की अग्रणी हॉस्पिटैलिटी और पाक कला शिक्षा दिग्गजों में से एक, सॉमेट एजुकेशन (Sommet Education) ने हाल ही में देश के प्रीमियम हॉस्पिटैलिटी संस्थान, इंडियन स्कूल ऑफ हॉस्पिटैलिटी (ISH) के साथ हाथ मिलाया है। इसके साथ सॉमेट एजुकेशन की अब आईएसएच (ISH) में 51 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जो पूर्व के विशाल वैश्विक नेटवर्क में एक महत्वपूर्ण एडिशन है। रणनीतिक साझेदारी सॉमेट एजुकेशन को भारत में अपने दो प्रतिष्ठित संस्थानों को स्थापित करने की अनुमति देती है। इनमें इकोले डुकासे शामिल है, जो पाक और पेस्ट्री कला में एक विश्वव्यापी शिक्षा संदर्भ के साथ है। दूसरा लेस रोचेस है, जो दुनिया के अग्रणी हॉस्पिटैलिटी बिजनेस स्कूलों में से एक है।

इस अकादमिक गठबंधन के साथ, इकोले डुकासे का अब भारत में अपना पहला परिसर आईएसएच (ISH) में होगा, और लेस रोचेस देश में अपने स्नातक और स्नातकोत्तर आतिथ्य प्रबंधन कार्यक्रम शुरू करेगा।

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Credit- Wikimedia Commons

भारतीय रेलवे (Wikimedia Commons)

पूर्व मध्य रेल ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देशों के बाद इसके अनुपालन में उल्लेखनीय प्रगति हासिल की है। इको स्मार्ट स्टेशन के रूप में विकसित करने के लिए पूर्व मध्य रेल के 52 चिन्हित स्टेशनों पर रेलवे बोर्ड द्वारा सुझाए गए 24 इंडिकेटर (पैरामीटर) लागू किए हैं। सभी 52 स्टेशनों ने पर्यावरण प्रबंधन के लिए एक प्रमाणन आईएसओ-14001:2015 प्राप्त किया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल द्वारा निर्धारित पूर्व मध्य रेल के 52 नामांकित स्टेशनों में से 45 का संबंधित राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोडरें के लिए सहमति-से-स्थापित (सीटीई) प्रस्तावों की ऑनलाइन प्रस्तुतियां सुनिश्चित कीं।

पूर्व मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी राजेष कुमार ने बताया कि पूर्व मध्य रेल के सभी 45 स्टेशनों के लिए स्थापना की सहमति के लिए एनओसी प्राप्त कर ली गई है और 32 स्टेशनों को कंसेंट-टू-ऑपरेट (सीटीओ) दी गई है। उन्होंने बताया कि इस प्रमाणीकरण ने पूर्व मध्य रेलवे को राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोडरें द्वारा निर्धारित पानी, वायु प्रदूषण नियंत्रण और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन मानदंडों की आवश्यकता को सुव्यवस्थित करने में मदद की है।

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वायरस जनित बीमारियों की विश्व स्तरीय जांच अब गोरखपुर में भी हो सकेगा। [IANS]

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में इंसेफेलाइटिस समेत अन्य वायरस जनित बीमारियों की विश्व स्तरीय जांच शुरू हो गई है। गोरखपुर (Gorakhpur) में यह इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR)की क्षेत्रीय इकाई रीजनल मेडिकल रिसर्च सेंटर (RMRC) के जरिए संभव हुआ है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) के प्रयास से शुरू इस आरएमआरसी में नौ अत्याधुनिक लैब्स बनकर तैयार हैं। बता दें कि मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) इसका उद्घाटन करेंगे।

राज्य सरकार की ओर से मिली जानकारी के अनुसार आरएमआरसी (RMRC) की इन लैब्स के जरिये न केवल बीमारियों के वायरस की पहचान होगी बल्कि बीमारी के कारण, इलाज और रोकथाम को लेकर व्यापक स्तर पर वल्र्ड क्लास अनुसंधान भी हो सकेगा। सबसे खास बात यह भी है कि अब गोरखपुर (Gorakhpur) में ही आने वाले समय में कोरोनाकाल के वर्तमान दौर की सबसे चर्चित और सबसे डिमांडिंग जीनोम सिक्वेंसिंग (Genome Sequencing) भी हो सकेगी। यह पता चल सकेगा कि कोरोना का कौन सा वेरिएंट (Covid variant) अधिक प्रभावित कर रहा है।

Narendra Modi , PM of India, ICMR मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस RMRC का उद्घाटन करेंगे। [Wikimedia Commons]

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