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Transparency Web Series : स्वराज से लेकर भ्रष्टाचार तक का सफर

"Transparency: Pardarshita" एक राजनीतिक थ्रिलर वेब सीरीज जो चंदे की पारदर्शिता के लिए एक आम - आदमी द्वारा किए गए संघर्ष को उजागर करती है।

“Transparency: Pardarshita” एक राजनीतिक थ्रिलर वेब सीरीज| (Transparency)

दुनिया में कई वेब सीरीज (Web Series) हैं, जिनकी कहानी, उससे जुड़े पात्र और उस सीरीज को जनता तक पहुंचाने का मकसद अलग-अलग होता है। कुछ काल्पनिक कुछ रहस्यमयी और कुछ सत्य घटनाओं पर आधारित ऐसी वेब सीरीज होती हैं जो जनता को सच्चाई से रूबरू कराती है।  

आज हम एक ऐसी वेब सीरीज की बात करेंगे जो राजनीतिक शैली पर आधारित है। यह सीरीज चंदे की पारदर्शिता के लिए एक आम-आदमी द्वारा किए गए संघर्ष को उजागर करती है।


“Transparency: Pardarshita” एक राजनीतिक थ्रिलर वेब सीरीज है जिसे Dr. Munish Raizada द्वारा निर्मित और निर्देशित किया गया है। जिसमें कुल 7 एपिसोड हैं। प्रत्येक एपिसोड 40 से 50 मिनट की अवधि में है। वेब सीरीज में तीन गीतों को भी बखूबी शामिल किया गया है| जिसमें कैलाश खेर जी द्वारा “बोल रे दिल्ली बोल”, उदित नारायण जी द्वारा “कितना चंदा” और सवानी मुद्गल जी द्वारा “वैष्णव जन”| यह एक ऐसी वेब सीरीज है, जो आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party) और इंडिया अगेंस्ट करप्शन (India Against Corruption) के चौंकाने वाले तथ्यों के विषय में बात करती है। एक ऐसी राजनीतिक पार्टी जिसने इस मकसद से सत्ता में कदम रखा की भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म कर देंगे उस पार्टी ने कैसे मासूम जनता की उम्मीदों का गला घोंटा है, यह सीरीज ऐसे कई झकझोर देने वाले सच को बयां करती है|

यह सीरीज झकझोर देने वाले सच को बयां करती है| (Transparency)

स्वराज, व्यवस्था परिवर्तन, आम – आदमी, जनलोकपाल, अन्ना आंदोलन, चंदे की पारदर्शिता और सत्य के अहम मुद्दों के साथ इस पूरी वेब सीरीज के स्वरूप को गठित किया गया है। 

“राजधानी का ओहदा पाया, सिमट गई तेरी हर काया”। यह सीरीज दिल्ली के साथ हुए छल को बखूबी बयां करती है। एक पार्टी जिसने छल – कपट से वो सब हासिल कर लिया जिसे वह दुनिया के सामने धिक्कारने का झूठा नाटक करती थी। यह वेब सीरीज एक ऐसी राजनीतिक पार्टी के झूठ से नकाब हटाती है, जिसने व्यवस्था परिवर्तन के नाम पर ना जाने कितने भारतवासियों के उम्मीदों का गला घोट डाला। 

हालांकि इस डॉक्यूमेंट्री सीरीज का मकसद व्यक्तिगत रूप से किसी की प्रतिष्ठा को चोट पहुंचाना नहीं है। यह सीरीज जनता के साथ हुए छल, अन्ना आंदोलन के दौरान हुई घटनाएं और आम आदमी पार्टी की कार्यप्रणाली का गहन विश्लेषण करती है। यह डॉक्यूमेंट्री सीरीज परत दर परत कई रहस्यों पर से पर्दा उठाती है।

यह भी पढ़ें :- Bol Re Dilli Bol – ‘आप’ सरकार से छले जाने का बिन्दुवार वर्णन

इस डॉक्यूमेंट्री सीरीज के माध्यम से आप आगे जानेंगे कि कैसे अन्ना आंदोलन की शुरुआत हुई थी? कैसे एक पार्टी व्यवस्था परिवर्तन के नाम पर जनता की उम्मीदों का एक चेहरा बन गई थी? 

  • डॉक्यूमेंट्री को transparencywebseries.com पर भी देखा जा सकता है

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आईपीएल में रॉयल चेलेंजर्स बेंगलोर (आरसीबी) का एक मैच (wikimedia commons)

भारत के क्रिकेट टीम के कप्तान और दिग्गज बल्लेबाज विराट कोहली ने एक के बाद टीम से अपनी कप्तानी छोड़ने का जैसे ऐलान किया वैसे हि , उनके चाहने वाले , प्रशंसकों और साथी खिलाडियों ने अपनीं प्रतिक्रिया देना शुरू कर दी । इसी बीच दक्षिण अफ्रीका के पूर्व तेज गेंदबाज डेल स्टेन का कहना है कि आईपीएल की टीम का नेतृत्व करने का दबाव और युवा परिवार का होना रॉयल चेलेंजर्स बेंगलोर (आरसीबी) के कप्तान विराट कोहली के इस आईपीएल के बाद टीम की कप्तानी छोड़ने के फैसले का कारण हो सकता है। आरसीबी की टीम की और से रविवार की देर रात यह घोषणा की गई , कि विराट कोहली आईपीएल 2021 सीजन के बाद टीम की कप्तानी छोड़ देंगे । इस के पहले कोहली ने कुछ दिन पहले ही टी20 विश्व कप के बाद भारतीय टीम के टी20 प्रारूप की कप्तानी छोड़ने का भी फैसला किया था।


डेल स्टेन ने आगे कहा कि, " विराट कोहली आरसीबी टीम के साथ शुरू से जुड़े हैं। मुझे नहीं पता, जैसे-जैसे जीवन आगे बढ़ता है आप चीजों को प्राथमिकता देने लगते हैं। कोहली का नया यूवा परिवार है । उन्हें अपनी पर्शनल लाइफ भी देखना है ।
डेल ने यह भी कहा कि , "हो सकता है, उस जिम्मेदारी (कप्तानी) से थोड़ा सा त्याग करना और सिर्फ अपनी बल्लेबाजी पर ध्यान केंद्रित करने में सक्षम होना उनके करियर के लिए इस समय एक अच्छा निर्णय है।"

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दुनिया के सबसे बड़े ऑनलाइन रिटेलर अमेजन (wikimedia commons)

दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी में शुमार अमेजन को लेकर एक बहुत बड़ी खबर सामने आई है । द मॉर्निग कॉन्टेक्स्ट की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के सबसे बड़े ऑनलाइन रिटेलर अमेजन ने भारत में अपने कानूनी प्रतिनिधियों के आचरण की जांच शुरू कर दी है। एक व्हिसलब्लोअर शिकायत के आधार पर यह जांच हुई है जिसमें आरोप लगाया गया है कि अमेजन द्वारा कानूनी शुल्क में भुगतान किए गए कुछ पैसे को उसके एक या अधिक कानूनी प्रतिनिधियों द्वारा घूस में बदल दिया गया है।

काम करने वाले दो लोगों ने जो कि अमेजन की इन-हाउस कानूनी टीम के साथ है , उन्होंने मिलकर पुष्टि की कि अमेजन के वरिष्ठ कॉर्पोरेट वकील राहुल सुंदरम को छुट्टी पर भेजा गया है। एक संदेश में उन्होंने कहा, "क्षमा करें, मैं प्रेस से बात नहीं कर सकता।" हम स्वतंत्र रूप से यह पता नहीं लगा सके कि आंतरिक जांच पूरी हो चुकी है या प्रगति पर है।

कई सवालों के एक विस्तृत सेट के जवाब में, अमेजन के प्रवक्ता ने कहा, "भ्रष्टाचार के लिए हमारे पास शून्य सहनशीलता है। हम अनुचित कार्यो के आरोपों को गंभीरता से लेते हैं, उनकी पूरी जांच करते हैं, और उचित कार्रवाई करते हैं। हम विशिष्ट आरोपों या किसी की स्थिति पर इस समय जांच या टिप्पणी नहीं कर रहे हैं इस समय जांच।"

\u0911\u0928\u0932\u093e\u0907\u0928 \u0930\u093f\u091f\u0947\u0932\u0930 \u0905\u092e\u0947\u091c\u0928 दुनिया की सबसे बड़े ऑनलाइन रिटेलर अमेजन कंपनी का लोगो (wikimedia commons)

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भारतीय जनता पार्टी भाजपा का चुनावी चिन्ह (wikimedia commons)

अभी-अभी भारत के पंजाब राज्य में एक बड़ी राजनेतिक घटना घटी जब वंहा का मुख्यमंत्री ने इस्तीफा दिया और सत्ता दल पार्टी ने राज्य ने नया मुख्यमंत्री बनाया । पंजाब में एक दलित को मुख्यमंत्री बना कर कांग्रेस ने एक बड़ी सियासी चाल खेल दी है। अब कांग्रेस इसका फायदा अगले साल होने जा रहे राज्यों के विधानसभा चुनाव में उठाने की रणनीति पर भी काम करने जा रही है । उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के सियासी पारे को गरम कर दिया है कांग्रेस की इस मंशा ने।

कांग्रेस नेता हरीश रावत जो कि पंजाब में दलित सीएम के नाम का ऐलान करने वाले वो उत्तराखंड से ही आते हैं, अतीत में प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और आगे भविष्य में भी सीएम पद के दावेदार हैं, इसलिए बात पहले इस पहाड़ी राज्य के सियासी तापमान की करते हैं। साढ़े चार साल के कार्यकाल में भाजपा राज्य में अपने दो मुख्यमंत्री को हटा चुकी है और अब तीसरे मुख्यमंत्री के सहारे राज्य में चुनाव जीतकर दोबारा सरकार बनाना चाहती है। इसलिए भाजपा इस बात को बखूबी समझती है कि हरीश रावत उत्तराखंड में तो इस मुद्दें को भुनाएंगे ही।

बात करे उत्तराखंड राज्य कि तो यहा पर आमतौर पर ठाकुर और ब्राह्मण जाति ही सत्ता के केंद्र में रहती है, लेकिन अब समय बदल रहा है राजनीतिक दल भी दलितों को लुभाने का विशेष प्रयास कर रहे हैं। दरअसल, उत्तराखंड राज्य में 70 विधानसभा सीट आती है , जिसमें 13 सीट अनुसूचित जाति और 2 सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है। मसला सिर्फ 13 आरक्षित सीट भर का ही नहीं है। उत्तराखंड राज्य के 17 प्रतिशत से अधिक दलित मतदाता 22 विधानसभा सीटों पर जीत-हार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और इसके साथ ही कुल 36 सीटों पर जीत हासिल करने वाली पार्टी राज्य में सरकार बना लेती है।

brahmin in uttrakhand उत्तराखंड राज्य में 70 विधानसभा सीट आती है (wikimedia commons)

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