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खेल

मानसिक दबाव से निकलने के लिए एथलीटों का प्रशिक्षण जरूरी : वीके सिंह

लोकसभा सांसद और पूर्व सेना प्रमुख जनरल वीके सिंह ने भारत की स्टार महिला पहलवान बबीता फोगाट और गीता फोगाट की ममेरी बहन रितिका फोगाट की मौत पर गहरा दुख प्रकट किया है।

लोकसभा सांसद और पूर्व सेना प्रमुख जनरल वीके सिंह ने भारत की स्टार महिला पहलवान बबीता फोगाट और गीता फोगाट की ममेरी बहन रितिका फोगाट की मौत पर गहरा दुख प्रकट किया है। सड़क परिवहन और राजमार्ग राज्य मंत्री, वीके सिंह ने साथ ही कहा है कि मानसिक दबाव से निकलने के लिए एथलीटों को अनिवार्य रूप से प्रशिक्षित किया जाना चाहिए। 17 साल की रितिका ने राजस्थान के भरतपुर के लोहागढ़ में आयोजित स्टेट लेवल सब जूनियर टूर्नामेंट में हिस्सा लिया था। इस टूर्नामेंट के फाइनल मुकाबले में रितिका एक अंक से हार गई। इस हार से निराश होकर उन्होंने फांसी लगाकर अपनी जान दे दी।


वीके सिंह ने ट्वीट करते हुए लिखा, “यह बेहद दुखद खबर है कि हमने रितिका फोगाट को खो दिया, जिनका कि आगे आने वाले समय में बेहद शानदार करियर था। दुनिया कुछ दशक में ही बदल गई है। एथलीट दबावों का सामना कर रहे हैं जो पहले नहीं था। एथलीटों को इन दबावों से निपटने के लिए भी अनिवार्य रूप से प्रशिक्षित किया जाना चाहिए।”

मिक्सड मार्शल आटर्स फाइटर रितु फोगाट ने रितिका की मौत पर शोक व्यक्त किया है। उन्होंने ट्विटर पर लिखा, “छोटी बहन रितिका की आत्मा को भगवान शांति दे। मुझे अभी भी विश्वास नहीं हो रहा है कि आपके साथ क्या हुआ। आप हमेशा हमें याद आएंगी। ओम शांति।”

उन्होंने आगे कहा, “मुझे आज सुबह से मैसेज आते रहे। मैं अपने परिवार में जो हुआ उससे बहुत दुखी और परेशान हूं। मैं आप लोगों से आग्रह करती हूं कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें और विश्वास करें और जिम्मेदारी से कार्य करें। ये मेरे और मेरे परिवार के लिए कठिन समय हैं और मैं आप सभी से हमारी निजता का सम्मान करने का आग्रह करती हूं।”

यह भी पढ़ें: कई लोगों को लंबे समय तक डिपरेशन से जूझना पड़ता है :  विराट कोहली

राष्ट्रमंडल खेलों-2010 में भारत को महिला वर्ग में कुश्ती में पहला स्वर्ण पदक दिलाने वाली गीता फोगाट भी बेहद दुखी हैं और उन्होंने कहा है कि हार-जीत खिलाड़ी के जीवन का हिस्सा होता है और किसी भी खिलाड़ी को ऐसे कदम नहीं उठाना चाहिए।

गीता फोगाट ने टिवटर पर लिखा, “भगवान मेरी छोटी बहन मेरे मामा की लड़की रितिका की आत्मा को शांति दे। मेरे परिवार के लिए बहुत ही दुख की घड़ी है। रितिका बहुत ही होनहार पहलवान थी। पता नहीं क्यों उसने ऐसा कदम उठाया। हार-जीत खिलाड़ी के जीवन का हिस्सा होता है हमें ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहिये।”(आईएएनएस-SHM)

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रिपोर्ट के अनुसार, एप्पल छोटी और लंबी दूरी के वायरलेस चाजिर्ंग उपकरणों पर काम कर रहा है। (Pixabay)

एप्पल (Apple) कथित तौर पर एक ऐसे चार्जर पर काम कर रहा है जो एक साथ कई डिवाइस, एक आईफोन, एयरपोड्स और वॉच को पावर दे सकता है।

मैकरियूमर्स की रिपोर्ट के अनुसार, 'पावर ऑन' न्यूजलेटर के लेटेस्ट एडीशन में मार्क गुरमन ने कंपनी की भविष्य की वायरलेस चाजिर्ंग तकनीक के बारे में कुछ दिलचस्प जानकारी का खुलासा किया।

उन्होंने लिखा, "मेरा यह भी मानना है कि एप्पल (Apple) छोटी और लंबी दूरी के वायरलेस चाजिर्ंग उपकरणों पर काम कर रहा है और यह एक ऐसे भविष्य की कल्पना करता है जहां एप्पल के सभी प्रमुख उपकरण एक-दूसरे को चार्ज कर सकते हैं। कल्पना कीजिए कि एक आईपैड एक आईफोन चार्ज कर रहा है और फिर वह आईफोन एयरपोड्स या एक एप्पल घड़ी चार्ज कर रहा है।"

apple , wireless charger, Iphone, iPod Chargers एप्पल कथित तौर पर एक ऐसे चार्जर पर काम कर रहा है जो एक साथ कई डिवाइस को पावर दे सकता है। [Wikimedia Commons]

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झारखंड के नोआमुंडी में खदान की कमान महिलाओं के हाथ में सौंपेगी टाटा स्टील कंपनी। [Wikimedia Commons]

टाटा स्टील (Tata Steel) कंपनी झारखंड में लौह अयस्क की एक खदान की कमान पूरी तरह महिलाओं के हाथ में होगी। फावड़ा से लेकर ड्रिलिंग तक और डंपर चलाने से लेकर डोजर-शॉवेल जैसी हेवी मशीनों का संचालन कुशल महिला कामगारों के द्वारा किया जाएगा। नये साल यानी 2022 में पश्चिम सिंहभूम जिले की नोआमुंडी आयरन ओर माइन्स को पूरी तरह महिलाओं के हाथ में सौंपने की तैयारी पूरी कर ली गयी है। ऐसा प्रयोग देश में पहली बार हो रहा है।

टाटा स्टील (Tata Steel) के आयरन ओर एंड क्वेरीज डिविजन के महाप्रबंधक ए. के. भटनागर ने पत्रकारों को बताया कि नोआमुंडी स्थित कंपनी की आयरन ओर माइन्स में सभी शिफ्टों के लिए 30 सदस्यों वाली महिलाओं की टीम की तैनाती की जा रही है। खदान को स्वतंत्र रूप से महिलाओं के हाथों संचालित करने का यह टास्क कंपनी ने महिला सशक्तीकरण की परियोजना तेजस्विनी-2.0 के तहत लिया था और अब इसे सफलतापूर्वक लागू करने की तैयारियां पूरी कर ली गयी हैं।

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इस साल देश में हिरासत में कुल 151 मौतें हुई हैं। (सांकेतिक चित्र, File Photo )

इस साल देश में हिरासत(police custody)में कुल 151 मौतें हुई हैं। केंद्र ने लोकसभा(Loksabha) में मंगलवार को यह जानकारी दी। बीजेपी सांसद वरुण गांधी के सवाल का जवाब देते हुए गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय(Nityanand Rai)ने कहा कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के मुताबिक 15 नवंबर तक पुलिस हिरासत में मौत के 151 मामले दर्ज किए गए हैं।

महाराष्ट्र में पुलिस हिरासत(police custody) में सबसे अधिक (26) मौतें हुईं हैं, उसके बाद गुजरात (21) और बिहार (18) का स्थान रहा है। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में पुलिस हिरासत में 11-11 लोगों की मौत की खबर है।

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