Never miss a story

Get subscribed to our newsletter


×
संस्कृति

गाय के गोबर से बन रहे गौरी-गणेश, पर्यावरण संरक्षण का संदेश

सिटीजन डेवलपमेंट फोउंडेशन संस्था के माध्यम से प्रवासी महिलाओं को इसकी ट्रेनिंग दी गई। गोबर से गणेश-लक्ष्मी की मूर्तियां बनाने और उनकी धार्मिक मान्यताओं से रूबरू करा कर उन्हें इस काम से जोड़ा गया।

भगवान गणेश की मूर्ति (सांकेतिक तस्वीर, Pexels)

By: विवेक त्रिपाठी

भारतीय परंपरा में बेहद पवित्र और अपने औषधीय महत्व के कारण पंचगव्य में से एक गाय के गोबर से गौरी-गणेश की मूर्तियां बनाने की पहल शुरू की गयी है। इस बार के गणेशोत्व और दीपावली में लोग इन मूर्तियों का भी पूजन में उपयोग कर सकते हैं। बायोडिग्रेडबल होने के कारण ये मूर्तियां इको फ्रेंडली होंगी। घर के गमले में विसर्जित करने पर ये कंपोस्ट खाद में तब्दील हो जाएंगी। यह पर्यावरण संरक्षण का एक संदेश भी देंगे।


राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में काम कर रही स्वयं सहयता समूह की महिलाएं भी इसमें बढ़चढ़ कर हिस्सा ले रही हैं। गाय के गोबर से मपर्यावरण संरक्षण के साथ इसे रोजगार का जरिया भी बना लिया है। इस बार गणेश महोत्सव के अलावा होंने वाली दीपावाली में गोबर के उत्पाद जैसे गमला, गणेश-लक्ष्मी की मूर्तियां, अगरबत्ती, हवन सामग्री भी महिलाएं तैयार कर रही हैं।

यह भी पढ़ें: एक गांव ऐसा, जहां अनहोनी के भय से राखी नहीं बांधती बहनें

राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के निदेशक सुजीत कुमार ने आईएएनएस को बताया, “हमारे समूहों द्वारा गोबर से मूर्तियां बनाने की एक अनूठी पहल की जा रही है। इससे लोगों को रोजगार भी मिल रहा है। इसके लिए कई जिलों में प्रशिक्षण भी चल रहा है। इसके अलावा मुजफ्फरनगर जिले में दुर्गा समूह की सात सदस्यों द्वारा सजावटी समान, घड़ी, गमला मूर्तियां भी गाय के गोबर से तैयार हो रहे हैं। इसी जिले की नवजागरण स्वयं सहयता की 6 महिलाएं भी इसी कार्य में लगी हुई हैं। झांसी में तीन, जलौन में चार और प्रतापगढ़ में सात स्वयं समूह सहयता में करीब 20 महिलाएं गोबर से बने उत्पादों को बनाने में लगी हैं।”

सांकेतिक तस्वीर (Image:Pexels)

उन्होंने बताया, “ये लोग अपने हुनर से पांच सौ से लेकर हजार रूपये तक कमा लेती हैं। इसके साथ ही लखनऊ , सुल्तानपुर, हरदोई, गजियाबाद आदि जिलों में भी गोबर से मूर्तियों और पूजन समाग्री बनाने का प्रशिक्षण चल रहा है।”

सिटीजन डेवलपमेंट फोउंडेशन संस्था के माध्यम से प्रवासी महिलाओं को इसकी ट्रेनिंग दी गई। गोबर से गणेश-लक्ष्मी की मूर्तियां बनाने और उनकी धार्मिक मान्यताओं से रूबरू करा कर उन्हें इस काम से जोड़ा गया। करीब 300 प्रवासी महिलाओं के समूह को रोजगार मिल गया है। शालिनी सिंह ने बताया, 20 हजार गणेश-लक्ष्मी की प्रतिमाओं को बनाने का ऑर्डर भी महिलाओं को मिला है। ऐसे इस दीपावली मां लक्ष्मी इन महिलाओं के घरों में समृद्घ का संचार करेंगी। राजधानी के कृष्णानगर और मलीहाबाद में प्रशिक्षण के साथ बनाने का कार्य चल रहा है।

उन्होंने बताया कि गोबर की बनी इको फ्रेंडली प्रतिमाओं का दाम भी सामान्य प्रतिमाओं के मुकाबले कम होगा जबकि पर्यावरण संरक्षण और स्वास्थ्य के लिए फोयदेमंद होगा। ऐसे में आने वाले गणेशोत्सव और दीपोत्सव पर ऐसी प्रतिमाओं का पूजन कर आप आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती हैं।

यह भी पढ़ें: अफगान में प्रताड़ित हिंदुओं, सिखों को भारत और अमेरिका से मिला समर्थन

एक अन्य समूह की महिला ने बताया कि मूर्ति बनाने में बेल का गुदा, उड़द की दाल का चूरा और हल्की मिट्टी के अलावा गोबर के प्रयोग से मूर्तियां बन रही हैं। यह पूर्णतया प्राकृतिक है। इसमें सभी चीजें नेचुरल इस्तेमाल हो रही हैं। इनको बनाते समय इनमें औषधीय महत्व के पौधे मसलन तुलसी और गिलोय आदि के बीज भी डाले जाएंगे। बाद में ये घर की औषधीय वाटिका में शामिल होकर पूरे परिवार की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में कारगर होंगे।(आईएएनएस)

Popular

अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी (Wikimedia Commons)

बॉलीवुड (Bollywood) के जाने माने अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी (Nawazuddin Siddiqui) अपने दमदार अभिनय के अलावा अक्सर पुरस्कारों और सम्मानों के साथ वैश्विक मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करने को लेकर भी सुर्ख़ियों में रहते हैं। उन्हें मिलने वाले सम्मान उनका आत्मविश्वास बढ़ाते हैं। उसी के बारे में बात करते हुए, अभिनेता ने कहा, "मैं अपनी पहचान या पुरस्कारों पर नजर नहीं रखता, लेकिन यह निश्चित रूप से मुझे प्रेरित करते हैं और उस तरह की फिल्मों या पात्रों को चुनने में मदद करते है जिन्हें मैं करना चाहता हूं। पुरस्कार मुझे अपना काम चुनने में आत्मविश्वास देते हैं।"

नवाज ने हाल ही में अंतर्राष्ट्रीय एमी पुरस्कारों (International Emmy Awards) की अपनी यात्रा के साथ सुर्खियां बटोरीं, क्योंकि उन्हें सुधीर मिश्रा निर्देशित 'सीरियस मेन' में उनके काम के लिए एक अभिनेता श्रेणी द्वारा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन में नामांकित किया गया था। हालांकि, अभिनेता डेविड टेनेंट से हार गए, जो ड्रामा मिनिसरीज 'देस' में अपने प्रदर्शन के लिए ट्रॉफी लेकर चले गए।

पहले भी अभिनेता (Nawazuddin Siddiqui) ने कई अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त की है, क्योंकि वह दुनिया के एकमात्र ऐसे अभिनेता हैं जिनके पास कान्स फिल्म समारोह में आधिकारिक तौर पर चयनित और प्रदर्शित 8 फिल्में हैं।

उनकी फिल्म 'पतंग: द काइट' का प्रीमियर 2012 में बर्लिन इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल और ट्रिबेका फिल्म फेस्टिवल में हुआ था।

Keep Reading Show less

टोयोटा (Wikimedia Commons)

टोयोटा(Toyota) मोटर कॉर्प ने घोषणा की है कि वह अमेरिका में अपनी कुछ इलेक्ट्रिक वाहन(Electric Vehicles) आपूर्ति श्रृंखला लाने के प्रयास में उत्तरी कैरोलिना में एक नई 1.29 बिलियन डॉलर की लागत से बैटरी फैक्ट्री(Battery Factory) का निर्माण कर रही है।

एक समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, टोयोटा ने घोषणा की है कि वह अगले दशक में बैटरी तकनीक में करीब 13.6 अरब डॉलर का निवेश करेगी, उत्पादन में 9 अरब डॉलर का निवेश शामिल है। क्योंकि यह अपने वाहन लाइनअप को विद्युतीकृत करने का प्रयास करता है।

नया संयंत्र शुरू में सालाना 8 लाख वाहनों के लिए लिथियम-आयन बैटरी की आपूर्ति करने में सक्षम होगा। पहले वर्ष में, फर्म इलेक्ट्रिक वाहनों के आगामी लाइनअप के लिए 1.2 मिलियन बैटरी पैक का उत्पादन करने की योजना बना रही है।

उत्तरी अमेरिका में टोयोटा मोटर के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी क्रिस रेनॉल्ड्स की रिपोर्ट के हवाले से कहा गया है, "यह निवेश, जो मुझे लगता है कि उत्तरी कैरोलिना के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा निजी पूंजी निवेश है.. कम से कम 1,750 नई नौकरियां पैदा करेगा और हमें ऑटोमोटिव बैटरी उत्पादन को विकसित करने और स्थानीय बनाने में मदद करेगा जो यहां निर्मित बैटरी इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका में मार्ग प्रशस्त करेगा।"

Keep Reading Show less

जेएनयू के कॉमरेड को अब बाबरी मस्जिद चाहिए (Image: Wikimedia Commons)

अपने हिंदू विरोधी कर्तव्य के लिए प्रसिद्ध साम्यवादी(communist) विचारधारा से ग्रसित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ(JNUSU) एक बार फिर से सुर्खियों में है। अबकी बार वह जिस वजह से सुर्खियों में है वह है बाबरी मस्जिद(Babri Masjid)। दरअसल, जेएनयूएसयू ने अयोध्या(ayodhya) में ध्वस्त बाबरी मस्जिद के पुनर्निर्माण की मांग को लेकर कैंपस के अंदर एक विरोध मार्च निकाला। विरोध मार्च चंद्रभागा छात्रावास में समाप्त हुआ, जहां छात्र नेताओं ने जमकर नारेबाजी और भाषण बाजी करी।

इसके अलावा एक जगह पर तख्तियां लिए हुए, नारेबाजी करते हुए जमा हो गए और बाद में उन्होंने परिसर के अंदर मार्च निकाला। छात्र नेताओं ने मस्जिद(Babri Masjid) के पुनर्निर्माण की मांग को लेकर भाषण भी दिया। जेएनयूएसयू(Janusu) के उपाध्यक्ष साकेत मून(Saket Moon) ने कहा कि बाबरी मस्जिद के पुनर्निर्माण से न्याय मिलेगा। उपाध्यक्ष जी न्याय दिलवाने की बात करके मस्जिद के निर्माण की बात कर रहे हैं, लेकिन शायद वह भूल गए कि राम मंदिर(Ram Mandir) आज सुप्रीम कोर्ट (supreme Court) द्वारा किए गए न्याय पर मिल रहा है।

Keep reading... Show less